CBSE Class 9 Hindi NCERT Solutions: Chapter 13 - गीत-अगीत
CBSE Class 9 Hindi 'Sparsh' textbook, Chapter 13, 'गीत-अगीत' (Song-Unsung) by Ramdhari Singh Dinkar, explores the contrast between audible songs and unspoken emotions, often found in nature. The solutions delve into how nature's elements, like the peacock's dance and the clouds' thunder, are personified to express feelings. It examines the inherent connection between animals and their surroundings, highlighting how their actions, though often silent, convey deep emotions. The chapter also touches upon the impact of natural events on human sentiments, illustrating that not all expressions are vocal. These solutions aim to enhance students' comprehension of poetic language, symbolism, and the philosophical depth within Dinkar's verses, providing clarity for effective exam preparation.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 13 |
Chapter summary
Chapter 13, 'गीत-अगीत' by Ramdhari Singh Dinkar, explores the concept of expression in nature and human emotions. The NCERT Solutions provided here clarify the distinction between 'geet' (song) and 'ageet' (unsung), explaining how natural elements and feelings find expression. The solutions cover the personification of the river, the relationship between birds and their environment, and the emotional resonance of nature with humans, offering insights into Dinkar's poetic philosophy.
Learning outcomes
- Understand the concept of 'गीत' (song) and 'अगीत' (unsung) as presented by the poet.
- Analyze the personification of nature in the poem, particularly the river and the rose.
- Explain the relationship between birds and their environment as depicted in the chapter.
- Describe how natural phenomena influence human emotions and feelings.
- Interpret the central theme of the poem regarding expression and emotion in nature and life.
Topics covered
Paper topics
- गीत और अगीत की अवधारणा
- प्रकृति का मानवीकरण
- नदी और गुलाब का चित्रण
- पशु-पक्षियों का प्रकृति से संबंध
- मानव मन पर प्रकृति का प्रभाव
- भावनाओं की अभिव्यक्ति
- रामधारी सिंह दिनकर की काव्य शैली
- कविता का केंद्रीय भाव
Important topics
- गीत और अगीत का अंतर
- प्रकृति का मानवीकरण
- भावनाओं की अभिव्यक्ति का माध्यम
- कविता का केंद्रीय भाव
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Questions and Solutions
प्रश्न 1 (क)
जब नदी किनारों से कुछ कहते हुए आगे बढ़ जाती है, तो उस किनारे पर खिला गुलाब यह सोचता है कि काश उसे भी बोलने की क्षमता (विधाता से स्वर) मिली होती। यदि ऐसा होता, तो वह भी अपने मन में छिपे हुए सपनों को, जो पतझर के समान प्रतीत होते हैं, दुनिया को गीत के रूप में सुना पाता। इससे संबंधित पंक्तियाँ हैं: "द्विउ उत्तर कः देते स्वर यदि मुझे विधाता, अपने पतझर के सपनों का मैं भी जग को गीत सुनाता।"
प्रश्न 1 (ख)
जब नर तोता (शुक) डाल पर बैठकर मधुर स्वर में गाता है, तो मादा तोता (शुकी), जो घोंसले में बैठकर अपने अंडों को से रही होती है, उसके हृदय पर गहरा प्रभाव पड़ता है। वह उसके संगीत को सुनकर मन ही मन बहुत प्रसन्न होती है। इस प्रकार, शुक के गाने का सीधा और सुखद प्रभाव शुकी के मन पर पड़ता है, जो उसकी प्रसन्नता के रूप में प्रकट होता है।
प्रश्न 1 (ग)
जब प्रेमी साँझ ढले प्रेम भरे गीत (आल्हा) गाता है, तो दूर अपने घर में बैठी प्रेमिका को उसका स्वर अपनी ओर खींच लेता है। वह पेड़ की छाया में छिपकर प्रेमी का गीत सुन रही होती है। इस स्थिति में, प्रेमिका की तीव्र इच्छा होती है कि वह केवल श्रोता बनकर न रहे, बल्कि स्वयं उस गीत की एक कड़ी बन जाए, अर्थात वह भी अपने प्रिय के संगीत का हिस्सा बन जाए।
प्रश्न 1 (घ)
प्रथम छंद में कवि ने प्रकृति का सुंदर मानवीकरण किया है। नदी को एक सजीव पात्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो बहते हुए अपने किनारों से बातें करती हुई चलती है। यह नदी के बहने को उसके मन की बात कहने का एक तरीका बताता है। इसी नदी के किनारे खिला हुआ गुलाब भी मन ही मन यह सोचता है कि यदि उसे भी बोलने की शक्ति मिली होती, तो वह भी अपने मन के भावों को गीतों के माध्यम से व्यक्त करता। इस प्रकार, कवि ने नदी और गुलाब के माध्यम से प्रकृति के सजीव और भावपूर्ण चित्रण को प्रस्तुत किया है।
प्रश्न 1 (ड)
कवि के अनुसार, पशु-पक्षी प्रकृति के अभिन्न अंग हैं और उनके माध्यम से प्रकृति स्वयं अपनी भावनाओं को व्यक्त करती है। जब पक्षी गाते या चहचहाते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति स्वयं गीत गा रही हो या गुनगुना रही हो। उनके माध्यम से ही प्रकृति अपने संदेशों को लोगों तक पहुँचाने का प्रयास करती है। इस प्रकार, पशु-पक्षियों का संबंध प्रकृति के साथ गहरा और अभिव्यंजक है।
प्रश्न 1 (च)
मनुष्य प्रकृति के हर रूप से गहराई से प्रभावित होता है और आंदोलित होता है। चाहे वह नदी का निरंतर बहना हो, झरने का गिरना हो, पक्षियों का मधुर कलरव हो, या फिर प्रकृति का हरा-भरा मनमोहक दृश्य हो – ये सभी मनुष्य के मन को स्पर्श करते हैं। प्रकृति अपने विभिन्न रूपों और क्रियाओं के माध्यम से मनुष्य को निरंतर एक नया संदेश देती है और उसे भावनात्मक रूप से प्रेरित करती है।
प्रश्न 1 (छ)
यह कथन कि 'सब कुछ गीत है, अगीत कुछ नहीं होता' एक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, लेकिन वास्तव में 'अगीत' भी होता है। 'गीत' वह है जिसे स्पष्ट रूप से गाया या व्यक्त किया जा सके, जैसे कोई धुन या बोली गई बात। वहीं, 'अगीत' वह है जिसे गाया जाना है या जो अव्यक्त है, जैसे मन में उठने वाली भावनाएं या विचार जो अभी शब्द या ध्वनि का रूप नहीं ले पाए हैं। जब प्रकृति या मनुष्य की भावनाएं मूर्त रूप ले लेती हैं, तो वे 'गीत' बन जाती हैं। लेकिन जो भावनाएं अभी मूर्त रूप लेने के लिए प्रस्तुत हैं, वे 'अगीत' के रूप में हमारे सामने रहती हैं।
प्रश्न 1 (ञ)
'गीत–अगीत' कविता का केंद्रीय भाव यह है कि प्रकृति में घटित होने वाली प्रत्येक घटना और मनुष्य के मन में उत्पन्न होने वाली प्रत्येक भावना या संवेदना किसी न किसी रूप में एक-दूसरे को प्रभावित करती है। यह प्रभाव कभी स्पष्ट रूप से 'गीत' (व्यक्त) के रूप में प्रकट होता है, जैसे पक्षियों का गाना या किसी की कही बात। वहीं, यह प्रभाव कभी अव्यक्त 'अगीत' के रूप में भी हमारे सामने आता है, जैसे मन की अनकही भावनाएं या प्रकृति की खामोश सुंदरता। कवि यह दर्शाते हैं कि जीवन और प्रकृति में गीत और अगीत दोनों का अस्तित्व है और वे एक-दूसरे के पूरक हैं।
Common mistakes
- Confusing the literal meaning of 'गीत' and 'अगीत' without understanding the poetic context.
- Failing to identify the personification of natural elements.
- Not fully grasping the connection between external natural expressions and internal human emotions.
Revision tips
- Read the poem carefully to grasp the contrast between 'गीत' and 'अगीत'.
- Identify and list examples of personification used for nature.
- Summarize the poet's view on how nature communicates with humans.
- Reflect on personal experiences that resonate with the poem's themes of emotion and expression.
Practice MCQs
Q1. नदी का किनारों से कुछ कहते हुए बह जाने पर गुलाब क्या सोच रहा है?
Explanation: गुलाब सोच रहा है कि यदि उसे भी बोलने की क्षमता (स्वर) मिलती, तो वह भी अपने मन की बातें (पतझर के सपने) गीत के रूप में सुनाता।
Q2. जब शुक (नर तोता) गाता है, तो शुकी (मादा तोता) पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Explanation: जब नर तोता गाता है, तो मादा तोता घोंसले में अंडे सेते हुए उसके संगीत को सुनकर प्रसन्न होती है।
Q3. प्रेमी जब गीत गाता है, तब प्रेमिका की क्या इच्छा होती है?
Explanation: प्रेमिका की इच्छा होती है कि वह पेड़ की छाया में छिपकर गीत सुनने के बजाय, स्वयं उस गीत की एक कड़ी बन जाए।
Q4. प्रथम छंद में कवि ने नदी का कैसा चित्रण किया है?
Explanation: कवि ने नदी को मानवीकरण रूप में प्रस्तुत किया है, जहाँ वह बहते हुए अपने किनारों से बातें करती हुई प्रतीत होती है।
Q5. 'गीत-अगीत' कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
Explanation: कविता का मुख्य भाव यह है कि प्रकृति की हर घटना और मानव की भावनाएं किसी न किसी रूप में व्यक्त होती हैं, जो कभी स्पष्ट 'गीत' होती हैं और कभी अव्यक्त 'अगीत'।
Frequently asked questions
कक्षा 9 हिंदी के 'गीत-अगीत' पाठ में 'गीत' और 'अगीत' का क्या अर्थ है?
कविता में 'गीत' वह है जो स्पष्ट रूप से व्यक्त हो जाता है, जैसे पक्षियों का गाना या प्रेमी का गीत। 'अगीत' वह है जो अव्यक्त है, जिसे गाया जाना है या महसूस किया जाता है पर स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं होता, जैसे गुलाब की खामोश इच्छा या नदी का बहना।
इस पाठ के अनुसार प्रकृति मनुष्य को कैसे आंदोलित करती है?
प्रकृति मनुष्य को हर रूप में आंदोलित करती है, चाहे वह नदी का बहना हो, झरने का गिरना हो, पक्षियों का चहचहाना हो या उसका हरा-भरा रूप हो। प्रकृति अपने हर रूप से मनुष्य को एक नया संदेश देती है और प्रभावित करती है।
रामधारी सिंह दिनकर ने 'गीत-अगीत' कविता में क्या संदेश दिया है?
दिनकर जी ने यह बताने का प्रयास किया है कि प्रकृति में होने वाली हर घटना और मनुष्य की भावनाएं एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं। यह प्रभाव कभी स्पष्ट 'गीत' के रूप में सामने आता है और कभी अव्यक्त 'अगीत' के रूप में।
क्या 'गीत-अगीत' पाठ केवल प्रकृति के बारे में है?
नहीं, यह पाठ प्रकृति के साथ-साथ मानव मन की भावनाओं और संवेदनाओं की अभिव्यक्ति पर भी केंद्रित है। यह दिखाता है कि कैसे प्रकृति और मानव भावनाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और दोनों ही किसी न किसी रूप में व्यक्त होती हैं।
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