कक्षा 4 पर्यावरण अध्ययन: अध्याय 22 दुनिया मेरे घर में NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 4 के पर्यावरण अध्ययन (EVS) के अध्याय 22, 'दुनिया मेरे घर में' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। यह अध्याय घर के भीतर होने वाले विभिन्न मुद्दों जैसे कि साझाकरण, झगड़े, नियम और पारिवारिक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं पर केंद्रित है। इसमें बच्चों के दृष्टिकोण से विभिन्न परिदृश्यों का पता लगाया गया है, जिसमें यह भी शामिल है कि कैसे परिवार के सदस्य विभिन्न वस्तुओं के लिए झगड़ते हैं, इन झगड़ों को कैसे सुलझाया जाता है, और परिवार में निर्णय लेने की प्रक्रिया में कौन शामिल होता है। अध्याय यह भी बताता है कि लिंग के आधार पर अलग-अलग नियम क्यों नहीं होने चाहिए और साझाकरण के महत्व पर जोर देता है। यह बच्चों को विभिन्न सामाजिक स्थितियों और व्यक्तिगत सीमाओं के बारे में सोचने के लिए प्रोत्साहित करता है। ये समाधान छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करेंगे।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 4
SubjectEnvironmental Studies
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 22 दुनिया मेरे घर में

Chapter summary

कक्षा 4 के लिए NCERT समाधान, अध्याय 22 'दुनिया मेरे घर में', घर के भीतर होने वाले विभिन्न सामाजिक गतिशीलता और नियमों पर केंद्रित है। यह अध्याय बच्चों को साझाकरण, झगड़े सुलझाने, पारिवारिक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और लिंग समानता के महत्व जैसे विषयों पर सोचने के लिए प्रोत्साहित करता है। इसमें विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से यह भी बताया गया है कि कैसे व्यक्तिगत सीमाएं और दूसरों के साथ व्यवहार महत्वपूर्ण हैं। ये समाधान छात्रों को अध्याय की मुख्य अवधारणाओं को समझने और संबंधित प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • घर में होने वाले झगड़ों और उन्हें सुलझाने के तरीकों को समझना।
  • साझाकरण के महत्व और उससे जुड़े लाभों को पहचानना।
  • पारिवारिक निर्णयों में शामिल विभिन्न सदस्यों और प्रक्रियाओं को समझना।
  • लिंग के आधार पर नियमों में अंतर के परिणामों का विश्लेषण करना।
  • व्यक्तिगत सीमाओं और दूसरों के साथ व्यवहार के महत्व को समझना।
  • विभिन्न सामाजिक परिदृश्यों में उचित व्यवहार के बारे में सोचना।

Topics covered

Paper topics

  • घर में झगड़े
  • झगड़े सुलझाना
  • साझा करना
  • पारिवारिक नियम
  • निर्णय लेना
  • लिंग समानता
  • व्यक्तिगत सीमाएं
  • दूसरों का व्यवहार
  • रीति-रिवाज
  • ईमानदारी
  • डर
  • समझौता

Important topics

  • घर में झगड़े और उन्हें सुलझाने के तरीके
  • साझा करने का महत्व
  • पारिवारिक निर्णय लेने की प्रक्रिया
  • लिंग समानता और नियम
  • व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान

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Questions and Solutions

बताओ

क्या तुम्हारे घर में भी पंखा, टी.वी., समाचारपत्र, कुर्सी या किसी और चीज को लेकर झगड़े होते हैं?
Solution: हाँ, कभी-कभी मेरे घर में भी ऐसी चीजें होती हैं। उदाहरण के लिए, जब एक से ज़्यादा लोग एक ही समय में टीवी देखना चाहते हैं, या जब कोई रिमोट कंट्रोल का इस्तेमाल करना चाहता है और दूसरा नहीं करने देना चाहता, तो ऐसे झगड़े हो सकते हैं। कभी-कभी किसी खास चीज़ को लेकर भी बहस हो जाती है, जैसे कि कौन पहले नहाएगा या कौन सा खेल खेला जाएगा।

बताओ

तुम्हारे घर के ऐसे झगड़े कौन सुलझाता है?
Solution: हमारे घर में ऐसे झगड़ों को आमतौर पर हमारे माता-पिता या बड़े भाई-बहन सुलझाते हैं। वे हमारी बात सुनते हैं, हमें समझाते हैं और एक ऐसा रास्ता निकालने की कोशिश करते हैं जिससे सभी सहमत हों। कभी-कभी हम बच्चे भी आपस में बात करके ही झगड़े का हल निकाल लेते हैं, खासकर अगर मामला बहुत छोटा हो।

बताओ

अपने घर के ऐसे झगड़ों के बारे में कोई मजेदार किस्सा सुनाओ।
Solution: एक बार की बात है, मैं और मेरी बहन दोनों एक ही समय पर अपना पसंदीदा कार्टून देखना चाहते थे, लेकिन टीवी एक ही था। हम दोनों के बीच इस बात पर झगड़ा हो गया। फिर हमने मिलकर तय किया कि हम बारी-बारी से देखेंगे। पहले मैं अपना कार्टून देखूंगा और फिर मेरी बहन अपना। इस तरह, हम दोनों खुश रहे और हमारा झगड़ा भी मजेदार तरीके से सुलझ गया।

बताओ

क्या तुमने कहीं और एक ही चीज के लिए लोगों को आपस में झगड़ते हुए देखा है? किस बात पर?
Solution: हाँ, मैंने कई बार लोगों को एक ही चीज के लिए झगड़ते हुए देखा है। उदाहरण के लिए, बसों या ट्रेनों में सीटों के लिए लोग अक्सर झगड़ते हैं। कभी-कभी बाज़ार में भी किसी चीज़ की कीमत को लेकर या किसी सेवा को लेकर बहस हो जाती है। सार्वजनिक स्थानों पर भी कई बार लोग छोटी-छोटी बातों पर आपस में उलझ पड़ते हैं।

बताओ

क्या तुम्हारे या किसी दोस्त के पिरवार में ऐसी बातें होती हैं? तुम इस बारे में क्या सोचते हो?
Solution: नहीं, मेरे या मेरे किसी दोस्त के परिवार में ऐसी बातें नहीं होती हैं। मैं सोचता हूँ कि किसी भी परिवार में ऐसा नहीं होना चाहिए। हर परिवार को शांति और प्यार से रहना चाहिए। अगर कोई समस्या है, तो उसे बातचीत से सुलझाना चाहिए, न कि झगड़े से।

बताओ

क्या लड़का-लड़की और आदमी-औरत के लिए अलग-अलग नियम होने चाहिएँ?
Solution: नहीं, मेरे विचार में लड़का-लड़की और आदमी-औरत के लिए अलग-अलग नियम नहीं होने चाहिए। सभी के लिए एक जैसे नियम होने चाहिए क्योंकि सभी इंसान हैं और सभी को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए।

सोचो

सोचो-अगर लड़कियों के लिए बनाए गए नियम, लड़कों पर और लड़कों के लिए बनाए गए नियम लड़कियों पर लागू हों, तो क्या होगा?
Solution: अगर लड़कियों के लिए बनाए गए नियम लड़कों पर और लड़कों के लिए बनाए गए नियम लड़कियों पर लागू हों, तो इससे बहुत परेशानी होगी। यह अनुचित होगा और किसी को भी अच्छा नहीं लगेगा। सभी को अपनी स्वतंत्रता और अधिकारों का हनन महसूस होगा। इसलिए, नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।

अपनी कल्पना से, इस कहानी का अंत बदलकर कॉपी में लिखो।

अपनी कल्पना से, इस कहानी का अंत बदलकर कॉपी में लिखो।
Solution: पीलू मामी ने कुल्फी वाले को पाँच कुल्फी के पैसे ही दिए। जब बच्चे कुल्फी खा रहे थे, तो उन्होंने देखा कि कुल्फी वाले के पास अभी भी कुछ कुल्फी बची हुई हैं। बच्चों को लगा कि पीलू मामी ने शायद कम पैसे दिए हैं। उन्होंने पीलू मामी से पूछा, तो पीलू मामी ने कहा कि उन्होंने पाँच कुल्फी के ही पैसे दिए हैं। बच्चों ने मिलकर पीलू मामी को समझाया कि उन्होंने जितनी कुल्फी खाई है, उतने पैसे देने चाहिए। पीलू मामी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने कुल्फी वाले को बाकी पैसे दिए। कुल्फी वाले ने खुश होकर बच्चों को अतिरिक्त कुल्फी दी और पीलू मामी को ईमानदारी का पाठ पढ़ाया।

बताओ

क्या तुम्हारे परिवार में भी कोई पिलू मामी की तरह है? कौन?
Solution: हाँ, मेरे घर में मेरी माँ कभी-कभी ऐसी स्थिति में पिलू मामी की तरह व्यवहार करती हैं। उदाहरण के लिए, जब हम बाज़ार से कोई सामान खरीदते हैं और दुकानदार गलती से कम पैसे वापस करता है, तो मेरी माँ हमेशा उसे ठीक करके पूरे पैसे देती हैं। वह कहती हैं कि किसी का हक़ मारना अच्छी बात नहीं है।

बताओ

अगर पिलू मामी कम पैसे देकर वहाँ से चलीं जातीं, तो बच्चे इस बारे में क्या सोचते? तुम इस बारे में क्या सोचते हो?
Solution: अगर पिलू मामी कम पैसे देकर चली जातीं, तो बच्चे सोचते कि पीलू मामी ने बेईमानी की है और वे गलत हैं। मेरी भी यही सोच है कि किसी को भी बेईमानी नहीं करनी चाहिए। दूसरों का हक़ मारना गलत है और इससे हमें बुरा इंसान माना जाता है।

बताओ

तुम्हें क्या लगता है, अक्षय क्या करेगा?
Solution: मुझे लगता है कि अक्षय शायद पहले थोड़ा सोचेगा कि उसकी दादी-माँ ने मना किया है, लेकिन फिर वह अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी पी लेगा। वह शायद यह भी सोचेगा कि पानी पीना कोई गलत काम नहीं है और उसकी दादी-माँ की बात शायद पुरानी सोच पर आधारित है।

बताओ

अक्षय उलझन में क्यों पड़ गया?
Solution: अक्षय उलझन में इसलिए पड़ गया क्योंकि उसकी दादी-माँ ने उसे अनिल के घर कुछ भी खाने-पीने से मना किया था। जब उसे प्यास लगी और पानी पीने का अवसर मिला, तो उसे अपनी दादी-माँ की बात याद आ गई, जिससे वह दुविधा में पड़ गया कि क्या करे और क्या न करे।

बताओ

अक्षय की दादी-माँ ने उसे अनिल के घर का पानी तक पीने के लिए मना क्यों किया होगा?
Solution: अक्षय की दादी-माँ ने उसे अनिल के घर का पानी तक पीने के लिए मना इसलिए किया होगा क्योंकि वे शायद पुराने विचारों की थीं। हो सकता है कि उनके परिवार और अनिल के परिवार के बीच कोई सामाजिक या धार्मिक मतभेद रहा हो, या वे किसी विशेष रीति-रिवाज को मानते हों जिसके अनुसार उन्हें लगा कि अनिल के घर का पानी पीना उनके लिए उचित नहीं है।

बताओ

क्या तुम किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हो, जो अक्षय की दादी-माँ की तरह ही सोचते हैं?
Solution: हाँ, मेरे एक दोस्त की दादी-माँ भी कुछ हद तक अक्षय की दादी-माँ की तरह ही सोचती हैं। वे भी कुछ पुराने रीति-रिवाजों को बहुत महत्व देती हैं और कभी-कभी नई चीजों या अलग पृष्ठभूमि के लोगों के साथ घुलने-मिलने में संकोच करती हैं।

बताओ

क्या तुम अक्षय की दादी-माँ से सहमत हो?
Solution: नहीं, मैं अक्षय की दादी-माँ से सहमत नहीं हूँ। मेरा मानना है कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए किसी को मना करना सही नहीं है, खासकर जब वह सिर्फ प्यास बुझाने के लिए हो। हमें सभी के साथ समान व्यवहार करना चाहिए और पुरानी सोच को छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए।

बताओ

तुम्हारी राय में अक्षय को क्या करना चाहिए?
Solution: मेरी राय में, अक्षय को अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी पी लेना चाहिए। अगर वह चाहे तो अपनी दादी-माँ से इस बारे में बात कर सकता है और उन्हें समझा सकता है कि पानी पीना एक सामान्य बात है। लेकिन सबसे पहले, उसे अपनी जरूरत पूरी करनी चाहिए।

बताओ

तुम धोंडू की जगह होते तो क्या करते?
Solution: अगर मैं धोंडू की जगह होता, तो मैं भी शायद वही करता जो धोंडू ने किया। मैं भी अपनी माँ की बात सुनता और शायद थोड़ी देर इंतज़ार करता। लेकिन अगर मुझे बहुत ज़्यादा ज़रूरत होती, तो मैं अपनी माँ को समझाने की कोशिश करता कि मुझे वह चीज़ क्यों चाहिए।

बताओ

क्या तुम्हारे साथ कभी ऐसा हुआ है कि तुम कुछ करना चाहते हो, पर घर के बड़ों ने मना किया हो?
Solution: हाँ, मेरे साथ ऐसा कई बार हुआ है। उदाहरण के लिए, कभी-कभी मैं देर रात तक खेलना चाहता हूँ, लेकिन मेरे माता-पिता मुझे मना कर देते हैं क्योंकि उन्हें मेरी सेहत की चिंता होती है। ऐसे में, मैं उनसे बात करने की कोशिश करता हूँ और उन्हें समझाता हूँ कि मुझे थोड़ी देर और खेलने की अनुमति क्यों चाहिए।

बताओ

तुम्हारे घर में जरूरी फैसले कौन लेता है?
Solution: हमारे घर में ज़रूरी फैसले आमतौर पर मेरे मम्मी-पापा मिलकर लेते हैं। वे दोनों एक-दूसरे से सलाह-मशविरा करते हैं और फिर मिलकर कोई निर्णय लेते हैं। कभी-कभी वे मुझसे भी मेरी राय पूछते हैं, खासकर अगर फैसला मुझसे जुड़ा हो।

बताओ

तुम्हें इस बारे में क्या लगता है?
Solution: मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छी बात है कि मेरे माता-पिता मिलकर फैसले लेते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सभी की राय सुनी जाए और जो भी फैसला हो, वह सबके लिए बेहतर हो। यह एक स्वस्थ पारिवारिक वातावरण को दर्शाता है।

बताओ

अगर तुम्हारे पिरवार में या रिश्तेदारी में हमेशा एक ही व्यक्ति अपनी बात मनवाता रहे, तो तुम्हें कैसा लगेगा?
Solution: अगर मेरे परिवार या रिश्तेदारी में हमेशा एक ही व्यक्ति अपनी बात मनवाता रहे, तो मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा। मुझे ऐसा महसूस होगा कि मेरी या दूसरों की राय का कोई महत्व नहीं है। इससे नाराजगी और असंतोष पैदा हो सकता है। सभी को अपनी बात कहने का मौका मिलना चाहिए और फैसले मिलकर लेने चाहिए।

बताओ

क्या तुम्हें-भी कभी किसी का छूना बुरा लगा है?
Solution: हाँ, मुझे भी कभी-कभी किसी का छूना बुरा लगा है। यह तब होता है जब कोई मुझे ज़बरदस्ती या असहज तरीके से छूता है, या जब कोई ऐसा व्यक्ति मुझे छूता है जिसके स्पर्श से मुझे डर या घबराहट महसूस होती है।

बताओ

किसका छूना तुम्हें अच्छा नहीं लगा?
Solution: मुझे एक बार एक अजनबी व्यक्ति का छूना अच्छा नहीं लगा था। वह व्यक्ति थोड़ा अजीब लग रहा था और उसने अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया था, जिससे मुझे डर लगा और असहज महसूस हुआ।

बताओ

अगर तुम रितुं की जगह होते, तो क्या करते?
Solution: अगर मैं रितु की जगह होता, तो मैं भी शायद डर जाता, लेकिन मैं अपनी सहेली को बताता कि मुझे उसके मामा के छूने से डर लगता है। मैं अपनी सहेली से कहता कि वह अपने मामा को समझाए कि वे मुझे असहज महसूस न कराएं। मैं उनसे दूरी बनाने की कोशिश करता।

बताओ

ऐसा होने पर और क्या किया जा सकता है?
Solution: अगर किसी को किसी के छूने से डर लगता है या बुरा लगता है, तो वह उस व्यक्ति से दूरी बना सकता है। वह किसी भरोसेमंद बड़े, जैसे माता-पिता या शिक्षक, को इस बारे में बता सकता है। वे उस व्यक्ति से बात कर सकते हैं या बच्चे को सुरक्षित महसूस कराने के तरीके ढूंढ सकते हैं।

बताओ

सभी का छूना एक जैसा नहीं होता। जब मीना के मामा रितु का हाथ पकड़ते थे, तब उसे अच्छा नहीं लगता था, लेकिन उसे मीना का हाथ पकड़ना अच्छा लगता था। सोच कर बताओ, ऐसा अंतर क्यों था?
Solution: ऐसा इसलिए था क्योंकि रितु को मीना के मामा से डर लगता था, शायद उनकी आदतें या व्यवहार ऐसा था जिससे रितु असहज महसूस करती थी। दूसरी ओर, मीना उसकी दोस्त थी और उसका हाथ पकड़ना रितु को सुरक्षित और सहज महसूस कराता था। स्पर्श का अनुभव व्यक्ति के इरादे, रिश्ते और उस व्यक्ति के प्रति हमारे विश्वास पर निर्भर करता है।

Common mistakes

  • साझा करने के महत्व को कम आंकना।
  • पारिवारिक निर्णयों में केवल एक व्यक्ति की राय को महत्व देना।
  • लिंग के आधार पर अलग-अलग नियमों को स्वीकार करना।
  • दूसरों के साथ व्यवहार करते समय व्यक्तिगत सीमाओं को अनदेखा करना।
  • झगड़ों को सुलझाने के बजाय उन्हें बढ़ने देना।

Revision tips

  • घर में होने वाले झगड़ों के बारे में सोचें और उन्हें सुलझाने के तरीकों पर चर्चा करें।
  • साझा करने के महत्व को समझने के लिए अपने अनुभवों को याद करें।
  • परिवार में निर्णय कैसे लिए जाते हैं, इस पर ध्यान दें और अपनी राय बनाएं।
  • लिंग समानता के बारे में अध्याय में दिए गए तर्कों को समझें।
  • अध्याय में दिए गए विभिन्न परिदृश्यों पर विचार करें और सोचें कि आप क्या करते।

Practice MCQs

Q1. घर में किसी वस्तु को लेकर झगड़ा होने पर उसे कौन सुलझा सकता है?

Q2. अक्षय की दादी-माँ ने उसे अनिल के घर कुछ भी खाने-पीने से मना क्यों किया?

Q3. अगर लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग नियम हों, तो क्या होगा?

Q4. पिलू मामी ने कुल्फी वाले को कम पैसे क्यों दिए?

Q5. रितु को मीना के मामा का छूना बुरा क्यों लगा?

Frequently asked questions

कक्षा 4 के EVS के अध्याय 22 का मुख्य विषय क्या है?

अध्याय 22, 'दुनिया मेरे घर में', मुख्य रूप से घर के भीतर होने वाले सामाजिक मुद्दों जैसे कि साझा करना, झगड़े, नियम बनाना और पारिवारिक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं पर केंद्रित है।

ये NCERT समाधान छात्रों की मदद कैसे करते हैं?

ये समाधान छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को गहराई से समझने, प्रश्नों के उत्तर देने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करते हैं।

क्या इन समाधानों में प्रश्नों के उत्तर विस्तृत हैं?

हाँ, प्रत्येक प्रश्न का उत्तर विस्तृत और स्पष्ट तरीके से दिया गया है, जिसमें आवश्यक स्पष्टीकरण भी शामिल हैं।

क्या अध्याय में लिंग समानता पर चर्चा की गई है?

हाँ, अध्याय में इस बात पर चर्चा की गई है कि क्या लड़का-लड़की और आदमी-औरत के लिए अलग-अलग नियम होने चाहिए और इसके परिणामों पर विचार किया गया है।

अक्षय की कहानी से क्या सीखने को मिलता है?

अक्षय की कहानी हमें सिखाती है कि रीति-रिवाजों के कारण दूसरों के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर सही निर्णय लेना चाहिए।

क्या इन समाधानों में कोई अभ्यास प्रश्न भी शामिल हैं?

हाँ, इस पृष्ठ में अध्याय के विभिन्न भागों से संबंधित अभ्यास प्रश्न और उनके विस्तृत समाधान शामिल हैं।

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