कक्षा 11 भूगोल: भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 11 की भूगोल पुस्तक 'भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत' के अध्याय 6, 'भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें अपक्षय, अपरदन, बृहत संचलन और मृदा निर्माण जैसी महत्वपूर्ण भू-आकृतिक प्रक्रियाओं की गहन विवेचना की गई है। समाधान छात्रों को इन प्रक्रियाओं के कारणों, प्रभावों और अंतर्संबंधों को समझने में मदद करते हैं। विभिन्न प्रकार के प्रश्नों के उत्तर, जिनमें बहुवैकल्पिक प्रश्न और विस्तृत व्याख्या वाले प्रश्न शामिल हैं, छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक व्यापक संसाधन प्रदान करते हैं। यह सामग्री छात्रों को भू-आकृतिक प्रक्रियाओं की जटिलताओं को स्पष्ट करने और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए आवश्यक ज्ञान और समझ प्रदान करने में सहायक है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectभौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter6. भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ

Chapter summary

अध्याय 6, 'भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ', भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांतों पर केंद्रित है। यह छात्रों को उन विभिन्न प्रक्रियाओं से परिचित कराता है जो पृथ्वी की सतह को आकार देती हैं, जैसे कि अपक्षय, अपरदन, परिवहन और निक्षेपण। समाधानों में बहिर्जनिक और अंतर्जनित बलों की भूमिका, बृहत संचलन के प्रकार और मृदा निर्माण में अपक्षय के महत्व पर प्रकाश डाला गया है। यह अध्याय छात्रों को भू-आकृतियों के विकास को समझने के लिए एक आधार प्रदान करता है।

Learning outcomes

  • भू-आकृतिक प्रक्रियाओं के विभिन्न प्रकारों को समझना।
  • अपक्षय और अपरदन के बीच अंतर स्पष्ट करना।
  • बृहत संचलन के कारणों और प्रभावों का विश्लेषण करना।
  • मृदा निर्माण में अपक्षय की भूमिका का वर्णन करना।
  • पृथ्वी की सतह को आकार देने वाली बहिर्जनिक शक्तियों की पहचान करना।

Topics covered

Paper topics

  • भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ
  • अपक्षय (Weathering)
  • अपरदन (Erosion)
  • बृहत संचलन (Mass Movement)
  • निक्षेपण (Deposition)
  • मृदा निर्माण (Soil Formation)
  • बहिर्जनिक प्रक्रियाएँ (Exogenic Processes)
  • अंतर्जनित प्रक्रियाएँ (Endogenic Processes)
  • जलवायु का प्रभाव
  • चट्टानों का अपक्षय
  • भू-आकृतियों का विकास
  • अनाच्छादन (Denudation)

Important topics

  • अपक्षय के प्रकार और प्रक्रियाएँ
  • अपरदन के कारक और उनके कार्य
  • बृहत संचलन के कारण और प्रकार
  • मृदा निर्माण में अपक्षय की भूमिका
  • बहिर्जनिक और अंतर्जनित शक्तियों का अंतरसंबंध

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Questions and Solutions

बहुवैकल्पिक प्रश्न 1

प्रश्न 1: निम्नलिखित में से कौन-सी एक अनुक्रमिक प्रक्रिया है?
  • (क) निपेक्ष
  • (ख) ज्वालामुखीयता
  • (ग) पटल विरूपण
  • (घ) अपरदन
Solution: अपरदन एक अनुक्रमिक प्रक्रिया है जिसमें चट्टानों और मिट्टी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता है। यह एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है जो भू-आकृतियों को लगातार बदलती रहती है। निपेक्ष, ज्वालामुखीयता और पटल विरूपण अलग-अलग घटनाएँ हैं जो एक निश्चित समय पर घटित होती हैं। इसलिए, सही उत्तर (घ) अपरदन है।

बहुवैकल्पिक प्रश्न 2

प्रश्न 2: जलयोजन प्रक्रिया निम्नलिखित पदार्थों में से किसे प्रभावित करती है?
  • (क) ग्रेनाइट
  • (ख) कार्ट्ज़
  • (ग) चीका (क्ले) मिट्टी
  • (घ) लवण
Solution: जलयोजन प्रक्रिया में जल का आयतन में विस्तार होता है, जो विशेष रूप से लवणों जैसे जिप्सम को प्रभावित करता है। जब लवण पानी को अवशोषित करते हैं, तो वे फूल जाते हैं और विघटित हो जाते हैं, जिससे चट्टानें कमजोर हो जाती हैं। ग्रेनाइट, क्वार्ट्ज और चीका मिट्टी पर जलयोजन का प्रभाव नगण्य होता है। इसलिए, सही उत्तर (घ) लवण है।

बहुवैकल्पिक प्रश्न 3

प्रश्न 3: मलवा अवधान को किस श्रेणी में सम्मिलित किया जा सकता है?
  • (क) भूस्खलन
  • (ख) तीव्र प्रवाही बृहत संचलन
  • (ग) मंद प्रवाही बृहत संचलन
  • (घ) अवतलन/धसकन
Solution: मलवा अवधान (Debris Avalanche) एक प्रकार का तीव्र प्रवाही बृहत संचलन है। इसमें चट्टानों, मिट्टी और अन्य मलबे का एक बड़ा हिस्सा गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में तेजी से ढलान से नीचे खिसकता है। यह भूस्खलन से भी अधिक तीव्र और विनाशकारी हो सकता है। मंद प्रवाही बृहत संचलन जैसे कि रेंगना (creep) बहुत धीमी गति से होता है, और अवतलन/धसकन नीचे की ओर बैठना है। इसलिए, सही उत्तर (ख) तीव्र प्रवाही बृहत संचलन है।

लगभग 30 शब्दों में उत्तर दें 1

प्रश्न 1: अपक्षय पृथ्वी पर जैव विविधता के लिए उत्तरदायी है। कैसे?
Solution: अपक्षय चट्टानों को छोटे टुकड़ों में तोड़कर मृदा निर्माण में सहायता करता है, जो पौधों के विकास के लिए आवश्यक है। यह प्रक्रिया अपरदन और बृहत संचलन को भी संभव बनाती है, जिससे विभिन्न प्रकार के आवास बनते हैं। इन विविध आवासों में विभिन्न प्रकार के जीव पनपते हैं, जिससे जैव विविधता बढ़ती है।

लगभग 30 शब्दों में उत्तर दें 2

प्रश्न 2: बृहत संचलन जो वास्तविक, तीव्र एवं गोचर, अवगम्य (Perceptible) हैं, वे क्या हैं? सूचीबद्ध कीजिए।
Solution: तीव्र एवं अवगम्य बृहत संचलन में मुख्य रूप से भूस्खलन (Landslide) और मलवा अवधान (Debris Avalanche) शामिल हैं। ये प्रक्रियाएँ गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में चट्टानों और मलबे के तेजी से ढलान से नीचे खिसकने के कारण होती हैं, और इन्हें आसानी से देखा जा सकता है।

लगभग 30 शब्दों में उत्तर दें 3

प्रश्न 3: विभिन्न गतिशील एवं शक्तिशाली बहिर्जनिक भू-आकृतिक कारक क्या हैं तथा वे क्या प्रधान कार्य संपन्न करते हैं?
Solution: मुख्य गतिशील बहिर्जनिक भू-आकृतिक कारक अपक्षय, बृहत संचलन, अपरदन और परिवहन हैं। ये कारक सूर्य की ऊर्जा से संचालित होते हैं और पृथ्वी की सतह को समतल करने तथा विभिन्न भू-आकृतियों का निर्माण करने का प्रधान कार्य संपन्न करते हैं।

लगभग 30 शब्दों में उत्तर दें 4

प्रश्न 4: क्या मृदा निर्माण में अपक्षय एक आवश्यक अनिवार्यता है?
Solution: हाँ, मृदा निर्माण में अपक्षय एक आवश्यक अनिवार्यता है। अपक्षय प्रक्रियाएँ शैलों को छोटे कणों में तोड़कर मृदा निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री प्रदान करती हैं। इसके बिना, मूल शैल का विघटन और परिवर्तन संभव नहीं होगा, जो मृदा के निर्माण की पहली सीढ़ी है।

लगभग 150 शब्दों में उत्तर दें 1

प्रश्न 1: "हमारी पृथ्वी भू-आकृतिक प्रक्रियाओं के दो विरोधात्मक वर्गों के खेल का मैदान है," विवेचना कीजिए।
Solution: पृथ्वी की सतह पर दिखाई देने वाले विविध स्थलरूपों का निर्माण मुख्य रूप से दो विरोधी शक्तियों के निरंतर संघर्ष का परिणाम है: अंतर्जनित बल (Endogenic forces) और बहिर्जनित बल (Exogenic forces)। अंतर्जनित बल, जो पृथ्वी के आंतरिक भाग से उत्पन्न होते हैं, जैसे कि विवर्तनिक हलचलें, ज्वालामुखी और भूकंप, स्थलरूपों का निर्माण करते हैं या उनमें परिवर्तन लाते हैं (जैसे पर्वत निर्माण, पठारों का उत्थान)। ये बल पृथ्वी की सतह को ऊँचा उठाते हैं और उसमें विषमताएँ उत्पन्न करते हैं। इसके विपरीत, बहिर्जनित बल, जो पृथ्वी की सतह पर या उसके निकट कार्य करते हैं, जैसे कि अपरदन, परिवहन और निक्षेपण (जो क्रमशः सूर्य की ऊर्जा और गुरुत्वाकर्षण से संचालित होते हैं), इन ऊँचे उठे हुए स्थलरूपों को समतल करने का कार्य करते हैं। अपक्षय इन बहिर्जनित शक्तियों का प्रारंभिक चरण है, जो चट्टानों को तोड़ता है। अपरदन इन टूटे हुए पदार्थों को हटाता है, और निक्षेपण उन्हें अन्यत्र जमा कर देता है। इस प्रकार, पृथ्वी की सतह पर स्थलरूपों का निर्माण और विनाश एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जो इन दो विरोधाभासी शक्तियों के बीच संतुलन का परिणाम है।

Common mistakes

  • अपक्षय और अपरदन के बीच भ्रमित होना।
  • बृहत संचलन के विभिन्न प्रकारों को ठीक से वर्गीकृत न कर पाना।
  • भू-आकृतिक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक समय-सीमा को कम आंकना।
  • मृदा निर्माण में अपक्षय की महत्वपूर्ण भूमिका को अनदेखा करना।

Revision tips

  • प्रत्येक भू-आकृतिक प्रक्रिया के लिए मुख्य शब्दों और परिभाषाओं को याद करें।
  • अपक्षय, अपरदन और बृहत संचलन के बीच अंतर को स्पष्ट करने के लिए आरेख बनाएं।
  • मृदा निर्माण प्रक्रिया को समझने के लिए विभिन्न कारकों के बीच संबंध का अध्ययन करें।
  • पाठ में दिए गए उदाहरणों और केस स्टडीज पर ध्यान केंद्रित करें।

Practice MCQs

Q1. निम्नलिखित में से कौन-सी एक अनुक्रमिक (Sequential) प्रक्रिया है?

Q2. जलयोजन (Hydration) प्रक्रिया निम्नलिखित पदार्थों में से किसे मुख्य रूप से प्रभावित करती है?

Q3. मलवा अवधान (Debris Avalanche) को किस श्रेणी में सम्मिलित किया जा सकता है?

Q4. मृदा निर्माण में अपक्षय की क्या भूमिका है?

Q5. बहिर्जनिक भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ अपनी ऊर्जा मुख्य रूप से किससे प्राप्त करती हैं?

Frequently asked questions

भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ क्या हैं?

भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ वे प्राकृतिक प्रक्रियाएँ हैं जो पृथ्वी की सतह को आकार देती हैं, जैसे कि अपक्षय, अपरदन, परिवहन और निक्षेपण। ये प्रक्रियाएँ बहिर्जनिक (जैसे सूर्य की ऊर्जा से संचालित) और अंतर्जनित (पृथ्वी के आंतरिक बलों से संचालित) हो सकती हैं।

अपक्षय और अपरदन में क्या अंतर है?

अपक्षय चट्टानों का उनके स्थान पर ही टूटना-फूटना या विघटन है, जबकि अपरदन में टूटे हुए पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता है।

बृहत संचलन से आप क्या समझते हैं?

बृहत संचलन गुरुत्वाकर्षण के सीधे प्रभाव के कारण चट्टानों और मलबे का ढाल के अनुरूप स्थानांतरित होना है। इसमें भूस्खलन, मलवा अवधान आदि शामिल हैं।

मृदा निर्माण में अपक्षय क्यों महत्वपूर्ण है?

अपक्षय चट्टानों को छोटे कणों में तोड़कर मृदा निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री प्रदान करता है। यह आवरण प्रस्तर और मिट्टी के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है।

कक्षा 11 भूगोल के लिए ये NCERT समाधान कैसे सहायक हैं?

ये समाधान 'भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ' अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्नों के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को समझने और परीक्षा की तैयारी करने में मदद मिलती है।

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