कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 11: कार्य तथा ऊर्जा NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 11, 'कार्य तथा ऊर्जा' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें कार्य की परिभाषा, जूल में इसके मात्रक, और कार्य करने के लिए आवश्यक दो शर्तों को समझाया गया है: बल का लगना और वस्तु का विस्थापित होना। समाधान विभिन्न प्रकार की ऊर्जाओं जैसे गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा, ऊष्मीय ऊर्जा, रासायनिक ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा और प्रकाश ऊर्जा पर भी प्रकाश डालते हैं। इसके अतिरिक्त, ऊर्जा संरक्षण के नियम और यांत्रिक ऊर्जा की अवधारणा को भी स्पष्ट किया गया है। अंत में, शक्ति की परिभाषा, कार्य करने की दर के रूप में और इसके व्यावसायिक मात्रक किलोवाट-घंटा (यूनिट) पर चर्चा की गई है। ये समाधान छात्रों को इन महत्वपूर्ण अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 11. कार्य तथा ऊर्जा |
Chapter summary
कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 11 'कार्य तथा ऊर्जा' के लिए NCERT समाधान छात्रों को कार्य की भौतिकी-आधारित परिभाषा, इसके मात्रक (जूल), और कार्य होने के लिए आवश्यक शर्तों को समझने में मदद करते हैं। समाधान विभिन्न प्रकार की ऊर्जाओं, जैसे गतिज और स्थितिज ऊर्जा, और ऊर्जा के अन्य रूपों का भी परिचय देते हैं। ऊर्जा संरक्षण के नियम और शक्ति की अवधारणा को भी स्पष्ट किया गया है, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Learning outcomes
- कार्य की भौतिकी-आधारित परिभाषा को समझना।
- कार्य के मात्रक जूल और इसे प्रभावित करने वाले कारकों को पहचानना।
- विभिन्न प्रकार की ऊर्जाओं (गतिज, स्थितिज, ऊष्मीय, रासायनिक, विद्युत, प्रकाश) के बीच अंतर करना।
- ऊर्जा संरक्षण के नियम को समझना और लागू करना।
- शक्ति की अवधारणा और इसके मात्रक को परिभाषित करना।
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति के बीच संबंध स्थापित करना।
Topics covered
Paper topics
- कार्य की परिभाषा
- कार्य का मात्रक (जूल)
- कार्य के लिए आवश्यक शर्तें
- कार्य का सूत्र (W = Fs cos θ)
- धनात्मक, ऋणात्मक और शून्य कार्य
- ऊर्जा की परिभाषा
- ऊर्जा के विभिन्न रूप (गतिज, स्थितिज, ऊष्मीय, रासायनिक, विद्युत, प्रकाश)
- गतिज ऊर्जा
- स्थितिज ऊर्जा
- ऊर्जा संरक्षण का नियम
- यांत्रिक ऊर्जा
- शक्ति की परिभाषा और मात्रक
Important topics
- कार्य की परिभाषा और शर्तें
- गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा
- ऊर्जा संरक्षण का नियम
- शक्ति की परिभाषा और गणना
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति के बीच संबंध
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
किसी वस्तु पर किए गए कार्य को परिभाषित करने वाले दो मुख्य कारक हैं:
- वस्तु पर लगाया गया बल (Force applied on the object)।
- बल की दिशा में वस्तु का विस्थापन (Displacement of the object in the direction of the force)।
कार्य की गणितीय अभिव्यक्ति इस प्रकार है: कार्य = बल × विस्थापन (जब बल और विस्थापन एक ही दिशा में हों)।
यदि वस्तु का विस्थापन शून्य है, तो किया गया कार्य भी शून्य होगा, भले ही उस पर कितना भी बल क्यों न लगाया गया हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि कार्य होने के लिए बल के साथ-साथ विस्थापन का होना भी आवश्यक है।
प्रश्न 2
भौतिकी में, कार्य को बल और विस्थापन के गुणनफल के रूप में परिभाषित किया जाता है। कार्य होने के लिए दो शर्तें पूरी होनी चाहिए: पहला, वस्तु पर एक बल लगना चाहिए, और दूसरा, वस्तु को बल की दिशा में विस्थापित होना चाहिए।
यदि वस्तु विस्थापित नहीं होती है, अर्थात विस्थापन शून्य है, तो कार्य का सूत्र (कार्य = बल × विस्थापन) के अनुसार, किया गया कार्य भी शून्य होगा। भले ही वस्तु पर एक महत्वपूर्ण बल लगाया जा रहा हो, यदि कोई गति या विस्थापन नहीं होता है, तो कोई कार्य नहीं किया गया माना जाता है।
प्रश्न 3
जब हम किसी वस्तु पर बल लगाते हैं और उस बल के कारण वस्तु विस्थापित होती है, तो उस क्रिया को भौतिकी की भाषा में 'कार्य करना' कहा जाता है।
गणितीय रूप से, कार्य (W) को लगाए गए बल (F) और बल की दिशा में हुए विस्थापन (s) के गुणनफल के रूप में व्यक्त किया जाता है: ।
प्रश्न 4
कार्य की सामान्य गणितीय अभिव्यक्ति है, जहाँ F बल का परिमाण है, s विस्थापन का परिमाण है, और θ बल सदिश तथा विस्थापन सदिश के बीच का कोण है। इस समीकरण के आधार पर तीन स्थितियाँ इस प्रकार हैं:
- स्थिति A: जब बल और विस्थापन एक ही दिशा में हों (θ = 0°): इस स्थिति में, होता है। इसलिए, कार्य होगा। यह धनात्मक कार्य है, जिसका अर्थ है कि बल वस्तु की गति को बढ़ाने में सहायक है।
- स्थिति B: जब बल और विस्थापन विपरीत दिशा में हों (θ = 180°): इस स्थिति में, होता है। इसलिए, कार्य होगा। यह ऋणात्मक कार्य है, जिसका अर्थ है कि बल वस्तु की गति को कम करने या रोकने में सहायक है।
- स्थिति C: जब बल और विस्थापन के बीच का कोण 90° हो (θ = 90°): इस स्थिति में, होता है। इसलिए, कार्य होगा। इसका मतलब है कि यदि बल विस्थापन के लंबवत है, तो बल द्वारा कोई कार्य नहीं किया जाता है, भले ही विस्थापन हो रहा हो। उदाहरण के लिए, एक कुली द्वारा सिर पर बोझ उठाकर क्षैतिज दिशा में चलना।
एक अतिरिक्त स्थिति यह है कि यदि वस्तु में कोई विस्थापन न हो (s = 0), तो भी कार्य शून्य होगा, भले ही बल लगाया गया हो या कोण कुछ भी हो।
प्रश्न 5
1 जूल कार्य तब किया जाता है जब 1 न्यूटन का बल किसी वस्तु पर लगाया जाता है और वह वस्तु बल की दिशा में 1 मीटर विस्थापित हो जाती है।
गणितीय रूप से, यदि और (बल की दिशा में), तो किया गया कार्य (जूल) होता है।
प्रश्न 6
ऊर्जा को किसी वस्तु की कार्य करने की क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है। यदि किसी वस्तु में ऊर्जा होती है, तो वह दूसरी वस्तु पर बल लगाकर कार्य कर सकती है, जिससे ऊर्जा पहली वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानांतरित हो जाती है।
चूंकि ऊर्जा कार्य करने की क्षमता है, इसलिए ऊर्जा का मात्रक वही होता है जो कार्य का मात्रक है, अर्थात जूल (Joule)। ऊर्जा के बड़े मात्रक के रूप में किलोजूल (kJ) का भी उपयोग किया जाता है, जहाँ 1 किलोजूल = 1000 जूल।
प्रश्न 7
ऊर्जा विभिन्न रूपों में मौजूद हो सकती है। ऊर्जा के कुछ प्रमुख रूप निम्नलिखित हैं:
- गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy): किसी गतिमान वस्तु में उसकी गति के कारण निहित ऊर्जा।
- स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy): किसी वस्तु में उसकी स्थिति या अवस्था के कारण संचित ऊर्जा।
- ऊष्मीय ऊर्जा (Thermal Energy): ऊष्मा के रूप में ऊर्जा, जो कणों की गतिज ऊर्जा से संबंधित है।
- रासायनिक ऊर्जा (Chemical Energy): रासायनिक बंधों में संचित ऊर्जा, जो रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा मुक्त होती है।
- विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy): विद्युत आवेशों के प्रवाह (विद्युत धारा) से संबंधित ऊर्जा।
- प्रकाश ऊर्जा (Light Energy): विद्युत चुम्बकीय विकिरण के रूप में ऊर्जा, जिसे हम प्रकाश के रूप में अनुभव करते हैं।
प्रश्न 8
ऊर्जा संरक्षण का नियम भौतिकी का एक मौलिक सिद्धांत है। इसके अनुसार:
'ऊर्जा को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।'
इसका मतलब है कि किसी भी बंद प्रणाली (isolated system) में कुल ऊर्जा हमेशा स्थिर रहती है। ऊर्जा के विभिन्न रूप जैसे गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा, ऊष्मीय ऊर्जा, रासायनिक ऊर्जा आदि एक-दूसरे में परिवर्तित हो सकते हैं, लेकिन कुल ऊर्जा का योग अपरिवर्तित रहता है। उदाहरण के लिए, जब कोई वस्तु गिरती है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है, लेकिन कुल यांत्रिक ऊर्जा (स्थितिज + गतिज) स्थिर रहती है (यदि वायु प्रतिरोध नगण्य हो)।
प्रश्न 9
किसी वस्तु की यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy) उसकी गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा के योग के बराबर होती है।
गणितीय रूप से, यांत्रिक ऊर्जा () को इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:
यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण का नियम बताता है कि यदि किसी प्रणाली पर केवल संरक्षी बल (जैसे गुरुत्वाकर्षण बल) कार्य कर रहे हों, तो उसकी कुल यांत्रिक ऊर्जा स्थिर रहती है।
प्रश्न 10
शक्ति को कार्य करने की दर या ऊर्जा रूपांतरण की दर के रूप में परिभाषित किया जाता है। दूसरे शब्दों में, यह बताता है कि कोई कार्य कितनी तेजी से किया जा रहा है या ऊर्जा कितनी तेजी से एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित हो रही है।
शक्ति का SI मात्रक वाट (Watt) है। 1 वाट का अर्थ है 1 जूल कार्य प्रति सेकंड किया जाना ()।
शक्ति का व्यावसायिक मात्रक किलोवाट-घंटा (kW h) है, जिसे सामान्यतः 'यूनिट' कहा जाता है। इसका उपयोग विद्युत ऊर्जा की खपत को मापने के लिए किया जाता है।
Common mistakes
- कार्य की सामान्य बोलचाल की परिभाषा को भौतिकी की परिभाषा से भ्रमित करना।
- ऊर्जा के विभिन्न रूपों के बीच अंतर करने में कठिनाई।
- ऊर्जा संरक्षण के नियम को गलत समझना या लागू करना।
- शक्ति और ऊर्जा के बीच के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
Revision tips
- कार्य की परिभाषा पर विशेष ध्यान दें, जिसमें बल और विस्थापन दोनों की आवश्यकता होती है।
- ऊर्जा के विभिन्न रूपों के उदाहरणों को याद करें।
- ऊर्जा संरक्षण के नियम को समझने के लिए उदाहरणों का उपयोग करें।
- शक्ति की गणना के सूत्रों का अभ्यास करें और इसके मात्रकों को समझें।
Practice MCQs
Q1. किसी वस्तु पर किया गया कार्य शून्य कब होता है?
Explanation: कार्य की परिभाषा के अनुसार, कार्य = बल × विस्थापन। यदि विस्थापन शून्य है, तो किया गया कार्य भी शून्य होगा, भले ही बल लगाया गया हो।
Q2. कार्य का SI मात्रक क्या है?
Explanation: कार्य का SI मात्रक जूल (Joule) है। 1 जूल कार्य तब होता है जब 1 न्यूटन बल 1 मीटर की दूरी तक वस्तु को विस्थापित करता है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन सी ऊर्जा का एक रूप नहीं है?
Explanation: गुरुत्वाकर्षण ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा का एक प्रकार है जो गुरुत्वाकर्षण के कारण उत्पन्न होती है, यह अपने आप में एक अलग मूल रूप नहीं है।
Q4. ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार:
Explanation: ऊर्जा संरक्षण का नियम कहता है कि ऊर्जा को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, केवल इसे एक रूप से दूसरे रूप में रूपांतरित किया जा सकता है।
Q5. शक्ति को कैसे परिभाषित किया जाता है?
Explanation: शक्ति को कार्य करने की दर या ऊर्जा रूपांतरण की दर के रूप में परिभाषित किया जाता है।
Frequently asked questions
कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 11 में कार्य को कैसे परिभाषित किया गया है?
अध्याय 11 के अनुसार, किसी वस्तु पर कार्य तब किया जाता है जब उस पर बल लगाया जाता है और वह बल की दिशा में विस्थापित होती है। कार्य को बल और विस्थापन के गुणनफल के रूप में परिभाषित किया जाता है।
कार्य करने के लिए कौन सी दो मुख्य शर्तें आवश्यक हैं?
कार्य करने के लिए दो मुख्य शर्तें हैं: (i) वस्तु पर कोई बल लगना चाहिए, और (ii) वस्तु को बल की दिशा में विस्थापित होना चाहिए।
ऊर्जा संरक्षण का नियम क्या कहता है?
ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार, ऊर्जा को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है; इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।
शक्ति (Power) क्या है?
शक्ति को कार्य करने की दर या ऊर्जा रूपांतरण की दर के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसका मात्रक वाट (Watt) है।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान अवधारणाओं को स्पष्ट करने, महत्वपूर्ण सूत्रों को समझने और अभ्यास के लिए विस्तृत स्पष्टीकरण प्रदान करके परीक्षा की तैयारी में बहुत मदद करेंगे।
कार्य और ऊर्जा के मात्रक समान क्यों हैं?
कार्य और ऊर्जा दोनों ही ऊर्जा के स्थानांतरण या परिवर्तन को मापते हैं। इसलिए, दोनों का SI मात्रक जूल (Joule) है।
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