कक्षा 8 संस्कृत: सुभाषितानि NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 8 के संस्कृत के लिए NCERT समाधान प्रस्तुत करता है, विशेष रूप से 'सुभाषितानि' (सुन्दर वचन) नामक पहले अध्याय पर केंद्रित है। इसमें पाठ में दिए गए श्लोकों का सस्वर वाचन, रिक्त स्थानों की पूर्ति, एक-पद उत्तर, तद्भव से तत्सम शब्दों का परिवर्तन, कर्तृपद और क्रियापद की पहचान, तथा रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न निर्माण जैसे अभ्यास शामिल हैं। समाधानों में श्लोकों के अर्थों को स्पष्ट किया गया है, जिससे छात्रों को नैतिक मूल्यों और जीवन के महत्वपूर्ण पाठों को समझने में मदद मिलती है। यह विस्तृत समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी और विषय की गहरी समझ विकसित करने में सहायक होंगे।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | संस्कृत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 1. सुभाषितानि |
Chapter summary
कक्षा 8 के संस्कृत अध्याय 'सुभाषितानि' के लिए NCERT समाधान छात्रों को सुन्दर और ज्ञानवर्धक श्लोकों से परिचित कराते हैं। इन समाधानों में श्लोकों के सस्वर वाचन, रिक्त स्थानों की पूर्ति, एक-पद उत्तर, तद्भव-तत्सम शब्द मिलान, कर्तृ-क्रिया पद चयन और प्रश्न निर्माण जैसे अभ्यासों को शामिल किया गया है। यह छात्रों को श्लोकों के अर्थ समझने, व्याकरणिक संरचनाओं को पहचानने और संस्कृत भाषा के प्रयोग में निपुणता प्राप्त करने में मदद करते हैं।
Learning outcomes
- श्लोकों का सस्वर वाचन करने में सक्षम होना।
- दिए गए श्लोकांशों में रिक्त स्थानों की पूर्ति करना।
- प्रश्नों के उत्तर एक पद में देना।
- तद्भव शब्दों के संस्कृत समकक्षों को पहचानना।
- वाक्यों में कर्तृपद और क्रियापद का चयन करना।
- रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न निर्माण करना।
- श्लोकों के माध्यम से नैतिक मूल्यों को समझना।
Topics covered
Paper topics
- सुभाषितानि (श्लोक)
- सस्वर वाचन
- रिक्त स्थान पूर्ति
- एक-पद उत्तर
- तद्भव-तत्सम शब्द
- कर्तृपद एवं क्रियापद
- प्रश्न निर्माण
- पद पृथक्करण
- समानार्थक शब्द
- श्लोक मिलान
Important topics
- सुभाषितानि (श्लोक)
- कर्तृपद एवं क्रियापद
- प्रश्न निर्माण
- श्लोक मिलान
- तद्भव-तत्सम शब्द
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
प्रश्न 2
- (क) समुद्रमासाद्य .....
- (ख) .....वच: मधुरसूक्तरसं सृजन्ति।
- (ग) तद्भागधेयं ..... पशूनाम्।
- (घ) विद्याफलं ..... कृपणस्य सौख्यम्।
- (ङ) स्त्रियां ...... कुलम्।
- (क) समुद्रमासाद्य भवन्त्यपेया:
- (ख) सन्त: वच: मधुरसूक्तरसं सृजन्ति।
- (ग) तद्भागधेयं परमं पशूनाम्।
- (घ) विद्याफलं व्यसनिन: कृपणस्य सौख्यम्।
- (ङ) स्त्रियां रोचमानायां कुलम्।
प्रश्न 3
- (क) व्यसनिन: किं नश्यति?
- (ख) कस्यां रोचमानायां सर्वं कुलं रोचते?
- (ग) कस्य यश: नश्यति?
- (घ) कस्मिन् श्लोके सद्भङ्गतेः प्रभावो वर्णितः?
- (ङ) मधुरसूक्तरसं के सृजन्ति?
- (क) व्यसनिन: विद्याफलम् नश्यति।
- (ख) स्त्रियाम् रोचमानायां सर्वं कुलं रोचते।
- (ग) लुब्धस्य यश: नश्यति।
- (घ) प्रथमे श्लोके सद्भङ्गतेः प्रभावो वर्णितः।
- (ङ) सन्त: मधुरसूक्तरसं सृजन्ति।
प्रश्न 4
- कंजूस - कृपण:
- कड़वा - कटुकम्
- पूँछ - पुच्छम्
- लोभी - लुब्धः
- मधुमक्खी - मधुमक्षिका
- तिनका - तृणम्
प्रश्न 5
वाक्यानि कर्त्ता क्रिया
यथा- सन्तः मधुरसूक्तरसं सृजन्ति। सन्त: सृजन्ति
- (क) निर्गुणं प्राप्य भवन्ति दोषाः। ....... ......
- (ख) गुणज्ञेषु गुणाः भवन्ति। .......
- (ग) मधुमक्षिका माधुर्यं जनयेत्।
- (घ) पिशुनस्य मैत्री यश: नाशयति।
- (ङ) नद्य: समुद्रमासाद्य अपेया: भवन्ति।
- (क) निर्गुणं प्राप्य भवन्ति दोषाः। कर्तृपद: दोषा:, क्रियापद: भवन्ति
- (ख) गुणज्ञेषु गुणाः भवन्ति। कर्तृपद: गुणा:, क्रियापद: भवन्ति
- (ग) मधुमक्षिका माधुर्यं जनयेत्। कर्तृपद: मधुमक्षिका, क्रियापद: जनयेत्
- (घ) पिशुनस्य मैत्री यश: नाशयति। कर्तृपद: मैत्री, क्रियापद: नाशयति
- (ङ) नद्य: समुद्रमासाद्य अपेया: भवन्ति। कर्तृपद: नद्य:, क्रियापद: भवन्ति
प्रश्न 6
- (क) <u>गुणाः</u> गुणज्ञेषु गुणाः भवन्ति।
- (ख) नद्यः सुस्वादुतोयाः भवन्ति।
- (ग) लुब्धस्य यशः नश्यति।
- (घ) मधुमिक्षका माधुर्यमेव जनयित।
- (ङ) महतां <u>प्रकृतिः</u> सुस्थिरा भवति।
- (क) रेखांकित पद 'गुणाः' (अनेकवचन, पुल्लिङ्ग) के आधार पर प्रश्न होगा: के गुणज्ञेषु गुणाः भवन्ति?
- (ख) रेखांकित पद 'नद्यः' (अनेकवचन, स्त्रीलिङ्ग) के आधार पर प्रश्न होगा: काः सुस्वादुतोयाः भवन्ति?
- (ग) रेखांकित पद 'लुब्धस्य' (षष्ठी विभक्ति, एकवचन, पुल्लिङ्ग) के आधार पर प्रश्न होगा: कस्य यशः नश्यति?
- (घ) रेखांकित पद 'मधुमक्षिका' (एकवचन, स्त्रीलिङ्ग) के आधार पर प्रश्न होगा: का माधुर्यमेव जनयति?
- (ङ) रेखांकित पद 'प्रकृतिः' (एकवचन, स्त्रीलिङ्ग) के आधार पर प्रश्न होगा: महतां का सुस्थिरा भवति?
प्रश्न 7
यथा- समुद्रमासाद्य = समुद्रम् + आसाद्य
1. माधुर्यमेव
2. अल्पमेव
3. सर्वमेव
4. समानमपि
5. महात्मनामुक्तः—
- माधुर्यमेव = माधुर्यम् + एव
- अल्पमेव = अल्पम् + एव
- सर्वमेव = सर्वम् + एव
- समानमपि = समानम् + अपि
- महात्मनामुक्तः = महात्मनाम् + उक्तिः
अतिरिक्त अभ्यास (1)
श्रुत्वा वच: मधुरसूक्तरसं सृजन्ति।
सुस्वादुतोयाः प्रभवन्ति नद्यः
राज्यं प्रमत्तसचिवस्य नराधिपस्य।
साहित्यसङ्गीतकला विहीन:
सन्तस्तथैव समसज्जनदुर्जनानां
समुद्रमासाद्य भवन्त्यपेयाः
विद्याफलं व्यसनिन: कृपणस्य सौख्यं
साक्षात्पशु: पुच्छविषाणहीन:
- सुस्वादुतोयाः प्रभवन्ति नद्यः समुद्रमासाद्य भवन्त्यपेया:।
- साहित्यसङ्गीतकलाविहीन: साक्षात्पशु: पुच्छविषाणहीन:।
- सन्तस्तथैव समसज्जनदुर्जनानां श्रुत्वा वचः मधुरसूक्तरसं सृजन्ति।
- विद्याफलं व्यसनिनः कृपणस्य सौख्यं राज्यं प्रमत्तसचिवस्य नराधिपस्य।
अतिरिक्त अभ्यास (2)
1. कुलमर्थपरस्य = (...... + .....)
2. त्वमेव = (..... + .....)
3. अहमपि = (..... + ....)
4. समुद्रमासाद्य = (..... + .....)
5. गृहमागत: = (...... + .....)
- कुलमर्थपरस्य = (कुलम् + अर्थपरस्य)
- त्वमेव = (त्वम् + एव)
- अहमपि = (अहम् + अपि)
- समुद्रमासाद्य = (समुद्रम् + आसाद्य)
- गृहमागत: = (गृहम् + आगतः)
अतिरिक्त अभ्यास (3)
मञ्जूषा-सज्जनाः, त्यजति, कीर्तिः, महापुरुषाणां/महात्मनाम्, राजा यश: 1.
= ......
नराधाप: = ..... 2. सन्तः
= .....
जहाति 4. = ..... 5. महताम् =
- यश: = कीर्ति:
- नराधाप: = राजा
- सन्तः = सज्जना:
- जहाति = त्यजति
- महताम् = महापुरुषाणां/महात्मनाम्
अतिरिक्त अभ्यास (4)
वाक्य
कर्त्ता
क्रिया
1. मधुमिक्षका मधु जनयति।
2. व्यसनं विद्याफलं नाशयति।
...............
3. सज्जनाः सज्जनदुर्जनानां वचनानि समम् एव आकर्णयन्ति।
...............
4. अर्थपरस्य धर्म: नश्यति।
5. महतां प्रकृतिः निजं भावं न त्यजित।
......
***************
- वाक्य: मधुमिक्षका मधु जनयति। कर्त्ता: मधुमिक्षका, क्रिया: जनयति
- वाक्य: व्यसनं विद्याफलं नाशयति। कर्त्ता: व्यसनम्, क्रिया: नाशयति
- वाक्य: सज्जनाः सज्जनदुर्जनानां वचनानि समम् एव आकर्णयन्ति। कर्त्ता: सज्जनाः, क्रिया: आकर्णयन्ति
- वाक्य: अर्थपरस्य धर्म: नश्यति। कर्त्ता: धर्म:, क्रिया: नश्यति
- वाक्य: महतां प्रकृतिः निजं भावं न त्यजित। कर्त्ता: प्रकृतिः, क्रिया: त्यजित
Common mistakes
- तद्भव और तत्सम शब्दों के बीच भ्रमित होना।
- कर्तृपद और क्रियापद की सही पहचान न कर पाना।
- प्रश्न निर्माण करते समय सही प्रश्नवाचक शब्द का चयन न करना।
- श्लोक के अर्थ को पूरी तरह न समझ पाना।
Revision tips
- प्रत्येक श्लोक का अर्थ ध्यानपूर्वक समझें।
- अभ्यास के प्रश्नों को हल करते समय व्याकरण के नियमों पर ध्यान दें।
- कर्तृपद और क्रियापद के मिलान का अभ्यास करें।
- प्रश्न निर्माण के अभ्यास को दोहराएं ताकि प्रश्नवाचक शब्दों का सही प्रयोग सीख सकें।
Practice MCQs
Q1. कस्य यशः नश्यति?
Explanation: श्लोक के अनुसार, लोभी व्यक्ति का यश नष्ट हो जाता है।
Q2. मधुमक्षिका किम् सृजन्ति?
Explanation: मधुमक्खियाँ केवल शहद (माधुर्य) का निर्माण करती हैं, कड़वा नहीं।
Q3. निर्गुण को प्राप्त करके क्या उत्पन्न होते हैं?
Explanation: जब गुण निर्गुण व्यक्ति के पास पहुँचते हैं, तो वे दोष बन जाते हैं।
Q4. साहित्य, संगीत और कला से रहित व्यक्ति कैसा होता है?
Explanation: श्लोक में ऐसे व्यक्ति की तुलना बिना सींग और पूंछ वाले पशु से की गई है।
Q5. नदियाँ कहाँ पहुँचकर पीने योग्य नहीं रहतीं?
Explanation: नदियाँ सागर में मिलने पर खारी हो जाती हैं और पीने योग्य नहीं रहतीं।
Frequently asked questions
कक्षा 8 के संस्कृत के 'सुभाषितानि' अध्याय में क्या शामिल है?
इस अध्याय में सुन्दर और ज्ञानवर्धक श्लोक शामिल हैं, जिनके माध्यम से नैतिक मूल्यों और जीवन के महत्वपूर्ण पाठों को सिखाया गया है। समाधानों में श्लोकों का अर्थ, प्रश्नोत्तर और व्याकरणिक अभ्यास दिए गए हैं।
NCERT समाधान छात्रों की मदद कैसे करते हैं?
ये समाधान छात्रों को प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें पाठ को बेहतर ढंग से समझने और परीक्षा की तैयारी करने में मदद मिलती है।
क्या इन समाधानों में व्याकरण का अभ्यास शामिल है?
हाँ, इन समाधानों में कर्तृपद और क्रियापद की पहचान, प्रश्न निर्माण, और तद्भव से तत्सम शब्दों का परिवर्तन जैसे व्याकरणिक अभ्यासों को शामिल किया गया है।
श्लोक का सस्वर वाचन क्यों महत्वपूर्ण है?
श्लोक का सस्वर वाचन उच्चारण को शुद्ध करता है, लय और प्रवाह को बनाए रखता है, और श्लोक के भाव को समझने में सहायक होता है।
तद्भव और तत्सम शब्दों में क्या अंतर है?
तत्सम शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से सीधे लिए जाते हैं और वैसे ही प्रयोग होते हैं, जबकि तद्भव शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से उत्पन्न हुए हैं लेकिन समय के साथ बदल गए हैं।
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