कक्षा 11 अर्थशास्त्र: पर्यावरण और धारणीय विकास NCERT समाधान
यह खंड कक्षा 11 अर्थशास्त्र के छात्रों के लिए "पर्यावरण और धारणीय विकास" अध्याय पर विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें पर्यावरण की परिभाषा, संसाधनों की कमी के परिणाम, नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों का वर्गीकरण, प्रमुख पर्यावरणीय समस्याएँ जैसे वैश्विक ऊष्मन और ओजोन क्षरण, और भारत में पर्यावरणीय संकट में योगदान देने वाले विभिन्न कारक जैसे बढ़ती जनसंख्या, प्रदूषण, उपभोग पैटर्न, निरक्षरता, औद्योगीकरण, शहरीकरण, वनों की कटाई और वैश्विक ऊष्मन पर चर्चा की गई है। समाधान यह भी बताते हैं कि ये कारक सरकार के लिए क्या समस्याएँ पैदा करते हैं। यह खंड छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए इन महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझने और याद रखने में मदद करता है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 9. पर्यावरण और धारणीय विकास |
Chapter summary
कक्षा 11 अर्थशास्त्र के लिए "पर्यावरण और धारणीय विकास" पर NCERT समाधान, पर्यावरण की मूल बातें, संसाधन प्रबंधन और सतत विकास की चुनौतियों को कवर करते हैं। यह खंड नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों के बीच अंतर स्पष्ट करता है, वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों पर प्रकाश डालता है, और भारत में पर्यावरणीय गिरावट में योगदान करने वाले विभिन्न सामाजिक-आर्थिक कारकों के प्रभाव की पड़ताल करता है। समाधान छात्रों को परीक्षा के लिए इन अवधारणाओं को प्रभावी ढंग से समझने में सहायता करते हैं।
Learning outcomes
- पर्यावरण की अवधारणा और इसके महत्व को समझना।
- नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों के बीच अंतर करना।
- वैश्विक पर्यावरणीय समस्याओं जैसे वैश्विक ऊष्मन और ओजोन क्षरण की पहचान करना।
- भारत में पर्यावरणीय संकट में योगदान करने वाले विभिन्न कारकों का विश्लेषण करना।
- पर्यावरणीय समस्याओं से उत्पन्न सरकारी चुनौतियों को समझना।
Topics covered
Paper topics
- पर्यावरण की परिभाषा
- संसाधन निस्सरण और पुनर्जनन
- नवीकरणीय संसाधन
- गैर-नवीकरणीय संसाधन
- वैश्विक ऊष्मन
- ओजोन अपक्षय
- पर्यावरणीय संकट के कारक
- बढ़ती जनसंख्या का प्रभाव
- वायु-प्रदूषण
- जल-प्रदूषण
- उपभोग मानक
- औद्योगीकरण और शहरीकरण का प्रभाव
Important topics
- पर्यावरण की परिभाषा और कार्य
- नवीकरणीय बनाम गैर-नवीकरणीय संसाधन
- वैश्विक ऊष्मन और ओजोन अपक्षय
- पर्यावरणीय संकट में योगदान करने वाले कारक
- सतत विकास की आवश्यकता
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
प्रश्न 2
प्रश्न 3
संसाधनों को उनकी पुनर्जनन क्षमता के आधार पर दो मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
- नवीकरणीय संसाधन (Renewable Resources): ये वे संसाधन हैं जो प्राकृतिक रूप से एक निश्चित समय अवधि में पुनः उत्पन्न हो सकते हैं या जिनकी आपूर्ति असीमित होती है।
- गैर-नवीकरणीय संसाधन (Non-renewable Resources): ये वे संसाधन हैं जो सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और जिनका पुनर्जनन होने में लाखों वर्ष लगते हैं, या जो एक बार उपयोग होने पर समाप्त हो जाते हैं।
दिए गए संसाधनों का वर्गीकरण इस प्रकार है:
- नवीकरणीय संसाधन:
- (क) वृक्ष
- (ख) मछली
- (च) जल
- गैर-नवीकरणीय संसाधन:
- (ग) पेट्रोलियम
- (घ) कोयला
- (ङ) लौह अयस्क
प्रश्न 4
प्रश्न 5
भारत में पर्यावरण संकट में योगदान देने वाले विभिन्न कारक और उनसे सरकार के समक्ष उत्पन्न होने वाली समस्याएँ निम्नलिखित हैं:
(क) बढ़ती जनसंख्या: जनसंख्या वृद्धि से प्राकृतिक संसाधनों (जैसे भोजन, पानी, ऊर्जा) की माँग बढ़ती है, जबकि उनकी आपूर्ति सीमित है। इससे संसाधनों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, उनका अत्यधिक उपभोग होता है और पर्यावरणीय हानि होती है। सरकार के समक्ष सभी की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने और संसाधनों के समान वितरण की चुनौती उत्पन्न होती है।
(ख) वायु-प्रदूषण: औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों और जीवाश्म ईंधन के जलने से होने वाला वायु-प्रदूषण दमा, फेफड़ों के कैंसर और श्वसन संबंधी अन्य बीमारियों का कारण बनता है। इससे सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय बढ़ाने का बोझ पड़ता है और सार्वजनिक स्वास्थ्य की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
(ग) जल-प्रदूषण: औद्योगिक अपशिष्ट, सीवेज और कृषि अपवाह से जल स्रोतों का प्रदूषण हैजा, मलेरिया और अतिसार जैसी जल-जनित बीमारियों को फैलाता है। इससे भी सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक खर्च करना पड़ता है और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की चुनौती बढ़ती है।
(घ) संपन्न उपभोग मानक: उच्च आय वर्ग के लोग विलासितापूर्ण वस्तुओं और सेवाओं पर अधिक खर्च करते हैं, जिससे प्राकृतिक संसाधनों की माँग बढ़ती है। यह संसाधनों के असमान वितरण को भी बढ़ावा देता है, जहाँ एक ओर अपव्यय होता है, वहीं दूसरी ओर गरीब वर्ग अपनी बुनियादी जरूरतों को भी पूरा नहीं कर पाता। सरकार को आय असमानता और संसाधनों के प्रबंधन की समस्या का सामना करना पड़ता है।
(ङ) निरक्षरता: ज्ञान और जागरूकता की कमी के कारण लोग अक्सर लकड़ी जैसे पारंपरिक ईंधनों का अत्यधिक उपयोग करते हैं और संसाधनों का दुरुपयोग करते हैं। इससे वनों की कटाई बढ़ती है और पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है। सरकार को शिक्षा और जागरूकता फैलाने के साथ-साथ वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की आवश्यकता होती है।
(च) औद्योगीकरण: औद्योगीकरण से वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है, जिससे विभिन्न बीमारियाँ (दमा, कैंसर, हैजा, बहरापन आदि) फैलती हैं। इससे सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं का बोझ बढ़ता है और पर्यावरणीय नियमों को लागू करने की चुनौती आती है।
(छ) शहरीकरण: शहरों के विस्तार से प्राकृतिक आवासों का विनाश होता है, संसाधनों की माँग बढ़ती है और अपशिष्ट प्रबंधन की समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इससे भी आय असमानताएँ बढ़ सकती हैं और सरकार को बुनियादी ढाँचे के विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।
(ज) वन-क्षेत्र में कमी: वनों की कटाई से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है, जो वैश्विक ऊष्मन का एक प्रमुख कारण है। इससे जैव विविधता का नुकसान होता है और मृदा अपरदन बढ़ता है। सरकार को वनीकरण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने और वन संरक्षण नीतियों को लागू करने की आवश्यकता होती है।
(झ) अवैध वन कटाई: यह वनों के क्षेत्र में कमी का एक गंभीर रूप है, जिससे जैव विविधता का भारी नुकसान होता है, मृदा अपरदन बढ़ता है, और खाद्य श्रृंखलाएँ बाधित होती हैं। सरकार को अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने और वन कानूनों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता होती है।
(ट) वैश्विक ऊष्णता: वैश्विक ऊष्मन के कारण तापमान में वृद्धि हो रही है, जिससे मौसम के पैटर्न में बदलाव, समुद्र के जल स्तर में वृद्धि और चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है। इससे सरकार को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए अनुकूलन और शमन रणनीतियों पर व्यय करना पड़ता है, साथ ही पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना पड़ता है।
Common mistakes
- नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों के वर्गीकरण में भ्रमित होना।
- पर्यावरणीय समस्याओं के कारणों और प्रभावों को ठीक से न जोड़ पाना।
- बढ़ती जनसंख्या और उपभोग पैटर्न के बीच संबंध को समझने में कठिनाई।
- विभिन्न प्रकार के प्रदूषण के स्वास्थ्य और सरकारी प्रभावों को अलग करने में चूक।
Revision tips
- पर्यावरण की परिभाषा और इसके कार्यों को याद करें।
- नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों की सूची बनाएं और उनके उदाहरणों को समझें।
- भारत में पर्यावरणीय संकट पैदा करने वाले कारकों और उनके प्रभावों को सारणीबद्ध करें।
- वैश्विक ऊष्मन और ओजोन क्षरण जैसी प्रमुख पर्यावरणीय समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करें।
Practice MCQs
Q1. पर्यावरण को कैसे परिभाषित किया जाता है?
Explanation: पर्यावरण में वे सभी जैविक और अजैविक तत्व शामिल होते हैं जो एक दूसरे को प्रभावित करते हैं, साथ ही भूमंडलीय विरासत और संसाधनों की समग्रता को भी।
Q2. जब संसाधनों के निस्सरण की दर उनके पुनर्जनन की दर से अधिक हो जाती है, तो क्या परिणाम होता है?
Explanation: संसाधनों के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण का जीवन पोषण कार्य बाधित होता है, जिससे पर्यावरण संकट पैदा होता है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन सा एक नवीकरणीय संसाधन है?
Explanation: वृक्ष एक नवीकरणीय संसाधन है क्योंकि वे पुनर्जनन कर सकते हैं, जबकि पेट्रोलियम, कोयला और लौह अयस्क गैर-नवीकरणीय संसाधन हैं।
Q4. भारत के सामने वर्तमान में दो मुख्य पर्यावरणीय समस्याएँ कौन सी हैं?
Explanation: वर्तमान में विश्व के सामने वैश्विक ऊष्मन (Global Warming) और ओजोन अपक्षय (Ozone Depletion) प्रमुख पर्यावरणीय समस्याएँ हैं।
Q5. बढ़ती जनसंख्या पर्यावरण संकट में कैसे योगदान करती है?
Explanation: बढ़ती जनसंख्या प्राकृतिक संसाधनों की माँग को बढ़ाती है, जिससे उन पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और पर्यावरणीय हानि होती है।
Frequently asked questions
कक्षा 11 अर्थशास्त्र में "पर्यावरण और धारणीय विकास" अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है?
यह अध्याय छात्रों को पर्यावरण की अवधारणा, संसाधनों के प्रबंधन, और सतत विकास की चुनौतियों को समझने में मदद करता है, जो परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं।
नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों में मुख्य अंतर क्या है?
नवीकरणीय संसाधन वे हैं जो पुनर्जनन कर सकते हैं (जैसे वृक्ष, जल), जबकि गैर-नवीकरणीय संसाधन सीमित मात्रा में होते हैं और एक बार उपयोग होने पर समाप्त हो जाते हैं (जैसे कोयला, पेट्रोलियम)।
भारत में पर्यावरणीय समस्याओं के कुछ प्रमुख कारण क्या हैं?
भारत में पर्यावरणीय समस्याओं के प्रमुख कारणों में बढ़ती जनसंख्या, वायु और जल प्रदूषण, संपन्न उपभोग मानक, औद्योगीकरण, शहरीकरण, और वनों की कटाई शामिल हैं।
वैश्विक ऊष्मन और ओजोन अपक्षय क्या हैं?
वैश्विक ऊष्मन पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि है, जबकि ओजोन अपक्षय समताप मंडल में ओजोन परत का पतला होना है, दोनों ही गंभीर पर्यावरणीय चिंताएँ हैं।
ये NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?
ये समाधान प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर देने में आत्मविश्वास मिलता है।
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