कक्षा 9 विज्ञान: हम बीमार क्यों होते हैं - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 13, 'हम बीमार क्यों होते हैं' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। यह अध्याय अच्छे स्वास्थ्य की आवश्यक स्थितियों, रोगमुक्ति के लिए आवश्यक परिस्थितियों और इन दोनों के बीच के अंतर की पड़ताल करता है। इसमें यह भी बताया गया है कि पीलिया जैसे दीर्घकालिक रोग स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करते हैं, और बीमार होने पर सुपाच्य व पौष्टिक भोजन क्यों महत्वपूर्ण है। समाधान संक्रामक रोगों के फैलने के विभिन्न तरीकों पर भी प्रकाश डालते हैं, जैसे हवा और पानी द्वारा फैलने वाले रोग। यह छात्रों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के महत्व को समझने में मदद करता है, जो परीक्षाओं की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 13. हम बीमार क्यों होते हैं |
Chapter summary
कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 13 के ये NCERT समाधान स्वास्थ्य की बुनियादी बातों, अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक कारकों और रोग से मुक्ति की स्थितियों पर केंद्रित हैं। यह अध्याय विभिन्न प्रकार के रोगों, विशेष रूप से संक्रामक रोगों के प्रसार के तंत्र की भी पड़ताल करता है। समाधान छात्रों को यह समझने में मदद करते हैं कि क्यों कुछ बीमारियाँ दूसरों की तुलना में अधिक गंभीर होती हैं और व्यक्तिगत तथा सामुदायिक स्वच्छता क्यों महत्वपूर्ण है।
Learning outcomes
- अच्छे स्वास्थ्य और रोगमुक्ति के लिए आवश्यक परिस्थितियों को समझना।
- स्वास्थ्य और रोगमुक्ति के बीच अंतर स्पष्ट करना।
- बीमार होने के सामान्य लक्षणों और उनके प्रभावों को पहचानना।
- दीर्घकालिक रोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को समझना।
- बीमार होने पर पौष्टिक और सुपाच्य भोजन के महत्व को जानना।
- संक्रामक रोगों के प्रसार के विभिन्न माध्यमों (हवा, पानी) की व्याख्या करना।
Topics covered
Paper topics
- स्वास्थ्य की परिभाषा
- अच्छे स्वास्थ्य की आवश्यक स्थितियाँ
- रोगमुक्ति की आवश्यक स्थितियाँ
- स्वास्थ्य और रोगमुक्ति में अंतर
- बीमारी के लक्षण
- दीर्घकालिक रोग
- संक्रामक रोग
- रोगों के फैलने की विधियाँ
- हवा द्वारा फैलने वाले रोग
- जल द्वारा फैलने वाले रोग
- पोषण का महत्व
- व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वच्छता
Important topics
- स्वास्थ्य और रोगमुक्ति के बीच अंतर
- संक्रामक रोगों के प्रसार की विधियाँ
- बीमारी के दौरान उचित आहार का महत्व
- दीर्घकालिक रोगों का प्रभाव
- व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वच्छता का महत्व
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
अच्छे स्वास्थ्य के लिए दो आवश्यक स्थितियाँ निम्नलिखित हैं:
- पर्याप्त पोषण तथा संतुलित आहार: शरीर को ठीक से कार्य करने और बीमारियों से लड़ने के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व प्राप्त होने चाहिए। एक संतुलित आहार में सभी आवश्यक विटामिन, खनिज, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा उचित मात्रा में शामिल होते हैं।
- अच्छा सामाजिक परिवेश: एक सकारात्मक और सहायक सामाजिक वातावरण मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। यह तनाव को कम करने और समग्र कल्याण को बढ़ावा देने में मदद करता है।
प्रश्न 2
रोग से मुक्त रहने या रोगमुक्ति के लिए दो आवश्यक परिस्थितियाँ इस प्रकार हैं:
- व्यक्तिगत तथा सामुदायिक स्वच्छता: अपने आसपास और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना संक्रामक रोगों को फैलने से रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें नियमित रूप से हाथ धोना, साफ-सफाई रखना और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखना शामिल है।
- संतुलित आहार का सेवन: शरीर को मजबूत बनाने और संक्रमण से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने के लिए पर्याप्त और पौष्टिक भोजन आवश्यक है।
प्रश्न 3
उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर कुछ हद तक एक जैसे हैं, लेकिन पूरी तरह से नहीं।
समानता: अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ (जैसे संतुलित आहार और स्वच्छता) रोगमुक्ति के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। यदि हम इन परिस्थितियों को बनाए रखते हैं, तो बीमार पड़ने की संभावना कम हो जाती है, जिससे हम रोगमुक्त रहते हैं।
भिन्नता: अच्छे स्वास्थ्य का अर्थ केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ होना नहीं है, बल्कि इसमें मानसिक और सामाजिक कल्याण भी शामिल है। दूसरी ओर, रोगमुक्त होने का अर्थ केवल किसी विशेष बीमारी से ग्रस्त न होना है। कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से रोगमुक्त हो सकता है, लेकिन यदि वह मानसिक या सामाजिक रूप से अस्वस्थ है, तो उसे पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं कहा जा सकता। इसलिए, अच्छे स्वास्थ्य की अवधारणा रोगमुक्ति से अधिक व्यापक है।
प्रश्न 4
ऐसे तीन सामान्य कारण या लक्षण जिनसे यह संकेत मिलता है कि कोई व्यक्ति बीमार है और उसे चिकित्सक के पास जाने की आवश्यकता हो सकती है, वे हैं:
- तेज सिरदर्द: लगातार या बहुत तेज सिरदर्द किसी अंतर्निहित समस्या का संकेत हो सकता है।
- लगातार खाँसी: एक सामान्य खाँसी कुछ दिनों में ठीक हो सकती है, लेकिन यदि यह लंबे समय तक बनी रहे या गंभीर हो जाए, तो यह चिंता का विषय है।
- दस्त (डायरिया): बार-बार दस्त लगना शरीर में पानी की कमी कर सकता है और यह किसी संक्रमण का संकेत हो सकता है।
यदि इनमें से केवल एक लक्षण हो, तो भी व्यक्ति को चिकित्सक के पास जाने पर विचार करना चाहिए, खासकर यदि वह लक्षण गंभीर हो या सामान्य से हटकर हो। हालांकि, कई बार हल्के लक्षण जैसे सामान्य सिरदर्द या हल्की खाँसी कुछ दिनों के आराम और घरेलू उपचार से ठीक हो जाते हैं। यदि ये लक्षण अधिक दिनों तक बने रहते हैं, या यदि व्यक्ति की सामान्य कार्यक्षमता पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है, तो चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक हो जाता है।
प्रश्न 5
- यदि आप पीलिया रोग से ग्रस्त हैं।
- यदि आपके शरीर पर जूँ (lice) हैं।
- यदि आप मुँहासों से ग्रस्त हैं।
लंबे समय तक रहने पर स्वास्थ्य पर सबसे बुरा प्रभाव पीलिया रोग से ग्रस्त होने के कारण पड़ेगा।
कारण:
- पीलिया: यह एक गंभीर यकृत (लिवर) संक्रमण है जो शरीर में बिलीरुबिन के स्तर को बढ़ा देता है। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह यकृत को स्थायी नुकसान पहुँचा सकता है और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है। यह एक दीर्घकालिक (chronic) बीमारी हो सकती है।
- जूँ (Lice): जूँ सिर की त्वचा पर खुजली और जलन पैदा कर सकती हैं, लेकिन ये आमतौर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा नहीं करतीं और उचित उपचार से इन्हें हटाया जा सकता है।
- मुँहासे (Acne): मुँहासे त्वचा संबंधी एक आम समस्या है जो मुख्य रूप से सौंदर्य संबंधी चिंताएँ पैदा करती है। ये आमतौर पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न नहीं करते हैं, हालांकि गंभीर मामलों में ये निशान छोड़ सकते हैं।
इसलिए, पीलिया एक ऐसी स्थिति है जिसके दीर्घकालिक प्रभाव स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक हानिकारक होते हैं।
प्रश्न 6
जब हम बीमार होते हैं, तो हमारे शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली बाधित हो जाती है और शरीर को संक्रमण से लड़ने तथा ठीक होने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। सुपाच्य और पोषणयुक्त भोजन करने का परामर्श निम्नलिखित कारणों से दिया जाता है:
- ऊर्जा की पूर्ति: बीमार शरीर को ठीक होने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। पोषणयुक्त भोजन शरीर को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है।
- पोषक तत्वों की आपूर्ति: बीमार होने पर शरीर पोषक तत्वों को अवशोषित करने में कम सक्षम हो सकता है। सुपाच्य भोजन आसानी से पच जाता है और शरीर को आवश्यक विटामिन, खनिज और प्रोटीन प्रदान करता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं।
- शरीर की मरम्मत: बीमार होने पर ऊतकों को क्षति पहुँच सकती है। प्रोटीन जैसे पोषक तत्व शरीर की मरम्मत और नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करते हैं।
- पाचन तंत्र पर कम भार: सुपाच्य भोजन पचाने में आसान होता है, जिससे पाचन तंत्र पर कम भार पड़ता है और वह ठीक होने की प्रक्रिया पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाता है।
इसलिए, बीमार होने पर शरीर को जल्दी ठीक होने और संक्रमण से लड़ने में मदद करने के लिए सुपाच्य और पोषणयुक्त भोजन करना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 7
संक्रामक रोग वे रोग होते हैं जो एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति में फैलते हैं। ये रोग विभिन्न माध्यमों से फैल सकते हैं, जिनमें प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं:
- हवा द्वारा: कई संक्रामक रोग हवा में मौजूद सूक्ष्मजीवों के माध्यम से फैलते हैं। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खाँसता, छींकता या बोलता है, तो उसके मुँह या नाक से निकले सूक्ष्म कण हवा में फैल जाते हैं। यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति इन कणों वाली हवा में साँस लेता है, तो वह भी संक्रमित हो सकता है। उदाहरण: सर्दी-जुकाम, इन्फ्लूएंजा, तपेदिक (टीबी), निमोनिया।
- जल द्वारा: दूषित जल पीने या भोजन पकाने में उपयोग करने से संक्रामक रोग फैल सकते हैं। यदि पीने के पानी में संक्रमित व्यक्ति के मल-मूत्र या अन्य अपशिष्ट मिल जाते हैं, तो उसमें मौजूद रोगाणु जल के माध्यम से फैलते हैं। उदाहरण: हैजा (कॉलरा), टाइफाइड, पीलिया (हेपेटाइटिस ए)।
- संपर्क द्वारा: सीधे शारीरिक संपर्क (जैसे हाथ मिलाना, गले मिलना) या संक्रमित वस्तु (जैसे तौलिया, कपड़े, बर्तन) के उपयोग से भी रोग फैल सकते हैं। उदाहरण: त्वचा संक्रमण, खसरा।
- कीटों द्वारा: कुछ रोग वाहक कीटों (जैसे मच्छर, मक्खी) के काटने से फैलते हैं। ये कीट संक्रमित व्यक्ति से रोग के रोगाणु लेकर स्वस्थ व्यक्ति तक पहुँचाते हैं। उदाहरण: मलेरिया, डेंगू (मच्छरों द्वारा), प्लेग (पिसूओं द्वारा)।
- यौन संपर्क द्वारा: कुछ रोग असुरक्षित यौन संबंध के माध्यम से फैलते हैं। उदाहरण: एड्स (HIV), सिफलिस।
इन विधियों को समझकर हम संक्रामक रोगों से बचाव के उपाय कर सकते हैं, जैसे स्वच्छता बनाए रखना, साफ पानी पीना और टीकाकरण करवाना।
Common mistakes
- स्वास्थ्य और रोगमुक्ति को एक ही समझना।
- हल्के लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना और डॉक्टर से सलाह न लेना।
- संक्रामक रोगों के प्रसार के तरीकों को कम आंकना।
- बीमारी के दौरान उचित आहार के महत्व को न समझना।
Revision tips
- स्वास्थ्य और रोगमुक्ति के बीच मुख्य अंतरों को सूचीबद्ध करें।
- संक्रामक रोगों के फैलने के विभिन्न तरीकों के उदाहरण याद करें।
- बीमारी के दौरान पौष्टिक भोजन के महत्व पर ध्यान केंद्रित करें।
- दीर्घकालिक रोगों के प्रभावों को समझें और उन्हें संक्रामक रोगों से तुलना करें।
Practice MCQs
Q1. अच्छे स्वास्थ्य के लिए निम्नलिखित में से कौन सी स्थिति आवश्यक है?
Explanation: अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार और एक सकारात्मक सामाजिक परिवेश दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।
Q2. रोगमुक्ति के लिए कौन सी परिस्थिति आवश्यक है?
Explanation: रोग से मुक्त होने के लिए व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वच्छता बनाए रखना तथा संतुलित आहार लेना आवश्यक है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन सा लक्षण लंबे समय तक रहने पर स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल सकता है?
Explanation: पीलिया एक गंभीर बीमारी है जो लंबे समय तक रहने पर शरीर पर बुरा प्रभाव डालती है।
Q4. बीमार होने पर सुपाच्य और पौष्टिक भोजन करने का परामर्श क्यों दिया जाता है?
Explanation: बीमार होने पर शरीर को ठीक होने, ऊर्जा प्राप्त करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए पौष्टिक और सुपाच्य भोजन आवश्यक है।
Q5. खाँसी-जुकाम जैसे रोग मुख्य रूप से किस विधि द्वारा फैलते हैं?
Explanation: खाँसी-जुकाम जैसे संक्रामक रोग हवा में मौजूद सूक्ष्मजीवों के माध्यम से फैलते हैं, जो छींकने या खाँसने से हवा में मिल जाते हैं।
Frequently asked questions
कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 13 में किन मुख्य अवधारणाओं को शामिल किया गया है?
इस अध्याय में अच्छे स्वास्थ्य की आवश्यक स्थितियाँ, रोगमुक्ति की आवश्यक स्थितियाँ, इन दोनों के बीच का अंतर, बीमारी के लक्षण, दीर्घकालिक रोगों का प्रभाव और संक्रामक रोगों के फैलने की विधियों जैसी मुख्य अवधारणाओं को शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य और रोगमुक्ति में क्या अंतर है?
अच्छा स्वास्थ्य एक समग्र स्थिति है जिसमें शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण शामिल है, जबकि रोगमुक्ति का अर्थ केवल किसी विशेष बीमारी से ग्रस्त न होना है।
संक्रामक रोग कैसे फैलते हैं?
संक्रामक रोग मुख्य रूप से हवा (छींकने, खाँसने से) और दूषित जल (पीने या भोजन में मिलने से) जैसे माध्यमों से फैलते हैं।
बीमार होने पर पौष्टिक भोजन क्यों महत्वपूर्ण है?
बीमार होने पर शरीर को जल्दी ठीक होने, ऊर्जा प्राप्त करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए पौष्टिक और सुपाच्य भोजन की आवश्यकता होती है।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान अध्याय की मुख्य अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रकार को समझने में मदद करते हैं।
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