कक्षा 9 भारत और समकालीन विश्व - I: किसान और काश्तकार NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 के सामाजिक विज्ञान के लिए "भारत और समकालीन विश्व - I" पुस्तक के "किसान और काश्तकार" अध्याय के विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें अमेरिका में गेहूं की खेती के विस्तार और उसके पर्यावरणीय संकट, इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति के कृषि पर प्रभाव, बाड़ाबंदी आंदोलन के कारण और परिणाम, कैप्टन स्विंग का विरोध, और भारतीय किसानों पर अफीम की खेती के लिए ब्रिटिश दबाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। समाधानों में प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को स्पष्ट रूप से समझाया गया है, जिससे छात्रों को इन ऐतिहासिक कृषि परिवर्तनों और उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को समझने में मदद मिलती है। ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए एक मूल्यवान संसाधन हैं, जो छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने और महत्वपूर्ण घटनाओं के बीच संबंध स्थापित करने में सहायता करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | भारत और समकालीन विश्व - I |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 6. किसान और काश्तकार |
Chapter summary
यह अध्याय "किसान और काश्तकार" कृषि में हुए बड़े बदलावों पर केंद्रित है, जिसमें इंग्लैंड में कृषि क्रांति, बाड़ाबंदी आंदोलन के प्रभाव, और अमेरिका में गेहूं की खेती के विस्तार से उत्पन्न पर्यावरणीय मुद्दे शामिल हैं। यह भारतीय किसानों पर अफीम की खेती के लिए ब्रिटिश दबाव और इसके परिणामों का भी विश्लेषण करता है। समाधान छात्रों को इन ऐतिहासिक घटनाओं के कारणों, प्रभावों और किसानों के जीवन पर उनके असर को समझने में मदद करते हैं।
Learning outcomes
- कृषि क्रांति के कारणों और प्रभावों को समझना।
- इंग्लैंड में बाड़ाबंदी आंदोलन के पीछे के सामाजिक और आर्थिक कारकों का विश्लेषण करना।
- औद्योगिक क्रांति ने कृषि को कैसे बदला, इसका वर्णन करना।
- अमेरिका में गेहूं की खेती के विस्तार से उत्पन्न पर्यावरणीय संकटों की पहचान करना।
- भारतीय किसानों पर अफीम की खेती के लिए ब्रिटिश दबाव के कारणों और परिणामों को समझाना।
Topics covered
Paper topics
- कृषि क्रांति
- इंग्लैंड में बाड़ाबंदी आंदोलन
- औद्योगिक क्रांति का कृषि पर प्रभाव
- थ्रेशिंग मशीनों का विरोध
- कैप्टन स्विंग
- अमेरिका में गेहूं की खेती का विस्तार
- पर्यावरणीय संकट (धूल भरी आँधियाँ)
- भारतीय किसानों पर अफीम की खेती का दबाव
- कृषि उत्पादन में वृद्धि
- शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि का प्रभाव
- किसानों का विस्थापन
- कृषि तकनीकें
Important topics
- इंग्लैंड में बाड़ाबंदी आंदोलन के कारण और परिणाम
- औद्योगिक क्रांति का कृषि पर प्रभाव
- अमेरिका में गेहूं की खेती के विस्तार से उत्पन्न पर्यावरणीय संकट
- भारतीय किसानों पर अफीम की खेती के लिए ब्रिटिश दबाव
- थ्रेशिंग मशीनों का विरोध और कैप्टन स्विंग
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
अमेरिका में गेहूं की खेती के विस्तार से उत्पन्न पर्यावरणीय संकट हमें महत्वपूर्ण सबक सिखाते हैं। सबसे पहला सबक यह है कि हमें पारिस्थितिक संतुलन का सम्मान करना चाहिए। अंधाधुंध वनों की कटाई करके या प्राकृतिक आवासों को नष्ट करके अधिकतम भूमि पर कृषि करना दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं है। हमें यह समझना चाहिए कि सूखा और उचित तापमान जैसी पर्यावरणीय स्थितियाँ कृषि के लिए महत्वपूर्ण हैं, और इनकी सुरक्षा के लिए पर्यावरण का संरक्षण आवश्यक है। प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर ही हम स्थायी कृषि पद्धतियों को अपना सकते हैं और भविष्य के लिए पर्यावरणीय संकटों से बच सकते हैं।
प्रश्न 2
इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति ने कृषि क्षेत्र को कई महत्वपूर्ण तरीकों से प्रभावित किया:
- तकनीकी परिवर्तन: औद्योगिक क्रांति ने कृषि के लिए नई तकनीकों और उपकरणों के आविष्कार को जन्म दिया। इससे खेती की प्रक्रिया अधिक कुशल और उत्पादक बन गई।
- उत्पादकता में वृद्धि: नए उपकरणों और बेहतर तकनीकों के उपयोग से कृषि उत्पादकता में काफी बढ़ोतरी हुई। अधिक अनाज और अन्य फसलें कम समय और श्रम में उगाई जाने लगीं।
- औद्योगिक कृषि को बढ़ावा: औद्योगिक क्रांति के विकास के साथ-साथ, उद्योगों पर आधारित कृषि को भी बढ़ावा मिला। इसका अर्थ है कि कृषि को केवल निर्वाह के लिए नहीं, बल्कि बाजार और उद्योगों की मांगों को पूरा करने के लिए एक व्यावसायिक उद्यम के रूप में देखा जाने लगा।
प्रश्न 3
इंग्लैंड के किसानों द्वारा थ्रेशिंग मशीनों का विरोध करने के कई मुख्य कारण थे:
- जीविका का भय: गरीब किसानों को यह डर था कि ये मशीनें उनके काम को छीन लेंगी और उनकी आजीविका को कम कर देंगी। वे समझते थे कि मशीनों के आने से उन्हें रोजगार नहीं मिलेगा।
- बाड़ाबंदी आंदोलन का डर: किसानों को यह भी आशंका थी कि इन मशीनों के आने से बड़े किसान और जमींदार बाड़ाबंदी आंदोलन को और बढ़ावा देंगे, जिससे उनकी अपनी जमीनें छिन सकती हैं या उन पर उनका नियंत्रण कम हो सकता है।
- रोजगार का संघर्ष: आम जनता कई हिस्सों में बंट गई थी और उन्हें अपने रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था। मशीनीकरण ने इस संघर्ष को और बढ़ा दिया।
प्रश्न 4
कैप्टन स्विंग कोई वास्तविक व्यक्ति नहीं था, बल्कि यह एक काल्पनिक नाम था जो सर्वहारा वर्ग, विशेष रूप से थ्रेशिंग मशीनों के विरोधियों का प्रतिनिधित्व करता था। कैप्टन स्विंग के नाम से डरावने पत्र लिखे जाते थे, जिनका उपयोग धनी जमींदारों या किसानों को थ्रेशिंग मशीनों के उपयोग के खिलाफ धमकी देने के लिए किया जाता था। यह विरोध का एक प्रतीकात्मक तरीका था।
प्रश्न 5
इंग्लैंड में कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने के कई प्रमुख कारण थे:
- बढ़ती जनसंख्या: देश की जनसंख्या में लगातार वृद्धि हो रही थी, जिससे भोजन की आवश्यकता भी बढ़ गई।
- शहरीकरण: औद्योगिक क्रांति के कारण लोग गाँवों से शहरों की ओर पलायन कर रहे थे, जिससे शहरी आबादी बढ़ी और उन्हें भोजन की आपूर्ति के लिए कृषि उत्पादों की मांग में वृद्धि हुई।
- फ्रांस से युद्ध: फ्रांस के साथ चल रहे युद्धों के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती थी और घरेलू उत्पादन पर निर्भरता बढ़ गई थी, जिससे मांग बढ़ी।
- औद्योगिक क्रांति: औद्योगिक क्रांति ने न केवल शहरीकरण को बढ़ावा दिया बल्कि लोगों की क्रय शक्ति में भी वृद्धि की, जिससे वे अधिक कृषि उत्पाद खरीदने में सक्षम हुए।
प्रश्न 6
इंग्लैंड में बाड़ाबंदी (Enclosure) कई कारणों से आवश्यक हो गई थी, जिनमें से दो प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- भूमि पर लंबी अवधि के निवेश के कारण: बाड़ाबंदी से जमींदारों और धनी किसानों को अपनी भूमि पर दीर्घकालिक निवेश करने का अवसर मिला। वे अपनी भूमि को बेहतर ढंग से प्रबंधित कर सकते थे, नई तकनीकों का उपयोग कर सकते थे और अपनी भूमि से अधिकतम लाभ उठा सकते थे, जो कि खुली भूमि पर संभव नहीं था।
- धनी किसानों को अपने नियंत्रण की भूमि को विकसित करने के लिए: बाड़ाबंदी ने धनी किसानों और जमींदारों को अपनी भूमि पर पूर्ण नियंत्रण प्रदान किया। इससे वे अपनी भूमि को अपनी इच्छानुसार विकसित कर सकते थे, जैसे कि चरागाहों को खेतों में बदलना या बेहतर फसलें उगाना, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती थी।
प्रश्न 7
कृषि क्रांति सबसे पहले इंग्लैंड में हुई थी।
प्रश्न 8
इंग्लैंड में बाड़ाबंदी आंदोलन को बढ़ावा देने वाले कई कारक थे, जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं:
- बढ़ती जनसंख्या और अनाजों की बढ़ती मांग: जनसंख्या में वृद्धि के कारण भोजन की मांग बढ़ी, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता महसूस हुई।
- कृषि उत्पादों की ऊंची कीमतें: कृषि उत्पादों की कीमतों में वृद्धि ने किसानों और जमींदारों को अपनी भूमि से अधिक लाभ कमाने के लिए प्रेरित किया, जिससे बाड़ाबंदी को बढ़ावा मिला।
- भूमि पर लंबी अवधि के निवेश के लिए: बाड़ाबंदी ने भूमि पर दीर्घकालिक निवेश को संभव बनाया, जिससे किसान और जमींदार अपनी भूमि को बेहतर ढंग से प्रबंधित कर सकें और उसमें सुधार कर सकें।
- धनी किसानों को अपने नियंत्रण की भूमि को विकसित करने के लिए: धनी किसानों और जमींदारों ने अपनी भूमि पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त करने और उसे अपनी इच्छानुसार विकसित करने के लिए बाड़ाबंदी का समर्थन किया।
प्रश्न 9
इंग्लैंड में बाड़ाबंदी आंदोलन के कारण कई हानियाँ हुईं, जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं:
- मुक्त भूमि का समाप्त होना: पहले जो भूमि आम जनता के उपयोग के लिए खुली थी, वह बाड़ाबंदी के कारण निजी संपत्ति बन गई और आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं रही।
- छोटे किसानों का भूमि बेचना: छोटे किसानों के पास अपनी भूमि को बनाए रखने के साधन नहीं रहे, इसलिए उन्होंने अपनी भूमि बड़े किसानों को बेच दी।
- गरीबों का पलायन: बड़ी संख्या में गरीब ग्रामीण अपनी आजीविका के साधनों के अभाव में गाँव छोड़कर शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए।
- रोजगार के लिए संघर्ष: विस्थापित हुए गरीबों को शहरों में रोजगार की तलाश में भारी संघर्ष करना पड़ा, क्योंकि औद्योगिकरण के बावजूद सभी के लिए पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं थे।
प्रश्न 10
अमेरिका के ग्रेट प्लेन्स क्षेत्र में गेहूं की खेती के विस्तार के कारण कई गंभीर पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हुए:
- मिट्टी का अपरदन: 1930 के दशक में, अत्यधिक खेती और अनुचित कृषि पद्धतियों के कारण, धूल भरी आँधियों ने दक्षिणी मैदानों की उपजाऊ मिट्टी का बड़े पैमाने पर अपरदन कर दिया।
- धूल भरी आँधियाँ: इन आँधियों ने दृश्यता को लगभग शून्य कर दिया, जिससे लोगों का अंधा होना और जानवरों का दम घुटकर मर जाना जैसी घटनाएँ आम हो गईं। इन्हें 'ब्लैक ब्लिजार्ड्स' (काले बर्फीले तूफान) भी कहा जाता था।
- पारिस्थितिक असंतुलन: गेहूं की मोनोकल्चर (एक ही फसल उगाना) और प्राकृतिक वनस्पति को हटाने से क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ गया, जिससे यह पर्यावरणीय आपदाओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो गया।
प्रश्न 11
अंग्रेज भारतीय किसानों पर अफीम की खेती के लिए दबाव डाल रहे थे क्योंकि अफीम का बाजार चीन तक विस्तृत हो गया था और यह अंग्रेजों के लिए एक अत्यंत लाभदायक व्यापार था। बंगाल पर अपना अधिकार स्थापित करने के बाद, अंग्रेजों ने अफीम की खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने का निश्चय किया। वे इस व्यापार से भारी मुनाफा कमाना चाहते थे, जो उनके लिए आर्थिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण था।
प्रश्न 12
भारतीय किसान इच्छा न होते हुए भी अफीम की खेती करने के लिए मजबूर थे, इसके कई कारण थे:
- आजीविका का अभाव: कई गरीब किसानों के पास आजीविका का कोई अन्य साधन नहीं था। उन्हें जीवित रहने के लिए खेती पर निर्भर रहना पड़ता था, और अफीम की खेती उन्हें कुछ आय प्रदान करती थी।
- लगान और आवश्यकताएँ पूरी करना: किसानों को ब्रिटिश सरकार को लगान चुकाना पड़ता था और अपनी अन्य आवश्यकताओं को भी पूरा करना होता था। अफीम की खेती से प्राप्त आय उन्हें इन खर्चों को वहन करने में मदद करती थी।
- अग्रिम राशि का दिया जाना: गाँव के मुखिया या साहूकार अक्सर किसानों को अफीम की खेती के लिए अग्रिम राशि (एडवांस) देते थे।
- अग्रिम राशि से मुकर न सकना: एक बार अग्रिम राशि लेने के बाद, किसान उस राशि को चुकाने के लिए बाध्य हो जाते थे और उन्हें अफीम की खेती करनी ही पड़ती थी, भले ही वे ऐसा न चाहते हों। वे इस ऋण के जाल में फंस जाते थे।
प्रश्न 13
भारतीय किसानों के अफीम की खेती के प्रति उदासीनता के कई कारण थे, जो उनकी कठिनाइयों को दर्शाते हैं:
- उपजाऊ भूमि का उपयोग: अफीम की फसल सबसे अच्छी और उपजाऊ भूमि पर पैदा की जाती थी, जो अक्सर गाँव के समीप होती थी। इस भूमि पर किसान पहले दालें जैसी महत्वपूर्ण फसलें उगाते थे। जब उन्हें अफीम उगानी पड़ती थी, तो वे दालें कम उपजाऊ भूमि पर उगाते थे, जिससे उनकी खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती थी और उन्हें परेशानी होती थी।
- भूमि का स्वामित्व और लगान: बहुत से किसानों के पास अपनी जमीन नहीं थी। अच्छी भूमि के लिए उन्हें अधिक लगान देना पड़ता था, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो जाती थी।
- कठिन प्रक्रिया और अधिक परिश्रम: अफीम की खेती एक जटिल और श्रमसाध्य प्रक्रिया है। इसमें बहुत अधिक परिश्रम और ध्यान देने की आवश्यकता होती है, जिससे किसान अन्य महत्वपूर्ण फसलों की खेती पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते थे।
- कम मूल्य और घाटा: ब्रिटिश अफीम उत्पादकों को बहुत कम मूल्य देते थे। इस कम मूल्य के कारण किसानों को अक्सर घाटा होता था, जिससे वे इस खेती के प्रति उदासीन हो जाते थे।
प्रश्न 14
अमेरिका में फसल काटने वाली मशीनों के उपयोग से किसानों को कई हानियाँ हुईं:
- गरीब किसानों पर कर्ज का बोझ: जिन गरीब किसानों ने उधार लेकर ये महंगी मशीनें खरीदी थीं, वे अक्सर फसल की अनिश्चितता या अन्य कारणों से कर्ज चुकाने में असमर्थ हो जाते थे, जिससे वे कर्ज के बोझ तले दब जाते थे।
- बेरोजगारी में वृद्धि: नई मशीनें और तकनीकें आने से हाथ से काम करने वाले मजदूरों की आवश्यकता कम हो गई, जिसके परिणामस्वरूप बेरोजगारी में काफी वृद्धि हुई।
- भूमि का परित्याग: मशीनीकरण के कारण कई छोटे किसानों के लिए अपनी भूमि पर खेती करना आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं रहा। इससे सैकड़ों किसानों ने अपनी भूमि छोड़ दी और नौकरी की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर दिया।
प्रश्न 15
अमेरिका में फसल काटने वाली मशीनों के उपयोग से कई महत्वपूर्ण लाभ हुए:
- गेहूं उत्पादन में वृहद विस्तार: इन मशीनों ने बड़े पैमाने पर गेहूं की खेती को संभव बनाया। इससे उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई और अमेरिका एक प्रमुख गेहूं निर्यातक देश बन गया।
- फसल कटाई में तेजी: मशीनें फसल को बहुत तेज़ी से काट सकती थीं। जैसे ही फसल पकती थी, उसे कुछ ही समय में काटा जा सकता था, जिससे फसल के खराब होने का खतरा कम हो जाता था और कटाई का काम कुशलता से पूरा होता था।
- श्रम की आवश्यकता में कमी (बड़े पैमाने पर): यद्यपि इससे कुछ मजदूरों की बेरोजगारी बढ़ी, लेकिन बड़े पैमाने पर खेती के लिए आवश्यक श्रम की कुल मात्रा में कमी आई, जिससे बड़े खेतों का प्रबंधन आसान हो गया।
Common mistakes
- बाड़ाबंदी आंदोलन के केवल एक पहलू पर ध्यान केंद्रित करना, जबकि इसके कई सामाजिक-आर्थिक कारण थे।
- अफीम की खेती के लिए ब्रिटिश दबाव के पीछे के आर्थिक (व्यापार) और राजनीतिक कारणों को नजरअंदाज करना।
- कृषि क्रांति और औद्योगिक क्रांति के बीच संबंध को स्पष्ट रूप से न समझना।
- अमेरिका में गेहूं की खेती के विस्तार के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं का मूल्यांकन न करना।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दिए गए कारणों और प्रभावों को सूचीबद्ध करें।
- इंग्लैंड में बाड़ाबंदी आंदोलन और अमेरिका में गेहूं की खेती के विस्तार के बीच तुलना करें।
- भारतीय किसानों पर अफीम की खेती के दबाव के पीछे के आर्थिक और राजनीतिक संदर्भ को समझें।
- कृषि में तकनीकी बदलावों (जैसे थ्रेशिंग मशीन) के सामाजिक परिणामों पर ध्यान केंद्रित करें।
Practice MCQs
Q1. इंग्लैंड में बाड़ाबंदी आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
Explanation: बाड़ाबंदी आंदोलन का उद्देश्य भूमि पर निवेश को सुरक्षित करना और कृषि को व्यावसायिक रूप से विकसित करना था, जिससे उत्पादकता बढ़े।
Q2. कैप्टन स्विंग कौन था?
Explanation: कैप्टन स्विंग एक काल्पनिक प्रतीक था जिसका उपयोग थ्रेशिंग मशीनों के विरोध में किसानों द्वारा किया जाता था।
Q3. अमेरिका में 1930 के दशक में गेहूं की खेती के विस्तार से कौन सा पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हुआ?
Explanation: अत्यधिक खेती और अनुचित कृषि पद्धतियों के कारण ग्रेट प्लेन्स में धूल भरी आँधियाँ चलीं, जिससे मिट्टी का बड़े पैमाने पर अपरदन हुआ।
Q4. अंग्रेज भारतीय किसानों पर अफीम की खेती के लिए क्यों दबाव डाल रहे थे?
Explanation: अंग्रेजों का मुख्य उद्देश्य चीन के साथ अफीम व्यापार से भारी मुनाफा कमाना था, जिसके लिए वे भारतीय किसानों से अफीम की खेती करवाते थे।
Q5. इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति ने कृषि को कैसे प्रभावित किया?
Explanation: औद्योगिक क्रांति ने कृषि में नई तकनीकों और उपकरणों के विकास को प्रेरित किया, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई।
Frequently asked questions
कक्षा 9 के "किसान और काश्तकार" अध्याय में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?
इस अध्याय में इंग्लैंड में कृषि क्रांति, बाड़ाबंदी आंदोलन, औद्योगिक क्रांति के कृषि पर प्रभाव, अमेरिका में गेहूं की खेती के विस्तार से उत्पन्न पर्यावरणीय संकट, और भारतीय किसानों पर अफीम की खेती के लिए ब्रिटिश दबाव जैसे विषयों को शामिल किया गया है।
बाड़ाबंदी आंदोलन क्या था और इसका किसानों पर क्या प्रभाव पड़ा?
बाड़ाबंदी आंदोलन इंग्लैंड में हुआ था जहाँ सार्वजनिक भूमि को निजी संपत्ति में बदला गया। इससे छोटे किसानों को अपनी भूमि से हाथ धोना पड़ा, वे गरीब हो गए और कई लोगों को रोजगार की तलाश में गाँव छोड़कर शहरों की ओर जाना पड़ा।
अमेरिका में गेहूं की खेती के विस्तार से क्या पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न हुईं?
अमेरिका के ग्रेट प्लेन्स में गेहूं की अत्यधिक खेती के कारण 1930 के दशक में धूल भरी आँधियाँ चलीं, जिससे मिट्टी का बड़े पैमाने पर अपरदन हुआ और गंभीर पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हुआ।
अंग्रेजों ने भारतीय किसानों को अफीम की खेती के लिए क्यों मजबूर किया?
अंग्रेज चीन के साथ अफीम व्यापार से भारी मुनाफा कमाना चाहते थे। बंगाल पर नियंत्रण के बाद, उन्होंने भारतीय किसानों पर अफीम की खेती करने के लिए दबाव डाला ताकि वे इस व्यापार से लाभ उठा सकें।
थ्रेशिंग मशीनों का विरोध क्यों हुआ?
इंग्लैंड के गरीब किसानों को डर था कि थ्रेशिंग मशीनें उनकी आजीविका छीन लेंगी और बेरोजगारी बढ़ाएँगी। उन्होंने इन मशीनों का विरोध किया, जिसे 'कैप्टन स्विंग' के नाम से भी जाना जाता है।
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