कक्षा 9 भारत और समकालीन विश्व - I: आधुनिक विश्व में चरवाहे NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 के सामाजिक विज्ञान के लिए 'आधुनिक विश्व में चरवाहे' अध्याय पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह समाधान चरवाहा समुदायों के जीवन के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल करते हैं, जिसमें उनके घुमंतू जीवन शैली के कारण, पर्यावरण पर उनके आवागमन का प्रभाव, और औपनिवेशिक शासन के दौरान वन अधिनियमों, परती भूमि नियमावली, अपराधी जनजाति अधिनियम और चराई कर जैसे कानूनों के कारण उनके जीवन में आए महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं। ये समाधान छात्रों को चरवाहों के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके पारंपरिक व्यवसायों पर औपनिवेशिक नीतियों के प्रभाव को समझने में मदद करने के लिए विस्तृत स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं। परीक्षा की तैयारी के लिए, ये समाधान प्रमुख अवधारणाओं को स्पष्ट करने और चरवाहा समुदायों के ऐतिहासिक संदर्भ की गहरी समझ प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | भारत और समकालीन विश्व - I |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 5. आधुनिक विश्व में चरवाहे |
Chapter summary
कक्षा 9 के लिए 'आधुनिक विश्व में चरवाहे' अध्याय के ये NCERT समाधान चरवाहा समुदायों के पारंपरिक जीवन और औपनिवेशिक काल के दौरान उनके सामने आई चुनौतियों का विस्तृत विवरण प्रदान करते हैं। इसमें घुमंतू जीवन के कारणों, पर्यावरण पर इसके प्रभावों और वन अधिनियमों, परती भूमि नियमावली, अपराधी जनजाति अधिनियम और चराई कर जैसे औपनिवेशिक कानूनों के कारण हुए परिवर्तनों पर प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को चरवाहों के जीवन की जटिलताओं और उनके व्यवसायों पर ऐतिहासिक नीतियों के प्रभाव को समझने में सहायता करते हैं।
Learning outcomes
- घुमंतू समुदायों के निरंतर आवागमन के कारणों को समझना।
- चरवाहों के आवागमन से पर्यावरण को होने वाले लाभों का विश्लेषण करना।
- औपनिवेशिक सरकार द्वारा बनाए गए विभिन्न कानूनों और उनके उद्देश्यों की व्याख्या करना।
- वन अधिनियमों, परती भूमि नियमावली, अपराधी जनजाति अधिनियम और चराई कर के चरवाहों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन करना।
- चरवाहा समुदायों के पारंपरिक जीवन और औपनिवेशिक काल के दौरान उनके सामने आई चुनौतियों को समझना।
Topics covered
Paper topics
- चरवाहा समुदायों का जीवन
- घुमंतू जीवन शैली के कारण
- पर्यावरण पर चरवाहों के आवागमन का प्रभाव
- औपनिवेशिक शासन का प्रभाव
- वन अधिनियम
- परती भूमि नियमावली
- अपराधी जनजाति अधिनियम
- चराई कर
- विभिन्न चरवाहा समुदाय (गुज्जर बकरवाल, गद्दी, धंगर, गोल्ला, कुरूमा, कुरूबा, बंजारा, राइका)
- पारंपरिक अधिकार
- भूमि उपयोग परिवर्तन
- चरगाहों का सिमटना
Important topics
- औपनिवेशिक कानूनों का चरवाहों के जीवन पर प्रभाव
- घुमंतू जीवन के कारण और पर्यावरणीय लाभ
- विभिन्न चरवाहा समुदायों का परिचय
- चरवाहों के पारंपरिक अधिकारों का हनन
- आधुनिक विश्व में चरवाहों के सामने चुनौतियाँ
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- चरागाहों पर निर्भरता: इन समुदायों के पास अक्सर अपने स्थायी चरागाह या खेत नहीं होते थे। इसलिए, उन्हें अपने पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने हेतु दूसरे के खेतों या दूर-दराज के चारागाहों पर निर्भर रहना पड़ता था।
- मौसम परिवर्तन का प्रभाव: जैसे-जैसे मौसम बदलता था, उन्हें अपने चरागाह भी बदलने पड़ते थे। उदाहरण के लिए, सर्दियों में जब पहाड़ी क्षेत्रों के ऊपरी हिस्से बर्फ से ढक जाते थे, तो वे निचले इलाकों में चले जाते थे। बर्फ पिघलने के बाद, वे वापस पहाड़ी क्षेत्रों की ओर प्रस्थान करते थे।
- प्राकृतिक आपदाओं से बचाव: मैदानी इलाकों में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के आने पर, वे सुरक्षित स्थानों की तलाश में ऊँचे स्थानों की ओर चले जाते थे।
- भूमि की उर्वरता में वृद्धि: जहाँ-जहाँ इनके मवेशी चरते थे, वहाँ उनके गोबर से भूमि की उर्वरता बढ़ती थी। इसी कारण कई किसान अपने खेतों में इन चरवाहों को अपने पशुओं को चरने की अनुमति देते थे, ताकि उनके खेत गोबर से समृद्ध हो सकें।
प्रश्न 2
- परती भूमि नियमावली (Wasteland Rules):
- कानून बनाने का कारण: ब्रिटिश सरकार का उद्देश्य बंजर या परती समझी जाने वाली भूमि को कृषि योग्य बनाकर उससे राजस्व प्राप्त करना था। वे इन भूमियों को खेती के लिए उपयुक्त मानते थे और उन्हें गांव के मुखिया या अन्य व्यक्तियों को सौंप देते थे।
- चरवाहों पर प्रभाव: इन नियमावली के कारण चरवाहों के लिए उपलब्ध चरागाह भूमि कम हो गई या समाप्त हो गई, क्योंकि इन भूमियों को कृषि के अधीन लाया जा रहा था। इससे उनके पशुधन के लिए चारे की उपलब्धता पर संकट आ गया।
- वन अधिनियम (Forest Acts):
- कानून बनाने का कारण: औपनिवेशिक सरकार ने वनों को अपने नियंत्रण में लेने और उनसे प्राप्त होने वाले संसाधनों (जैसे लकड़ी) का अपने लाभ के लिए उपयोग करने हेतु वन अधिनियम बनाए। वे चाहते थे कि वनों का प्रबंधन उनके अनुसार हो और चरवाहों जैसे स्थानीय समुदायों का प्रवेश सीमित हो, क्योंकि पशु पौधे की नई कोपलों को खा जाते थे।
- चरवाहों पर प्रभाव: इन कानूनों ने चरवाहों के जीवन को पूरी तरह बदल दिया। आरक्षित और संरक्षित वनों में उनके प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया। जिन क्षेत्रों में उन्हें प्रवेश की अनुमति थी, वहाँ भी उन्हें परमिट लेना पड़ता था, उनकी आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी जाती थी, और वे जंगल में सीमित समय ही बिता सकते थे। इससे उनके पारंपरिक चरागाहों तक पहुँच बाधित हुई।
- अपराधी जनजाति अधिनियम (Criminal Tribes Act), 1871:
- कानून बनाने का कारण: इस कानून का उद्देश्य औपनिवेशिक सरकार के अनुसार 'समस्याग्रस्त' माने जाने वाले समुदायों पर नियंत्रण रखना था। सरकार ने दस्तकारों, व्यापारियों और चरवाहों के कई समुदायों को अपराधी समुदायों की सूची में डाल दिया, उन्हें जन्मजात अपराधी घोषित कर दिया।
- चरवाहों पर प्रभाव: इस कानून के लागू होने से चरवाहों के कई समुदायों को अपराधी माना जाने लगा। उन्हें कुछ खास अधिसूचित क्षेत्रों में रहने या निश्चित समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने जैसे प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा। इसने उनके सामाजिक जीवन और स्वतंत्रता को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
- चराई कर (Grazing Fees):
- कानून बनाने का कारण: औपनिवेशिक सरकार ने चरागाहों के उपयोग के बदले में चरवाहों से कर वसूलने की व्यवस्था लागू की। इसका उद्देश्य राजस्व बढ़ाना और चरागाहों के उपयोग को नियंत्रित करना था।
- चरवाहों पर प्रभाव: चरवाहों को अपने पशुओं को चराने के लिए सरकार को कर का भुगतान करना पड़ता था। यह उनके लिए एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ था, खासकर जब उनके चरागाहों के क्षेत्र भी सीमित किए जा रहे थे। इससे उनकी आजीविका और भी कठिन हो गई।
Common mistakes
- औपनिवेशिक कानूनों के वास्तविक उद्देश्यों को समझने में विफलता।
- चरवाहों के जीवन पर कानूनों के प्रभाव को सतही तौर पर समझना।
- घुमंतू जीवन के पर्यावरणीय लाभों को नजरअंदाज करना।
- विभिन्न चरवाहा समुदायों और उनके क्षेत्रों के बीच भ्रमित होना।
Revision tips
- औपनिवेशिक कानूनों और उनके विशिष्ट प्रभावों को सूचीबद्ध करें।
- चरवाहों के दैनिक जीवन और उनकी चुनौतियों को दर्शाने वाले चित्र या माइंड मैप बनाएं।
- घुमंतू जीवन के कारणों और पर्यावरणीय लाभों के बीच संबंध स्थापित करें।
- विभिन्न समुदायों (जैसे गुज्जर बकरवाल, गद्दी, धंगर, राइका) और उनकी जीवन शैली की तुलना करें।
Practice MCQs
Q1. घुमंतू समुदायों को बार-बार एक जगह से दूसरी जगह क्यों जाना पड़ता था?
Explanation: घुमंतू समुदायों को अपने पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार लगातार नए चरागाहों की तलाश में भटकना पड़ता था।
Q2. चरवाहों के निरंतर आवागमन से पर्यावरण को क्या लाभ होता था?
Explanation: चरवाहों के मवेशियों द्वारा एक स्थान पर चरने के बाद छोड़े गए गोबर से उस भूमि की उर्वरता बढ़ती थी, जिससे किसानों को लाभ होता था।
Q3. औपनिवेशिक सरकार ने 'वन अधिनियम' क्यों बनाए?
Explanation: वन अधिनियमों का मुख्य उद्देश्य आरक्षित और संरक्षित वनों पर औपनिवेशिक सरकार का नियंत्रण स्थापित करना था, जिससे चरवाहों का प्रवेश प्रतिबंधित हो गया।
Q4. 1871 में पारित 'अपराधी जनजाति अधिनियम' का चरवाहों पर क्या प्रभाव पड़ा?
Explanation: इस अधिनियम के तहत कई चरवाहा समुदायों को जन्मजात अपराधी घोषित कर दिया गया, जिससे उनके जीवन और आवागमन पर गंभीर प्रतिबंध लगे।
Q5. महाराष्ट्र का प्रसिद्ध चरवाहा समुदाय कौन सा है?
Explanation: धंगर महाराष्ट्र का एक प्रमुख चरवाहा समुदाय है जो अपनी आजीविका के लिए पशुपालन के साथ-साथ कंबल और चादरें बनाने जैसे कार्य भी करता था।
Frequently asked questions
कक्षा 9 के 'आधुनिक विश्व में चरवाहे' अध्याय में किन मुख्य विषयों को शामिल किया गया है?
इस अध्याय में चरवाहा समुदायों के जीवन, उनकी घुमंतू जीवन शैली के कारणों, पर्यावरण पर इसके प्रभावों, और औपनिवेशिक शासन के दौरान वन अधिनियमों, परती भूमि नियमावली, अपराधी जनजाति अधिनियम और चराई कर जैसे कानूनों के कारण उनके जीवन में आए बदलावों को शामिल किया गया है।
चरवाहों को बार-बार एक स्थान से दूसरे स्थान पर क्यों जाना पड़ता था?
चरवाहों को अपने पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु मौसम परिवर्तन के साथ-साथ अपने चरागाहों को बदलना पड़ता था। उनके पास स्थायी चरागाह या खेत नहीं होते थे, इसलिए वे दूसरे के खेतों या दूर के चारागाहों पर निर्भर रहते थे।
औपनिवेशिक सरकार ने चरवाहों के लिए कानून क्यों बनाए?
औपनिवेशिक सरकार ने अपने प्रशासनिक और आर्थिक हितों को साधने के लिए, जैसे कि भूमि पर नियंत्रण स्थापित करना, राजस्व बढ़ाना और अपने अनुसार भूमि का उपयोग सुनिश्चित करना, चरवाहों के लिए विभिन्न कानून बनाए थे।
वन अधिनियमों ने चरवाहों के जीवन को कैसे प्रभावित किया?
वन अधिनियमों ने चरवाहों को उन जंगलों में प्रवेश करने से रोक दिया जो उनके मवेशियों के लिए चारे का महत्वपूर्ण स्रोत थे। इससे उनके चरागाह सिमट गए और उनके पारंपरिक जीवन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
क्या चरवाहों के आवागमन से पर्यावरण को कोई लाभ होता था?
हाँ, चरवाहों के निरंतर आवागमन से पर्यावरण को लाभ होता था। जहाँ उनके मवेशी चरते थे, वहाँ की भूमि उनके गोबर से उपजाऊ हो जाती थी, जिससे किसानों को फायदा होता था।
यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?
ये समाधान छात्रों को चरवाहा समुदायों के जीवन, उनकी चुनौतियों और औपनिवेशिक नीतियों के ऐतिहासिक प्रभाव की गहन समझ प्रदान करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है।
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