CBSE Class 6 Hindi NCERT Solutions: Chapter 45 - साँस-साँस में बाँस

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This chapter, 'साँस-साँस में बाँस', delves into the versatile uses of bamboo, a remarkable natural resource. The NCERT Solutions provide detailed answers to questions exploring when bamboo can be considered 'old', the unique characteristics of mature bamboo, and the surprising array of items crafted from it. Students will learn about the historical integration of bamboo weaving into human civilization and its geographical distribution for various applications. The solutions also touch upon the broader scope of bamboo's utility, extending to music, publishing, and furniture, and compare it with other natural resources like leather, grass, bark, dung, and clay. By understanding these applications, students can appreciate bamboo's significance in daily life and its role as a sustainable material. These solutions are designed to aid students in comprehending the text thoroughly and preparing effectively for their Hindi examinations.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 6
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 45

Chapter summary

Chapter 45, 'साँस-साँस में बाँस', focuses on the multifaceted applications of bamboo. The NCERT Solutions cover questions related to the maturity and characteristics of bamboo, its historical significance in crafts, and its diverse uses across different regions. It also prompts students to think about bamboo's role beyond everyday items, including its use in music and furniture, and to compare it with other natural resources. The solutions aim to enhance understanding of bamboo as a vital natural resource and its integration into human culture and daily life.

Learning outcomes

  • Understand the characteristics and uses of mature bamboo.
  • Identify the historical significance of bamboo weaving.
  • Recognize the diverse applications of bamboo in various fields.
  • Compare bamboo with other natural resources for making everyday items.
  • Appreciate bamboo as a sustainable and versatile material.

Topics covered

Paper topics

  • बाँस के गुण
  • बाँस से निर्मित वस्तुएँ
  • बाँस की बुनाई का इतिहास
  • बाँस के क्षेत्रीय उपयोग
  • बाँस के व्यापक उपयोग (संगीत, फर्नीचर)
  • प्राकृतिक संसाधन और दैनिक उपयोग की वस्तुएँ
  • चमड़ा
  • घास के तिनके
  • पेड़ की छाल
  • गोबर
  • मिट्टी
  • बाँस की प्रासंगिकता

Important topics

  • बाँस के विभिन्न उपयोग
  • बाँस की बुनाई का ऐतिहासिक महत्व
  • बाँस की तुलना अन्य प्राकृतिक संसाधनों से
  • बाँस के अप्रत्यक्ष उपयोग
  • बाँस के गुण और विशेषताएँ

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

बाँस को बूढ़ा कब कहा जा सकता है? बूढ़े बाँस में कौन सी विशेषता होती है जो युवा बाँस में नहीं पाई जाती?
Solution:

बाँस को बूढ़ा तब कहा जा सकता है जब उसमें कुछ विशेष गुण विकसित हो जाते हैं जो युवा बाँस में नहीं पाए जाते। पाठ के अनुसार, बूढ़े बाँस में एक ऐसी विशेषता होती है जो उसे युवा बाँस से अलग करती है, हालाँकि पाठ में उस विशिष्ट विशेषता का स्पष्ट रूप से वर्णन नहीं किया गया है। यह विशेषता संभवतः उसकी मजबूती, लचीलेपन में बदलाव या बुनाई के लिए उसकी उपयुक्तता से संबंधित हो सकती है।

प्रश्न 2

बाँस से बनायीं जाने वाली चीज़ो में तुम्हे सबसे आश्चर्यजनक चीज कोनसी लगी और क्यों?
Solution:

बाँस से बनाई जाने वाली चीज़ों में सबसे आश्चर्यजनक चीज़ संगीत वाद्ययंत्र (जैसे बाँसुरी) लग सकती है। इसका कारण यह है कि बाँस एक पौधा है, और इससे मधुर ध्वनि उत्पन्न करने वाले वाद्ययंत्र बनाना एक कलात्मक और तकनीकी प्रक्रिया है। यह दर्शाता है कि कैसे प्रकृति से प्राप्त सामग्री का उपयोग रचनात्मकता के माध्यम से कला और संगीत के क्षेत्र में किया जा सकता है। अन्य वस्तुएँ जैसे टोकरी, फर्नीचर आदि तो सामान्य उपयोग की वस्तुएँ हैं, परन्तु संगीत वाद्ययंत्र का निर्माण एक विशेष कौशल और कल्पना का परिणाम है।

प्रश्न 3

बाँस की बुनाई मानव के इतिहास में कब शामिल हुई होंगी?
Solution:

बाँस की बुनाई मानव के इतिहास में बहुत प्राचीन काल से शामिल हुई होगी। यह एक ऐसी कला है जो संभवतः तब से चली आ रही है जब मनुष्यों ने प्रकृति से प्राप्त सामग्री का उपयोग अपने आश्रय और दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करना शुरू किया था। चूँकि बाँस आसानी से उपलब्ध और लचीला होता है, इसलिए यह संभावना है कि प्रागैतिहासिक काल में ही मनुष्यों ने इसका उपयोग टोकरियाँ, चटाईयाँ और अन्य उपयोगी वस्तुएँ बनाने के लिए सीखा होगा।

प्रश्न 4

बाँस के विभिन्न उपयोगों से सम्बंधित जानकारी देश के किस भू - भाग के सन्दर्भ में दी गयी है? एटलस में देखो |
Solution:

पाठ में बाँस के विभिन्न उपयोगों से सम्बंधित जानकारी मुख्य रूप से देश के उत्तर-पूर्वी भू-भाग के सन्दर्भ में दी गयी है। भारत का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र, जिसमें असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं, बाँस की प्रचुरता और इसके पारंपरिक उपयोगों के लिए जाना जाता है। इन क्षेत्रों में बाँस का उपयोग घर बनाने, फर्नीचर, हस्तशिल्प, भोजन और संगीत वाद्ययंत्रों सहित कई तरह की चीज़ों में किया जाता है।

प्रश्न 1 (निबंध से आगे)

बाँस के कई उपयोग इस पाठ में बताए गए है। लेकिन बाँस के उपयोग का दायरा बहुत बड़ा है। निचे दिए गए शब्दों की मदद से तुम इस दायरे को पहचान सकते हो- संगीत, प्रकाशन, मछर, एक नया सन्दर्भ, फर्नीचर
Solution:

दिए गए शब्दों की मदद से बाँस के उपयोग के व्यापक दायरे को इस प्रकार पहचाना जा सकता है:

  • संगीत: बाँस का उपयोग बाँसुरी जैसे वाद्ययंत्र बनाने में किया जाता है, जो मधुर संगीत उत्पन्न करते हैं।
  • प्रकाशन: प्राचीन काल में, बाँस की खपच्चियों का उपयोग लिखने के लिए किया जाता था, और कुछ संस्कृतियों में आज भी इसका उपयोग कागज बनाने या अन्य प्रकाशन-संबंधी सामग्री में हो सकता है।
  • मछर: बाँस का उपयोग मछरदानी बनाने में किया जा सकता है, जो मच्छरों से बचाव में सहायक होती है।
  • एक नया सन्दर्भ: बाँस का उपयोग आधुनिक समय में पर्यावरण-अनुकूल निर्माण सामग्री, बायोडिग्रेडेबल उत्पादों और यहाँ तक कि बायोफ्यूल के उत्पादन में भी एक नए सन्दर्भ में किया जा रहा है।
  • फर्नीचर: बाँस बहुत मजबूत और लचीला होता है, इसलिए इसका उपयोग टिकाऊ और आकर्षक फर्नीचर जैसे कुर्सियाँ, मेजें, बिस्तर और अलमारियाँ बनाने के लिए किया जाता है।
ये सभी उपयोग दर्शाते हैं कि बाँस केवल साधारण वस्तुएँ बनाने के काम ही नहीं आता, बल्कि इसका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक रूप से फैला हुआ है।

प्रश्न 2 (निबंध से आगे)

इस लेख में दैनिक उपयोग की चीज़ें बनाने के लिए बाँस का उल्लेख प्राकृतिक संसाधन के रूप में हुआ है। निचे दिए गए प्राकृतिक संसाधनों से दैनिक उपयोग की कौन-कौन सी चीज़ें बनाई जाती हैं— प्राकृतिक संसाधन दैनिक उपयोग की वस्तुएँ चमडा -- जूते, चपल, कपडे आदि घास के तिनके -- टोकरी, टोपी, छत आदि पेड़ की छाल -- दवाइयां आदि गोबर --- उपले, लिपाई आदि मिट्टी -- बर्तन, घर, मटके आदि इनमें से किन्हीं एक या दो प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए कोई एक चीज़ बनाने का तरीक़ा अपने शब्दों में लिखो।
Solution:

यहाँ मिट्टी से 'मटका' बनाने की विधि का वर्णन किया गया है: प्राकृतिक संसाधन: मिट्टी दैनिक उपयोग की वस्तु: मटका बनाने की विधि:

  1. मिट्टी का चयन: सबसे पहले, अच्छी गुणवत्ता वाली चिकनी मिट्टी का चयन किया जाता है। यह मिट्टी न तो बहुत अधिक रेतीली हो और न ही बहुत अधिक पथरीली।
  2. मिट्टी तैयार करना: चयनित मिट्टी को पानी मिलाकर अच्छी तरह गूंथा जाता है ताकि वह नरम और चिकनी हो जाए। गूंथने की प्रक्रिया से मिट्टी में हवा के बुलबुले निकल जाते हैं और वह एक समान हो जाती है।
  3. आकार देना: गूंथी हुई मिट्टी का एक गोला बनाया जाता है और उसे कुम्हार के चाक पर रखा जाता है। चाक को घुमाते हुए, हाथों और औजारों की मदद से मिट्टी को धीरे-धीरे ऊपर की ओर खींचकर मटके का आकार दिया जाता है। पहले नीचे का गोल आधार बनता है, फिर धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ते हुए मटके का पेट और गला बनाया जाता है।
  4. सुखाना: आकार देने के बाद, मटके को कुछ समय के लिए धूप में या छाया में सूखने के लिए रख दिया जाता है ताकि उसका अतिरिक्त पानी उड़ जाए और वह थोड़ा सख्त हो जाए।
  5. पकाना: जब मटका अच्छी तरह सूख जाता है, तो उसे भट्ठी में पकाया जाता है। पकाने से मिट्टी के कण आपस में जुड़ जाते हैं और मटका मजबूत और टिकाऊ बन जाता है। तेज आंच पर पकाने से मटका पानी को सोखने की क्षमता प्राप्त करता है।
  6. ठंडा करना और उपयोग: पकने के बाद, मटके को भट्ठी से निकालकर ठंडा किया जाता है। ठंडा होने पर, मटका पीने के पानी को ठंडा रखने के लिए उपयोग के लिए तैयार हो जाता है।
इस प्रकार, मिट्टी जैसे प्राकृतिक संसाधन से एक उपयोगी वस्तु 'मटका' तैयार किया जाता है।

प्रश्न 3 (निबंध से आगे)

जिन जगहों पर साँस में बाँस बस है, अखबार और टेलीविज़न के ज़रिए उन जगहों की कैसी तसवीर तुम्हारे मन में बनती है।
Solution:

जिन जगहों पर बाँस बहुतायत में पाया जाता है और जहाँ के लोगों का जीवन बाँस पर निर्भर करता है, उन जगहों की तस्वीर मेरे मन में कुछ इस प्रकार बनती है: प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली: मैं कल्पना करता हूँ कि वे स्थान हरे-भरे जंगलों और बाँस के झुरमुटों से ढके हुए होंगे। चारों ओर हरियाली और ताज़ी हवा का अनुभव होगा। पारंपरिक जीवनशैली: वहाँ के लोग बाँस से बने घरों में रहते होंगे, जिनकी दीवारें और छतें बाँस से बनी होंगी। वे बाँस की टोकरियाँ, चटाईयाँ, औजार और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएँ बनाते होंगे। उनकी जीवनशैली प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाए हुए होगी। सांस्कृतिक समृद्धि: मैं सोचता हूँ कि बाँस का उपयोग वहाँ के संगीत, नृत्य और कला में भी होता होगा। बाँसुरी जैसे वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि वातावरण में गूंजती होगी। कठिन परिश्रम और सरलता: अखबार और टेलीविज़न में अक्सर ऐसे क्षेत्रों के लोगों को बाँस काटते, ढोते और उनसे वस्तुएँ बनाते हुए दिखाया जाता है। इससे यह तस्वीर बनती है कि उनका जीवन परिश्रम भरा लेकिन सरल और संतोषी होता है। वे अपनी मेहनत से अपनी आजीविका कमाते हैं और प्रकृति पर निर्भर रहते हैं। संक्षेप में, बाँस बहुल क्षेत्रों की तस्वीर मेरे मन में प्रकृति की गोद में बसे, पारंपरिक जीवनशैली जीते हुए, मेहनती और कलात्मक लोगों की बनती है।

Common mistakes

  • Confusing the specific regional uses of bamboo mentioned in the text.
  • Not elaborating on the 'why' when asked about surprising bamboo items.
  • Failing to connect bamboo's uses to its historical integration with human civilization.
  • Limited understanding of bamboo's potential beyond basic crafts.

Revision tips

  • Focus on the specific details about 'old' bamboo and its unique properties.
  • List all the different uses of bamboo mentioned and categorize them.
  • Compare and contrast bamboo with other natural resources discussed in the exercise.
  • Think about how the information presented in the text would influence your perception of bamboo.
  • Practice explaining the historical significance of bamboo crafts in your own words.

Practice MCQs

Q1. पाठ के अनुसार, बाँस को बूढ़ा कब कहा जा सकता है?

Q2. बाँस से बनाई जाने वाली कौन सी चीज़ सबसे आश्चर्यजनक लग सकती है?

Q3. बाँस की बुनाई मानव इतिहास में कब शामिल हुई होगी?

Q4. पाठ में बाँस के उपयोग से सम्बंधित जानकारी मुख्य रूप से किस भू-भाग के सन्दर्भ में दी गयी है?

Q5. निम्नलिखित में से कौन सा बाँस का एक अप्रत्यक्ष उपयोग है जिसका उल्लेख पाठ में किया गया है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान CBSE कक्षा 6 के हिंदी विषय के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 45 'साँस-साँस में बाँस' के लिए।

अध्याय 45 'साँस-साँस में बाँस' में मुख्य रूप से क्या सिखाया गया है?

इस अध्याय में बाँस के विभिन्न उपयोगों, जैसे कि दैनिक उपयोग की वस्तुएँ, संगीत वाद्ययंत्र, फर्नीचर आदि बनाने में इसकी भूमिका, और इसके ऐतिहासिक महत्व के बारे में सिखाया गया है।

क्या इन समाधानों में बाँस की तुलना अन्य प्राकृतिक संसाधनों से की गई है?

हाँ, इन समाधानों में बाँस की तुलना चमड़ा, घास, पेड़ की छाल, गोबर और मिट्टी जैसे अन्य प्राकृतिक संसाधनों से की गई है, यह समझाने के लिए कि उनसे कौन-कौन सी दैनिक उपयोग की वस्तुएँ बनाई जाती हैं।

बाँस को 'बूढ़ा' कब कहा जा सकता है, इस प्रश्न का क्या उत्तर है?

पाठ के अनुसार, बाँस को बूढ़ा तब कहा जा सकता है जब उसमें कोई विशेष विशेषता आ जाती है जो युवा बाँस में नहीं होती।

ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान पाठ के प्रश्नों के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अध्याय की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद मिलती है।

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