कक्षा 11 भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास: निर्धनता NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 11 की भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास पुस्तक के अध्याय 4, 'निर्धनता' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें निर्धनता की अवधारणा, कैलोरी आधारित मापन की सीमाओं, मनरेगा जैसे रोजगार सृजन कार्यक्रमों के महत्व, आय-अर्जक परिसंपत्तियों के निर्माण द्वारा निर्धनता उन्मूलन, और सरकार द्वारा बुजुर्गों, निर्धनों व असहाय महिलाओं के लिए चलाए जा रहे सामाजिक सहायता कार्यक्रमों पर चर्चा की गई है। समाधान ग्रामीण और शहरी बेरोजगारी के बीच अंतर को भी स्पष्ट करते हैं और बताते हैं कि कैसे निर्धनता ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में स्थानांतरित हुई है। यह सामग्री छात्रों को निर्धनता के बहुआयामी स्वरूप को समझने और परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectभारतीय अर्थव्यवस्था का विकास
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter4. निर्धनता

Chapter summary

अध्याय 4 'निर्धनता' के ये NCERT समाधान छात्रों को निर्धनता के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराते हैं। इसमें निर्धनता को मापने के पारंपरिक तरीकों की कमियों, रोजगार सृजन कार्यक्रमों की भूमिका, और संपत्ति निर्माण के माध्यम से आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया है। समाधान सरकारी योजनाओं जैसे मनरेगा और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का भी विश्लेषण करते हैं, साथ ही ग्रामीण और शहरी निर्धनता के बीच स्थानांतरण की प्रवृत्ति पर प्रकाश डालते हैं। यह छात्रों को निर्धनता की समस्या और उसके समाधान के सरकारी प्रयासों की गहरी समझ प्रदान करता है।

Learning outcomes

  • निर्धनता के कैलोरी आधारित मापन की सीमाओं को समझना।
  • मनरेगा जैसे रोजगार सृजन कार्यक्रमों के महत्व का विश्लेषण करना।
  • आय-अर्जक परिसंपत्तियों के निर्माण से निर्धनता उन्मूलन की प्रक्रिया को समझना।
  • सरकार द्वारा निर्धनों, बुजुर्गों और असहाय महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं की पहचान करना।
  • ग्रामीण और शहरी बेरोजगारी के बीच अंतर स्पष्ट करना।
  • निर्धनता के ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों में स्थानांतरण के कारणों का अध्ययन करना।

Topics covered

Paper topics

  • निर्धनता की अवधारणा
  • कैलोरी आधारित निर्धनता मापन की सीमाएं
  • मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम)
  • रोजगार सृजन कार्यक्रम
  • आय अर्जित करने वाली परिसंपत्तियाँ
  • निर्धनता उन्मूलन की रणनीतियाँ
  • त्रि-आयामी प्रहार
  • राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP)
  • ग्रामीण बेरोजगारी
  • शहरी बेरोजगारी
  • निर्धनता का स्थानांतरण
  • सरकारी योजनाएं

Important topics

  • निर्धनता के कारण और समाधान
  • मनरेगा की भूमिका
  • आय-अर्जक परिसंपत्तियों का महत्व
  • राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम
  • ग्रामीण बनाम शहरी बेरोजगारी
  • निर्धनता उन्मूलन में सरकारी नीतियों की प्रभावशीलता

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Questions and Solutions

प्रश्न 1. कैलोरी आधारित तरीका निर्धनता की पहचान के लिए क्यों उपयुक्त नहीं है?

निर्धनता की पहचान के लिए कैलोरी आधारित तरीका क्यों उपयुक्त नहीं है?
Solution:

निर्धनता की पहचान के लिए केवल कैलोरी आधारित तरीका पर्याप्त नहीं है क्योंकि यह जीवन की गुणवत्ता के लिए आवश्यक अन्य महत्वपूर्ण कारकों को नजरअंदाज करता है। एक व्यक्ति को केवल 2100/2400 कैलोरी प्राप्त करने से एक पूर्ण और स्वस्थ जीवन जीने के लिए आवश्यक संतुलित आहार नहीं मिल पाता है। एक गुणवत्तापूर्ण जीवन जीने के लिए व्यक्ति को वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, स्वच्छ पेयजल, उचित स्वच्छता सुविधाएँ, ईंधन और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी आवश्यकता होती है। जब तक किसी व्यक्ति की इन सभी आवश्यकताओं तक पहुँच नहीं होती, तब तक उसे निर्धन माना जा सकता है, भले ही उसे पर्याप्त कैलोरी मिल रही हो।

प्रश्न 2. मनरेगा कार्यक्रम क्या है?

मनरेगा कार्यक्रम क्या है?
Solution:

मनरेगा का पूरा नाम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act) है। यह भारत सरकार द्वारा 7 सितंबर 2005 को अधिनियमित एक रोजगार गारंटी योजना है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को प्रति वर्ष कम से कम 100 दिनों के सुनिश्चित रोजगार की गारंटी प्रदान करना है। यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और गरीबी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उदाहरण के लिए, वित्तीय वर्ष 2010-11 में इस योजना के लिए केंद्र सरकार का परिव्यय लगभग 40,100 करोड़ रुपये था।

प्रश्न 3. भारत में निर्धनता से मुक्ति पाने के लिए रोजगार सृजन करने वाले कार्यक्रम क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?

भारत में निर्धनता से मुक्ति पाने के लिए रोजगार सृजन करने वाले कार्यक्रम क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
Solution:

निर्धनता और बेरोजगारी के बीच एक गहरा कारण-प्रभाव संबंध है। जब लोग बेरोजगार होते हैं, तो उनके पास आय का कोई साधन नहीं होता, जिससे वे अपनी बुनियादी जरूरतों को भी पूरा नहीं कर पाते और निर्धनता में जीवन यापन करते हैं। इसलिए, भारत में निर्धनता को कम करने के लिए रोजगार सृजन करने वाले कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये कार्यक्रम लोगों को आय अर्जित करने के अवसर प्रदान करते हैं, चाहे वह मजदूरी रोजगार के रूप में हो या स्वरोजगार के रूप में। रोजगार प्राप्त करके, व्यक्ति निर्धनता के दुष्चक्र से बाहर निकल सकता है और अपने जीवन स्तर में सुधार कर सकता है।

प्रश्न 4. आय अर्जित करने वाली परिसंपत्तियों के सृजन से निर्धनता की समस्या का समाधान किस प्रकार हो सकता है?

आय अर्जित करने वाली परिसंपत्तियों के सृजन से निर्धनता की समस्या का समाधान किस प्रकार हो सकता है?
Solution:

आय अर्जित करने वाली परिसंपत्तियों का सृजन निर्धनता की समस्या को हल करने में एक प्रभावी तरीका है क्योंकि यह व्यक्तियों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करता है। जब किसी व्यक्ति के पास ऐसी परिसंपत्ति होती है जो आय उत्पन्न कर सकती है, तो उसके पास अपने निर्वाह के लिए एक आधारभूत आय सुनिश्चित हो जाती है। उदाहरण के लिए, यदि सरकार किसी निर्धन व्यक्ति को कम ब्याज दर पर ऋण देकर एक गाड़ी खरीदने में मदद करती है, तो वह व्यक्ति उस गाड़ी का उपयोग टैक्सी सेवा के रूप में कर सकता है। इससे उसे स्वरोजगार मिलेगा और वह अपनी आय बढ़ाकर निर्धनता से बाहर आ सकेगा। इस प्रकार, परिसंपत्तियों का सृजन आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है।

प्रश्न 5. भारत सरकार द्वारा निर्धनता पर त्रि-आयामी प्रहार निर्धनता दूर करने में सफल नहीं रहा है। चर्चा करें।

चर्चा करें कि भारत सरकार द्वारा निर्धनता पर किया गया त्रि-आयामी प्रहार निर्धनता दूर करने में पूरी तरह सफल क्यों नहीं रहा है।
Solution:

यह कहना काफी हद तक सही है कि भारत सरकार द्वारा निर्धनता पर किया गया त्रि-आयामी प्रहार (जिसमें संवृद्धि आधारित रणनीति, विशिष्ट निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम और न्यूनतम आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराना शामिल है) पूरी तरह सफल नहीं रहा है। इन कार्यक्रमों के बावजूद, 1973-74 में 321 मिलियन से घटकर 1999-00 में निर्धनों की संख्या केवल 260 मिलियन रह गई, जो दर्शाता है कि निर्धनता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। विशेष रूप से 1990 के दशक में, निर्धनता ग्रामीण क्षेत्रों में कम हुई लेकिन शहरी क्षेत्रों में बढ़ी, जिसका अर्थ है कि निर्धनता का उन्मूलन नहीं हुआ, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में स्थानांतरित हो गई। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • (क) भ्रष्टाचार: देश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार ने कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा डाली।
  • (ख) पर्यवेक्षण का अभाव: कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की निगरानी और पर्यवेक्षण में कमी के कारण उनका लाभ सही लाभार्थियों तक नहीं पहुँच पाया।
  • (ग) जागरूकता की कमी: लक्षित लाभार्थियों के बीच उनके लाभ के कार्यक्रमों के बारे में जागरूकता की कमी के कारण वे उनका पूरा फायदा नहीं उठा सके।
  • (घ) विशेष समूहों की उपेक्षा: शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों जैसे विशेष कमजोर समूहों के लिए पर्याप्त कार्यक्रमों का अभाव रहा।

प्रश्न 6. सरकार ने बुजुर्गों, निर्धनों और असहाय महिलाओं की सहायतार्थ कौन-से कार्यक्रम अपनाए हैं?

सरकार ने बुजुर्गों, निर्धनों और असहाय महिलाओं की सहायता के लिए कौन-कौन से कार्यक्रम लागू किए हैं?
Solution:

भारत सरकार ने समाज के कमजोर वर्गों, जैसे बुजुर्गों, निर्धनों और असहाय महिलाओं की सहायता के लिए कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम अपनाए हैं। इनमें से एक प्रमुख कार्यक्रम है:

  • (क) राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP): यह कार्यक्रम 15 अगस्त 1995 को लागू किया गया था। इसका उद्देश्य गरीब परिवारों के बुजुर्गों, परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु से प्रभावित लोगों, और प्रसूति देखभाल से प्रभावित महिलाओं को सामाजिक सहायता प्रदान करना है। इस कार्यक्रम के मुख्य घटकों में शामिल हैं:
  • राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (National Old Age Pension Scheme - NOAPS)
  • राष्ट्रीय परिवार हितकारी योजना (National Family Benefit Scheme - NFBS)
  • राष्ट्रीय मातृत्व लाभ योजना (National Maternity Benefit Scheme - NMBS)

ये कार्यक्रम इन कमजोर समूहों को वित्तीय सुरक्षा और आवश्यक सहायता प्रदान करके उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

प्रश्न 7. क्या निर्धनता और बेरोज़गारी के बीच कोई संबंध है? समझाइए।

निर्धनता और बेरोजगारी के बीच क्या संबंध है? विस्तार से समझाइए।
Solution:

हाँ, निर्धनता और बेरोजगारी के बीच एक गहरा और वृत्तीय संबंध है। जब कोई व्यक्ति बेरोजगार होता है, तो उसके पास अपनी आजीविका कमाने का कोई साधन नहीं होता है। आय के अभाव में, वह अपने जीवन की बुनियादी आवश्यकताओं, जैसे भोजन, वस्त्र, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं को पूरा करने में असमर्थ होता है। इस स्थिति के कारण वह निर्धन बना रहता है। इसके विपरीत, यदि कोई व्यक्ति निर्धन है, तो उसके पास अक्सर शिक्षा और कौशल प्राप्त करने के सीमित अवसर होते हैं, जिससे उसके लिए रोजगार पाना और भी कठिन हो जाता है। इस प्रकार, बेरोजगारी निर्धनता को जन्म देती है और निर्धनता बेरोजगारी को बनाए रखने में योगदान करती है, जिससे एक दुष्चक्र बनता है।

प्रश्न 8. मान लीजिए कि आप एक निर्धन परिवार से हैं और छोटी-सी दुकान खोलने के लिए सरकारी सहायता पाना चाहते हैं। आप किस योजना के अंतर्गत आवेदन देंगे और क्यों?

यदि आप एक निर्धन परिवार से हैं और एक छोटी दुकान खोलने के लिए सरकारी सहायता चाहते हैं, तो आप किस योजना के तहत आवेदन करेंगे और इसका क्या कारण होगा?
Solution:

यदि मैं एक निर्धन परिवार से हूँ और एक छोटी दुकान खोलने के लिए सरकारी सहायता प्राप्त करना चाहता हूँ, तो मेरा आवेदन इस बात पर निर्भर करेगा कि मैं ग्रामीण क्षेत्र में रहता हूँ या शहरी क्षेत्र में।

  • यदि मैं शहरी क्षेत्र का निवासी हूँ: तो मैं 'स्वर्ण जयंती शहरी रोज़गार योजना' (SJSRY) के अंतर्गत सहायता के लिए आवेदन करूँगा। यह योजना शहरी गरीबों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने पर केंद्रित है, जिसमें छोटे व्यवसाय या दुकान खोलना शामिल हो सकता है।
  • यदि मैं ग्रामीण क्षेत्र का निवासी हूँ: तो मेरे पास कई विकल्प हो सकते हैं, जैसे 'स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना' (SGSY), 'ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम' (REGP), या 'प्रधानमंत्री रोजगार योजना' (PMRY)। ये योजनाएँ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करती हैं, जो एक छोटी दुकान खोलने के लिए उपयुक्त हो सकती हैं।

इन योजनाओं के तहत आवेदन करने का कारण यह है कि ये विशेष रूप से निर्धन व्यक्तियों और परिवारों को स्वरोजगार के माध्यम से आय अर्जित करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं, जिससे वे निर्धनता से बाहर निकल सकें।

प्रश्न 9. ग्रामीण और शहरी बेरोजगारी में अंतर स्पष्ट करें। क्या यह कहना सही होगा कि निर्धनता गाँवों से शहरों में आ गई है? अपने उत्तर के पक्ष में निर्धनता अनुपात प्रवृत्ति का प्रयोग करें।

ग्रामीण और शहरी बेरोजगारी के बीच मुख्य अंतर क्या हैं? क्या यह तर्क सही है कि निर्धनता गाँवों से शहरों की ओर स्थानांतरित हो गई है? अपने उत्तर के समर्थन में निर्धनता अनुपात के रुझानों का उपयोग करें।
Solution:

ग्रामीण और शहरी बेरोजगारी के बीच मुख्य अंतर उनके कारणों और स्वरूप में निहित है:

  • ग्रामीण बेरोजगारी: यह मुख्य रूप से मौसमी बेरोजगारी (कृषि कार्यों के बीच के समय में) और प्रच्छन्न बेरोजगारी (जहाँ आवश्यकता से अधिक लोग काम में लगे होते हैं और काम करने पर भी उत्पादन नहीं बढ़ता) के रूप में पाई जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन मजदूर, छोटे और सीमांत किसान अक्सर बेरोजगारी या अल्प-रोजगार का शिकार होते हैं। वे कर्ज के जाल में भी फंस जाते हैं।
  • शहरी बेरोजगारी: यह मुख्य रूप से शिक्षित बेरोजगारी के रूप में देखी जाती है, जहाँ शहरी युवा अपनी शिक्षा के अनुरूप रोजगार नहीं पा पाते। इसके अलावा, अनियत दिहाड़ी मजदूर, रेहड़ी-पटरी वाले, रिक्शा चालक आदि भी शहरी बेरोजगारी का हिस्सा हैं, जो अक्सर अनिश्चित और कम आय वाले काम करते हैं।

क्या निर्धनता गाँवों से शहरों में आ गई है?

यह कहना काफी हद तक सही है कि निर्धनता गाँवों से शहरों में आ गई है। स्वतंत्रता के समय से ही ग्रामीण बेरोजगारी शहरी बेरोजगारी से अधिक रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में अवसरों की कमी, कृषि पर अत्यधिक निर्भरता, और कर्ज के बोझ से दबे हुए लोग बेहतर आय और जीवन स्तर की आशा में शहरों की ओर पलायन करते हैं। हालाँकि, शहरों में भी उन्हें अक्सर कम वेतन वाले, अनिश्चित और अकुशल श्रमिक के रूप में ही काम मिलता है, जिससे वे शहरी निर्धनता का हिस्सा बन जाते हैं।

निर्धनता अनुपात प्रवृत्ति: 1990 के दशक के बाद के आँकड़े इस प्रवृत्ति का समर्थन करते हैं। इस अवधि में, जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धनता अनुपात में कमी आई, वहीं शहरी क्षेत्रों में निर्धनता अनुपात में वृद्धि देखी गई या यह स्थिर रही। इसका सीधा अर्थ यह है कि निर्धनता का उन्मूलन नहीं हुआ, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में स्थानांतरित हो गई है, जहाँ लोग अक्सर झुग्गी-बस्तियों में रहते हैं और अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं।

Common mistakes

  • निर्धनता को केवल आय की कमी के रूप में देखना, अन्य आवश्यकताओं को नजरअंदाज करना।
  • सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार और पर्यवेक्षण की कमी के प्रभाव को कम आंकना।
  • ग्रामीण और शहरी निर्धनता के बीच के अंतर को ठीक से न समझना।
  • रोजगार सृजन कार्यक्रमों की प्रभावशीलता को कम आंकना।

Revision tips

  • निर्धनता के विभिन्न मापदंडों और उनकी सीमाओं पर ध्यान केंद्रित करें।
  • मनरेगा और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम जैसी प्रमुख सरकारी योजनाओं को विस्तार से समझें।
  • ग्रामीण और शहरी बेरोजगारी के बीच के अंतर और निर्धनता के स्थानांतरण के कारणों को याद करें।
  • आय-अर्जक परिसंपत्तियों के निर्माण के महत्व को उदाहरणों सहित समझें।

Practice MCQs

Q1. निर्धनता की पहचान के लिए कैलोरी आधारित तरीका क्यों अपर्याप्त माना जाता है?

Q2. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का मुख्य उद्देश्य क्या है?

Q3. आय अर्जित करने वाली परिसंपत्तियों का सृजन निर्धनता उन्मूलन में कैसे सहायक होता है?

Q4. राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के अंतर्गत किसे सहायता प्रदान की जाती है?

Q5. निर्धनता के त्रि-आयामी प्रहार के असफल होने का एक प्रमुख कारण क्या बताया गया है?

Frequently asked questions

निर्धनता को मापने के लिए कैलोरी आधारित तरीका क्यों पर्याप्त नहीं है?

कैलोरी आधारित तरीका केवल ऊर्जा की आवश्यकता को पूरा करता है, लेकिन एक गुणवत्तापूर्ण जीवन के लिए वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी अन्य बुनियादी आवश्यकताओं को नजरअंदाज करता है, इसलिए यह अपर्याप्त है।

मनरेगा कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?

मनरेगा का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष कम से कम 100 दिनों के रोजगार की गारंटी देना है, जिससे उनकी आय सुनिश्चित हो सके और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम हो।

आय अर्जित करने वाली परिसंपत्तियों का निर्माण निर्धनता से कैसे बचाता है?

आय अर्जित करने वाली परिसंपत्तियाँ जैसे कि एक छोटी दुकान या वाहन, व्यक्ति को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करती हैं, जिससे वे नियमित आय अर्जित कर सकते हैं और निर्धनता के दुष्चक्र से बाहर निकल सकते हैं।

सरकार बुजुर्गों और असहाय महिलाओं की मदद के लिए कौन सी प्रमुख योजना चलाती है?

सरकार बुजुर्गों, निर्धनों और असहाय महिलाओं की सहायता के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) चलाती है, जिसके अंतर्गत वृद्धावस्था पेंशन और परिवार हितकारी योजनाएं शामिल हैं।

क्या निर्धनता केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित है?

नहीं, निर्धनता ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पाई जाती है। हालांकि, कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि निर्धनता ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित हुई है, जहाँ लोग बेहतर आय की तलाश में जाते हैं।

निर्धनता उन्मूलन के लिए सरकारी कार्यक्रमों की सफलता में क्या बाधाएं आती हैं?

सरकारी कार्यक्रमों की सफलता में भ्रष्टाचार, प्रभावी पर्यवेक्षण की कमी, और लाभार्थियों में जागरूकता का अभाव जैसी बाधाएं आती हैं, जो निर्धनता को पूरी तरह से समाप्त करने में रुकावट पैदा करती हैं।

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