कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 12: ध्वनि - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 12, 'ध्वनि' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें ध्वनि के संचरण, यांत्रिक तरंगों के रूप में इसकी प्रकृति, और विभिन्न माध्यमों में इसकी गति जैसे विषयों को शामिल किया गया है। समाधान ध्वनि की उत्पत्ति, परावर्तन, गूंज और अनुरणन की अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं। इसके अतिरिक्त, यह मानव श्रवण की सीमा, अवश्रव्य और पराध्वनि तरंगों के बीच अंतर, और सोनार जैसी तकनीकों में पराध्वनि के अनुप्रयोगों पर भी प्रकाश डालता है। ये समाधान छात्रों को ध्वनि से संबंधित विभिन्न प्रश्नों को हल करने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 12. ध्वनि |
Chapter summary
कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 12 'ध्वनि' के लिए NCERT समाधान ध्वनि की मूल बातें, इसके संचरण के तरीके और विभिन्न माध्यमों में इसकी गति को कवर करते हैं। समाधान ध्वनि की उत्पत्ति, यांत्रिक तरंगों के रूप में इसकी प्रकृति, गूंज और अनुरणन जैसी घटनाओं, और मानव श्रवण की सीमा को स्पष्ट करते हैं। इसमें अवश्रव्य और पराध्वनि तरंगों के बीच अंतर और उनके अनुप्रयोगों पर भी चर्चा की गई है।
Learning outcomes
- ध्वनि की प्रकृति और संचरण को समझें।
- ध्वनि तरंगों को यांत्रिक तरंगें क्यों कहा जाता है, इसकी व्याख्या करें।
- विभिन्न माध्यमों में ध्वनि की गति की तुलना करें।
- गूंज और अनुरणन की घटनाओं को समझें और उनके अनुप्रयोगों का वर्णन करें।
- मानव श्रवण की सीमा और अवश्रव्य तथा पराध्वनि तरंगों के बारे में जानें।
- सोनार जैसी तकनीकों में ध्वनि तरंगों के अनुप्रयोगों को समझें।
Topics covered
Paper topics
- ध्वनि की उत्पत्ति
- ध्वनि का संचरण
- यांत्रिक तरंगें
- संपीडन और विरलन
- ध्वनि की चाल
- गूंज (प्रतिध्वनि)
- अनुरणन
- श्रव्यता की सीमा
- अवश्रव्य ध्वनि
- पराध्वनि
- पराध्वनि के अनुप्रयोग (इकोकार्डियोग्राफी, सोनार)
- ध्वनि की प्रबलता और तारत्व
Important topics
- ध्वनि का संचरण और माध्यम की आवश्यकता
- गूंज (प्रतिध्वनि) की गणना
- अनुरणन और इसे कम करने के उपाय
- मानव श्रवण की सीमा और पराध्वनि
- सोनार का सिद्धांत और अनुप्रयोग
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Questions and Solutions
प्रश्न 1. किसी माध्यम में ध्वनि द्वारा उत्पन्न विक्षोभ आपके कानों तक कैसे पहुँचता है?
जब कोई ध्वनि स्रोत कंपन करता है, तो वह अपने आसपास के माध्यम (जैसे हवा) में विक्षोभ उत्पन्न करता है। यह विक्षोभ संपीडनों (उच्च दाब वाले क्षेत्र) और विरलनों (निम्न दाब वाले क्षेत्र) के रूप में माध्यम में आगे बढ़ता है। माध्यम के कण स्वयं लंबी दूरी तय नहीं करते, बल्कि वे अपनी ऊर्जा निकटवर्ती कणों को स्थानांतरित करते हैं, जिससे विक्षोभ तरंग के रूप में संचरित होता है। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक कि ध्वनि तरंग हमारे कानों तक नहीं पहुँच जाती, जहाँ कान का पर्दा इन कंपनों को ग्रहण करता है और मस्तिष्क तक संकेत भेजता है।
प्रश्न 2. आपके विद्यालय की घंटी, ध्वनि कैसे उत्पन्न करती है?
विद्यालय की घंटी ध्वनि उत्पन्न करने के लिए कंपन का उपयोग करती है। जब घंटी को मारा जाता है, तो उसकी धातु की सतह कंपन करने लगती है। ये कंपन घंटी के आसपास की हवा में विक्षोभ उत्पन्न करते हैं, जो संपीडनों और विरलनों के रूप में फैलते हैं। यही विक्षोभ ध्वनि तरंगों के रूप में हमारे कानों तक पहुँचते हैं, जिससे हमें घंटी की आवाज़ सुनाई देती है।
प्रश्न 3. ध्वनि तरंगों को यांत्रिक तरंगें क्यों कहते हैं?
ध्वनि तरंगों को यांत्रिक तरंगें कहा जाता है क्योंकि उन्हें संचरण के लिए एक माध्यम की आवश्यकता होती है। ये तरंगें माध्यम के कणों के कंपन द्वारा उत्पन्न होती हैं और उन्हीं कणों के माध्यम से आगे बढ़ती हैं। ध्वनि तरंगें निर्वात (vacuum) में संचरित नहीं हो सकतीं, क्योंकि निर्वात में कोई माध्यम नहीं होता जिसके कण कंपन कर सकें।
प्रश्न 4. मान लीजिए आप अपने मित्र के साथ चंद्रमा पर गए हुए हैं। क्या आप अपने मित्र द्वारा उत्पन्न ध्वनि को सुन पाएँगे? अपने उत्तर का कारण बताइए।
नहीं, आप अपने मित्र द्वारा उत्पन्न ध्वनि को चंद्रमा पर नहीं सुन पाएँगे। इसका कारण यह है कि चंद्रमा पर वायुमंडल नहीं है, अर्थात वहाँ ध्वनि के संचरण के लिए कोई माध्यम उपलब्ध नहीं है। ध्वनि तरंगों को यात्रा करने के लिए एक माध्यम (जैसे हवा, पानी या ठोस) की आवश्यकता होती है। चूँकि चंद्रमा पर निर्वात है, इसलिए ध्वनि तरंगें उत्पन्न तो हो सकती हैं, लेकिन वे संचरित नहीं हो पाएंगी और आपके कानों तक नहीं पहुँचेंगी।
प्रश्न 1. वायु, जल या लोहे में से किस माध्यम में ध्वनि सबसे तेज चलती है?
ध्वनि की चाल माध्यम के घनत्व और प्रत्यास्थता पर निर्भर करती है। सामान्यतः, ध्वनि ठोस माध्यमों में सबसे तेज, द्रवों में उससे कम और गैसों में सबसे धीमी गति से चलती है। दिए गए माध्यमों में, लोहा एक ठोस है, जल एक द्रव है, और वायु एक गैस है। इसलिए, ध्वनि लोहे में सबसे तेज चलेगी।
प्रश्न 1. कोई प्रतिध्वनि 3 सेकंड पश्चात् सुनाई देती है। यदि ध्वनि की चाल 342 m/s हो तो स्रोत तथा परावर्तक सतह के बीच कितनी दूरी होगी?
प्रतिध्वनि सुनने के लिए, ध्वनि को स्रोत से परावर्तक सतह तक जाने और फिर वापस स्रोत तक आने में कुल समय लगता है।
दिया गया है:
- ध्वनि द्वारा लिया गया कुल समय (T) = 3 s
- ध्वनि की चाल (v) = 342 m/s
ध्वनि द्वारा तय की गई कुल दूरी = चाल × समय
कुल दूरी =
यह कुल दूरी स्रोत से परावर्तक सतह तक जाने और वापस आने की दूरी है। इसलिए, स्रोत तथा परावर्तक सतह के बीच की दूरी कुल दूरी की आधी होगी।
स्रोत तथा परावर्तक सतह के बीच की दूरी =
उत्तर: स्रोत तथा परावर्तक सतह के बीच की दूरी 513 मीटर होगी।
प्रश्न 1. कंसर्ट हॉल की छतें वक्राकार क्यों होती हैं?
कंसर्ट हॉल की छतें अक्सर वक्राकार (curved) बनाई जाती हैं ताकि ध्वनि को समान रूप से पूरे हॉल में वितरित किया जा सके। वक्राकार सतह ध्वनि को एक बिंदु पर केंद्रित करने के बजाय उसे परावर्तित करके हॉल के विभिन्न हिस्सों में फैला देती है। यह सुनिश्चित करता है कि दर्शक, चाहे वे कहीं भी बैठे हों, ध्वनि को स्पष्ट रूप से सुन सकें। यह छत से होने वाले अवांछित गूंज (echoes) को भी कम करने में मदद करता है, जिससे ध्वनि की गुणवत्ता बेहतर होती है।
प्रश्न 1. सामान्य मनुष्य के कानों केलिए श्रव्यता परास क्या है?
सामान्य मनुष्य के कानों के लिए श्रव्यता परास (audible range) लगभग 20 हर्ट्ज़ (Hz) से लेकर 20,000 हर्ट्ज़ (20 kHz) तक होता है। इस आवृत्ति सीमा के भीतर की ध्वनियों को मनुष्य सुन सकते हैं। 20 हर्ट्ज़ से कम आवृत्ति वाली ध्वनियों को अवश्रव्य (infrasonic) और 20,000 हर्ट्ज़ से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनियों को पराध्वनि (ultrasonic) कहा जाता है, जिन्हें सामान्य मनुष्य नहीं सुन सकते।
प्रश्न 2. निम्न से संबंधित आवृत्तियों का परास क्या है?
क) अवश्रव्य ध्वनि (Infrasonic sound): अवश्रव्य ध्वनि उन ध्वनियों को कहते हैं जिनकी आवृत्ति सामान्य मनुष्य के श्रवण परास से कम होती है। इसका आवृत्ति परास 20 हर्ट्ज़ (Hz) से कम होता है।
ख) पराध्वनि (Ultrasonic sound): पराध्वनि उन ध्वनियों को कहते हैं जिनकी आवृत्ति सामान्य मनुष्य के श्रवण परास से अधिक होती है। इसका आवृत्ति परास 20,000 हर्ट्ज़ (20 kHz) से अधिक होता है।
प्रश्न 1. एक पनडुब्बी सोनार स्पंद उत्सर्जित करती है, जो पानी के अंदर एक खड़ी चट्टान से टकराकर 1.02 s के पश्चात् वापस लौटता है। यदि खारे पानी में ध्वनि की चाल 1531 m/s हो, तो चट्टान की दूरी ज्ञात कीजिए।
सोनार (SONAR - Sound Navigation and Ranging) प्रणाली ध्वनि तरंगों का उपयोग करके पानी के नीचे वस्तुओं का पता लगाने और उनकी दूरी मापने के लिए काम करती है। पनडुब्बी द्वारा उत्सर्जित ध्वनि स्पंद चट्टान से टकराकर वापस पनडुब्बी तक पहुँचने में कुल समय लेती है।
दिया गया है:
- ध्वनि स्पंद द्वारा लिया गया कुल समय (T) = 1.02 s
- खारे पानी में ध्वनि की चाल (v) = 1531 m/s
ध्वनि द्वारा तय की गई कुल दूरी = चाल × समय
कुल दूरी =
कुल दूरी =
यह कुल दूरी पनडुब्बी से चट्टान तक जाने और चट्टान से वापस पनडुब्बी तक आने की दूरी है। इसलिए, चट्टान की पनडुब्बी से दूरी, तय की गई कुल दूरी की आधी होगी।
चट्टान की दूरी =
चट्टान की दूरी =
उत्तर: चट्टान की दूरी लगभग 780.81 मीटर है।
प्रश्न 1. ध्वनि निम्न में से किस का रूप है ?
ध्वनि ऊर्जा का एक रूप है जो कंपन के कारण उत्पन्न होती है और तरंगों के रूप में संचरित होती है। यह हमारे कानों द्वारा सुनी जाती है।
सही विकल्प है: (ग) ऊर्जा
प्रश्न 2. किन किन क्रिया कलापों द्वारा हम ध्वनि उत्पन्न कर सकते है ?
हम विभिन्न क्रिया कलापों द्वारा ध्वनि उत्पन्न कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- आघात करना: किसी वस्तु पर प्रहार करके, जैसे घंटी बजाना या ड्रम बजाना।
- घर्षण: दो सतहों को एक-दूसरे पर रगड़कर, जैसे हाथों को रगड़ना।
- खुरचना या रगड़ना: किसी खुरदरी सतह पर किसी वस्तु को खुरचकर या रगड़कर, जैसे किसी वाद्य यंत्र को बजाना।
- वायु फूँकना: किसी वस्तु में हवा फूँककर, जैसे सीटी बजाना या वांसुरी बजाना।
- हिलाना या कंपन कराना: किसी वस्तु को तेजी से हिलाकर या कंपन कराकर, जैसे किसी तार को खींचकर छोड़ना।
Common mistakes
- गूंज और अनुरणन के बीच अंतर करने में भ्रमित होना।
- ध्वनि की गति की गणना करते समय दूरी और समय के बीच संबंध को गलत समझना।
- श्रव्यता सीमा और आवृत्ति की इकाइयों को गलत याद रखना।
- ध्वनि तरंगों के संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता को अनदेखा करना।
Revision tips
- ध्वनि की उत्पत्ति और संचरण के मूल सिद्धांतों को समझने पर ध्यान केंद्रित करें।
- गूंज और अनुरणन के उदाहरणों और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों की समीक्षा करें।
- ध्वनि की गति, आवृत्ति और आयाम से संबंधित सूत्रों का अभ्यास करें।
- मानव श्रवण की सीमा और पराध्वनि के उपयोगों को याद रखें।
Practice MCQs
Q1. ध्वनि तरंगें किस प्रकार की तरंगें हैं?
Explanation: ध्वनि तरंगों को संचरण के लिए एक माध्यम की आवश्यकता होती है, इसलिए उन्हें यांत्रिक तरंगें कहा जाता है।
Q2. मानव श्रवण की सामान्य आवृत्ति सीमा क्या है?
Explanation: मनुष्य सामान्यतः 20 हर्ट्ज़ से 20,000 हर्ट्ज़ तक की आवृत्तियों वाली ध्वनियों को सुन सकते हैं।
Q3. ध्वनि की गति सबसे तेज किस माध्यम में होती है?
Explanation: ध्वनि की गति ठोस माध्यमों में सबसे तेज होती है, और लोहे जैसे ठोस में यह वायु या जल की तुलना में बहुत तेज होती है।
Q4. जब ध्वनि किसी सतह से टकराकर वापस लौटती है, तो उसे क्या कहते हैं?
Explanation: ध्वनि का किसी सतह से टकराकर परावर्तित होना और पुनः सुनाई देना गूंज कहलाता है।
Q5. 20 Hz से कम आवृत्ति वाली ध्वनि को क्या कहा जाता है?
Explanation: 20 हर्ट्ज़ से कम आवृत्ति वाली ध्वनियों को अवश्रव्य ध्वनि कहा जाता है, जिन्हें मनुष्य नहीं सुन सकते।
Frequently asked questions
कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 12 'ध्वनि' में मुख्य रूप से किन अवधारणाओं को शामिल किया गया है?
इस अध्याय में ध्वनि की उत्पत्ति, संचरण, यांत्रिक तरंगों के रूप में इसकी प्रकृति, विभिन्न माध्यमों में इसकी चाल, गूंज, अनुरणन, मानव श्रवण की सीमा, अवश्रव्य और पराध्वनि तरंगों तथा उनके अनुप्रयोगों जैसी अवधारणाओं को शामिल किया गया है।
ध्वनि तरंगों को यांत्रिक तरंगें क्यों कहा जाता है?
ध्वनि तरंगों को यांत्रिक तरंगें इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्हें संचरण के लिए किसी न किसी माध्यम (जैसे ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है। वे माध्यम के कणों के कंपन द्वारा फैलती हैं।
गूंज (प्रतिध्वनि) क्या है और यह कैसे उत्पन्न होती है?
गूंज तब उत्पन्न होती है जब ध्वनि किसी कठोर सतह से टकराकर परावर्तित होती है और मूल ध्वनि सुनने के कुछ समय बाद हमें पुनः सुनाई देती है। इसके लिए ध्वनि स्रोत और परावर्तक सतह के बीच पर्याप्त दूरी होनी चाहिए।
पराध्वनि तरंगें क्या हैं और उनके कुछ अनुप्रयोग क्या हैं?
पराध्वनि तरंगें वे ध्वनि तरंगें होती हैं जिनकी आवृत्ति 20,000 हर्ट्ज़ से अधिक होती है। इनका उपयोग चिकित्सा में (जैसे इकोकार्डियोग्राफी) और सोनार (SONAR) जैसी तकनीकों में वस्तुओं का पता लगाने और दूरी मापने के लिए किया जाता है।
अनुरणन को कम करने के लिए क्या उपाय किए जाते हैं?
अनुरणन को कम करने के लिए कंसर्ट हॉल या ऑडिटोरियम की दीवारों और छतों पर ध्वनि-अवशोषक सामग्री का उपयोग किया जाता है, जैसे पर्दे, कालीन, या विशेष ध्वनिक पैनल। श्रोताओं की उपस्थिति भी ध्वनि अवशोषण में मदद करती है।
क्या चंद्रमा पर ध्वनि सुनी जा सकती है?
नहीं, चंद्रमा पर ध्वनि नहीं सुनी जा सकती क्योंकि वहाँ वायुमंडल नहीं है, और ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है। चंद्रमा एक निर्वात की तरह है।
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