कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान अध्याय 4: आदिवासी, दिकु और एक स्वर्ण युग की कल्पना - NCERT समाधान

NCERT Solutions PDF Class 8 PDF

यह पृष्ठ कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान के अध्याय 4, 'आदिवासी, दिकु और एक स्वर्ण युग की कल्पना' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय औपनिवेशिक शासन के तहत आदिवासी समुदायों के जीवन, उनकी संघर्षों और प्रतिरोधों पर प्रकाश डालता है। समाधानों में झूम खेती की विभिन्न पद्धतियों, 'दिकुओं' (बाहरी लोगों) के आगमन से उत्पन्न समस्याओं, आदिवासी मुखियाओं की बदलती शक्तियों और बिरसा मुंडा जैसे नेताओं के आंदोलनों का गहन विश्लेषण शामिल है। यह बताता है कि कैसे बाहरी लोगों के हस्तक्षेप ने आदिवासी जीवन शैली, आजीविका और धार्मिक विश्वासों को प्रभावित किया। अंत में, यह बिरसा द्वारा कल्पना किए गए 'स्वर्ण युग' की अवधारणा को स्पष्ट करता है, जो स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक सद्भाव पर आधारित था। ये समाधान छात्रों को आदिवासी समुदायों के इतिहास और उनके द्वारा झेली गई चुनौतियों को समझने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 8
Subjectसामाजिक विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter4. आदिवासी, दिकु और एक स्वर्ण युग की कल्पना

Chapter summary

कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान के अध्याय 4 के ये NCERT समाधान आदिवासी समुदायों के जीवन पर औपनिवेशिक शासन के प्रभाव की पड़ताल करते हैं। इनमें झूम खेती की विधियों, 'दिकुओं' के शोषण, आदिवासी मुखियाओं की घटती शक्ति और बिरसा मुंडा के नेतृत्व में हुए विद्रोहों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। समाधान यह भी बताते हैं कि कैसे बाहरी लोगों के हस्तक्षेप ने आदिवासियों की संस्कृति और आजीविका को प्रभावित किया, और बिरसा द्वारा देखे गए एक आदर्श 'स्वर्ण युग' की कल्पना को रेखांकित करते हैं।

Learning outcomes

  • औपनिवेशिक काल में आदिवासी समुदायों के जीवन और संघर्षों को समझना।
  • झूम खेती की विभिन्न पद्धतियों और उनके महत्व का विश्लेषण करना।
  • 'दिकुओं' के प्रभाव और आदिवासी समाज पर उनके शोषणकारी व्यवहार को पहचानना।
  • औपनिवेशिक शासन के तहत आदिवासी मुखियाओं की बदलती शक्तियों का मूल्यांकन करना।
  • बिरसा मुंडा के आंदोलन और उनके 'स्वर्ण युग' की कल्पना के कारणों को समझना।
  • आदिवासी प्रतिरोध के विभिन्न रूपों का अध्ययन करना।

Topics covered

Paper topics

  • आदिवासी जीवन शैली
  • झूम खेती (कर्तन और दहन कृषि)
  • दिकु (बाहरी लोग)
  • औपनिवेशिक शासन का प्रभाव
  • आदिवासी मुखियाओं की बदलती शक्तियाँ
  • बिरसा मुंडा और मुंडा आंदोलन
  • आदिवासी प्रतिरोध
  • स्वर्ण युग की कल्पना
  • आजीविका का संकट
  • धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव
  • भूमि बंदोबस्त
  • जनजातीय समूह

Important topics

  • औपनिवेशिक शासन का आदिवासी जीवन पर प्रभाव
  • झूम खेती की विधियाँ और समस्याएँ
  • बिरसा मुंडा का आंदोलन और उनकी कल्पना
  • दिकुओं का शोषण और आदिवासी प्रतिक्रिया
  • आदिवासी मुखियाओं की शक्तियों में परिवर्तन

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1: रिक्त स्थान भरें:

(क) अंग्रेजों ने आदिवासियों को ..... के रूप में वर्णित किया। (ख) झूम खेती में बीज बोने के तरीके को ...... कहा जाता है। (ग) मध्य भारत में ब्रिटिश भूमि बंदोबस्त के अंतर्गत आदिवासी मुखियाओं को ...... स्वामित्व मिल गया। (घ) असम के ...... और बिहार की ..... में काम करने के लिए आदिवासी जाने लगे।
Solution:

(क) अंग्रेजों ने आदिवासियों को 'जंगली' के रूप में वर्णित किया, जो उनकी अपनी जीवन शैली और प्रकृति से जुड़ाव को नकारात्मक रूप से दर्शाता था।

(ख) झूम खेती में बीज बोने के तरीके को 'छितराना' कहा जाता है, जिसमें बीजों को जमीन पर बिखेर दिया जाता है।

(ग) मध्य भारत में ब्रिटिश भूमि बंदोबस्त के अंतर्गत आदिवासी मुखियाओं को भूमि का स्वामित्व मिल गया, हालांकि उनकी पारंपरिक शक्तियाँ सीमित कर दी गईं।

(घ) असम के बागानों और बिहार की खादानों में काम करने के लिए आदिवासी जाने लगे, जहाँ उन्हें अक्सर कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था।

प्रश्न 2: सही या गलत बताएँ:

(क) झूम काश्तकार जमीन की जुताई करते हैं और बीज रोपते हैं। (ख) व्यापारी संथालों से कृमिकोष खरीदकर उसे पाँच गुना ज्यादा कीमत पर बेचते थे। (ग) बिरसा ने अपने अनुयायियों का आह्वान किया कि वे अपना शुद्धिकरण करे, शराब पीना छोड़ दे और डायन व जाद्-टोने जैसी प्रथाओं में यकीन न करें। (घ) अंग्रेज आदिवासियों की जीवन पद्धति को बचाए रखना चाहते थे।
Solution:

(क) गलत। झूम काश्तकार आमतौर पर जमीन की जुताई नहीं करते, बल्कि उसे साफ करके बीज बिखेरते या रोपते हैं।

(ख) सही। व्यापारी संथालों से कम कीमत पर कृमिकोष (जैसे रेशम के कीड़े के कोकून) खरीदकर उन्हें काफी अधिक कीमत पर बेचते थे, जिससे संथालों का शोषण होता था।

(ग) सही। बिरसा मुंडा ने अपने अनुयायियों को सामाजिक और धार्मिक सुधारों के लिए प्रेरित किया, जिसमें शुद्धिकरण, शराब त्यागना और अंधविश्वासों से दूर रहना शामिल था।

(घ) गलत। अंग्रेज आदिवासियों की जीवन पद्धति को बचाए रखने के बजाय, अक्सर उसे बदलना या अपने आर्थिक हितों के अनुसार ढालना चाहते थे।

प्रश्न 3: ब्रिटिश शासन में घुमंतू कास्तकारों के सामने कौन-सी समस्या थी?

ब्रिटिश शासन में घुमंतू कास्तकारों के सामने कौन-सी समस्या थी?
Solution:

ब्रिटिश शासन के तहत, घुमंतू कास्तकारों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिनमें प्रमुख थे:

  1. भूमि का मानकीकरण और व्यक्तिगत हिस्सेदारी: अंग्रेजों ने जमीन को मापा और प्रति व्यक्ति हिस्सेदारी तय कर दी, जिससे उनकी पारंपरिक भूमि उपयोग की पद्धतियाँ बाधित हुईं।
  2. लगान का निर्धारण: उन्होंने यह भी तय कर दिया कि किसे कितना लगान देना होगा, जो अक्सर उनकी क्षमता से अधिक होता था।
  3. भू-स्वामी और पट्टेदार का वर्गीकरण: कुछ किसानों को भू-स्वामी और दूसरों को पट्टेदार घोषित कर दिया गया, जिससे सामाजिक और आर्थिक असमानता बढ़ी।
  4. पट्टेदारों पर बोझ: पट्टेदार किसानों को अपने भू-स्वामियों का भाड़ा चुकाना पड़ता था, और भू-स्वामी सरकार को लगान देते थे, जिससे पट्टेदारों पर दोहरा बोझ पड़ता था।

इन बदलावों ने घुमंतू कास्तकारों की स्वतंत्रता को सीमित कर दिया और उन्हें एक निश्चित स्थान पर बसने तथा निश्चित लगान चुकाने के लिए मजबूर किया।

प्रश्न 4: औपनिवेशिक शासन के तहत आदिवासी मुखियाओं की ताकत में क्या बदलाव आया?

औपनिवेशिक शासन के तहत आदिवासी मुखियाओं की ताकत में क्या बदलाव आया?
Solution:

औपनिवेशिक शासन के आने से आदिवासी मुखियाओं की पारंपरिक शक्तियों और स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव आए:

  1. भूमि का मालिकाना हक मिला, पर शासकीय शक्तियाँ छीनीं: उन्हें कई-कई गांवों पर जमीन का मालिकाना हक तो मिला, लेकिन उनकी पारंपरिक शासकीय और न्यायिक शक्तियाँ छीन ली गईं।
  2. ब्रिटिश नियमों का पालन: उन्हें ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा बनाए गए नियमों और कानूनों को मानने के लिए बाध्य कर दिया गया, जिससे उनकी स्वायत्तता समाप्त हो गई।
  3. नज़राना देने की बाध्यता: मुखियाओं को अंग्रेजों को नज़राना (उपहार या कर) देना पड़ता था, जो उनकी आर्थिक स्थिति पर बोझ डालता था।
  4. समूहों पर अनुशासन की कमी: पहले वे अपने समूहों को अनुशासन में रखते थे, लेकिन अब उनकी यह शक्ति भी सीमित हो गई थी।
  5. पारंपरिक कार्यों में बाधा: पहले जो ताकत उनके पास थी, वह अब नहीं रही, और वे अपने पारंपरिक कामों को करने के लिए भी लचार हो गए।

संक्षेप में, मुखियाओं को केवल नाममात्र का अधिकार मिला, जबकि वास्तविक शक्ति अंग्रेजों के हाथों में केंद्रित हो गई।

प्रश्न 5: दिकुओं से आदिवासियों के गुस्से के क्या कारण थे?

दिकुओं से आदिवासियों के गुस्से के क्या कारण थे?
Solution:

आदिवासी समुदाय 'दिकुओं' (बाहरी लोगों) के प्रति अपने गुस्से और बेचैनी के लिए कई कारणों से प्रेरित थे:

  1. जीवन शैली में हस्तक्षेप: आदिवासी अपने आस-पास आ रहे बदलावों और अंग्रेज शासन के कारण पैदा हो रही समस्याओं से बेचैन थे, क्योंकि उनकी परिचित जीवन पद्धति नष्ट होती दिखाई दे रही थी।
  2. आजीविका का संकट: दिकुओं के हस्तक्षेप, जैसे कि जमीन पर कब्जा करना और नए आर्थिक नियमों को लागू करना, ने आदिवासियों की आजीविका को खतरे में डाल दिया था।
  3. धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव: दिकुओं के आगमन और औपनिवेशिक नीतियों के कारण उनके धार्मिक विश्वासों और सांस्कृतिक प्रथाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था, जिससे वे छिन्न-भिन्न हो रहे थे।
  4. शोषण और अन्याय: व्यापारी, साहूकार और जमींदार (जिन्हें दिकु कहा जाता था) अक्सर आदिवासियों का शोषण करते थे, उन्हें कर्ज के जाल में फंसाते थे और उनकी जमीनें हड़प लेते थे।

इन सभी कारणों ने मिलकर आदिवासियों में दिकुओं और औपनिवेशिक शासन के प्रति गहरा असंतोष और गुस्सा पैदा किया।

प्रश्न: बिरसा की कल्पना में 'स्वर्ण युग' किस तरह का था? आपकी राय में यह कल्पना लोगों को इतनी आकर्षक क्यों लग रही थी?

बिरसा की कल्पना में 'स्वर्ण युग' किस तरह का था? आपकी राय में यह कल्पना लोगों को इतनी आकर्षक क्यों लग रही थी?
Solution:

बिरसा मुंडा जिस 'स्वर्ण युग' की कल्पना करते थे, उसे वे 'सतयुग' कहते थे। यह एक ऐसा आदर्श समय था जिसमें:

  • मुंडा लोग एक अच्छा और सुखी जीवन जीते थे।
  • वे तटबंध बनाते थे, पेड़ और बाग लगाते थे, और अपनी आजीविका के लिए खेती करते थे।
  • वे प्राकृतिक झरनों को नियंत्रित करते थे और अपनी जमीन पर आत्मनिर्भर थे।
  • वे अपनी बिरादरियों और रिश्तेदारों का खून नहीं बहाते थे, यानी उनके बीच शांति और सद्भाव था।
  • वे ईमानदारी से जीवन जीते थे।

यह कल्पना लोगों को इसलिए आकर्षक लग रही थी क्योंकि:

  • अतीत का गौरव: यह उनके गौरवशाली अतीत की याद दिलाती थी जब वे बाहरी हस्तक्षेप के बिना स्वतंत्र और आत्मनिर्भर थे।
  • वर्तमान की निराशा: वर्तमान में वे दिकुओं के शोषण, औपनिवेशिक नीतियों के दमन और अपनी जीवन शैली के विनाश से त्रस्त थे। बिरसा का 'स्वर्ण युग' इन सभी समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता था।
  • स्वायत्तता और स्वतंत्रता की चाह: लोग अपनी जमीन पर खेती करने, अपनी परंपराओं का पालन करने और बाहरी नियंत्रण से मुक्त रहने की तीव्र इच्छा रखते थे।
  • सामाजिक और धार्मिक सुधार: बिरसा ने अंधविश्वासों और बुराइयों को दूर करने का भी आह्वान किया, जिससे एक शुद्ध और बेहतर समाज की आशा जगी।

यह कल्पना उन्हें वर्तमान की कठिनाइयों से उबरने और एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा देती थी।

प्रश्न: झूम खेती के तीन नाम बताइए।

झूम खेती के तीन नाम बताइए।
Solution:

झूम खेती के तीन नाम हैं: बेवड़, घुमंतू खेती और कर्तन-दहन कृषि।

प्रश्न: बिरसा कब गिरफ्तार हुए?

बिरसा कब गिरफ्तार हुए?
Solution:

बिरसा को 1895 ईस्वी में गिरफ्तार किया गया था।

प्रश्न: बिरसा का जन्म कब हुआ?

बिरसा का जन्म कब हुआ?
Solution:

बिरसा का जन्म 1870 के दशक में हुआ था।

प्रश्न: बिरसा का जन्म किस जनजातीय समूह में हुआ था?

बिरसा का जन्म किस जनजातीय समूह में हुआ था?
Solution:

बिरसा का जन्म मुंडा जनजातीय समूह में हुआ था।

प्रश्न: बिरसा की मृत्यु कब और कैसे हुई?

बिरसा की मृत्यु कब और कैसे हुई?
Solution:

सन 1900 में, बिरसा की मृत्यु हैजे की बीमारी के कारण हुई थी।

Common mistakes

  • झूम खेती को केवल एक ही तरीके से समझना।
  • दिकुओं के प्रभाव को केवल आर्थिक शोषण तक सीमित मानना।
  • आदिवासी मुखियाओं की शक्तियों में हुए बदलावों को नजरअंदाज करना।
  • बिरसा आंदोलन के उद्देश्यों को केवल राजनीतिक विद्रोह तक सीमित समझना।
  • आदिवासी जीवन शैली पर औपनिवेशिक नीतियों के समग्र प्रभाव को न समझना।

Revision tips

  • झूम खेती के विभिन्न नामों और तरीकों को सूचीबद्ध करें।
  • दिकुओं द्वारा आदिवासियों के शोषण के मुख्य कारणों को पहचानें।
  • बिरसा मुंडा के 'स्वर्ण युग' की कल्पना के प्रमुख तत्वों को लिखें।
  • औपनिवेशिक शासन के तहत आदिवासी मुखियाओं की शक्तियों में आए बदलावों की तुलना करें।
  • अध्याय में उल्लिखित प्रमुख जनजातीय समूहों और उनके संघर्षों को याद करें।

Practice MCQs

Q1. झूम खेती में बीज बोने के किस तरीके को 'छितराना' कहा जाता है?

Q2. व्यापारी संथालों से कृमिकोष खरीदकर उसे कितने गुना ज्यादा कीमत पर बेचते थे?

Q3. बिरसा मुंडा ने अपने अनुयायियों को किन प्रथाओं को छोड़ने का आह्वान किया?

Q4. औपनिवेशिक शासन के तहत आदिवासी मुखियाओं को क्या अधिकार मिले, लेकिन उनकी कौन सी शक्ति छीन ली गई?

Q5. आदिवासियों के गुस्से का एक मुख्य कारण क्या था जो उनकी 'परिचित जीवन पद्धति' से जुड़ा था?

Frequently asked questions

कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान के अध्याय 4 का मुख्य विषय क्या है?

अध्याय 4, 'आदिवासी, दिकु और एक स्वर्ण युग की कल्पना', मुख्य रूप से औपनिवेशिक शासन के तहत आदिवासी समुदायों के जीवन, उनके संघर्षों, बाहरी लोगों (दिकुओं) के हस्तक्षेप और बिरसा मुंडा जैसे नेताओं के आंदोलनों पर केंद्रित है।

झूम खेती क्या है और इसके क्या नाम हैं?

झूम खेती एक प्रकार की कर्तन और दहन कृषि है जिसमें जंगल के छोटे हिस्से को साफ करके खेती की जाती है। इसके अन्य नामों में बेवड़ और घुमंतू खेती शामिल हैं।

बिरसा मुंडा कौन थे और उन्होंने किस आंदोलन का नेतृत्व किया?

बिरसा मुंडा 19वीं सदी के अंत में छोटा नागपुर पठार क्षेत्र के एक आदिवासी नेता थे। उन्होंने मुंडा जनजाति के लोगों को ब्रिटिश शासन और बाहरी लोगों के शोषण के खिलाफ संगठित किया और एक 'स्वर्ण युग' की कल्पना की।

आदिवासियों के लिए 'दिकु' शब्द का क्या अर्थ है?

'दिकु' शब्द का प्रयोग आदिवासी समुदाय बाहरी लोगों, विशेषकर व्यापारियों, जमींदारों और साहूकारों के लिए करते थे, जो अक्सर उनका शोषण करते थे।

औपनिवेशिक शासन ने आदिवासी मुखियाओं की शक्तियों को कैसे प्रभावित किया?

औपनिवेशिक शासन के तहत, आदिवासी मुखियाओं को अपनी जमीन पर मालिकाना हक तो मिला, लेकिन उनकी पारंपरिक शासकीय शक्तियाँ छीन ली गईं और उन्हें ब्रिटिश नियमों का पालन करने के लिए बाध्य किया गया।

बिरसा की 'स्वर्ण युग' की कल्पना में क्या शामिल था?

बिरसा की 'स्वर्ण युग' की कल्पना एक ऐसे समय की थी जब मुंडा लोग अपनी जमीन पर खेती करते थे, तटबंध बनाते थे, पेड़-बाग लगाते थे, और ईमानदारी से जीवन जीते थे, बिना किसी बाहरी शोषण या आंतरिक कलह के।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.