कक्षा 9 भारत और समकालीन विश्व - I: अध्याय 4 वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 9 के लिए 'भारत और समकालीन विश्व - I' पुस्तक के अध्याय 4, 'वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय वनों के महत्व, वन विनाश के कारणों, वैज्ञानिक वानिकी की अवधारणा और औपनिवेशिक काल के दौरान वन प्रबंधन में हुए परिवर्तनों की पड़ताल करता है। समाधानों में वन विनाश के विभिन्न कारण जैसे बढ़ती आबादी, कृषि विस्तार, रेलवे का विकास और बागान स्थापित करने के लिए वनों की कटाई शामिल हैं। यह वैज्ञानिक वानिकी के अर्थ, वन अधिनियमों द्वारा वनों के वर्गीकरण और वन क्षेत्र बढ़ाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है। इसके अतिरिक्त, यह 'भस्म-कर-भोगों नीति' और 'वन ग्राम' जैसी अवधारणाओं की व्याख्या करता है, और बताता है कि कैसे औपनिवेशिक वन प्रबंधन ने विभिन्न समुदायों के जीवन को प्रभावित किया। ये विस्तृत समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट समझ और महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectभारत और समकालीन विश्व - I
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter4. वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद

Chapter summary

अध्याय 4 'वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद' के ये NCERT समाधान छात्रों को वन संसाधनों के प्रबंधन और औपनिवेशिक शासन के प्रभाव को समझने में मदद करते हैं। इसमें वन विनाश के कारणों, वैज्ञानिक वानिकी के सिद्धांतों, वन अधिनियमों के वर्गीकरण (आरक्षित, सुरक्षित, ग्रामीण वन) और वन क्षेत्र बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा की गई है। समाधान यह भी बताते हैं कि कैसे औपनिवेशिक नीतियों ने झूम खेती करने वालों, चरवाहों और वन उत्पादों के व्यापारियों जैसे विभिन्न समुदायों को प्रभावित किया। यह अध्याय वनों के आर्थिक और पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करता है।

Learning outcomes

  • वन विनाश के विभिन्न कारणों की पहचान करना।
  • वैज्ञानिक वानिकी की अवधारणा को समझना।
  • औपनिवेशिक वन प्रबंधन के प्रभावों का विश्लेषण करना।
  • वन अधिनियमों द्वारा वनों के वर्गीकरण को जानना।
  • वन क्षेत्र बढ़ाने की आवश्यकता के कारणों को स्पष्ट करना।
  • विभिन्न समुदायों पर औपनिवेशिक वन नीतियों के प्रभाव का वर्णन करना।

Topics covered

Paper topics

  • वन विनाश
  • वन विनाश के कारण
  • वैज्ञानिक वानिकी
  • वन अधिनियम
  • आरक्षित वन
  • सुरक्षित वन
  • ग्रामीण वन
  • वन क्षेत्र बढ़ाने की आवश्यकता
  • पारिस्थितिक संतुलन
  • ग्लोबल वार्मिंग
  • औपनिवेशिक वन प्रबंधन
  • भस्म-कर-भोगों नीति

Important topics

  • वन विनाश के कारण और प्रभाव
  • वैज्ञानिक वानिकी की अवधारणा
  • औपनिवेशिक वन प्रबंधन का विश्लेषण
  • वन अधिनियमों का वर्गीकरण
  • विभिन्न समुदायों पर औपनिवेशिक नीतियों का प्रभाव

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

वन विनाश से आप क्या समझते हैं? भारत में वन विनाश के कारणों का वर्णन करें।
Solution:

वन विनाश का अर्थ है वनों का लुप्त होना या उनका बड़े पैमाने पर सफाया हो जाना। यह प्राकृतिक कारणों या मानवीय गतिविधियों के कारण हो सकता है।

भारत में वन विनाश के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  1. बढ़ती आबादी और खाद्य पदार्थों की मांग: जनसंख्या वृद्धि के कारण भोजन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कृषि योग्य भूमि का विस्तार किया गया है, जिसके लिए वनों को काटा गया है।
  2. रेलवे लाइनों का विस्तार और लकड़ी का उपयोग: रेलवे लाइनों के निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में भूमि की आवश्यकता होती है, जिसके लिए वनों को साफ किया जाता है। साथ ही, रेलवे के स्लीपरों और ईंधन के रूप में भी लकड़ी का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।
  3. बागानों की स्थापना: यूरोपीय देशों में चाय, कॉफी और रबर जैसी नकदी फसलों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत में बड़े पैमाने पर प्राकृतिक वनों को साफ करके इन फसलों के बागान स्थापित किए गए।

प्रश्न 2

वैज्ञानिक वानिकी से आप क्या समझते हैं?
Solution:

वैज्ञानिक वानिकी एक ऐसी प्रबंधन प्रणाली है जिसे औपनिवेशिक काल में ब्रिटिश सरकार द्वारा लागू किया गया था। इम्पीरियल फ़ॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादून ने वन से संबंधित विषयों पर एक शिक्षा पद्धति विकसित की, जिसे वैज्ञानिक वानिकी कहा गया। इसका मुख्य उद्देश्य वन संसाधनों का व्यावसायिक और व्यवस्थित उपयोग सुनिश्चित करना था। इस प्रणाली के तहत, पुराने और अनुपयोगी पेड़ों को काटकर उनकी जगह नए, उपयोगी पेड़ लगाए जाते थे ताकि लकड़ी का निरंतर उत्पादन हो सके।

प्रश्न 3

1878 के वन अधिनियम में जंगल को किन तीन श्रेणियों में बांटा गया?
Solution:

1878 के वन अधिनियम के अनुसार, जंगलों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा गया था:

  1. आरक्षित वन (Reserved Forests): ये सबसे अच्छे वन माने जाते थे और इनका उपयोग केवल सरकारी अनुमति से ही किया जा सकता था।
  2. सुरक्षित वन (Protected Forests): इन वनों में कुछ निश्चित नियमों के तहत स्थानीय लोगों को लकड़ी इकट्ठा करने या पशु चराने की अनुमति दी जा सकती थी।
  3. ग्रामीण वन (Village Forests): ये वन स्थानीय समुदायों के उपयोग के लिए होते थे, लेकिन इनका प्रबंधन भी वन विभाग के नियमों के अधीन होता था।

प्रश्न 4

किस प्रकार के वन को आरक्षित वन कहा गया?
Solution:

सबसे अच्छे और मूल्यवान वनों को आरक्षित वन कहा गया। इन वनों पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण होता था और इनका उपयोग केवल विशेष सरकारी उद्देश्यों के लिए ही किया जा सकता था। इन वनों से लकड़ी काटना या पशु चराना पूरी तरह से प्रतिबंधित था, जब तक कि सरकार द्वारा विशेष अनुमति न दी जाए।

प्रश्न 5

वन के अधीन क्षेत्र बढ़ाने की क्या आवश्यकता है? कारण दें।
Solution:

भारत में वन के अधीन क्षेत्र वर्तमान में वैज्ञानिक मानकों से काफी कम है। कुल भूमि क्षेत्र का लगभग 19.3% ही वनों से आच्छादित है, जबकि आदर्श रूप से यह 33.3% होना चाहिए। इसलिए, वन क्षेत्र बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना: वन हवा के प्रदूषण को कम करते हैं और पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  2. ग्लोबल वार्मिंग को कम करना: वन वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसों को अवशोषित करते हैं, जिससे ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
  3. वन्यजीवों का संरक्षण: वन विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक आवास प्रदान करते हैं, जिससे उनकी प्रजातियों का अस्तित्व बना रहता है।
  4. वर्षा को बढ़ावा देना: वनों का वर्षा लाने में महत्वपूर्ण योगदान होता है। पेड़ वाष्पोत्सर्जन के माध्यम से जलवाष्प छोड़ते हैं, जो बादलों के निर्माण और वर्षा होने में सहायक होता है।
  5. मृदा का संरक्षण: वन मिट्टी के कटाव को रोकते हैं। पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बांधे रखती हैं और बारिश के पानी के साथ मिट्टी को बहने से रोकती हैं।

प्रश्न 6

'भस्म-कर-भोगों नीति' क्या थी?
Solution:

'भस्म-कर-भोगों नीति' (Scorched Earth Policy) एक ऐसी रणनीति थी जिसे जावा पर जापानियों के कब्जे से पहले डच औपनिवेशिक सरकार द्वारा अपनाया गया था। इस नीति के तहत, डचों ने अपनी आरा मशीनों, सागौन की लकड़ियों के विशाल लठ्ठों और अन्य मूल्यवान संसाधनों को नष्ट करने या उनमें आग लगाने का आदेश दिया था, ताकि ये संसाधन जापानियों के हाथ न लग सकें और वे उनका उपयोग न कर सकें। इसका उद्देश्य दुश्मन को संसाधनों से वंचित करना था।

प्रश्न 7

'वन ग्राम' से आप क्या समझते हैं?
Solution:

'वन ग्राम' उन बस्तियों को कहा जाता था जहाँ वन विभाग द्वारा आरक्षित वनों में कुछ विशेष शर्तों पर लोगों को रहने की अनुमति दी जाती थी। इन शर्तों में मुख्य रूप से वनों में पेड़ों की कटाई और लकड़ी की ढुलाई जैसे कामों में विभाग की सहायता करना शामिल था। बदले में, इन लोगों को वनों के पास रहने और अपने निर्वाह के लिए सीमित संसाधनों का उपयोग करने की अनुमति मिलती थी। ये लोग वनों की आग से रक्षा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।

प्रश्न 8

कृषि ने वन विनाश को किस प्रकार से प्रभावित किया?
Solution:

कृषि ने वन विनाश को कई प्रकार से प्रभावित किया है:

  1. खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग: जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ खाद्य पदार्थों की मांग में भी वृद्धि हुई। इस मांग को पूरा करने के लिए, अधिक से अधिक भूमि पर खेती करना आवश्यक हो गया, जिसके परिणामस्वरूप वनों को काटकर कृषि योग्य भूमि में परिवर्तित किया गया।
  2. औपनिवेशिक काल में कृषि का विस्तार: औपनिवेशिक शासन के दौरान, नकदी फसलों जैसे चाय, कॉफी और रबर की खेती को बढ़ावा दिया गया। इन फसलों के लिए बड़े पैमाने पर भूमि की आवश्यकता थी, जिसके लिए घने जंगलों को काटा गया।
  3. व्यावसायिक खेती: व्यावसायिक लाभ के उद्देश्य से भी वनों को साफ करके खेती की जाती थी, जिससे वन क्षेत्र में कमी आई।

प्रश्न 9

रेलवे ने वन विनाश को कैसे प्रभावित किया?
Solution:

रेलवे के विकास ने वन विनाश को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया:

  1. भूमि अधिग्रहण: रेलवे लाइनों के निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में भूमि की आवश्यकता होती थी, जिसके लिए अक्सर घने जंगलों को काटा और साफ किया जाता था।
  2. लकड़ी की मांग: रेलवे स्लीपरों (रेल पटरियों के नीचे बिछाए जाने वाले लकड़ी के तख्ते) के निर्माण के लिए प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में पेड़ों को काटा जाता था।
  3. संसाधनों तक पहुंच: रेलवे लाइनों के विस्तार ने दूरदराज के वन क्षेत्रों तक पहुंच को आसान बना दिया, जिससे लकड़ी और अन्य वन उत्पादों का व्यावसायिक दोहन बढ़ा और वन विनाश में तेजी आई।

प्रश्न 10

उपनिवेशकाल में बनिय प्रबंधन में परिवर्तन ने लोगो के जीवन में लकड़ी की नई माँग पैदा कर दी। बनिय प्रबंधन में परिवर्तन ने किस प्रकार लोगों को प्रभावित किया?
Solution:

औपनिवेशिक काल में वन प्रबंधन में हुए परिवर्तनों ने विभिन्न समुदायों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला, जिससे लकड़ी और अन्य वन उत्पादों की नई मांगें पैदा हुईं:

Q1. औपनिवेशिक काल के वन प्रबंधन में आए परिवर्तनों ने इन समूहों को कैसे प्रभावित किया:

  • झूम खेती करने वालों को: झूम या स्थानांतरित खेती करने वाले समुदायों को अक्सर उनके पारंपरिक क्षेत्रों से विस्थापित कर दिया गया या उनकी खेती पर प्रतिबंध लगा दिया गया। वन विभाग ने उनकी खेती को अव्यवस्थित और वनों के लिए हानिकारक माना, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हुई।
  • घुमंतू और चरवाहा समुदायों को: वन कानूनों ने इन समुदायों के चराई के अधिकारों को सीमित कर दिया। उन्हें अक्सर आरक्षित या सुरक्षित वनों में अपने पशुओं को चराने से रोक दिया गया, जिससे उनके पारंपरिक जीवन और आय के स्रोत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
  • लकड़ी और वन-उत्पादों का व्यापार करने वाली कंपनियों को: औपनिवेशिक सरकार ने वन संसाधनों के व्यावसायिक दोहन को बढ़ावा दिया। उन्होंने लकड़ी और अन्य वन उत्पादों के व्यापार के लिए कंपनियों को लाइसेंस दिए, जिससे इन कंपनियों का मुनाफा बढ़ा, लेकिन स्थानीय समुदायों के पारंपरिक अधिकारों का हनन हुआ।
  • बागान मालिकों को: औपनिवेशिक सरकार ने चाय, कॉफी और रबर जैसे नकदी फसलों के बागान स्थापित करने के लिए वनों को साफ करने की अनुमति दी। इससे बागान मालिकों को बड़े पैमाने पर भूमि मिली और उनका व्यवसाय फला-फूला, लेकिन इसके लिए बड़े पैमाने पर वनों का विनाश हुआ।
  • शिकार खेलने वाले राजाओं और अंग्रेज अफसरों को: औपनिवेशिक काल में, शिकार को एक शाही गतिविधि के रूप में देखा जाता था। अंग्रेज अधिकारियों और राजाओं को विशेष क्षेत्रों में शिकार की अनुमति थी, जो अक्सर आरक्षित वनों का हिस्सा होते थे। इससे वन्यजीवों की आबादी पर भी असर पड़ा।

Common mistakes

  • वन विनाश के कारणों को केवल एक या दो बिंदुओं तक सीमित रखना।
  • वैज्ञानिक वानिकी के वास्तविक अर्थ को न समझना।
  • औपनिवेशिक काल के वन प्रबंधन के प्रभावों को कम आंकना।
  • वन अधिनियमों के वर्गीकरण को ठीक से याद न रखना।

Revision tips

  • वन विनाश के सभी कारणों की सूची बनाएं और प्रत्येक के प्रभाव को समझें।
  • वैज्ञानिक वानिकी और इसके उद्देश्य को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।
  • औपनिवेशिक वन प्रबंधन के कारण विभिन्न समुदायों पर पड़े प्रभावों की तुलना करें।
  • वन अधिनियमों द्वारा वनों के वर्गीकरण को याद रखने के लिए एक तालिका बनाएं।

Practice MCQs

Q1. वन विनाश का एक प्रमुख कारण क्या है जो बढ़ती आबादी से जुड़ा है?

Q2. वैज्ञानिक वानिकी का मुख्य उद्देश्य क्या था?

Q3. 1878 के वन अधिनियम के अनुसार वनों को मुख्य रूप से कितनी श्रेणियों में बांटा गया था?

Q4. 'भस्म-कर-भोगों नीति' किस संदर्भ में अपनाई गई थी?

Q5. वन क्षेत्र को 33.3% तक बढ़ाने की आवश्यकता क्यों बताई गई है?

Frequently asked questions

कक्षा 9 के लिए 'वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद' अध्याय में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?

इस अध्याय में वन विनाश के कारणों, वैज्ञानिक वानिकी की अवधारणा, औपनिवेशिक काल में वन प्रबंधन में हुए बदलावों और इन बदलावों के विभिन्न समुदायों पर पड़े प्रभावों को शामिल किया गया है।

वन विनाश के प्रमुख कारण क्या हैं?

वन विनाश के प्रमुख कारणों में बढ़ती आबादी के कारण कृषि का विस्तार, रेलवे लाइनों का निर्माण, चाय, कॉफी और रबर के बागान स्थापित करना, और औपनिवेशिक काल में लकड़ी की बढ़ती मांग शामिल हैं।

वैज्ञानिक वानिकी से क्या तात्पर्य है?

वैज्ञानिक वानिकी एक ऐसी शिक्षा पद्धति थी जिसमें पुराने पेड़ों को काटकर उनकी जगह नए पेड़ लगाए जाते थे, ताकि वन संसाधनों का व्यवस्थित और निरंतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

1878 के वन अधिनियम ने वनों को किन श्रेणियों में बांटा?

1878 के वन अधिनियम ने वनों को तीन श्रेणियों में बांटा: आरक्षित वन (सबसे अच्छे वन), सुरक्षित वन, और ग्रामीण वन।

वन क्षेत्र को 33.3% तक बढ़ाना क्यों महत्वपूर्ण है?

वन क्षेत्र को 33.3% तक बढ़ाना पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने, हवा का प्रदूषण कम करने, ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने, वन्यजीवों को प्राकृतिक निवास प्रदान करने और वर्षा लाने में वनों की भूमिका के कारण महत्वपूर्ण है।

औपनिवेशिक वन प्रबंधन ने झूम खेती करने वालों को कैसे प्रभावित किया?

औपनिवेशिक वन प्रबंधन के तहत, झूम खेती करने वालों को अक्सर प्रतिबंधित कर दिया गया या उन्हें स्थानांतरित होने के लिए मजबूर किया गया, क्योंकि उनकी खेती की विधि को अव्यवस्थित और वनों के लिए हानिकारक माना जाता था।

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