कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान: औरतों ने बदली दुनिया - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 7 के सामाजिक विज्ञान विषय के अध्याय 5, 'औरतों ने बदली दुनिया' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय समाज में महिलाओं की भूमिका, विभिन्न व्यवसायों में उनकी भागीदारी, और शिक्षा के क्षेत्र में उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालता है। समाधानों में उन व्यवसायों की सूची दी गई है जहाँ पुरुषों की संख्या अधिक है, और नर्स जैसे व्यवसायों में महिलाओं की अधिकता के कारणों की व्याख्या की गई है। यह अध्याय यह भी बताता है कि क्यों कुछ बच्चे, विशेषकर आदिवासी समुदायों से, माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ देते हैं। इन समाधानों के माध्यम से छात्र समाज में लैंगिक समानता के महत्व को समझेंगे और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता को पहचानेंगे। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और संक्षिप्त मार्गदर्शिका प्रदान करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
Subjectसामाजिक एवं राजनीतिक जीवन
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter5. औरतों ने बदली दुनिया

Chapter summary

कक्षा 7 के सामाजिक विज्ञान के अध्याय 5, 'औरतों ने बदली दुनिया' के NCERT समाधान, समाज में महिलाओं की बदलती भूमिकाओं और उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर केंद्रित हैं। इसमें विभिन्न व्यवसायों में लैंगिक असमानता, शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों द्वारा स्कूल छोड़ने के कारणों (विशेषकर आदिवासी समुदायों में), और लड़कों पर पड़ने वाले सामाजिक दबावों जैसे विषयों को शामिल किया गया है। समाधान इन मुद्दों की गहराई से पड़ताल करते हैं और छात्रों को समाज में समानता और शिक्षा के महत्व को समझने में मदद करते हैं।

Learning outcomes

  • विभिन्न व्यवसायों में पुरुषों और महिलाओं की भागीदारी के अंतर को समझना।
  • नर्स जैसे व्यवसायों में महिलाओं की अधिक संख्या के सामाजिक कारणों का विश्लेषण करना।
  • माध्यमिक स्तर पर बच्चों द्वारा स्कूल छोड़ने के कारणों की पहचान करना।
  • आदिवासी समुदायों के बच्चों द्वारा शिक्षा छोड़ने की दर के कारणों को समझना।
  • लड़कों पर पड़ने वाले सामाजिक और शैक्षिक दबावों का वर्णन करना।
  • समाज में लैंगिक समानता के महत्व पर विचार करना।

Topics covered

Paper topics

  • व्यवसायों में लैंगिक भागीदारी
  • महिलाओं की भूमिका और समाज
  • शिक्षा और स्कूल छोड़ने की दर
  • आदिवासी समुदायों की शैक्षिक चुनौतियाँ
  • लड़कों पर सामाजिक दबाव
  • लैंगिक समानता
  • सामाजिक न्याय
  • भारत में शिक्षा प्रणाली

Important topics

  • व्यवसायों में पुरुषों और महिलाओं की संख्या का अंतर और उसके कारण।
  • नर्स जैसे व्यवसायों में महिलाओं की अधिकता के सामाजिक कारण।
  • माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की दरें।
  • आदिवासी समुदायों के बच्चों द्वारा स्कूल छोड़ने के विशिष्ट कारण।
  • लड़कों पर पड़ने वाले विभिन्न सामाजिक और अकादमिक दबाव।

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Questions and Solutions

1. किस प्रकार के व्यवसायों में स्त्रियों की अपेक्षा पुरुष अधिक हैं?

पुलिस, सेना, ड्राइवर, पेट्रोल पंप के कर्मचारी, रेलवे व वायुयान के पायलट, व्यापार, किसान, वैज्ञानिक, औद्योगिक मजदूर आदि व्यवसायों में स्त्रियों की अपेक्षा पुरुष अधिक हैं।
Solution: समाज में विभिन्न प्रकार के व्यवसाय हैं जहाँ पुरुषों और महिलाओं की भागीदारी में अंतर देखा जाता है। ऐसे कई व्यवसाय हैं जिनमें ऐतिहासिक रूप से और वर्तमान में भी पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में काफी अधिक है। इनमें मुख्य रूप से शारीरिक श्रम वाले या पारंपरिक रूप से पुरुषों के माने जाने वाले कार्य शामिल हैं। उदाहरण के लिए, पुलिस बल, सेना, भारी वाहन जैसे ट्रक या बस चलाना (ड्राइवर), पेट्रोल पंप पर कर्मचारी, रेलवे और वायुयान के पायलट, बड़े पैमाने पर व्यापारिक गतिविधियाँ, खेती (विशेषकर हल चलाना जैसे कार्य), वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक कारखानों में मजदूर जैसे व्यवसायों में स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों की संख्या अधिक पाई जाती है। यह अंतर सामाजिक मान्यताओं, प्रशिक्षण की उपलब्धता और शारीरिक आवश्यकताओं जैसे कई कारकों का परिणाम हो सकता है।

2. नर्स के काम में महिलाओं की संख्या अधिक क्यों है?

नर्स के काम में महिलाओं की संख्या अधिक क्यों है?
Solution: नर्स का पेशा एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में काफी अधिक है। इसके कई सामाजिक और सांस्कृतिक कारण हैं। पारंपरिक रूप से, महिलाओं को देखभाल करने वाली भूमिकाओं के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है, जैसे कि परिवार में बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल करना। इस सामाजिक अपेक्षा को नर्स के पेशे से जोड़ा जाता है, जहाँ रोगियों की देखभाल में सहानुभूति, धैर्य और स्नेह की आवश्यकता होती है। यह माना जाता है कि महिलाएँ स्वाभाविक रूप से अधिक सहनशील, विनम्र और देखभाल करने वाली होती हैं, जो उन्हें रोगियों की सेवा के लिए आदर्श बनाती हैं। रोगियों को अक्सर घर जैसे स्नेह और आराम की आवश्यकता होती है, और यह गुण महिलाओं में अधिक पाया जाता है, ऐसा समाज मानता है। इसलिए, नर्स के पेशे में महिलाओं की अधिक संख्या इन सामाजिक धारणाओं और भूमिकाओं से प्रभावित है।

3. महिला किसानों की संख्या पुरुषों की तुलना में कम क्यों है? यदि हैं, तो क्यों?

महिला किसानों की संख्या पुरुषों की तुलनात्मक रूप से कम है? यदि हैं, तो क्यों?
Solution: खेती का कार्य, विशेष रूप से कुछ विशिष्ट कार्य जैसे हल चलाना, कुदाल चलाना, भारी बोझ उठाना आदि, शारीरिक रूप से काफी कठिन और श्रमसाध्य होते हैं। पारंपरिक रूप से, इन भारी शारीरिक कार्यों को पुरुषों द्वारा अधिक आसानी से किया जाने वाला माना जाता है। महिलाओं के शरीर की बनावट और शारीरिक क्षमता को अक्सर पुरुषों की तुलना में नाजुक माना जाता है, जिसके कारण उन्हें ऐसे कठिन कार्यों को करने में अधिक मुश्किल हो सकती है। इसी कारण से, महिला किसानों की संख्या पुरुषों की तुलना में कम देखी जाती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ खेती के पारंपरिक और अधिक शारीरिक श्रम वाले तरीके अपनाए जाते हैं। हालाँकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि महिलाएँ भी खेती के कई महत्वपूर्ण कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेती हैं, जैसे बुवाई, रोपण, निराई-गुड़ाई और फसल की कटाई के बाद की प्रक्रियाएँ।

4. (क) यदि आप जेवियर होते तो कौन-से विषय चुनते? (ख) अपने अनुभव के आधार पर बताइए कि लड़कों को ऐसे किन-किन दबावों का सामना करना पड़ता है?

(क) यदि आप जेवियर होते तो कौन-से विषय चुनते? (ख) अपने अनुभव के आधार पर बताइए कि लड़कों को ऐसे किन-किन दबावों का सामना करना पड़ता है?
Solution:

(क) यदि मैं जेवियर की जगह होता, तो मैं इतिहास विषय चुनता। किसी भी विषय को 'खराब' या 'अच्छा' नहीं कहा जा सकता; यह पूरी तरह से व्यक्ति की रुचि और उस विषय के प्रति उसके दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। यदि किसी विषय में गहरी दिलचस्पी हो, तो उसे पढ़ना आनंददायक हो जाता है और उसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करना संभव होता है। इतिहास जैसे विषय हमें अतीत की घटनाओं, समाजों और संस्कृतियों को समझने में मदद करते हैं, जो हमारे वर्तमान को आकार देते हैं। किसी भी विषय में रुचि लेकर और लगन से पढ़कर हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं और अव्वल आ सकते हैं।

(ख) लड़कों को अपने जीवन में कई तरह के सामाजिक और व्यक्तिगत दबावों का सामना करना पड़ता है। इनमें से कुछ प्रमुख दबाव इस प्रकार हैं:

  1. शैक्षणिक दबाव: माता-पिता और समाज अक्सर लड़कों से अपेक्षा करते हैं कि वे परीक्षाओं में बहुत अच्छे अंक लाएँ और अकादमिक रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन करें। यह एक निरंतर दबाव बना रहता है कि वे अपनी कक्षा में अव्वल रहें।
  2. विषय चयन का दबाव: कई बार लड़कों को अपनी व्यक्तिगत रुचि या झुकाव के बजाय, परिवार या समाज की अपेक्षाओं के अनुसार विषय चुनने के लिए दबाव डाला जाता है। उन्हें ऐसे विषय चुनने के लिए कहा जा सकता है जिन्हें 'लड़कों के लिए उपयुक्त' माना जाता है, भले ही उनकी उनमें रुचि न हो।
  3. करियर और नौकरी का दबाव: लड़कों पर अक्सर यह दबाव होता है कि वे पढ़ाई पूरी करने के बाद एक अच्छी और प्रतिष्ठित नौकरी हासिल करें ताकि वे परिवार का भरण-पोषण कर सकें और समाज में अपनी पहचान बना सकें। यह दबाव उन्हें अपने करियर पथ को लेकर चिंतित कर सकता है।

5. माध्यमिक स्तर पर कितने बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं?

माध्यमिक स्तर पर कितने बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं?
Solution: माध्यमिक स्तर पर बच्चों द्वारा स्कूल छोड़ने की दर चिंताजनक है। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर लगभग 52 प्रतिशत बच्चे अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाते और स्कूल छोड़ देते हैं। इस दर में विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच अंतर देखा जाता है। उदाहरण के लिए, अनुसूचित जाति (SC) के लड़कों में यह दर लगभग 57 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जनजाति (ST) के लड़कों में यह दर 69 प्रतिशत तक पहुँच जाती है। इसी प्रकार, अनुसूचित जाति की लड़कियों में स्कूल छोड़ने की दर लगभग 62 प्रतिशत है, और अनुसूचित जनजाति की लड़कियों में यह दर 71 प्रतिशत है। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि विशेष रूप से वंचित समुदायों के बच्चों को माध्यमिक शिक्षा जारी रखने में अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

6. शिक्षा के किस स्तर पर आपको सर्वाधिक बच्चे स्कूल छोड़ते हुए दिखाई देते हैं?

शिक्षा के किस स्तर पर आपको सर्वाधिक बच्चे स्कूल छोड़ते हुए दिखाई देते हैं?
Solution: शिक्षा के विभिन्न स्तरों की तुलना करने पर, यह पाया जाता है कि उच्च माध्यमिक स्तर पर बच्चों द्वारा स्कूल छोड़ने की दर सर्वाधिक है। इस स्तर पर लगभग 63 प्रतिशत बच्चे अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़ देते हैं। यह दर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए और भी अधिक है। उदाहरण के लिए, अनुसूचित जाति के लड़कों में यह दर 71 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लड़कों में 78 प्रतिशत, अनुसूचित जाति की लड़कियों में 76 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की लड़कियों में यह दर 81 प्रतिशत तक पहुँच जाती है। ये आँकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि उच्च माध्यमिक शिक्षा जारी रखना कई छात्रों, विशेषकर वंचित समुदायों के लिए एक बड़ी चुनौती है, और इस स्तर पर स्कूल छोड़ने की दर सबसे अधिक है।

7. आपके विचार में अन्य सभी वर्गों की तुलना में, आदिवासी लड़के-लड़कियों की विद्यालय छोड़ने की दर अधिक क्यों है?

आपके विचार में अन्य सभी वर्गों की तुलना में, आदिवासी लड़के-लड़कियों की विद्यालय छोड़ने की दर अधिक क्यों है?
Solution: अन्य सामाजिक वर्गों की तुलना में आदिवासी लड़के-लड़कियों की विद्यालय छोड़ने की दर अधिक होने के कई महत्वपूर्ण कारण हैं:
  1. भौगोलिक अलगाव और स्कूलों की कमी: आदिवासी समुदाय अक्सर दूरदराज के जंगली या पहाड़ी इलाकों में रहते हैं। इन क्षेत्रों में स्कूलों की संख्या बहुत कम होती है, और जो स्कूल होते भी हैं, वे अक्सर काफी दूरी पर स्थित होते हैं। इस कारण आदिवासी बच्चों को पढ़ने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उन्हें आने-जाने में कठिनाई होती है और वे स्कूल छोड़ देते हैं।
  2. गरीबी और आर्थिक तंगी: आदिवासी समुदायों में गरीबी का स्तर अक्सर अधिक होता है। कई परिवार इतने गरीब होते हैं कि वे बच्चों की शिक्षा का खर्च वहन नहीं कर पाते। भले ही सरकार द्वारा किताबें मुफ्त दी जाती हैं, स्कूल यूनिफॉर्म के लिए पैसे मिलते हैं, और मध्याह्न भोजन की व्यवस्था भी की जाती है, फिर भी पढ़ाई से जुड़े छोटे-मोटे खर्चे, जैसे स्टेशनरी या अन्य आवश्यक सामग्री, भी इन परिवारों के लिए बोझ बन जाते हैं। इस कारण, कई बच्चे कम उम्र में ही पढ़ाई छोड़कर कमाने लग जाते हैं।
  3. सांस्कृतिक और सामाजिक कारक: कभी-कभी पारंपरिक जीवन शैली, भाषा की भिन्नता, या शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी भी एक कारण हो सकती है। हालाँकि, मुख्य कारण उपरोक्त दो बिंदु ही हैं।

8. प्राथमिक कक्षाओं में स्कूल छोड़ देने वाले बच्चों के आँकड़ों के आधार पर एक दंडारेख बनाएँ।

प्राथमिक कक्षाओं में स्कूल छोड़ देने वाले बच्चों के आँकड़ों के आधार पर एक दंडारेख बनाएँ।
Solution: इस प्रश्न के लिए, हमें दिए गए आँकड़ों का उपयोग करके एक दंड आरेख (Bar Graph) बनाना होगा। दंड आरेख बनाने के लिए, हम क्षैतिज अक्ष (X-axis) पर स्कूल के स्तर और सामाजिक समूहों (जैसे प्राथमिक कक्षाएँ, सभी अनुसूचित जाति के लड़के, सभी अनुसूचित जनजाति के लड़के, आदि) को दर्शाएंगे, और ऊर्ध्वाधर अक्ष (Y-axis) पर स्कूल छोड़ने वाले बच्चों के प्रतिशत को दर्शाएंगे। दिए गए आँकड़े इस प्रकार हैं: | स्कूल का स्तर | सभी लड़के | सभी अनुसूचित जाति के लड़के | सभी अनुसूचित जनजाति के लड़के | सभी लड़कियाँ | सभी अनुसूचित जाति की लड़कियाँ | सभी अनुसूचित जनजाति की लड़कियाँ | |---------------------|-----------|---------------------------|-----------------------------|-------------|-----------------------------|---------------------------------| | प्राथमिक कक्षाओं में | 34 | 37 | 29 | 49 | 36 | 49 | इस तालिका के आधार पर, हम एक दंड आरेख बना सकते हैं जहाँ प्रत्येक श्रेणी (जैसे 'सभी लड़के', 'अनुसूचित जाति के लड़के', आदि) के लिए एक बार (स्तंभ) होगा, जिसकी ऊँचाई उस समूह के लिए स्कूल छोड़ने वाले बच्चों के प्रतिशत को दर्शाएगी। उदाहरण के लिए, 'सभी लड़के' के लिए बार 34% तक जाएगा, 'अनुसूचित जाति के लड़के' के लिए 37% तक, और इसी तरह अन्य सभी श्रेणियों के लिए। यह आरेख प्राथमिक कक्षाओं में विभिन्न समूहों के बीच स्कूल छोड़ने की दर में अंतर को स्पष्ट रूप से दिखाएगा।

Common mistakes

  • व्यवसायों में लैंगिक असमानता के सामाजिक और सांस्कृतिक कारणों को अनदेखा करना।
  • स्कूल छोड़ने के आँकड़ों की व्याख्या करते समय विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच अंतर को न समझना।
  • लड़कों पर पड़ने वाले दबावों को केवल अकादमिक प्रदर्शन तक सीमित मानना।
  • शिक्षा में आदिवासी समुदायों के सामने आने वाली विशिष्ट बाधाओं को कम आंकना।

Revision tips

  • प्रत्येक व्यवसाय में पुरुषों और महिलाओं की भागीदारी के कारणों पर विचार करें।
  • स्कूल छोड़ने की दर से संबंधित आँकड़ों का विश्लेषण करें और विभिन्न समूहों के लिए कारणों की तुलना करें।
  • लड़कों पर पड़ने वाले सामाजिक दबावों के उदाहरणों को अपने आसपास के समाज से जोड़ें।
  • आदिवासी समुदायों के सामने आने वाली शैक्षिक चुनौतियों को समझने के लिए अतिरिक्त जानकारी खोजें।

Practice MCQs

Q1. निम्नलिखित में से किस व्यवसाय में स्त्रियों की अपेक्षा पुरुष अधिक हैं?

Q2. नर्स के काम में महिलाओं की संख्या अधिक होने का एक कारण क्या है?

Q3. किस स्तर पर सर्वाधिक बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं?

Q4. आदिवासी लड़के-लड़कियों के विद्यालय छोड़ने की दर अधिक होने का एक प्रमुख कारण क्या है?

Q5. लड़कों पर किस प्रकार के दबावों का सामना करना पड़ता है?

Frequently asked questions

कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान के अध्याय 5 का मुख्य विषय क्या है?

अध्याय 5, 'औरतों ने बदली दुनिया', समाज में महिलाओं की भूमिका, विभिन्न व्यवसायों में उनकी भागीदारी, शिक्षा के क्षेत्र में उनके सामने आने वाली चुनौतियाँ, और लड़कों पर पड़ने वाले सामाजिक दबावों जैसे विषयों पर केंद्रित है।

इन NCERT समाधानों से छात्रों को क्या लाभ होगा?

ये समाधान छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को गहराई से समझने, परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर तैयार करने और समाज में लैंगिक समानता जैसे मुद्दों पर अपनी समझ विकसित करने में मदद करेंगे।

क्या इन समाधानों में सभी प्रश्न शामिल हैं?

हाँ, ये समाधान पाठ्यपुस्तक के सभी पाठगत प्रश्नों और अभ्यास प्रश्नों को कवर करते हैं, जिससे छात्रों को एक व्यापक अध्ययन सामग्री मिलती है।

आदिवासी बच्चों द्वारा स्कूल छोड़ने की दर अधिक क्यों बताई गई है?

समाधानों के अनुसार, आदिवासी क्षेत्रों में स्कूलों की कमी, लंबी दूरी तय करना, और गरीबी जैसे कारक बच्चों को स्कूल छोड़ने पर मजबूर करते हैं।

लड़कों पर किस प्रकार के दबावों का उल्लेख किया गया है?

लड़कों पर परीक्षा में अच्छे अंक लाने, अपनी पसंद के विषय चुनने, और एक अच्छी नौकरी हासिल करने जैसे विभिन्न प्रकार के दबावों का उल्लेख किया गया है।

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