कक्षा 11 भूगोल अध्याय 14: महासागरीय जल संचलन NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 11 के छात्रों के लिए 'भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत' पुस्तक के अध्याय 14, 'महासागरीय जल संचलन' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें महासागरीय जल की गतियों के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है, जैसे कि तरंगें, ज्वार-भाटा और महासागरीय धाराएँ। समाधानों में तरंगों की उत्पत्ति और ऊर्जा स्रोत, ज्वार-भाटा के कारण (चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल तथा अपकेंद्रीय बल), और ज्वार-भाटा का नौसंचालन में महत्व समझाया गया है। यह विस्तृत व्याख्या छात्रों को इन जटिल भौगोलिक अवधारणाओं को समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectभौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter14. महासागरीय जल संचलन

Chapter summary

अध्याय 14 'महासागरीय जल संचलन' के ये NCERT समाधान महासागरीय जल की गतियों पर केंद्रित हैं। इसमें तरंगों की प्रकृति, उनकी ऊर्जा प्राप्ति के स्रोत, और ज्वार-भाटा की उत्पत्ति के खगोलीय कारणों (सूर्य, चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण और अपकेंद्रीय बल) का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। साथ ही, नौसंचालन और बंदरगाहों के लिए ज्वार-भाटा के व्यावहारिक महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को महासागरीय गतियों की वैज्ञानिक समझ विकसित करने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • महासागरीय तरंगों की परिभाषा और उनकी ऊर्जा के स्रोत को समझना।
  • ज्वार-भाटा की उत्पत्ति के खगोलीय कारणों का विश्लेषण करना।
  • उपभू, अपभू, उपसौर और अपसौर जैसी खगोलीय स्थितियों को पहचानना।
  • ज्वार-भाटा के प्रकारों और उनके नौसंचालन में महत्व को समझना।
  • महासागरीय जल संचलन से संबंधित विभिन्न शब्दावली को परिभाषित करना।

Topics covered

Paper topics

  • महासागरीय जल संचलन
  • तरंगें
  • तरंगों की उत्पत्ति
  • तरंगों की ऊर्जा
  • ज्वार-भाटा
  • ज्वार-भाटा के कारण
  • चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण
  • सूर्य का गुरुत्वाकर्षण
  • अपकेंद्रीय बल
  • उपभू और अपभू
  • वृहत ज्वार
  • नौसंचालन में ज्वार-भाटा का महत्व

Important topics

  • तरंगों की उत्पत्ति और ऊर्जा
  • ज्वार-भाटा के कारण (गुरुत्वाकर्षण और अपकेंद्रीय बल)
  • उपभू और अपभू की स्थिति
  • वृहत ज्वार और लघु ज्वार
  • नौसंचालन में ज्वार-भाटा का महत्व

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Questions and Solutions

बहुवैकल्पिक प्रश्न 1

प्रश्न 1: महासागरीय जल की ऊपर एवं नीचे की गति किससे संबंधित है?
  • (क) ज्वार
  • (ख) तरंग
  • (ग) धाराएँ।
  • (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Solution: महासागरीय जल की ऊपर और नीचे की आवधिक गति को ज्वार कहा जाता है। यह गति मुख्य रूप से चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण होती है। तरंगें सतह पर ऊर्जा की गति हैं और धाराएँ जल का क्षैतिज प्रवाह हैं। इसलिए, सही उत्तर (क) ज्वार है।

बहुवैकल्पिक प्रश्न 2

प्रश्न 2: वृहत ज्वार आने का क्या कारण है?
  • (क) सूर्य और चंद्रमा का पृथ्वी पर एक ही दिशा में गुरुत्वाकर्षण बल
  • (ख) सूर्य और चंद्रमा द्वारा एक दूसरे की विपरीत दिशा से पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण बल
  • (ग) तटरेखा का दंतुरित होना
  • (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Solution: वृहत ज्वार (Spring Tide) तब आते हैं जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी लगभग एक सीध में होते हैं। इस स्थिति में, सूर्य और चंद्रमा दोनों का गुरुत्वाकर्षण बल एक ही दिशा में कार्य करता है, जिससे ज्वार का प्रभाव बढ़ जाता है और जल का स्तर सामान्य से अधिक ऊपर उठता है। इसलिए, सही उत्तर (क) है।

बहुवैकल्पिक प्रश्न 3

प्रश्न 3: पृथ्वी तथा चंद्रमा की न्यूनतम दूरी कब होती है?
  • (क) अपसौर
  • (ख) उपसौर
  • (ग) उपभू
  • (घ) अपभू
Solution: जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है, तो इस स्थिति को उपभू (Perigee) कहा जाता है। अपभू (Apogee) वह स्थिति है जब चंद्रमा पृथ्वी से सबसे दूर होता है। उपसौर (Perihelion) वह स्थिति है जब पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट होती है, और अपसौर (Aphelion) वह स्थिति है जब पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर होती है। इसलिए, पृथ्वी तथा चंद्रमा की न्यूनतम दूरी की स्थिति को उपभू कहते हैं, जिसका सही उत्तर (ग) है।

बहुवैकल्पिक प्रश्न 4

प्रश्न 4: पृथ्वी उपसौर की स्थिति कब होती है?
  • (क) अक्तूबर
  • (ख) जुलाई
  • (ग) सितंबर
  • (घ) जनवरी
Solution: पृथ्वी उपसौर (Perihelion) की स्थिति में तब होती है जब वह सूर्य के सबसे निकट होती है। यह स्थिति सामान्यतः प्रत्येक वर्ष जनवरी माह में आती है। इसलिए, सही उत्तर (घ) जनवरी है।

लघु उत्तरीय प्रश्न 1

प्रश्न 1: तरंगें क्या हैं?
Solution: तरंगें वास्तव में महासागरीय सतह पर ऊर्जा की गति हैं, न कि जल की। ये तब उत्पन्न होती हैं जब वायु जल की सतह पर ऊर्जा स्थानांतरित करती है। इस प्रक्रिया में, जल-कण छोटे वृत्ताकार पथों में गति करते हैं। वायु के प्रभाव से ये तरंगें महासागर में आगे बढ़ती हैं और तट के पास पहुँचने पर इनकी गति धीमी हो जाती है। खुले महासागरों में बड़ी तरंगें पाई जाती हैं जो आगे बढ़ते हुए और बड़ी हो सकती हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न 2

प्रश्न 2: महासागरीय तरंगें ऊर्जा कहाँ से प्राप्त करती हैं?
Solution: महासागरीय तरंगें मुख्य रूप से वायु से ऊर्जा प्राप्त करती हैं। जब वायु जल की सतह के ऊपर से बहती है, तो वह जल को ऊर्जा स्थानांतरित करती है, जिससे तरंगें उत्पन्न होती हैं और गतिमान होती हैं। यह ऊर्जा तटरेखा पर निर्मुक्त होती है। अधिकतर तरंगें वायु के जल के विपरीत दिशा में गतिमान होने के कारण उत्पन्न होती हैं, जिससे वायु जल से ऊर्जा अवशोषित करती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न 3

प्रश्न 3: ज्वार-भाटा क्या है?
Solution: ज्वार-भाटा समुद्र के जल स्तर में होने वाली एक नियमित, आवधिक वृद्धि और कमी है। यह मुख्य रूप से चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण होता है। जब समुद्र का जल स्तर ऊपर उठता है और तटरेखा से आगे बढ़ जाता है, तो उसे ज्वार (High Tide) कहते हैं। इसके विपरीत, जब जल स्तर नीचे गिरता है और तटरेखा पीछे हट जाती है, तो उसे भाटा (Low Tide) कहते हैं। यह प्रक्रिया दिन में एक या दो बार होती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न 4

प्रश्न 4: ज्वार-भाटा उत्पन्न होने के क्या कारण हैं?
Solution: ज्वार-भाटा उत्पन्न होने के दो मुख्य कारण हैं: चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल और अपकेंद्रीय बल। चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी के उस भाग को अपनी ओर खींचता है जो उसके निकट होता है, जिससे वहाँ ज्वार आता है। पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न अपकेंद्रीय बल, पृथ्वी के उस भाग पर ज्वार उत्पन्न करता है जो चंद्रमा से विपरीत दिशा में होता है। सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल भी ज्वार-भाटा को प्रभावित करता है, लेकिन चंद्रमा की निकटता के कारण इसका प्रभाव कम होता है। ये दोनों बल मिलकर पृथ्वी पर दो प्रमुख ज्वार-भाटा उत्पन्न करते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न 5

प्रश्न 5: ज्वार-भाटा नौसंचालन से कैसे संबंधित है?
Solution: ज्वार-भाटा नौसंचालकों और मछुआरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनके कार्य-संबंधी योजनाओं में सहायता करता है। विशेष रूप से नदियों के मुहाने पर स्थित बंदरगाहों के लिए ज्वार की ऊँचाई बहुत मायने रखती है। जहाँ प्रवेश द्वार पर छिछली रोधिकाएँ होती हैं, वहाँ ऊँचे ज्वार के समय ही बड़े जहाज बंदरगाह में प्रवेश कर पाते हैं। उदाहरण के लिए, भारत में हुगली नदी पर स्थित कोलकाता बंदरगाह में बड़े जहाज ऊँचे ज्वार के समय ही प्रवेश कर पाते हैं। इस प्रकार, ज्वारीय प्रवाह नौसंचालन के लिए एक आवश्यक कारक है।

Common mistakes

  • तरंगों को जल की गति समझना, जबकि वे ऊर्जा की गति हैं।
  • ज्वार-भाटा के कारणों को केवल चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण तक सीमित रखना।
  • उपसौर और उपभू जैसी खगोलीय स्थितियों के बीच अंतर न कर पाना।

Revision tips

  • तरंगों और ज्वार-भाटा के बीच मुख्य अंतरों को सूचीबद्ध करें।
  • ज्वार-भाटा उत्पन्न करने वाले बलों (गुरुत्वाकर्षण और अपकेंद्रीय) को आरेख की सहायता से समझें।
  • नौसंचालन में ज्वार-भाटा के महत्व के उदाहरणों को याद करें।

Practice MCQs

Q1. महासागरीय जल की ऊपर और नीचे की गति मुख्य रूप से किससे संबंधित है?

Q2. वृहत ज्वार (Spring Tide) आने का मुख्य कारण क्या है?

Q3. पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की न्यूनतम दूरी की स्थिति को क्या कहते हैं?

Q4. महासागरीय तरंगें अपनी ऊर्जा मुख्य रूप से किससे प्राप्त करती हैं?

Q5. ज्वार-भाटा उत्पन्न होने में चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के अतिरिक्त कौन सा बल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है?

Frequently asked questions

कक्षा 11 भूगोल के अध्याय 14 में किन मुख्य अवधारणाओं को समझाया गया है?

अध्याय 14 'महासागरीय जल संचलन' में मुख्य रूप से महासागरीय तरंगों की उत्पत्ति, उनकी ऊर्जा के स्रोत, ज्वार-भाटा की परिभाषा, इसके उत्पन्न होने के खगोलीय कारण (चंद्रमा और सूर्य का गुरुत्वाकर्षण, अपकेंद्रीय बल), और ज्वार-भाटा का नौसंचालन में महत्व समझाया गया है।

तरंगें और ज्वार-भाटा में क्या अंतर है?

तरंगें महासागरीय सतह पर वायु द्वारा उत्पन्न ऊर्जा की गति हैं, जबकि ज्वार-भाटा चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल तथा अपकेंद्रीय बल के कारण महासागरीय जल के स्तर में होने वाली आवधिक वृद्धि (ज्वार) और कमी (भाटा) है।

ज्वार-भाटा के लिए चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल का क्या महत्व है?

चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल ज्वार-भाटा उत्पन्न करने में सबसे प्रमुख कारक है। सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल भी योगदान देता है, लेकिन चंद्रमा की निकटता के कारण इसका प्रभाव कम होता है। जब ये तीनों एक सीध में होते हैं तो वृहत ज्वार आते हैं।

उपभू (Perigee) और अपभू (Apogee) का क्या अर्थ है?

उपभू वह स्थिति है जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है, और अपभू वह स्थिति है जब चंद्रमा पृथ्वी से सबसे दूर होता है। इन दूरियों में परिवर्तन ज्वार की ऊँचाई को प्रभावित कर सकता है।

नौसंचालन में ज्वार-भाटा का क्या महत्व है?

ज्वार-भाटा नौसंचालकों और मछुआरों के लिए महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से नदियों के मुहाने पर स्थित बंदरगाहों में, ऊँचे ज्वार के समय बड़े जहाज प्रवेश कर पाते हैं, जो भाटे के समय संभव नहीं होता।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को महासागरीय जल संचलन की अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर देने में मदद मिलेगी।

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