कक्षा 8 रुचिरा पाठ 5: कण्टकेनैव कण्टकम् NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 8 की रुचिरा पुस्तक के पाठ 5, 'कण्टकेनैव कण्टकम्' (कांटे से कांटा निकालना) के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ एक चालाक लोमड़ी और एक फँसे हुए बाघ की कहानी बताता है, जो हमें सिखाता है कि कभी-कभी हमें अपनी समस्याओं को हल करने के लिए उसी तरह की रणनीति का उपयोग करना पड़ता है जिसने उन्हें बनाया है। समाधानों में पाठ के अभ्यास के सभी प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं, जिनमें एक-शब्द और पूर्ण-वाक्य उत्तर, साथ ही संवादों के स्रोत की पहचान शामिल है। ये समाधान छात्रों को कहानी के सार को समझने, पात्रों के कार्यों का विश्लेषण करने और पाठ में प्रस्तुत नैतिक शिक्षाओं को आत्मसात करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। परीक्षा की तैयारी के लिए यह एक उत्कृष्ट संसाधन है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | रुचिरा |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 5. धर्मे धमनं पापे पुण्यम् |
Chapter summary
कक्षा 8 की रुचिरा पुस्तक के पाठ 5, 'कण्टकेनैव कण्टकम्' के ये NCERT समाधान छात्रों को एक आकर्षक कहानी के माध्यम से एक महत्वपूर्ण जीवन सबक सिखाते हैं। समाधान अभ्यास के सभी प्रश्नों को कवर करते हैं, जिसमें एक-शब्द उत्तर, पूर्ण-वाक्य उत्तर और संवादों के स्रोत की पहचान शामिल है। ये छात्रों को कहानी की बारीकियों को समझने, पात्रों के इरादों का विश्लेषण करने और 'जैसे को तैसा' के सिद्धांत को समझने में मदद करते हैं। यह संसाधन छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और उनकी परीक्षा की तैयारी को मजबूत करने में सहायता करता है।
Learning outcomes
- पाठ 'कण्टकेनैव कण्टकम्' के मुख्य पात्रों और कथानक को समझना।
- एक-शब्द और पूर्ण-वाक्य उत्तरों के माध्यम से पाठ की समझ का प्रदर्शन करना।
- संवादों को उनके बोलने वाले पात्रों और श्रोताओं से जोड़ने की क्षमता विकसित करना।
- कहानी में निहित नैतिक शिक्षा 'कांटे से कांटा निकालना' का विश्लेषण करना।
- संस्कृत में प्रश्न पूछने और उत्तर देने का अभ्यास करना।
Topics covered
Paper topics
- कण्टकेनैव कण्टकम् कहानी का सारांश
- व्याध (शिकारी) का चरित्र चित्रण
- बाघ का चरित्र चित्रण
- लोमड़ी का चरित्र चित्रण
- कहानी का नैतिक: जैसे को तैसा
- संस्कृत में एक-शब्द उत्तर
- संस्कृत में पूर्ण-वाक्य उत्तर
- संवादों की पहचान
- पात्रों के बीच संबंध
- पाठ में प्रयुक्त शब्दावली
Important topics
- कण्टकेनैव कण्टकम् कहानी का सार और नैतिक
- बाघ और लोमड़ी के बीच संवाद
- लोमड़ी द्वारा बाघ को बचाने की युक्ति
- पाठ के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
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Questions and Solutions
प्रश्न 1: एकपदेन उत्तरं लिखत- (एक शब्द में उत्तर लिखिए-)
एकपदेन उत्तरं लिखत-
- (क) व्याधस्य नाम किम् आसीत्? (शिकारी का नाम क्या था?)
- (ख) चञ्चल: व्याघ्रं कुत्र दृष्टवान्? (चंचल ने बाघ को कहाँ देखा?)
- (ग) कस्मै किमपि अकार्यं न भवति। (किसके लिए कोई भी कार्य बुरा नहीं होता?)
- (घ) बदरी-गुल्मानां पृष्ठे का निलीना आसीत्? (बेर की झाड़ियों के पीछे कौन छिपा था?)
- (ङ) सर्वः किं समीहते? (सभी क्या चाहते हैं?)
- (च) निःसहायो व्याधः किमयाचत? (असहाय शिकारी ने क्या माँगा?)
यहाँ पाठ के आधार पर एक-शब्द में उत्तर दिए गए हैं:
- (क) व्याध का नाम चञ्चल था।
- (ख) चञ्चल ने बाघ को जाल में फँसा हुआ देखा।
- (ग) भूखे (क्षुधार्त) के लिए कोई भी कार्य बुरा नहीं होता।
- (घ) बेर की झाड़ियों के पीछे लोमड़ी छिपी हुई थी।
- (ङ) सभी अपना स्वार्थ (अपना हित) चाहते हैं।
- (च) असहाय शिकारी ने प्राणों की भिक्षा माँगी।
प्रश्न 2: पूर्णवाक्येन उत्तरत- (पूर्ण वाक्य में उत्तर दीजिए-)
पूर्णवाक्येन उत्तरत-
- (क) चञ्चलेन वने किं कृतम्? (चंचल ने जंगल में क्या किया?)
- (ख) व्याघ्रस्य पिपासा कथं शान्ता अभवत्? (बाघ की प्यास कैसे शांत हुई?)
- (ग) जलं पीत्वा व्याघ्रः किम् अवदत्? (जल पीकर बाघ ने क्या कहा?)
- (घ) चञ्चलः 'मातृस्वसः!' इति कां सम्बोधितवान्? (चंचल ने 'मातृस्वसः!' कहकर किसे संबोधित किया?)
- (ङ) जाले पुनः बद्धं व्याघ्रं दृष्ट्वा व्याधः किम् अकरोत्? (जाल में फिर से बंधे बाघ को देखकर शिकारी ने क्या किया?)
यहाँ पाठ के आधार पर पूर्ण वाक्यों में उत्तर दिए गए हैं:
- (क) चञ्चलेन वने जालं विस्तीर्य जीविकां अर्जयितुं प्रयत्नं कृतम्। (चंचल ने जंगल में जाल फैलाकर अपनी आजीविका कमाने का प्रयास किया।)
- (ख) व्याधेन नद्याः जलम् आनीय पिबत्त्वा व्याघ्रस्य पिपासा शान्ता अभवत्। (शिकारी द्वारा नदी से जल लाकर पिलाने पर बाघ की प्यास शांत हुई।)
- (ग) जलं पीत्वा व्याघ्रः अवदत् यत्, "शान्ता मे पिपासा। साम्प्रतं बुभुक्षितोऽस्मि। इदानीम् अहं त्वां खादिष्यामि।" (जल पीकर बाघ ने कहा कि, "मेरी प्यास शांत हो गई है। अब मैं भूखा हूँ। अब मैं तुम्हें खाऊंगा।")
- (घ) चञ्चलः 'मातृस्वसः!' इति लोमशिकां सम्बोधितवान्। (चंचल ने 'मातृस्वसः!' कहकर लोमड़ी को संबोधित किया।)
- (ङ) जाले पुनः बद्धं व्याघ्रं दृष्ट्वा व्याधः प्रसन्नः भूत्वा गृहं प्रत्यावर्तत। (जाल में फिर से बंधे बाघ को देखकर शिकारी प्रसन्न होकर घर लौट गया।)
प्रश्न 3: अधोलिखितानि वाक्यानि कः/का कं/कां प्रति कथयति- (निम्नलिखित वाक्यों को कौन, किसे, किसके प्रति कहता है- लिखिए-)
अधोलिखितानि वाक्यानि कः/का कं/कां प्रति कथयति-
यथा - इदानीम् अहं त्वां व्याधम
खादिष्यामि । (बाघ -> शिकारी)
- (क) कल्याणं भवत् ते। (कल्याण हो तुम्हारा।)
- (ख) जनाः मयि स्नानं कुर्वन्ति । (लोग मुझमें स्नान करते हैं।)
- (ग) अहं त्वत्कृते धर्मम् आचरितवान् त्वया मिथ्या भणितम् । (मैंने तुम्हारे लिए धर्म का आचरण किया, तुमने झूठ कहा।)
- (घ) यत्र कुत्रापि छेदनं कुर्वन्ति । (जहाँ-तहाँ काटते हैं।)
- (ङ) सम्प्रति पुनः पुनः कूर्दनं कृत्वा दर्शय। (अब बार-बार कूदकर दिखाओ। )
यहाँ वाक्यों को कहने वाले पात्र और सुनने वाले पात्रों का उल्लेख किया गया है:
- (क) कल्याणं भवत् ते। (शिकारी -> बाघ) - शिकारी ने बाघ से यह कहा जब उसने उसे जाल से मुक्त किया।
- (ख) जनाः मयि स्नानं कुर्वन्ति । (बाघ -> शिकारी) - बाघ ने अपनी व्यथा बताते हुए शिकारी से कहा कि लोग नदी में स्नान करते हैं।
- (ग) अहं त्वत्कृते धर्मम् आचरितवान् त्वया मिथ्या भणितम् । (बाघ -> लोमड़ी) - बाघ ने लोमड़ी से कहा कि उसने उसके लिए धर्म का कार्य किया पर उसने झूठ बोला।
- (घ) यत्र कुत्रापि छेदनं कुर्वन्ति । (लोमड़ी -> बाघ) - लोमड़ी ने बाघ से कहा कि वे (जाल काटने वाले) जहाँ-तहाँ काटते हैं।
- (ङ) सम्प्रति पुनः पुनः कूर्दनं कृत्वा दर्शय। (लोमड़ी -> बाघ) - लोमड़ी ने बाघ से यह कहा ताकि वह जाल से बाहर निकलने का तरीका समझ सके।
Common mistakes
- संवादों को गलत पात्रों को निर्दिष्ट करना।
- कहानी के नैतिक को पूरी तरह से समझने में विफलता।
- संस्कृत व्याकरण या शब्दावली की गलतियाँ।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को पाठ के संदर्भ में फिर से पढ़ें।
- कहानी के मुख्य पात्रों - व्याध, बाघ और लोमड़ी - के कार्यों और प्रेरणाओं पर ध्यान केंद्रित करें।
- संवादों का अभ्यास करें और पहचानें कि कौन किससे क्या कह रहा है।
- पाठ के अंतर्निहित संदेश, 'कांटे से कांटा निकालना', पर विचार करें।
Practice MCQs
Q1. व्याध का नाम क्या था?
Explanation: पाठ के अनुसार, व्याध का नाम चञ्चल था।
Q2. चञ्चल ने जंगल में क्या फैलाया?
Explanation: चञ्चल ने जंगल में शिकार करने के लिए जाल फैलाया था।
Q3. बाघ की प्यास कैसे बुझी?
Explanation: व्याध ने बाघ के लिए नदी से जल लाकर उसकी प्यास बुझाई।
Q4. जल पीने के बाद बाघ ने क्या कहा?
Explanation: जल पीने के बाद बाघ ने कहा कि उसकी प्यास बुझ गई है और अब वह भूखा है और व्याध को खाएगा।
Q5. चञ्चल ने 'मातृस्वसः!' कहकर किसे संबोधित किया?
Explanation: चञ्चल ने संकट में होने पर लोमड़ी को 'मातृस्वसः!' (मौसी) कहकर पुकारा।
Q6. लोमड़ी ने बाघ को जाल से बाहर निकलने का क्या तरीका बताया?
Explanation: लोमड़ी ने बाघ को बार-बार जाल के अंदर कूदकर यह दिखाने को कहा कि वह कैसे फँसा था, जिससे बाघ को बाहर निकलने का रास्ता मिल गया।
Frequently asked questions
कक्षा 8 रुचिरा के पाठ 5 का शीर्षक क्या है और इसका क्या अर्थ है?
कक्षा 8 रुचिरा के पाठ 5 का शीर्षक 'कण्टकेनैव कण्टकम्' है, जिसका अर्थ है 'कांटे से कांटा निकालना'। यह एक कहावत है जिसका अर्थ है कि कभी-कभी किसी समस्या को हल करने के लिए उसी तरह की विधि या साधन का उपयोग करना पड़ता है जिसने समस्या उत्पन्न की है।
इस पाठ में मुख्य पात्र कौन हैं?
इस पाठ में मुख्य पात्र एक शिकारी (व्याध) जिसका नाम चञ्चल है, एक फँसा हुआ बाघ (व्याघ्र) और एक चालाक लोमड़ी (लोमशिका) हैं।
कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
कहानी का मुख्य संदेश यह है कि हमें अपनी बुद्धि का उपयोग करके कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलना चाहिए, और कभी-कभी समस्या को हल करने के लिए उसी तरीके का इस्तेमाल करना पड़ता है जिसने समस्या पैदा की हो। यह पाठ 'जैसे को तैसा' की नीति को भी दर्शाता है।
ये NCERT समाधान छात्रों की मदद कैसे करते हैं?
ये समाधान छात्रों को पाठ के प्रत्येक प्रश्न का सही और विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें कहानी की गहरी समझ विकसित करने, पात्रों के कार्यों का विश्लेषण करने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद मिलती है।
क्या इन समाधानों में सभी अभ्यास प्रश्न शामिल हैं?
हाँ, इन समाधानों में पाठ 5 'कण्टकेनैव कण्टकम्' के सभी अभ्यास प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं, जिनमें एक-शब्द उत्तर, पूर्ण-वाक्य उत्तर और संवादों की पहचान जैसे प्रश्न शामिल हैं।
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