CBSE Class 6 Hindi: Chapter 43 "नौकर" NCERT Solutions

NCERT Solutions PDF Class 6 PDF

This chapter, "नौकर" (Servant), from the CBSE Class 6 Hindi curriculum, delves into the profound principles of Mahatma Gandhi regarding work, service, and equality. The NCERT Solutions provided here offer detailed explanations and insights into the life and philosophy of Gandhi Ji, particularly his views on manual labor and the treatment of domestic help. Students will explore how Gandhi Ji himself engaged in tasks typically performed by servants, emphasizing dignity in labor and the importance of self-reliance. The solutions also address the benefits of walking and the equitable distribution of household chores. These solutions are designed to help students understand the ethical dimensions of work and social responsibility, aiding in their exam preparation by clarifying complex ideas with clear, concise answers.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 6
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 43

Chapter summary

Chapter 43, "नौकर", focuses on Mahatma Gandhi's philosophy of work and service. The NCERT Solutions cover his practices at the ashram, where he performed tasks usually done by servants, highlighting his belief in the dignity of labor. It also explores his views on treating domestic workers as equals and the practical benefits of walking. The exercises encourage students to reflect on household responsibilities and equitable task distribution.

Learning outcomes

  • Understand Gandhi Ji's philosophy on manual labor and service.
  • Identify instances where Gandhi Ji performed tasks of a servant.
  • Analyze Gandhi Ji's approach to child-rearing and health.
  • Explain the importance of equitable distribution of household chores.
  • Appreciate the dignity of labor and self-reliance.
  • Discuss the benefits of walking as a form of exercise and transport.

Topics covered

Paper topics

  • Gandhi Ji's principles of service
  • Dignity of labor
  • Equality and respect for domestic workers
  • Self-reliance
  • Child-rearing practices
  • Benefits of walking
  • Distribution of household chores
  • Ethical treatment of employees

Important topics

  • Gandhi Ji's personal examples of service
  • Treating domestic workers as equals
  • The dignity of manual labor
  • Equitable distribution of household responsibilities
  • Self-reliance and its importance

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

आश्रम में कॉलेज के छात्रों से गांधी जी ने कौनसा काम करवाया और क्यों?
Solution: आश्रम में गांधी जी ने कॉलेज के छात्रों से कई तरह के सेवा कार्य करवाए, जिनमें मुख्य रूप से आश्रम की सफाई, बर्तन धोना, बगीचे की देखभाल और अन्य शारीरिक श्रम वाले कार्य शामिल थे। गांधी जी ऐसा इसलिए करवाते थे ताकि छात्र श्रम की गरिमा को समझ सकें, उनमें आत्मनिर्भरता की भावना विकसित हो और वे यह जान सकें कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। वे चाहते थे कि छात्र केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि व्यावहारिक जीवन के अनुभव भी प्राप्त करें और सेवा भाव को समझें।

प्रश्न 2

'आश्रम में गांधी कई ऐसे काम भी करते थे, जिन्हें आमतौर पर नौकर - चाकर करते हैं।' पाठ में तीन ऐसे प्रसंगों को अपने शब्दों में लिखो जो इस बात का प्रमाण हों?
Solution: पाठ के अनुसार, गांधी जी आश्रम में ऐसे कई कार्य करते थे जो सामान्यतः नौकर-चाकर करते हैं। ऐसे तीन प्रसंग निम्नलिखित हैं:
  1. सफाई का कार्य: गांधी जी स्वयं आश्रम की सफाई का काम करते थे, जिसमें शौचालय की सफाई भी शामिल थी। वे मानते थे कि सफाई का काम किसी के लिए भी नीचा नहीं है और इसे स्वयं करना चाहिए।
  2. रसोई का कार्य: वे रसोई में भी सहायता करते थे, जैसे कि सब्जियां काटना या अन्य छोटे-मोटे काम करना। इससे यह पता चलता है कि वे किसी भी कार्य को करने में संकोच नहीं करते थे।
  3. बीमारों की सेवा: जब आश्रम में कोई बीमार पड़ता था, तो गांधी जी उनकी व्यक्तिगत देखभाल करते थे, जैसे कि उन्हें खाना खिलाना या उनकी अन्य ज़रूरतें पूरी करना। यह कार्य भी अक्सर नौकरों द्वारा किया जाता है, परन्तु गांधी जी इसे स्वयं करते थे।
ये प्रसंग दर्शाते हैं कि गांधी जी श्रम को महत्व देते थे और किसी भी कार्य को करने में संकोच नहीं करते थे, चाहे वह सामान्यतः नौकरों का काम ही क्यों न हो।

प्रश्न 3

लन्दन में भेजे पर बुलाए जाने पर गांधी जी ने क्या किया?
Solution: जब गांधी जी को लन्दन में पढ़ाई के लिए भेजा गया था, तब उन्होंने वहाँ अपने खर्चों को कम करने के लिए कई उपाय किए। वे अक्सर पैदल ही यात्रा करते थे, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते थे और जहाँ तक संभव हो, अपने कपड़े स्वयं धोते थे। उन्होंने वहाँ के जीवन के अनुसार खुद को ढाला और अनावश्यक खर्चों से बचने का प्रयास किया, ताकि वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें और अपने परिवार पर आर्थिक बोझ न बनें।

प्रश्न 4

गांधी जी ने श्रीमती पोलक के बच्चे का दूध कैसे छुड़वाया?
Solution: गांधी जी ने श्रीमती पोलक के बच्चे का दूध छुड़वाने में एक अनूठा तरीका अपनाया। जब बच्चे को माँ का दूध छुड़ाने की बात आई, तो श्रीमती पोलक चिंतित थीं। गांधी जी ने बच्चे को माँ के दूध के बजाय कोई और पौष्टिक आहार देने का सुझाव दिया। उन्होंने बच्चे को माँ के दूध के अलावा अन्य खाद्य पदार्थ खिलाने की व्यवस्था की, जिससे धीरे-धीरे बच्चे की माँ के दूध पर निर्भरता कम हो गई और उसका दूध छूट गया। इस प्रक्रिया में उन्होंने बच्चे के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा।

प्रश्न 5

आश्रम में काम करने या करवाने का कौनसा तरीका गांधी जी अपनाते थे? इस पाठ पढ़कर लिखो।
Solution: गांधी जी आश्रम में काम करने और करवाने का एक विशेष तरीका अपनाते थे, जो सेवा, समानता और श्रम की गरिमा पर आधारित था। वे स्वयं भी वे सभी कार्य करते थे जो सामान्यतः नौकर करते हैं, जैसे सफाई, रसोई का काम आदि। जब वे दूसरों से काम करवाते थे, तो वे उन्हें आदेश देने के बजाय अनुरोध करते थे और उन्हें कार्य का महत्व समझाते थे। वे सभी आश्रमवासियों को समान मानते थे और किसी को भी अपने से कमतर नहीं समझते थे। उनका मानना था कि हर व्यक्ति को अपनी क्षमतानुसार काम करना चाहिए और श्रम का सम्मान करना चाहिए। वे काम को बोझ की तरह नहीं, बल्कि सेवा और आत्म-सुधार के अवसर के रूप में देखते थे।

प्रश्न 1

गांधी जी इतना पैदल क्यों चलते थे? पैदल चलने का क्या लाभ हैं? लिखो ।
Solution: गांधी जी बहुत अधिक पैदल चलते थे क्योंकि वे इसे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानते थे। उनके अनुसार, पैदल चलना एक उत्तम व्यायाम है जो शरीर को स्वस्थ और सक्रिय रखता है। पैदल चलने के कई लाभ हैं, जैसे:
  • शारीरिक स्वास्थ्य: यह हृदय को मजबूत बनाता है, मांसपेशियों को सक्रिय रखता है और शरीर को सुडौल बनाता है।
  • मानसिक स्वास्थ्य: टहलने से मन शांत होता है, तनाव कम होता है और सकारात्मक सोच विकसित होती है।
  • पर्यावरण के अनुकूल: पैदल चलने से प्रदूषण नहीं फैलता और यह एक पर्यावरण-हितैषी तरीका है।
  • आर्थिक बचत: यह यात्रा का एक सस्ता साधन है, जिससे परिवहन पर होने वाले खर्च की बचत होती है।
  • प्रकृति से जुड़ाव: पैदल चलते हुए व्यक्ति आसपास के वातावरण और प्रकृति का अनुभव कर सकता है।
गांधी जी इन सभी लाभों के कारण पैदल चलने को प्राथमिकता देते थे।

प्रश्न 2

अपने घर के किन्हीं दस कामों की सूची बनाकर लिखो और यह भी कि उन कामों को घर के कौन - कौन से सदस्य अक्सर करते हैं? तुम तालिका की सहायता लेकिन सकते हों -

काम में माँ भाई पिता बहन चाचा दादी अन्य

  1. घर का सामान लाना
  2. घर की सफ़ाई करना
  3. बिस्तर रखना
  4. खाना बनाना
  5. कपड़े धोना
अब यह देखों कि कौन सबसे ज़्यादा काम करता है और कौन सबसे कम कामों का बराबर बंटवारा हो सके, इसके लिए तुम क्या कर सकते हों? सोचकर कक्षा में बताओ ।
Solution: घर के कामों की सूची और उनके बंटवारे पर विचार करना एक महत्वपूर्ण अभ्यास है। यहाँ एक उदाहरण तालिका दी गई है, जिसे आप अपने घर के अनुसार भर सकते हैं:

घर के कामों की सूची और सदस्यों द्वारा उनका निष्पादन

क्रम संख्या काम माँ पिता भाई बहन दादा/दादी अन्य
1 घर का सामान लाना (किराना, सब्ज़ी आदि) हाँ हाँ हाँ नहीं नहीं नहीं
2 घर की सफ़ाई करना (झाड़ू, पोंछा) हाँ नहीं कभी-कभी हाँ हाँ नहीं
3 बिस्तर ठीक करना/रखना हाँ नहीं हाँ हाँ नहीं नहीं
4 खाना बनाना हाँ नहीं नहीं नहीं कभी-कभी नहीं
5 कपड़े धोना हाँ नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं
6 बर्तन धोना हाँ कभी-कभी हाँ हाँ नहीं नहीं
7 बच्चों को स्कूल भेजना/ले जाना हाँ कभी-कभी नहीं नहीं नहीं नहीं
8 पानी भरना/गैस सिलेंडर बदलना नहीं हाँ हाँ नहीं नहीं नहीं
9 पौधों की देखभाल करना कभी-कभी हाँ नहीं नहीं नहीं नहीं
10 घर की छोटी-मोटी मरम्मत करना नहीं हाँ कभी-कभी नहीं नहीं नहीं
कौन सबसे ज़्यादा काम करता है और कौन सबसे कम: इस तालिका के अनुसार, अक्सर माँ घर के अधिकांश काम करती हैं। पिता और भाई कुछ काम करते हैं, जबकि बहन और दादा/दादी भी कुछ कामों में योगदान देते हैं। यह विश्लेषण दर्शाता है कि कामों का बंटवारा हमेशा बराबर नहीं होता। बराबर बंटवारे के लिए सुझाव: कामों का बराबर बंटवारा हो सके, इसके लिए हम निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:
  • जागरूकता: सबसे पहले, घर के सभी सदस्यों को यह समझना होगा कि घर चलाना एक सामूहिक जिम्मेदारी है।
  • चर्चा और योजना: परिवार के सभी सदस्य मिलकर बैठें और तय करें कि कौन सा काम कौन करेगा। हर किसी की क्षमता और समय के अनुसार काम बांटा जा सकता है।
  • लचीलापन: यदि कोई सदस्य किसी दिन काम नहीं कर पाता है, तो दूसरा सदस्य उसकी मदद कर सकता है।
  • नई पीढ़ी की भागीदारी: बच्चों को भी उनकी उम्र के अनुसार छोटे-छोटे काम सौंपे जाने चाहिए, जैसे अपना बिस्तर ठीक करना, खिलौने समेटना, या बड़ों की मदद करना।
  • प्रोत्साहन: जो सदस्य अच्छा काम करते हैं, उनकी सराहना की जानी चाहिए ताकि वे प्रेरित हों।
इस तरह के प्रयासों से घर के कामों का बोझ कम होगा और सभी सदस्य मिलकर एक सुखद वातावरण बना पाएंगे।

प्रश्न 1

गांधी जी अपने साथियों की ज़रूरत के मुताबिक हर कम कर देते थे, लेकिन उनका ख़ुद का काम कोई और करे, ये उन्हें पसंद नहीं था। क्यों? सोचो और अपनी कक्षा में सुनाओ ।
Solution: गांधी जी अपने साथियों की ज़रूरत के मुताबिक हर काम करने को तैयार रहते थे क्योंकि वे सेवा भाव में विश्वास रखते थे और दूसरों की मदद करना अपना कर्तव्य मानते थे। वे मानते थे कि किसी की ज़रूरत को पूरा करना एक महान कार्य है। लेकिन, वे यह पसंद नहीं करते थे कि उनका अपना काम कोई और करे, इसके पीछे कई कारण थे:
  • आत्मनिर्भरता: गांधी जी आत्मनिर्भरता पर बहुत जोर देते थे। वे चाहते थे कि हर व्यक्ति अपने काम स्वयं करे और दूसरों पर निर्भर न रहे। यदि कोई उनका काम करता, तो यह उनकी आत्मनिर्भरता के सिद्धांत के विरुद्ध होता।
  • श्रम की गरिमा: वे सभी प्रकार के श्रम को समान मानते थे। यदि वे स्वयं काम न करके दूसरों से करवाते, तो यह संदेश जाता कि कुछ काम दूसरों के लिए हैं और कुछ उनके लिए, जो उनकी श्रम की गरिमा की भावना के विपरीत था।
  • अनुशासन और उदाहरण: वे स्वयं अनुशासित थे और चाहते थे कि उनके साथी भी अनुशासित रहें। यदि वे अपना काम दूसरों से करवाते, तो यह दूसरों के लिए एक गलत उदाहरण प्रस्तुत करता। वे चाहते थे कि हर कोई अपने हिस्से का काम स्वयं करे।
  • व्यक्तिगत विकास: स्वयं काम करने से व्यक्ति का शारीरिक और मानसिक विकास होता है। वे नहीं चाहते थे कि उनके साथियों को इस विकास के अवसर से वंचित रखा जाए, और न ही वे स्वयं इस अवसर को खोना चाहते थे।
इसलिए, वे दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे, पर अपना काम स्वयं करना पसंद करते थे ताकि आत्मनिर्भरता और श्रम की गरिमा बनी रहे।

प्रश्न 2

नौकरों को हमें वेतनभोगी मज़दूर नहीं, अपने भाई के समान मानना चाहिए। इसमें कुछ कठिनाई हों सकती है, फिर भी हमारी कोशिश सर्वथा निष्फल नहीं जाएगी। गांधी जी ऐसा क्यों कहते होंगे? तर्क के साथ समझाओ ।
Solution: गांधी जी का यह कथन कि "नौकरों को हमें वेतनभोगी मजदूर नहीं, अपने भाई के समान मानना चाहिए। इसमें कुछ कठिनाई हो सकती है, फिर भी हमारी कोशिश सर्वथा निष्फल नहीं जाएगी," उनके गहरे मानवीय मूल्यों और सामाजिक समानता के सिद्धांतों को दर्शाता है। वे ऐसा इसलिए कहते थे, इसके पीछे निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं:
  1. मानवीय गरिमा: गांधी जी मानते थे कि प्रत्येक मनुष्य, चाहे वह किसी भी पेशे में हो, सम्मान का पात्र है। नौकर भी मनुष्य हैं और उन्हें केवल एक 'वेतनभोगी मजदूर' के रूप में देखना उनकी मानवीय गरिमा का अपमान है। उन्हें अपने परिवार का सदस्य, भाई की तरह मानना, उनके प्रति सम्मान और अपनेपन को दर्शाता है।
  2. समानता का सिद्धांत: गांधी जी समाज में समानता के प्रबल समर्थक थे। वे नहीं चाहते थे कि समाज में कोई ऊँच-नीच या भेद-भाव हो। नौकरों को भाई मानना इसी समानता के सिद्धांत का एक व्यावहारिक रूप है।
  3. सामाजिक सुधार की अपेक्षा: गांधी जी जानते थे कि समाज की पुरानी सोच और व्यवस्था को बदलना आसान नहीं है। नौकरों को भाई मानने में कठिनाई इसलिए हो सकती है क्योंकि सदियों से एक वर्ग दूसरे वर्ग से सेवा करवाता आया है और मालिक-नौकर का रिश्ता एक प्रभुत्व वाला रिश्ता बन गया है। इस सोच को बदलना एक चुनौती है।
  4. प्रयास की सार्थकता: कठिनाई होने के बावजूद, गांधी जी का मानना था कि प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता। यदि हम ईमानदारी से नौकरों को सम्मान और अपनेपन का व्यवहार देंगे, तो धीरे-धीरे समाज में यह सोच फैलेगी। भले ही तुरंत पूर्ण समानता स्थापित न हो, लेकिन हमारे प्रयास से उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ेगा। यह प्रयास न केवल नौकरों के जीवन को बेहतर बनाएगा, बल्कि समाज में करुणा और भाईचारे की भावना को भी बढ़ावा देगा।
  5. आत्म-सुधार का मार्ग: दूसरों के प्रति सम्मान और समानता का व्यवहार करना स्वयं व्यक्ति के चरित्र का भी उत्थान करता है। जब हम दूसरों को भाई मानते हैं, तो हम स्वयं भी अधिक विनम्र और संवेदनशील बनते हैं।
संक्षेप में, गांधी जी चाहते थे कि हम नौकरों को केवल उनके काम के लिए नहीं, बल्कि एक इंसान के तौर पर देखें और उनके साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा हम अपने प्रियजनों के साथ करते हैं। यह एक आदर्शवादी विचार लग सकता है, लेकिन उनके अनुसार ऐसे आदर्शों के लिए प्रयास करते रहना ही मानवता का सच्चा मार्ग है।

Common mistakes

  • Confusing Gandhi Ji's personal philosophy with general societal norms.
  • Underestimating the significance of manual labor.
  • Difficulty in applying principles of equality to domestic help.
  • Not considering the practical benefits of simple living habits like walking.

Revision tips

  • Focus on understanding Gandhi Ji's personal examples of service.
  • Reflect on the concept of equality in the context of household work.
  • List down the benefits of walking as discussed in the chapter.
  • Consider how to ensure fair distribution of chores at home.

Practice MCQs

Q1. आश्रम में गांधी जी ने कॉलेज के छात्रों से कौन सा काम करवाया?

Q2. गांधी जी ने श्रीमती पोलक के बच्चे का दूध कैसे छुड़वाया?

Q3. गांधी जी के अनुसार नौकरों को कैसा मानना चाहिए?

Q4. गांधी जी इतना पैदल क्यों चलते थे?

Q5. घर के कामों का बराबर बंटवारा हो सके, इसके लिए क्या करना चाहिए?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान CBSE कक्षा 6 हिंदी के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 43 "नौकर" पर केंद्रित हैं।

अध्याय 43 "नौकर" में मुख्य रूप से क्या सिखाया गया है?

यह अध्याय महात्मा गांधी के श्रम, सेवा और समानता के सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें वे स्वयं भी नौकरों जैसे कार्य करते थे।

गांधी जी आश्रम में छात्रों से कौन से कार्य करवाते थे?

गांधी जी आश्रम में कॉलेज के छात्रों से सफाई और अन्य सेवा कार्य करवाते थे ताकि वे श्रम की गरिमा को समझ सकें।

गांधी जी पैदल चलने के क्या लाभ बताते थे?

गांधी जी पैदल चलने को शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक मानते थे और इसे व्यायाम का एक महत्वपूर्ण साधन मानते थे।

घर के कामों के बंटवारे पर गांधी जी के क्या विचार थे?

गांधी जी का मानना था कि घर के कामों का बंटवारा सभी सदस्यों के बीच समान रूप से होना चाहिए, ताकि कोई एक सदस्य बोझिल न हो।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान अध्याय की अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में छात्रों की सहायता करेंगे।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.