कक्षा 12 भौतिकी NCERT समाधान: अध्याय 1 - वैधुत आवेश तथा क्षेत्र
यह पृष्ठ कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 1, 'वैधुत आवेश तथा क्षेत्र' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें कूलॉम के नियम के अनुप्रयोग, आवेशों के क्वांटमीकरण और संरक्षण के सिद्धांत जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को शामिल किया गया है। समाधानों में प्रत्येक प्रश्न को स्पष्ट रूप से समझाया गया है, जिसमें आवश्यक सूत्र, गणनाएँ और भौतिकी के सिद्धांतों का अनुप्रयोग शामिल है। यह सामग्री छात्रों को इन विषयों की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए डिज़ाइन की गई है। विस्तृत स्पष्टीकरण और चरण-दर-चरण समाधान छात्रों को जटिल समस्याओं को हल करने में मदद करते हैं, जिससे यह विषय परीक्षा के लिए अधिक सुलभ हो जाता है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | भौतिकी विज्ञान-I |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 1. वैधुत आवेश तथा क्षेत्र |
Chapter summary
कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 1, 'वैधुत आवेश तथा क्षेत्र' के लिए ये NCERT समाधान, कूलॉम के नियम के अनुप्रयोगों, आवेशों के बीच बलों की गणना, और आवेशों के क्वांटमीकरण तथा संरक्षण के सिद्धांतों पर केंद्रित हैं। समाधानों में प्रत्येक अभ्यास प्रश्न का विस्तृत विश्लेषण, गणितीय व्युत्पत्ति और भौतिक स्थिरांकों का उपयोग शामिल है। यह छात्रों को इन मूलभूत विद्युत चुम्बकीय अवधारणाओं को समझने और लागू करने में मदद करता है।
Learning outcomes
- कूलॉम के नियम का उपयोग करके दो बिंदु आवेशों के बीच बल की गणना करना सीखें।
- आवेशों के क्वांटमीकरण के सिद्धांत को समझें और इसके निहितार्थों को जानें।
- आवेश संरक्षण के नियम को समझें और विभिन्न परिदृश्यों में इसे कैसे लागू किया जाता है।
- स्थूल पैमाने पर आवेशों के व्यवहार में क्वांटमीकरण की उपेक्षा के कारणों का विश्लेषण करें।
- भौतिक स्थिरांकों का उपयोग करके विमाहीन अनुपातों की गणना करें और उनके महत्व को समझें।
Topics covered
Paper topics
- वैधुत आवेश
- आवेशों का क्वांटमीकरण
- आवेश संरक्षण का नियम
- कूलॉम का नियम
- बिंदु आवेशों के बीच बल
- स्थिर वैद्युत बल
- भौतिक स्थिरांक
- विमाहीन राशियाँ
- आवेशों का स्थानांतरण
- आवेशित वस्तुओं के युग्म
Important topics
- कूलॉम का नियम और उसके अनुप्रयोग
- आवेशों के गुण (क्वांटमीकरण, संरक्षण)
- स्थिर वैद्युत बल की गणना
- विमाहीन अनुपातों का महत्व
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Questions and Solutions
प्रश्न 1.1
इस प्रश्न में, हमें दो छोटे आवेशित गोलों के बीच लगने वाले स्थिर वैद्युत बल की गणना करनी है। हम कूलॉम के नियम का उपयोग करेंगे।
दिए गए मान हैं:
- पहला आवेश,
- दूसरा आवेश,
- दोनों आवेशों के बीच की दूरी,
सबसे पहले, दूरी को मीटर में बदलें:
कूलॉम के नियम के अनुसार, दो बिंदु आवेशों के बीच लगने वाला बल () इस प्रकार दिया जाता है:
जहाँ एक स्थिरांक है।
अब, दिए गए मानों को सूत्र में रखें:
गणना करने पर:
चूंकि दोनों आवेश धनात्मक हैं, इसलिए उनके बीच प्रतिकर्षण बल लगेगा।
अतः, दोनों गोलों के बीच N का प्रतिकर्षी बल लगता है।
प्रश्न 1.2
- दोनों गोलों के बीच कितनी दूरी है?
- दूसरे गोले पर पहले गोले के कारण कितना बल लगता है?
इस प्रश्न में, हमें दो आवेशित गोलों के बीच की दूरी और एक गोले द्वारा दूसरे पर लगाए गए बल की गणना करनी है। हम कूलॉम के नियम का उपयोग करेंगे।
दिए गए मान हैं:
- पहला आवेश,
- दूसरा आवेश,
- दोनों आवेशों के बीच लगने वाला बल,
भाग (a): दोनों गोलों के बीच की दूरी ज्ञात करना
हम कूलॉम के नियम का उपयोग करते हैं:
जहाँ दोनों गोलों के बीच की दूरी है। हम के लिए सूत्र को पुनर्व्यवस्थित करते हैं:
स्थिरांक का मान है।
मानों को सूत्र में रखने पर:
गणना करने पर:
अब, का मान ज्ञात करने के लिए वर्गमूल लें:
इस दूरी को सेंटीमीटर में बदलने पर:
अतः, दोनों गोलों के बीच की दूरी 12 cm है।
भाग (b): दूसरे गोले पर पहले गोले के कारण बल ज्ञात करना
न्यूटन के गति के तृतीय नियम के अनुसार, प्रत्येक क्रिया के लिए एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। स्थिर वैद्युत बल के संदर्भ में, इसका मतलब है कि यदि पहला आवेश दूसरे आवेश पर एक बल लगाता है, तो दूसरा आवेश पहले आवेश पर एक समान परिमाण का लेकिन विपरीत दिशा में बल लगाएगा। अर्थात, ।
प्रश्न में दिया गया बल (0.2 N) पहले गोले पर दूसरे गोले के कारण या दूसरे गोले पर पहले गोले के कारण लगने वाला बल है। चूँकि दोनों आवेशों के चिन्ह समान (धनात्मक) हैं, बल प्रतिकर्षी होगा।
इसलिए, दूसरे गोले पर पहले गोले के कारण लगने वाला बल भी 0.2 N होगा, और यह बल प्रतिकर्षी प्रकृति का होगा।
अतः, दूसरे गोले पर पहले गोले के कारण 0.2 N का प्रतिकर्षी बल लगता है।
प्रश्न 1.3
हमें यह सिद्ध करना है कि अनुपात विमाहीन है और फिर इसका मान ज्ञात करना है।
भाग 1: विमा की जाँच
हम प्रत्येक पद की विमाएँ लिखते हैं:
- (कूलॉम स्थिरांक) की विमा
- (इलेक्ट्रॉन का आवेश) की विमा , इसलिए की विमा
- (गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक) की विमा
- (इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान) की विमा
- (प्रोटॉन का द्रव्यमान) की विमा
अब, अनुपात की विमा ज्ञात करते हैं:
अंश की विमा
हर की विमा
अतः, अनुपात की विमा है:
यह दर्शाता है कि एक विमाहीन राशि है।
भाग 2: अनुपात का मान ज्ञात करना
दिए गए भौतिक नियतांकों के मान हैं:
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
गणना करने पर:
लगभग मान है।
भाग 3: अनुपात का महत्व
यह अनुपात एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन के बीच लगने वाले विद्युत स्थैतिक बल () और उनके बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल () का अनुपात है।
अर्थात,
चूंकि यह अनुपात बहुत बड़ा () है, इसका मतलब है कि एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन के बीच विद्युत स्थैतिक बल उनके बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल की तुलना में बहुत अधिक शक्तिशाली होता है।
प्रश्न 1.4
(b) स्थूल अथवा बड़े पैमाने पर वैद्युत आवेशों से व्यवहार करते समय हम वैद्युत आवेश के क्वांटमीकरण की उपेक्षा कैसे कर सकते हैं?
भाग (a): आवेश के क्वांटमीकरण का तात्पर्य
जब हम कहते हैं कि "किसी वस्तु का वैद्युत आवेश क्वांटीकृत है", तो इसका अर्थ है कि किसी भी विलगित वस्तु पर कुल आवेश, मूल आवेश (इलेक्ट्रॉन या प्रोटॉन पर आवेश) का एक पूर्णांक गुणक होता है। दूसरे शब्दों में, आवेश को मनमाने ढंग से किसी भी मान पर नहीं लिया जा सकता, बल्कि यह केवल मूल आवेश के पैकेट (क्वांटा) के रूप में ही स्थानांतरित या संग्रहीत हो सकता है।
गणितीय रूप में, किसी वस्तु पर आवेश () को इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है:
जहाँ:
- एक धनात्मक पूर्णांक है (जैसे 1, 2, 3, ...)।
- मूल आवेश का परिमाण है, जिसका मान होता है।
इसका मतलब है कि हम कभी भी या जैसे आवेश नहीं देख सकते; आवेश हमेशा के पूर्ण गुणकों में ही पाया जाता है।
भाग (b): स्थूल पैमाने पर क्वांटमीकरण की उपेक्षा
स्थूल (बड़े) पैमाने पर, जब हम आवेशों से व्यवहार करते हैं, तो हम अक्सर आवेश के क्वांटमीकरण की उपेक्षा कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि स्थूल वस्तुओं पर आवेश की मात्रा बहुत बड़ी होती है, जो सामान्यतः (माइक्रोकूलॉम) या उससे अधिक होती है।
जबकि मूल आवेश बहुत ही सूक्ष्म मान है। जब किसी स्थूल वस्तु पर आवेश जोड़ा या हटाया जाता है, तो इलेक्ट्रॉनों की संख्या बहुत बड़ी होती है। उदाहरण के लिए, आवेश प्राप्त करने के लिए लगभग इलेक्ट्रॉन स्थानांतरित करने पड़ते हैं।
इस विशाल संख्या के कारण, आवेश में होने वाला परिवर्तन (जो के रूप में होता है) कुल आवेश की तुलना में बहुत छोटा होता है। इसलिए, स्थूल पैमाने पर, आवेश को लगभग एक सतत राशि के रूप में माना जा सकता है, और क्वांटमीकरण के प्रभाव को नगण्य माना जा सकता है।
प्रश्न 1.5
यह प्रेक्षण आवेश संरक्षण के नियम के साथ पूरी तरह से सामंजस्य रखता है। आवेश संरक्षण का नियम कहता है कि किसी विलगित निकाय का कुल आवेश स्थिर रहता है; इसे न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, केवल एक रूप से दूसरे रूप में स्थानांतरित किया जा सकता है।
जब काँच की छड़ को रेशम के कपड़े से रगड़ा जाता है, तो निम्नलिखित प्रक्रिया होती है:
- प्रारंभिक अवस्था: रगड़ने से पहले, काँच की छड़ और रेशम का कपड़ा दोनों ही वैद्युत रूप से उदासीन होते हैं। इसका मतलब है कि उन पर कुल आवेश शून्य है (धनात्मक और ऋणात्मक आवेशों की संख्या बराबर है)।
- रगड़ने की प्रक्रिया: रगड़ने से छड़ से कुछ इलेक्ट्रॉन रेशम के कपड़े पर स्थानांतरित हो जाते हैं।
- परिणाम:
- चूंकि काँच की छड़ से इलेक्ट्रॉन निकल जाते हैं, उस पर इलेक्ट्रॉनों की कमी हो जाती है। इसलिए, उस पर धनात्मक आवेश आ जाता है (क्योंकि प्रोटॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों से अधिक हो जाती है)।
- चूंकि रेशम के कपड़े पर इलेक्ट्रॉन आ जाते हैं, उस पर इलेक्ट्रॉनों की अधिकता हो जाती है। इसलिए, उस पर ऋणात्मक आवेश आ जाता है (क्योंकि इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों से अधिक हो जाती है)।
- आवेश संरक्षण: महत्वपूर्ण बात यह है कि काँच की छड़ पर जितना धनात्मक आवेश आता है, रेशम के कपड़े पर ठीक उतना ही ऋणात्मक आवेश आता है। यदि हम छड़ और कपड़े को एक विलगित निकाय मानें, तो रगड़ने से पहले कुल आवेश शून्य था, और रगड़ने के बाद भी कुल आवेश शून्य ही रहता है (धनात्मक आवेश और ऋणात्मक आवेश एक दूसरे को निरस्त कर देते हैं)।
यह प्रक्रिया दर्शाती है कि आवेश उत्पन्न नहीं हुआ है, बल्कि केवल एक वस्तु (काँच की छड़) से दूसरी वस्तु (रेशम के कपड़े) पर स्थानांतरित हुआ है। यही आवेश संरक्षण का सिद्धांत है। इसी प्रकार, अन्य वस्तुओं के युग्मों को रगड़ने पर भी आवेश का स्थानांतरण होता है, जिससे वे आवेशित हो जाते हैं, लेकिन कुल आवेश हमेशा संरक्षित रहता है।
Common mistakes
- दूरी को मीटर में परिवर्तित करने में त्रुटियाँ (जैसे cm को m में बदलना)।
- आवेशों के चिन्हों (धनात्मक/ऋणात्मक) को ध्यान में न रखना, विशेषकर जब बल की प्रकृति (आकर्षक/प्रतिकर्षी) पूछी जाती है।
- सूत्रों में भौतिक स्थिरांकों के मानों को गलत रखना या उनकी इकाइयों को गलत समझना।
- गणितीय गणनाओं में घातांकों (powers of 10) को संभालने में गलतियाँ।
- विमाहीन राशियों की गणना करते समय विमाओं (dimensions) को सही ढंग से न घटाना।
Revision tips
- कूलॉम के नियम के सूत्र को अच्छी तरह याद करें और विभिन्न आवेशों व दूरियों के लिए इसके अनुप्रयोग का अभ्यास करें।
- आवेशों के क्वांटमीकरण और संरक्षण के सिद्धांतों को उदाहरणों के साथ समझें।
- सभी भौतिक स्थिरांकों (जैसे k, e, G) के मान और उनकी विमाएँ याद रखें।
- प्रत्येक प्रश्न के हल में दिए गए चरणों का पालन करें और स्वयं गणनाएँ दोहराएँ।
- हल किए गए प्रश्नों के आधार पर स्वयं कुछ नए प्रश्न बनाकर हल करने का प्रयास करें।
Practice MCQs
Q1. दो बिंदु आवेशों के बीच लगने वाला स्थिर वैद्युत बल किस पर निर्भर करता है?
Explanation: कूलॉम के नियम के अनुसार, दो बिंदु आवेशों के बीच लगने वाला बल उनके आवेशों के गुणनफल के समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
Q2. किसी वस्तु पर आवेश का क्वांटमीकरण का क्या अर्थ है?
Explanation: आवेश के क्वांटमीकरण का अर्थ है कि किसी भी वस्तु पर कुल आवेश मूल आवेश (इलेक्ट्रॉन या प्रोटॉन पर आवेश) का एक पूर्णांक गुणक होता है, अर्थात q = ±ne।
Q3. स्थूल पैमाने पर आवेशों के व्यवहार में क्वांटमीकरण की उपेक्षा क्यों की जा सकती है?
Explanation: स्थूल पैमाने पर, आवेशों की संख्या इतनी अधिक होती है कि आवेशों के स्थानांतरण से होने वाला परिवर्तन (जो मूल आवेश 'e' का गुणक होता है) कुल आवेश की तुलना में बहुत छोटा होता है, जिससे आवेश सतत प्रतीत होता है।
Q4. यदि दो आवेशित गोलों के बीच की दूरी दोगुनी कर दी जाए, तो उनके बीच लगने वाला बल कितना हो जाएगा?
Explanation: कूलॉम के नियम के अनुसार, बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यदि दूरी दोगुनी (2r) हो जाती है, तो बल (1/(2r)^2) = 1/(4) हो जाता है, अर्थात बल चौथाई रह जाता है।
Q5. आवेश संरक्षण का नियम क्या कहता है?
Explanation: आवेश संरक्षण का नियम बताता है कि किसी विलगित निकाय का कुल आवेश स्थिर रहता है; इसे न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
Frequently asked questions
कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 1 में मुख्य रूप से किन अवधारणाओं को शामिल किया गया है?
इस अध्याय में मुख्य रूप से वैधुत आवेश, कूलॉम का नियम, बिंदु आवेशों के बीच बल की गणना, आवेशों का क्वांटमीकरण और आवेश संरक्षण के नियम जैसी अवधारणाओं को शामिल किया गया है।
कूलॉम के नियम का सूत्र क्या है और यह क्या बताता है?
कूलॉम के नियम का सूत्र F = (1/4πε₀) * (q₁q₂/r²) है। यह बताता है कि दो बिंदु आवेशों के बीच लगने वाला स्थिर वैद्युत बल उनके आवेशों के गुणनफल के समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
आवेश के क्वांटमीकरण से क्या तात्पर्य है?
आवेश के क्वांटमीकरण का अर्थ है कि किसी भी वस्तु पर कुल आवेश, मूल आवेश (इलेक्ट्रॉन या प्रोटॉन पर आवेश) का एक पूर्णांक गुणक होता है, अर्थात q = ±ne, जहाँ n एक पूर्णांक है।
स्थूल पैमाने पर आवेशों के व्यवहार में क्वांटमीकरण की उपेक्षा क्यों की जाती है?
स्थूल पैमाने पर, आवेशों की संख्या बहुत अधिक होती है, जिससे आवेशों के स्थानांतरण से होने वाला परिवर्तन कुल आवेश की तुलना में बहुत छोटा होता है, इसलिए आवेश सतत प्रतीत होता है।
इन NCERT समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए कैसे किया जा सकता है?
ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए विस्तृत, चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने और समस्याओं को हल करने की विधि सीखने में मदद मिलती है, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी है।
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