कक्षा 11 भूगोल: भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 11 भूगोल के अध्याय 7, 'भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें विभिन्न भू-आकृतियों के निर्माण और विकास की प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें नदी अपरदन, हिमनद क्रिया और चूना-पत्थर प्रदेशों में रासायनिक अपक्षय जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाएँ शामिल हैं। समाधानों में अधोमुख कटाव, गॉर्ज, कैनियन, लेपीज, घाटी रंध्र और हिमनद निक्षेपण स्थलरूपों की व्याख्या की गई है। यह सामग्री छात्रों को स्थलाकृति विकास के विभिन्न चरणों और कारकों को समझने में मदद करती है, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 7. भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास |
Chapter summary
अध्याय 7 'भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास' के ये NCERT समाधान छात्रों को विभिन्न भू-आकृतिक प्रक्रियाओं जैसे अपरदन, अपक्षय और निक्षेपण से बनने वाली स्थलाकृतियों को समझने में मदद करते हैं। इसमें नदी घाटियों, हिमनद घाटियों और चूना-पत्थर प्रदेशों में विकसित होने वाली विशिष्ट आकृतियों पर प्रकाश डाला गया है। समाधानों में स्थलरूप विकास के विभिन्न चरणों और उनके कारणों का विस्तृत विश्लेषण शामिल है।
Learning outcomes
- भू-आकृतियों के विकास की विभिन्न अवस्थाओं को समझना।
- नदी अपरदन से बनने वाली स्थलाकृतियों (जैसे गॉर्ज, कैनियन) की पहचान करना।
- रासायनिक और यांत्रिक अपक्षय के बीच अंतर को समझना।
- चूना-पत्थर प्रदेशों में विकसित होने वाली विशिष्ट स्थलाकृतियों (जैसे लेपीज, घाटी रंध्र) का अध्ययन करना।
- हिमनद निक्षेपण से बनने वाले स्थलरूपों (जैसे हिमोढ़, एस्कर) को जानना।
- स्थलरूप विकास में विभिन्न कारकों की भूमिका का विश्लेषण करना।
Topics covered
Paper topics
- भू-आकृतियों का विकास
- अपरदन
- अपक्षय (यांत्रिक और रासायनिक)
- नदी अपरदन स्थलाकृतियाँ (गॉर्ज, कैनियन, विसर्प)
- हिमनद अपरदन और निक्षेपण स्थलाकृतियाँ (सर्क, हिमोढ़, एस्कर)
- चूना-पत्थर प्रदेश की स्थलाकृतियाँ (लेपीज, घाटी रंध्र, डोलाइन)
- स्थलरूप विकास की अवस्थाएँ (तरुणावस्था, प्रौढ़ावस्था, वृद्धावस्था)
- भौम जल प्रवाह
- नदी विकास
Important topics
- भू-आकृतियों के विकास की अवस्थाएँ
- नदी अपरदन से निर्मित स्थलाकृतियाँ
- हिमनद निक्षेपण स्थलाकृतियाँ
- चूना-पत्थर प्रदेशों में भौम जल का कार्य
- रासायनिक बनाम यांत्रिक अपक्षय
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Questions and Solutions
बहुवैकल्पिक प्रश्न 1
बहुवैकल्पिक प्रश्न 2
बहुवैकल्पिक प्रश्न 3
बहुवैकल्पिक प्रश्न 4
बहुवैकल्पिक प्रश्न 5
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।
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Common mistakes
- भू-आकृतियों के विकास की विभिन्न अवस्थाओं में भ्रमित होना।
- रासायनिक और यांत्रिक अपक्षय के बीच अंतर स्पष्ट न कर पाना।
- हिमनद निक्षेपण स्थलरूपों के नाम और उनकी अवस्थिति में गलती करना।
- स्थलरूपों के निर्माण की प्रक्रियाओं को ठीक से न समझ पाना।
Revision tips
- प्रत्येक भू-आकृतिक प्रक्रिया (अपरदन, अपक्षय, निक्षेपण) से संबंधित स्थलाकृतियों को सूचीबद्ध करें।
- नदी, हिमनद और चूना-पत्थर प्रदेशों की विशिष्ट स्थलाकृतियों के बीच अंतर को समझें।
- स्थलरूप विकास के विभिन्न चरणों (तरुणावस्था, प्रौढ़ावस्था, वृद्धावस्था) को उदाहरणों सहित याद करें।
- महत्वपूर्ण शब्दावली जैसे गॉर्ज, कैनियन, लेपीज, सर्क, एस्कर आदि की परिभाषाओं को स्पष्ट करें।
Practice MCQs
Q1. स्थलरूप विकास की किस अवस्था में अधोमुख कटाव (downward erosion) प्रमुख होता है?
Explanation: तरुणावस्था में नदी का ढाल तीव्र होता है, जिससे अधोमुख कटाव अधिक प्रभावी होता है और घाटी की गहराई बढ़ती है।
Q2. U-आकार की घाटी का निर्माण सामान्यतः किस अपरदनकारी शक्ति द्वारा होता है?
Explanation: हिमनद अपनी चौड़ाई और गहराई के कारण घाटियों को U-आकार में काटते हैं, जबकि नदियाँ V-आकार की घाटियाँ बनाती हैं।
Q3. रासायनिक अपक्षय प्रक्रिया किन प्रदेशों में अधिक सक्रिय होती है?
Explanation: आर्दै प्रदेशों में जल की अधिकता के कारण रासायनिक क्रियाएँ (जैसे घोलन, ऑक्सीकरण) अधिक प्रभावी होती हैं, जिससे रासायनिक अपक्षय बढ़ता है।
Q4. लेपीज (Lapies) स्थलरूप किस प्रकार के प्रदेशों में पाए जाते हैं?
Explanation: लेपीज चूना-पत्थर प्रदेशों में वर्षा जल के रासायनिक अपक्षय (घोलन) से बनने वाले खुरदुरे, नुकीले कटक और खाँच वाले स्थलरूप हैं।
Q5. हिमनद द्वारा निक्षेपण से निर्मित रैखिक स्थलरूप कौन सा है?
Explanation: एस्कर हिमनद के पिघलने से बनी धाराओं द्वारा बर्फ के नीचे या किनारों में जमा की गई रेत और बजरी की लंबी, घुमावदार कटकें होती हैं।
Frequently asked questions
भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास अध्याय में मुख्य रूप से किन प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है?
इस अध्याय में मुख्य रूप से अपरदन, अपक्षय और निक्षेपण जैसी प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है, जिनसे विभिन्न स्थलाकृतियों का निर्माण और विकास होता है।
नदी द्वारा निर्मित गॉर्ज और कैनियन में क्या अंतर है?
गॉर्ज और कैनियन दोनों ही खड़ी ढाल वाली गहरी घाटियाँ हैं जो नदी अपरदन से बनती हैं। कैनियन सामान्यतः गॉर्ज से अधिक चौड़े और विस्तृत होते हैं।
चूना-पत्थर प्रदेशों में धरातलीय जल की अपेक्षा भौम जल प्रवाह अधिक क्यों होता है?
चूना-पत्थर रासायनिक रूप से घुलनशील होता है, जिससे जल उसमें रिसकर भूमिगत हो जाता है। इस कारण धरातलीय प्रवाह कम और भौम जल प्रवाह अधिक होता है।
हिमनद द्वारा निर्मित प्रमुख निक्षेपण स्थलरूप कौन से हैं?
हिमनद द्वारा निर्मित प्रमुख निक्षेपण स्थलरूपों में हिमोढ़ (अंतस्थ, पार्श्विक, मध्यस्थ) और एस्कर शामिल हैं।
स्थलरूप विकास की विभिन्न अवस्थाओं का क्या महत्व है?
स्थलरूप विकास की अवस्थाएँ (तरुणावस्था, प्रौढ़ावस्था, वृद्धावस्था) नदी घाटियों के विकास और उनमें होने वाले कटाव व निक्षेपण की प्रक्रियाओं को समझने में मदद करती हैं।
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