कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 10: गुरुत्वाकर्षण NCERT समाधान (हिंदी में)
यह पृष्ठ कक्षा 9 के छात्रों के लिए विज्ञान अध्याय 10, 'गुरुत्वाकर्षण' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम, पृथ्वी द्वारा लगाए गए गुरुत्वीय बल, मुक्त पतन की अवधारणा, गुरुत्वीय त्वरण, द्रव्यमान और भार के बीच महत्वपूर्ण अंतर, उत्प्लावकता, प्रणोद और दाब जैसे प्रमुख विषयों को शामिल किया गया है। समाधानों को स्पष्टता के लिए विस्तृत किया गया है, जिसमें प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को समझने में आसान चरणों और स्पष्टीकरणों के साथ प्रस्तुत किया गया है। यह संसाधन छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए इन महत्वपूर्ण अवधारणाओं को प्रभावी ढंग से समझने और याद रखने में सहायता करेगा।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 10. गुरुत्वाकर्षण |
Chapter summary
कक्षा 9 के विज्ञान के अध्याय 10 'गुरुत्वाकर्षण' के लिए ये NCERT समाधान छात्रों को गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम, गुरुत्वीय बल, मुक्त पतन, गुरुत्वीय त्वरण, द्रव्यमान, भार, उत्प्लावकता और दाब जैसी मूलभूत अवधारणाओं को समझने में मदद करते हैं। समाधानों में प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को स्पष्ट और विस्तृत तरीके से समझाया गया है, जिससे छात्रों को विषय की गहरी समझ विकसित करने में सहायता मिलती है।
Learning outcomes
- गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम को समझना और व्यक्त करना।
- पृथ्वी और किसी वस्तु के बीच गुरुत्वाकर्षण बल के सूत्र को लिखना।
- मुक्त पतन की अवधारणा को परिभाषित करना।
- गुरुत्वीय त्वरण के अर्थ को समझाना।
- द्रव्यमान और भार के बीच मुख्य अंतरों की पहचान करना।
- उत्प्लावकता और दाब की अवधारणाओं को समझना।
Topics covered
Paper topics
- गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम
- गुरुत्वाकर्षण बल
- पृथ्वी का गुरुत्वीय बल
- मुक्त पतन
- गुरुत्वीय त्वरण
- द्रव्यमान
- भार
- द्रव्यमान और भार में अंतर
- उत्प्लावकता
- प्रणोद
- दाब
- सार्वत्रिक गुरुत्वीय स्थिरांक (G)
Important topics
- गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम
- मुक्त पतन और गुरुत्वीय त्वरण
- द्रव्यमान और भार के बीच अंतर
- उत्प्लावकता का सिद्धांत
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Questions and Solutions
प्रश्न 1: गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम बताइए।
गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के अनुसार, ब्रह्मांड में किन्हीं भी दो पिंडों के बीच लगने वाला आकर्षण बल निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है:
- यह बल उन दोनों पिंडों के द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती होता है।
- यह बल उन दोनों पिंडों के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
यदि दो पिंडों के द्रव्यमान और हैं, और उनके केंद्रों के बीच की दूरी है, तो उनके बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:
जहाँ सार्वत्रिक गुरुत्वीय स्थिरांक है, जिसका मान लगभग होता है।
प्रश्न 2: पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी वस्तु के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का परिणाम ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
मान लीजिए पृथ्वी का द्रव्यमान है और उसकी सतह पर रखी वस्तु का द्रव्यमान है। यदि पृथ्वी के केंद्र और वस्तु के बीच की दूरी है, तो गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के अनुसार, उनके बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का सूत्र है:
यहाँ सार्वत्रिक गुरुत्वीय स्थिरांक है, जिसका मान है। यह बल ही वह गुरुत्वीय बल है जो पृथ्वी किसी वस्तु पर लगाती है।
प्रश्न 1: मुक्त पतन से आप क्या समझते हैं?
जब कोई वस्तु पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के प्रभाव में नीचे गिरती है, तो हम कहते हैं कि वह वस्तु 'मुक्त पतन' में है। इसका अर्थ है कि वस्तु पर केवल पृथ्वी का गुरुत्वीय बल कार्य कर रहा है और अन्य कोई बाहरी बल (जैसे वायु प्रतिरोध) नगण्य है या अनुपस्थित है। पृथ्वी सभी वस्तुओं को अपने केंद्र की ओर आकर्षित करती है, और इसी आकर्षण बल के कारण वस्तुएँ नीचे की ओर गति करती हैं।
प्रश्न 2: गुरुत्वीय त्वरण से आप क्या समझते हैं?
जब कोई वस्तु पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के कारण नीचे गिरती है (अर्थात मुक्त पतन में होती है), तो उसके वेग में लगातार परिवर्तन होता है। वेग में इस परिवर्तन की दर को ही गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं। यह त्वरण पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण उत्पन्न होता है। पृथ्वी की सतह के पास इसका मान लगभग होता है।
प्रश्न 1: किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा भार में क्या अंतर है?
किसी वस्तु के द्रव्यमान और भार में निम्नलिखित मुख्य अंतर हैं:
द्रव्यमान (Mass):
- द्रव्यमान वस्तु में उपस्थित पदार्थ की कुल मात्रा होती है।
- यह वस्तु के जड़त्व (inertia) की माप है। जितना अधिक द्रव्यमान होगा, वस्तु का जड़त्व उतना ही अधिक होगा।
- द्रव्यमान एक अदिश राशि है और यह स्थान के साथ परिवर्तित नहीं होता है। यह हर जगह समान रहता है।
- द्रव्यमान का SI मात्रक किलोग्राम (kg) है।
भार (Weight):
- भार वह गुरुत्वाकर्षण बल है जिससे पृथ्वी किसी वस्तु को अपने केंद्र की ओर खींचती है।
- भार एक सदिश राशि है क्योंकि यह एक बल है और इसकी दिशा हमेशा पृथ्वी के केंद्र की ओर होती है।
- भार का मान स्थान के साथ बदल सकता है, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल (और इस प्रकार गुरुत्वीय त्वरण) पृथ्वी की सतह पर हर जगह समान नहीं होता है। उदाहरण के लिए, चंद्रमा पर भार पृथ्वी की तुलना में कम होता है।
- भार का सूत्र है, जहाँ द्रव्यमान है और गुरुत्वीय त्वरण है।
- भार का SI मात्रक न्यूटन (N) है।
प्रश्न: उत्प्लावकता से आप क्या समझते हैं?
उत्प्लावकता वह ऊपरी दिशा में लगने वाला बल है जो किसी तरल (द्रव या गैस) द्वारा किसी वस्तु पर लगाया जाता है जब उस वस्तु को तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोया जाता है। यह बल वस्तु द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है। इसी उत्प्लावन बल के कारण वस्तुएं पानी में तैरती हुई प्रतीत होती हैं या हल्की महसूस होती हैं।
प्रश्न: प्रणोद और दाब को परिभाषित करें।
प्रणोद (Thrust): प्रणोद किसी सतह के लंबवत (perpendicular) लगने वाला कुल बल होता है। यह बल किसी वस्तु पर लगाया जा सकता है, जैसे कि किसी रॉकेट का निकास गैसों द्वारा लगाया गया बल, या किसी तरल द्वारा किसी वस्तु पर लगाया गया बल। प्रणोद का SI मात्रक न्यूटन (N) है।
दाब (Pressure): दाब को प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले प्रणोद के रूप में परिभाषित किया जाता है। दूसरे शब्दों में, यह बताता है कि किसी सतह के एक छोटे से हिस्से पर कितना बल लग रहा है। दाब का सूत्र है, जहाँ दाब है, प्रणोद (लंबवत बल) है, और वह क्षेत्रफल है जिस पर बल लग रहा है। दाब का SI मात्रक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर () है, जिसे पास्कल (Pa) भी कहा जाता है।
प्रश्न: आर्किमिडीज का सिद्धांत क्या है?
आर्किमिडीज का सिद्धांत बताता है कि जब किसी वस्तु को किसी तरल (द्रव या गैस) में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबोया जाता है, तो वह वस्तु ऊपर की ओर एक बल का अनुभव करती है। यह उत्प्लावन बल (buoyant force) उस वस्तु द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है। इसी सिद्धांत के कारण वस्तुएं पानी में तैरती हैं या हल्की महसूस होती हैं।
प्रश्न: गुरुत्वीय त्वरण का मान ध्रुवों पर भूमध्य रेखा से अधिक क्यों होता है?
गुरुत्वीय त्वरण का मान ध्रुवों पर भूमध्य रेखा से अधिक होने के दो मुख्य कारण हैं:
- पृथ्वी का आकार: पृथ्वी पूर्णतः गोलाकार नहीं है, बल्कि ध्रुवों पर थोड़ी चपटी और भूमध्य रेखा पर थोड़ी उभरी हुई है। इस कारण, ध्रुवों पर स्थित कोई भी वस्तु पृथ्वी के केंद्र के अधिक निकट होती है, जबकि भूमध्य रेखा पर स्थित वस्तु केंद्र से अधिक दूर होती है। गुरुत्वाकर्षण बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है, इसलिए केंद्र के निकट होने के कारण ध्रुवों पर गुरुत्वाकर्षण प्रभाव अधिक होता है।
- पृथ्वी का घूर्णन: पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है। इस घूर्णन के कारण एक अपकेन्द्री बल (centrifugal force) उत्पन्न होता है जो वस्तुओं को बाहर की ओर धकेलता है। यह बल भूमध्य रेखा पर सबसे अधिक होता है और ध्रुवों पर शून्य होता है। यह अपकेन्द्री बल गुरुत्वाकर्षण बल के विपरीत कार्य करता है, जिससे भूमध्य रेखा पर प्रभावी गुरुत्वाकर्षण बल कम हो जाता है।
इन दोनों कारणों से, ध्रुवों पर गुरुत्वीय त्वरण का मान भूमध्य रेखा की तुलना में थोड़ा अधिक होता है (लगभग ध्रुवों पर और भूमध्य रेखा पर)।
प्रश्न: कागज की गेंद की अपेक्षा कागज पर वायु लगाया गया प्रतिरोध अधिक क्यों होता है?
कागज की गेंद की अपेक्षा कागज की शीट पर वायु का प्रतिरोध अधिक होता है क्योंकि कागज की शीट का आकार और सतह क्षेत्र गेंद की तुलना में बहुत अधिक होता है। जब कागज की शीट गिरती है, तो हवा का एक बड़ा क्षेत्र उसके नीचे फंस जाता है, जिससे हवा का प्रतिरोध (drag) बहुत बढ़ जाता है। यह प्रतिरोध शीट को नीचे गिरने से धीमा कर देता है। इसके विपरीत, कागज की गेंद का आकार छोटा और सघन होता है, जिससे हवा का प्रतिरोध उस पर कम प्रभावी होता है और वह अपेक्षाकृत तेज़ी से गिरती है।
Common mistakes
- द्रव्यमान और भार के बीच भ्रमित होना।
- गुरुत्वाकर्षण के नियम में दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती संबंध को गलत समझना।
- मुक्त पतन और सामान्य गिरावट के बीच अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
Revision tips
- गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के सूत्र को याद करें और उसके घटकों को समझें।
- द्रव्यमान और भार के बीच के अंतर को सारणीबद्ध रूप में लिखें।
- मुक्त पतन और गुरुत्वीय त्वरण से संबंधित प्रश्नों का अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम क्या कहता है?
Explanation: गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम बताता है कि दो वस्तुओं के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
Q2. गुरुत्वीय त्वरण का मान लगभग कितना होता है?
Explanation: पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के कारण उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं, जिसका मान लगभग 9.8 m/s² होता है।
Q3. किसी वस्तु का द्रव्यमान क्या मापता है?
Explanation: द्रव्यमान वस्तु में उपस्थित पदार्थ की कुल मात्रा होती है और यह वस्तु के जड़त्व की माप होती है।
Q4. जब कोई वस्तु केवल गुरुत्वीय बल के प्रभाव में गिरती है, तो उसे क्या कहते हैं?
Explanation: जब कोई वस्तु केवल पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के कारण नीचे गिरती है, तो उसकी गति को मुक्त पतन कहा जाता है।
Q5. उत्प्लावकता का संबंध किससे है?
Explanation: उत्प्लावकता वह प्रवृत्ति है जिसके कारण तरल (द्रव या गैस) किसी वस्तु पर ऊपर की ओर बल लगाता है जब उसे उसमें डुबोया जाता है।
Frequently asked questions
कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 10 में कौन से मुख्य विषय शामिल हैं?
इस अध्याय में गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम, गुरुत्वीय बल, मुक्त पतन, गुरुत्वीय त्वरण, द्रव्यमान, भार, उत्प्लावकता और दाब जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम क्या है?
यह नियम बताता है कि ब्रह्मांड में प्रत्येक कण प्रत्येक दूसरे कण को एक बल द्वारा आकर्षित करता है जो उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
द्रव्यमान और भार में क्या अंतर है?
द्रव्यमान वस्तु में पदार्थ की मात्रा है और यह स्थिर रहता है, जबकि भार वह बल है जिससे पृथ्वी किसी वस्तु को अपनी ओर खींचती है और यह स्थान के साथ बदल सकता है।
मुक्त पतन का क्या अर्थ है?
मुक्त पतन तब होता है जब कोई वस्तु केवल पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के प्रभाव में गिरती है, बिना किसी अन्य बाहरी बल के।
ये NCERT समाधान छात्रों की मदद कैसे करते हैं?
ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को विस्तृत और स्पष्ट चरणों में समझाते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझने और परीक्षा की तैयारी करने में मदद मिलती है।
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