कक्षा 9 हिंदी स्पर्श पाठ 11: रैदास के पद - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी स्पर्श पुस्तक के पाठ 11, 'रैदास के पद' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें रैदास जी द्वारा रचित दो पदों का गहन विश्लेषण शामिल है, जो ईश्वर और भक्त के बीच अटूट संबंध को दर्शाते हैं। समाधानों में भगवान की विभिन्न उपमाओं (जैसे चंदन, बादल, दीपक, मोती, स्वामी) और भक्त की उपमाओं (जैसे पानी, चकोर, बाती, धागा, दास) की व्याख्या की गई है। यह पाठ ईश्वर की सर्वव्यापकता, उनकी कृपा और समाज में व्याप्त छुआछूत जैसी कुरीतियों पर भी प्रकाश डालता है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से दिया गया है, जिससे छात्रों को पदों के भावार्थ को समझने में मदद मिलेगी। ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं, क्योंकि ये पाठ की मुख्य अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं और छात्रों को महत्वपूर्ण बिंदुओं को याद रखने में सहायता करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 11

Chapter summary

कक्षा 9 हिंदी स्पर्श, पाठ 11 'रैदास के पद' के ये NCERT समाधान छात्रों को रैदास जी की भक्ति भावना को समझने में मदद करते हैं। समाधानों में पदों में प्रयुक्त उपमाओं, तुकांत शब्दों और अर्थ की दृष्टि से संबंधित शब्दों की पहचान की गई है। विशेष रूप से, ईश्वर को 'गरीब निवाजु' कहने के पीछे के भाव और समाज द्वारा उपेक्षित लोगों के प्रति ईश्वर की करुणा को स्पष्ट किया गया है। यह समाधान छात्रों को पदों के गहरे अर्थ और रैदास जी के ईश्वर के प्रति समर्पण को समझने में सहायता प्रदान करते हैं।

Learning outcomes

  • रैदास के पदों में प्रयुक्त उपमाओं को पहचानना और समझना।
  • ईश्वर और भक्त के बीच संबंध की प्रकृति का विश्लेषण करना।
  • पदों में व्यक्त सामाजिक संदेशों (जैसे छुआछूत) को समझना।
  • तुकांत शब्दों और उनके काव्य में प्रभाव को पहचानना।
  • प्रचलित हिंदी में शब्दों के अर्थ को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • रैदास के पद
  • ईश्वर-भक्त संबंध
  • ईश्वर की तुलना
  • भक्त की तुलना
  • तुकांत शब्द
  • अर्थ की दृष्टि से संबंधित शब्द
  • गरीब निवाजु
  • छुआछूत
  • सामाजिक संदेश
  • प्रचलित हिंदी शब्द

Important topics

  • ईश्वर और भक्त की तुलनात्मक उपमाएँ
  • 'गरीब निवाजु' का अर्थ और संदर्भ
  • सामाजिक कुरीतियों पर रैदास के विचार
  • पदों का भावार्थ
  • तुकांत शब्दों का काव्य सौंदर्य

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

(क). पहले पद में भगवान और भक्त की जिन—जिन चीजों से तुलना की गई है , उनका उल्लेख कीजिए।

(ख). पहले पद की प्रत्येक पंक्ति के अंत में तुकांत शब्दों के प्रयोग से नाद सौंदर्य आ गया है , जैसे पानी , समानी आदि इस पद के अन्य तुकांत शब्द छाँटकर लिखिए।

(ग). पहले पद में कुछ शब्द अर्थ की दृष्टि से परस्पर संबद्ध हैं । ऐसे शब्दों को छाँटकर लिखिए।

(घ). दूसरे पद में कवि ने ' गरीब निवाजु ' किसे कहा है ? स्पष्ट कीजिए।

(ङ). दूसरे पद की ' जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै ' इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

(च). रैदास जी ने अपने स्वामी को किन-किन नामों से पुकारा है ?

(छ). निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए । मोरा , चंद , बाती ,जोति ,बरै , राती , छत्रु ,धरै , छोति , तुही , गुसईआ

Solution:

(क) पहले पद में कवि रैदास ने अपने आराध्य प्रभु की तुलना चंदन, बादल, दीपक, मोती और स्वामी से की है। वहीं, भक्त की तुलना पानी (जो चंदन में मिल जाता है), चकोर (जो चंद्रमा को देखता है), दीपक की बाती (जो दीपक में जलती है), धागा (जो मोती को पिरोता है) और दास (जो स्वामी की सेवा करता है) से की गई है। यह तुलना ईश्वर की सर्वव्यापकता और भक्त के उन पर पूर्ण समर्पण को दर्शाती है।

(ख) पहले पद में नाद सौंदर्य उत्पन्न करने वाले तुकांत शब्द हैं: पानी-समानी, मोरा-चकोरा, बाती-राती, धागा-सुहागा, स्वामी-दास। ये शब्द पद के प्रवाह को बढ़ाते हैं और सुनने में मधुर लगते हैं।

(ग) अर्थ की दृष्टि से परस्पर संबद्ध शब्द इस प्रकार हैं:

ईश्वर संबंधी: घन (बादल), चंद (चंद्रमा), मोर (मयूर), स्वामी, गोविंद, हरिजी

भक्त संबंधी: पानी, चकोर, बाती, धागा, दास

अन्य संबंधित: जोति (ज्योति), बरै (जलती है), राती (रात्रि), छत्रु (छत्र), धरै (धारण करता है), छोति (छूत), तुही (तुम ही), गुसईआ (स्वामी)

ये शब्द ईश्वर और भक्त के रिश्ते को विभिन्न रूपों में चित्रित करते हैं।

(घ) दूसरे पद में कवि रैदास ने 'गरीब निवाजु' अपने आराध्य ईश्वर को कहा है। 'गरीब निवाजु' का अर्थ है गरीबों पर दया करने वाला या उनका उद्धार करने वाला। रैदास जी का मानना है कि ईश्वर ही एकमात्र ऐसे हैं जो समाज के निम्न वर्ग, दलितों और पीड़ितों पर कृपा करते हैं और उन्हें सम्मान प्रदान करते हैं।

(ङ) इस पंक्ति का आशय यह है कि जिन लोगों को समाज अछूत मानता है, जिनके स्पर्श मात्र से लोग अपवित्र हो जाते हैं, और जिन पर कुलीन या उच्च वर्ग के लोग दया नहीं करते, हे ईश्वर, आप उन पर ही सबसे अधिक कृपा करते हैं और उनका उद्धार करते हैं। यह पंक्ति समाज में व्याप्त छुआछूत और भेदभाव की ओर संकेत करती है और ईश्वर की करुणा को दर्शाती है।

(च) रैदास जी ने अपने स्वामी (ईश्वर) को विभिन्न नामों से पुकारा है, जिनमें प्रमुख हैं: लाल, गुसाईं, गोविंद, और हरिजी। ये नाम ईश्वर के प्रति उनके प्रेम, श्रद्धा और आत्मीयता को प्रकट करते हैं।

(छ) दिए गए शब्दों के प्रचलित रूप निम्नलिखित हैं:

शब्द

प्रचलित रूप

मोरा

मोर, मयूर चंद चंद्र, चंद्रमा

बाती

बत्ती

जोति

ज्योति बरै जलती है

राती

रात्रि, रात

छत्रु

छत्र धरै धारण करता है

छोति

छूत, छूना

तुही

तुम ही

गुसईआ

गुसाईं, गोसाईं

ये शब्द रैदास जी की भाषा की विशेषता को दर्शाते हैं, जो लोकभाषा के करीब है।

प्रश्न 2

नीचे लिखी पंक्तियों के भाव स्पष्ट कीजिए -

(क). जाकी अंग-अंग बास समानी

Solution:

(क) इस पंक्ति का भाव यह है कि जिस प्रकार चंदन का लेप शरीर के कण-कण में समाकर उसे सुगंधित कर देता है, उसी प्रकार ईश्वर की भक्ति भी भक्त के रोम-रोम में समा जाती है। यह भक्ति भक्त के पूरे अस्तित्व को पवित्र और आनंदित कर देती है, जिससे उसका मन और शरीर दोनों ही ईश्वर के प्रेम में लीन हो जाते हैं।

Common mistakes

  • पदों के लाक्षणिक अर्थ को समझने में कठिनाई।
  • तुकांत शब्दों की पहचान में चूक।
  • सामाजिक संदेशों की व्याख्या में अस्पष्टता।

Revision tips

  • प्रत्येक पद को ध्यान से पढ़ें और उसके मुख्य भाव को समझें।
  • भगवान और भक्त की तुलना के लिए प्रयुक्त उपमाओं की सूची बनाएं।
  • कठिन शब्दों के प्रचलित अर्थों को याद करें।
  • सामाजिक कुरीतियों पर कवि के विचारों पर ध्यान केंद्रित करें।

Practice MCQs

Q1. पहले पद में भगवान की तुलना किससे की गई है?

Q2. रैदास जी ने ईश्वर को 'गरीब निवाजु' क्यों कहा है?

Q3. दूसरे पद की पंक्ति 'जाकी छोति जगत कउ लागै' का क्या आशय है?

Q4. निम्नलिखित में से कौन सा शब्द 'मोरा' का प्रचलित रूप है?

Q5. रैदास जी ने अपने स्वामी को किन नामों से पुकारा है?

Frequently asked questions

कक्षा 9 हिंदी स्पर्श के पाठ 11 का क्या नाम है?

कक्षा 9 हिंदी स्पर्श के पाठ 11 का नाम 'रैदास के पद' है।

इन समाधानों में किन मुख्य विषयों पर चर्चा की गई है?

इन समाधानों में ईश्वर और भक्त के बीच संबंध, ईश्वर की विभिन्न उपमाओं, सामाजिक संदेशों जैसे छुआछूत और पदों के भावार्थ पर चर्चा की गई है।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान पदों की गहन समझ प्रदान करते हैं और महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत सहायक हैं।

रैदास जी ने ईश्वर को 'गरीब निवाजु' क्यों कहा है?

रैदास जी ने ईश्वर को 'गरीब निवाजु' इसलिए कहा है क्योंकि ईश्वर दीन-दुखियों और समाज द्वारा उपेक्षित लोगों पर विशेष कृपा करते हैं और उनका उद्धार करते हैं।

पहले पद में भक्त की तुलना किन-किन चीजों से की गई है?

पहले पद में भक्त की तुलना पानी, चकोर, बाती, धागा और दास से की गई है।

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