CBSE Class 6 Hindi: Chapter 44 'वन के मार्ग में' NCERT Solutions

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CBSE कक्षा 6 हिंदी के अध्याय 44 'वन के मार्ग में' के लिए यह खंड विस्तृत समाधान प्रस्तुत करता है। यह समाधान 'सवैया' कविता के अर्थ, पात्रों के बीच संवाद और यात्रा के दृश्यों पर केंद्रित है। इसमें 'अनुमान और कल्पना' तथा 'भाषा की बात' जैसे अनुभाग भी शामिल हैं, जो भाषाई भिन्नताओं और काव्यात्मक वाक्य-विन्यास पर प्रकाश डालते हैं। इन समाधानों का उद्देश्य छात्रों को कविता और गद्य में प्रयुक्त हिंदी भाषा की बारीकियों को समझने, कविता की कथावस्तु से संबंधित संदेहों को दूर करने और परीक्षाओं के लिए आत्मविश्वास बनाने में सहायता करना है। स्पष्ट व्याख्याएँ और विस्तृत उत्तर प्रदान करके, ये समाधान अध्याय के गहन अध्ययन और पुनरीक्षण के लिए एक उत्कृष्ट साधन के रूप में कार्य करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 6
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 44

Chapter summary

Chapter 44, 'वन के मार्ग में', focuses on a poem depicting the journey of Rama, Sita, and Lakshmana to the forest. The NCERT Solutions provide answers to questions about Sita's condition after walking, the reasons behind certain dialogues, Rama's help to Sita, comparisons between different poetic verses, and a descriptive account of the forest path. It also includes exercises on linguistic features, comparing Avadhi and Hindi verb conjugations, and rearranging poetic sentences into prose order.

Learning outcomes

  • Understand the emotional and physical state of Sita during her forest journey.
  • Analyze the dialogues and their underlying reasons between the characters.
  • Describe the journey through the forest based on poetic descriptions.
  • Identify and explain linguistic differences between Hindi and Avadhi.
  • Reconstruct poetic sentence structures into prose order.

Topics covered

Paper topics

  • Poem Analysis: 'वन के मार्ग में'
  • Character Emotions and Actions
  • Dialogue Interpretation
  • Description of the Forest Path
  • Linguistic Variations (Avadhi and Hindi)
  • Verb Conjugation in Different Dialects
  • Sentence Structure in Poetry vs. Prose
  • Imagination and Empathy Exercises

Important topics

  • Sita's condition and Rama's response
  • Linguistic comparison: Avadhi vs. Hindi
  • Reconstructing poetic sentences
  • Describing the forest journey
  • Understanding character dialogues

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

नगर से बाहर निकलकर दो पग चलने के बाद सीता की क्या दशा हुई?
Solution: नगर से बाहर निकलते ही कुछ दूर चलने पर ही सीता जी बहुत थक गईं। उनकी चाल धीमी पड़ गई और वे चलने में लगभग असमर्थ सी हो गईं। उनकी यह दशा देखकर राम और लक्ष्मण को भी चिंता हुई।

प्रश्न 2

'अब और कितनी दूर चलना है, पर्णकुटी कहाँ बनाइएगा' - यह किसने किससे पूछा और क्यों?
Solution: यह प्रश्न **सीता जी ने श्री राम से** पूछा। इसका कारण यह था कि वे वन के मार्ग पर चलते-चलते बहुत थक गई थीं और उन्हें आगे के विश्राम स्थल तथा पर्णकुटी (पत्तों की झोपड़ी) बनाने के स्थान के बारे में जानने की उत्सुकता थी, ताकि वे थोड़ा आराम कर सकें।

प्रश्न 3

राम ने थकी हुई सीता की क्या सहायता की?
Solution: श्री राम ने जब देखा कि सीता जी बहुत थक गई हैं और उनके पैरों में काँटे चुभ गए हैं, तो उन्होंने स्वयं उनके साथ बैठकर उन्हें धीरज बंधाया। उन्होंने सीता जी के पैरों से काँटे निकाले और उनकी थकावट को कम करने का प्रयास किया।

प्रश्न 4

दोनों सवैया के प्रसंगो में अंतर स्पष्ट करो |
Solution: इस पाठ में दो सवैये दिए गए हैं, जिनमें अलग-अलग प्रसंगों का वर्णन है:
  1. पहला सवैया: इसमें नगर से बाहर निकलते ही सीता जी की थकावट का वर्णन है। वे दो कदम चलकर ही थक जाती हैं, उनके होंठ सूख जाते हैं और वे राम से पूछती हैं कि आगे कितनी दूर चलना है और पर्णकुटी कहाँ बनेगी। राम उन्हें धीरज बंधाते हैं और उनके पैरों से काँटे निकालते हैं।
  2. दूसरा सवैया: इसमें वन के मार्ग का वर्णन है। यह मार्ग अत्यंत दुर्गम और सूना है। रास्ते में न तो पीने के पानी की व्यवस्था है और न ही विश्राम के लिए कोई छायादार स्थान। यह सवैया वन की कठिनाइयों और यात्रा की गंभीरता को दर्शाता है।
इस प्रकार, पहले सवैया में सीता जी की व्यक्तिगत थकावट और राम के प्रेमपूर्ण व्यवहार पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जबकि दूसरे सवैया में वन के मार्ग की कठिनाइयों और यात्रा के व्यापक संदर्भ को दर्शाया गया है।

प्रश्न 5

पाठ के आधार पर वन के मार्ग का वर्णन अपने शब्दों में करो |
Solution: पाठ में वर्णित वन का मार्ग अत्यंत कठिन और सूना है। यह मार्ग ऐसा है जहाँ यात्रियों को पीने के पानी की भी आसानी से उपलब्धता नहीं है। रास्ते में कहीं भी विश्राम करने के लिए पेड़ की छाया भी मुश्किल से मिलती है। यह मार्ग तपती धूप और धूल भरा हो सकता है, जिससे यात्रियों को अत्यधिक कष्ट होता है। कुल मिलाकर, यह एक ऐसा मार्ग है जिस पर यात्रा करना शारीरिक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।

अनुमान और कल्पना

गर्मी के दिनों में कच्ची सड़क की तपती धूल में नंगे पाँव चलने पर पाँव जलते हैं। ऐसी स्थिति में पेड़ की छाया में खड़ा होने और पाँव धोने पर बड़ी राहत मिलती है। ठीक वैसे ही जैसे प्यास लगने पर पानी मिल जाये और भूख लगने पर भोजन | तुम्हें भी किसी वस्तु की आवश्यकता हुई होगी और वह कुछ समय बाद पूरी हों गई होगी। तुम सोचकर लिखो कि आवश्यकता पूरी होने के पहले तक तुम्हारे मन की दशा कैसी थी?
Solution: जब मुझे किसी चीज़ की बहुत आवश्यकता होती है और वह तुरंत पूरी नहीं होती, तो मेरा मन बेचैन हो जाता है। जैसे, अगर मुझे खेलने के लिए कोई खिलौना चाहिए और वह मुझे तुरंत नहीं मिलता, तो मैं बार-बार उसे माँगता रहता हूँ और उसके न मिलने पर उदास हो जाता हूँ। मुझे उस चीज़ के बारे में सोचते रहने से भूख-प्यास भी कम लगती है। मन में बस वही चीज़ घूमती रहती है और उसे पाने की तीव्र इच्छा होती है। जब वह चीज़ मिल जाती है, तो सारी बेचैनी दूर हो जाती है और बहुत खुशी मिलती है, ठीक वैसे ही जैसे प्यासे को पानी मिलने पर या भूखे को भोजन मिलने पर मिलती है।

भाषा की बात - प्रश्न 1

लखि - देखकर धरि - रखकर पोंछि - पोंछकर जानि - जानकर ऊपर लिखें शब्दों और उनके अर्थों को ध्यन से देखो | हिंदी में जिस उद्धेश्य के लिए हम क्रिया में 'कर' जोड़ते हैं, उसी के लिए अवधी में क्रिया में ि (इ ) को जोड़ा जाता है, जैसे - अवधी में बैठ + ि = बैठि और हिंदी में बैठ + कर = बैठकर | तुम्हारी भाषा या बोली में क्या होता है? अपनी भाषा के ऐसे छह शब्द लिखो | उन्हें ध्यान से देखो और कक्षा में बताओ |
Solution: मेरी भाषा/बोली (जैसे - भोजपुरी) में भी क्रिया के साथ 'के' या 'कर' जैसा प्रत्यय जोड़ा जाता है, जो हिंदी के 'कर' के समान ही कार्य-समाप्ति का बोध कराता है। यहाँ मेरी भाषा (भोजपुरी) के छह उदाहरण दिए गए हैं, जो हिंदी के 'कर' के समान अर्थ व्यक्त करते हैं: 1. देखि (अवधी) / देख के (भोजपुरी) - देखकर (हिंदी) 2. धरि (अवधी) / धरि के (भोजपुरी) - रखकर (हिंदी) 3. पोंछि (अवधी) / पोंछ के (भोजपुरी) - पोंछकर (हिंदी) 4. जानि (अवधी) / जान के (भोजपुरी) - जानकर (हिंदी) 5. सुनि (अवधी) / सुनि के (भोजपुरी) - सुनकर (हिंदी) 6. खाई के (भोजपुरी) - खाकर (हिंदी) इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि अवधी में जहाँ क्रिया के अंत में 'इ' लगाया जाता है, वहीं भोजपुरी जैसी अन्य बोलियों में क्रिया के साथ 'के' जोड़कर वही अर्थ व्यक्त किया जाता है जो हिंदी में 'कर' जोड़ने से होता है।

भाषा की बात - प्रश्न 2

"मिट्टी का गहरा अंधकार, डूबा है उसमे एक बीज।"उसमे एक बीज डूबा हुआ है। जब हम किसी बात को कविता में कहते हैं तो वाक्य के शब्दों के क्रम में बदलाव आता है, जैसे - "छाँह घरीक है ठाढे " को गद्य में ऐसे लिखा जाता सकता है "छाया में वक घड़ी खड़ा होकर "। उदाहरण के आधार पर नीचे दी गई कविता की पंक्तियों के गद्य के शब्दक्रम में लिखो।

- पुर तें निकसी रघुबीर - बधू,

- पुट सुखि गए मधुराधर वै ॥

- बैठि विलम्ब लौं कंटक काढ़े।

Solution: कविता की पंक्तियों को गद्य के सामान्य शब्द क्रम में लिखने पर वे इस प्रकार होंगी: 1. पुर तें निकसी रघुबीर - बधू, गद्य क्रम: रघुबीर-वधू पुर से निकली। (अर्थ: श्री राम की पत्नी (सीता) अयोध्यापुरी से निकलीं।) 2. पुट सुखि गए मधुराधर वै ॥ गद्य क्रम: मधुराधर वै पुट सूख गए। (अर्थ: उनके मधुर होंठ प्यास के कारण सूख गए।) 3. बैठि विलम्ब लौं कंटक काढ़े। गद्य क्रम: विलम्ब बैठ कर कंटक काढ़े। (अर्थ: देर तक बैठकर (सीता ने) काँटे निकाले।) कविता में शब्दों का क्रम बदलने से काव्यात्मकता और लय बढ़ती है, जबकि गद्य में वाक्य का अर्थ स्पष्ट करने के लिए सामान्य कर्ता-कर्म-क्रिया क्रम का पालन किया जाता है।

Common mistakes

  • Misinterpreting the emotional state of characters.
  • Confusing the context of dialogues.
  • Difficulty in describing the forest path from poetic verses.
  • Struggling with linguistic comparisons between dialects.
  • Errors in rearranging poetic sentence structures to prose.

Revision tips

  • Read the poem 'सवैया' aloud to grasp its rhythm and emotion.
  • Focus on the descriptions of Sita's fatigue and Rama's care.
  • Pay close attention to the 'भाषा की बात' section for linguistic insights.
  • Practice rewriting poetic lines into prose to understand sentence structure.
  • Summarize the journey and the characters' feelings in your own words.

Practice MCQs

Q1. नगर से बाहर निकलने के बाद सीता की क्या दशा हुई?

Q2. किसने किससे पूछा कि 'अब और कितनी दूर चलना है, पर्णकुटी कहाँ बनाइएगा'?

Q3. राम ने थकी हुई सीता की सहायता कैसे की?

Q4. अवधी भाषा में क्रिया में 'इ' जोड़ने का उद्देश्य हिंदी के किस प्रत्यय के समान है?

Q5. कविता की पंक्ति 'पुर तें निकसी रघुबीर - बधू' को गद्य के सामान्य शब्द क्रम में कैसे लिखा जा सकता है?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह समाधान CBSE बोर्ड की कक्षा 6 के हिंदी विषय के लिए हैं, विशेष रूप से 'वन के मार्ग में' नामक पाठ के लिए।

समाधान में 'वन के मार्ग में' पाठ के किन मुख्य भागों को कवर किया गया है?

समाधान में पाठ की कविता 'सवैया', 'अनुमान और कल्पना' तथा 'भाषा की बात' अनुभागों के प्रश्नों को शामिल किया गया है।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान पाठ की गहरी समझ, भाषा की बारीकियों को समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने की क्षमता विकसित करने में मदद करेंगे।

'भाषा की बात' खंड में क्या सिखाया गया है?

इस खंड में अवधी और हिंदी भाषा के बीच क्रिया जोड़ने के तरीके में अंतर समझाया गया है और कविता की पंक्तियों को गद्य के सामान्य क्रम में लिखना सिखाया गया है।

सीता की दशा के बारे में समाधान क्या बताता है?

समाधान बताता है कि नगर से बाहर दो पग चलने के बाद ही सीता बहुत थक गईं और चलने में असमर्थ सी हो गईं।

राम ने सीता की थकावट दूर करने के लिए क्या किया?

राम ने सीता के साथ बैठकर उन्हें धीरज बंधाया और उनके पैरों से काँटे निकाले।

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