कक्षा 11 भौतिकी: ऊष्मागतिकी NCERT समाधान

NCERT Solutions PDF Class 11 PDF

यह खंड कक्षा 11 भौतिकी के अध्याय 12, ऊष्मागतिकी के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें ऊष्मा हस्तांतरण, विशिष्ट ऊष्मा, ऊष्मागतिकी के नियम और विभिन्न प्रणालियों में उनके अनुप्रयोगों से संबंधित प्रश्नों को शामिल किया गया है। समाधानों में ऊष्मा की गणना, गैसों के व्यवहार का विश्लेषण और ऊष्मागतिक प्रक्रियाओं की व्याख्या शामिल है। यह खंड छात्रों को ऊष्मागतिकी की अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करता है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectभौतिकी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter12. ऊष्मागतिकी

Chapter summary

कक्षा 11 भौतिकी के अध्याय 12, ऊष्मागतिकी के लिए ये NCERT समाधान, ऊष्मा, कार्य और तापमान के बीच संबंध की पड़ताल करते हैं। इसमें ऊष्मा हस्तांतरण, विशिष्ट ऊष्मा की अवधारणाएं, और ऊष्मागतिकी के पहले और दूसरे नियम शामिल हैं। समाधान विभिन्न परिदृश्यों में ऊष्मागतिक प्रक्रियाओं की गणना और व्याख्या पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जो छात्रों को इन मौलिक सिद्धांतों को समझने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • ऊष्मागतिकी के पहले नियम का उपयोग करके ऊष्मा, कार्य और आंतरिक ऊर्जा के बीच संबंध को समझना।
  • विभिन्न प्रक्रियाओं (जैसे समतापी, समदाबी, रुद्धोष्म) के लिए ऊष्मागतिक समीकरणों को लागू करना।
  • विशिष्ट ऊष्मा और ऊष्मा क्षमता की गणना करना।
  • ऊष्मा इंजन और प्रशीतक की दक्षता का विश्लेषण करना।
  • ऊष्मागतिकी के अनुप्रयोगों को वास्तविक दुनिया के उदाहरणों से जोड़ना।

Topics covered

Paper topics

  • ऊष्मागतिकी का परिचय
  • ऊष्मा और कार्य
  • आंतरिक ऊर्जा
  • ऊष्मागतिकी का पहला नियम
  • विशिष्ट ऊष्मा
  • स्थिर दाब और आयतन पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा
  • ऊष्मागतिक प्रक्रियाएं (समतापी, समदाबी, रुद्धोष्म)
  • ऊष्मा इंजन
  • प्रशीतक
  • ऊष्मा का हस्तांतरण
  • गैसों का व्यवहार
  • ऊष्मागतिकी के अनुप्रयोग

Important topics

  • ऊष्मागतिकी का पहला नियम
  • Cp और Cv के बीच संबंध
  • ऊष्मागतिक प्रक्रियाओं की गणना
  • विशिष्ट ऊष्मा की अवधारणा
  • ऊष्मा इंजन और दक्षता

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

कोई गीजर 3.0 लीटर प्रति मिनट की दर से बहते हुए जल को 27°C से 77°C तक गर्म करता है। यदि गीजर का परिचालन गैस बर्नर द्वारा किया जाए तो ईंघन के व्यय की क्या दर होगी? बर्नर के ईंघन की दहन-ऊष्मा 4.0 \times 10^4 \text{ Jg}^{-1} है।
Solution:

जल के प्रवाह की दर V = 3 \text{ L/min} है।

चूंकि 1 \text{ L} = 10^{-3} \text{ m}^3, इसलिए आयतन V = 3 \times 10^{-3} \text{ m}^3/\text{min}

जल का घनत्व \rho = 10^3 \text{ kg/m}^3 है।

प्रति मिनट प्रवाहित जल का द्रव्यमान m = \text{आयतन} \times \text{घनत्व} है।

m = (3 \times 10^{-3} \text{ m}^3/\text{min}) \times (10^3 \text{ kg/m}^3) = 3 \text{ kg/min}

तापमान में वृद्धि \Delta\theta = 77^{\circ}\text{C} - 27^{\circ}\text{C} = 50^{\circ}\text{C} है।

जल की विशिष्ट ऊष्मा s = 4.2 \text{ J/g-}^{\circ}\text{C} = 4.2 \times 10^3 \text{ J/kg-}^{\circ}\text{C} है।

जल द्वारा अवशोषित ऊष्मा की गणना Q = ms\Delta\theta सूत्र से की जाती है।

Q = (3 \text{ kg}) \times (4.2 \times 10^3 \text{ J/kg-}^{\circ}\text{C}) \times (50^{\circ}\text{C}) = 630 \times 10^3 \text{ J/min} = 63 \times 10^4 \text{ J/min}

ईंधन की दहन-ऊष्मा 4.0 \times 10^4 \text{ J/g} = 4 \times 10^7 \text{ J/kg} है।

माना प्रति मिनट m_{fuel} किग्रा ईंधन का व्यय होता है।

ईंधन द्वारा उत्पन्न ऊष्मा = m_{fuel} \times (4 \times 10^7 \text{ J/kg})

जल द्वारा अवशोषित ऊष्मा ईंधन द्वारा उत्पन्न ऊष्मा के बराबर होनी चाहिए:

63 \times 10^4 \text{ J/min} = m_{fuel} \times (4 \times 10^7 \text{ J/kg})

ईंधन व्यय की दर m_{fuel} = \frac{63 \times 10^4}{4 \times 10^7} \text{ kg/min}

m_{fuel} = 15.75 \times 10^{-3} \text{ kg/min}

इसे ग्राम प्रति मिनट में बदलने पर: m_{fuel} = 15.75 \text{ g/min}

Answer: ईंधन के व्यय की दर 15.75 \text{ g/min} है।

प्रश्न 2

स्थिर दाब पर 2.0 \times 10^{-2} \text{ kg} नाइट्रोजन (कमरे के ताप पर) के ताप में 45^{\circ}\text{C} वृद्धि करने के लिए कितनी ऊष्मा की आपूर्ति की जानी चाहिए? (N2 का अणुभार = 28; R = 8.3 \text{ Jmol}^{-1} \text{K}^{-1})
Solution:

दिया गया है:

  • नाइट्रोजन (N_2) का द्रव्यमान m = 2.0 \times 10^{-2} \text{ kg}
  • तापमान में वृद्धि \Delta T = 45^{\circ}\text{C} (जो 45 \text{ K} के बराबर है)।
  • N_2 का अणुभार M = 28 \text{ g/mol} = 28 \times 10^{-3} \text{ kg/mol}
  • सार्वत्रिक गैस स्थिरांक R = 8.3 \text{ Jmol}^{-1} \text{K}^{-1}

नाइट्रोजन के मोलों की संख्या n की गणना इस प्रकार की जाती है:

n = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{अणुभार}} = \frac{2.0 \times 10^{-2} \text{ kg}}{28 \times 10^{-3} \text{ kg/mol}} = \frac{20}{28} = \frac{5}{7} \text{ mol}

चूंकि नाइट्रोजन एक द्विपरमाणुक गैस है, स्थिर दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा C_p = \frac{7}{2}R होती है।

स्थिर दाब पर आवश्यक ऊष्मा की आपूर्ति Q = nC_p\Delta T सूत्र से दी जाती है।

Q = \left(\frac{5}{7} \text{ mol}\right) \times \left(\frac{7}{2}R\right) \times (45 \text{ K})

Q = \frac{5}{7} \times \frac{7}{2} \times (8.3 \text{ Jmol}^{-1} \text{K}^{-1}) \times (45 \text{ K})

Q = \frac{5}{2} \times 8.3 \times 45 \text{ J}

Q = 5 \times 4.15 \times 45 \text{ J}

Q = 20.75 \times 45 \text{ J}

Q = 933.75 \text{ J}

Answer: 933.75 \text{ J} ऊष्मा की आपूर्ति की जानी चाहिए।

प्रश्न 3

व्याख्या कीजिए कि ऐसा क्यों होता है?
  1. भिन्न-भिन्न तापों T_1T_2 के दो पिण्डों को यदि ऊष्मीय सम्पर्क में लाया जाए तो यह आवश्यक नहीं है कि उनका अन्तिम ताप (T_1+T_2)/2 ही हो।
  2. रासायनिक या नामिकीय संयत्रों में शीतलक (अर्थात् द्रव जो सयंत्र के भिन्न-भिन्न भागों को अधिक गर्म होने से रोकता है) की विशिष्ट ऊष्मा अधिक होनी चाहिए।
  3. कार को चलाते-चलाते उसके टायरों में वायुदाब बढ़ जाता है।
  4. किसी बन्दरगाह के समीप के शहर की जलवायु, समान अक्षांश के किसी रेगिस्तानी शहर की जलवायु से अधिक शीतोष्ण होती है।
Solution:
  1. अंतिम ताप का औसत न होना: जब दो भिन्न तापमानों T_1 और T_2 वाली वस्तुएँ ऊष्मीय संपर्क में आती हैं, तो ऊष्मा उच्च तापमान वाली वस्तु से निम्न तापमान वाली वस्तु की ओर तब तक प्रवाहित होती है जब तक कि दोनों का तापमान समान न हो जाए। अंतिम तापमान केवल प्रारंभिक तापमानों के औसत (T_1+T_2)/2 पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि प्रत्येक वस्तु की ऊष्मा धारिता (द्रव्यमान × विशिष्ट ऊष्मा) पर भी निर्भर करता है। यदि दोनों वस्तुओं की ऊष्मा धारिताएँ समान नहीं हैं, तो अंतिम तापमान औसत नहीं होगा।
  2. शीतलक की उच्च विशिष्ट ऊष्मा: शीतलक की विशिष्ट ऊष्मा अधिक होनी चाहिए ताकि वह कम तापमान वृद्धि के साथ अधिक मात्रा में ऊष्मा को अवशोषित कर सके। उच्च विशिष्ट ऊष्मा का अर्थ है कि किसी पदार्थ के तापमान को 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ाने के लिए अधिक ऊष्मा की आवश्यकता होती है। इसलिए, एक उच्च विशिष्ट ऊष्मा वाला शीतलक प्रभावी ढंग से मशीनरी को ठंडा कर सकता है क्योंकि यह बड़ी मात्रा में ऊष्मा को अवशोषित करके अपने तापमान में केवल थोड़ी वृद्धि करता है।
  3. टायरों में वायुदाब का बढ़ना: जब कार चलती है, तो इंजन और सड़क के घर्षण के कारण टायर गर्म हो जाते हैं। गैसों के लिए, आयतन स्थिर होने पर (टायर की निश्चित सीमा के भीतर), दाब तापमान के समानुपाती होता है (गे-लुसैक का नियम)। जैसे-जैसे टायर के अंदर की हवा गर्म होती है, गैस के अणु अधिक तेजी से गति करते हैं और टायर की दीवारों पर अधिक बार और अधिक बल के साथ टकराते हैं, जिससे वायुदाब बढ़ जाता है।
  4. तटीय और रेगिस्तानी जलवायु: बंदरगाह के पास के शहर की जलवायु रेगिस्तानी शहर की तुलना में अधिक शीतोष्ण होती है क्योंकि पानी (समुद्र) की विशिष्ट ऊष्मा क्षमता भूमि की तुलना में बहुत अधिक होती है। पानी धीरे-धीरे गर्म होता है और धीरे-धीरे ठंडा होता है। गर्मियों में, समुद्र की हवा दिन के दौरान भूमि को ठंडा रखती है, और सर्दियों में, यह भूमि को गर्म रखती है। इसके विपरीत, रेगिस्तान में भूमि जल्दी गर्म और ठंडी होती है, जिससे अत्यधिक तापमान परिवर्तन होता है।

Common mistakes

  • ऊष्मागतिकी के नियमों के बीच भ्रमित होना।
  • स्थिर दाब और स्थिर आयतन पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा के बीच अंतर करने में विफलता।
  • तापमान परिवर्तन को केल्विन में परिवर्तित करने में त्रुटियाँ।
  • ऊष्मागतिक प्रक्रियाओं में चिन्ह परिपाटी को गलत समझना।

Revision tips

  • प्रत्येक ऊष्मागतिक प्रक्रिया के लिए सूत्रों को याद करें।
  • ऊष्मागतिकी के नियमों के भौतिक महत्व को समझें।
  • दिए गए डेटा के साथ गणना का अभ्यास करें, विशेष रूप से इकाइयों पर ध्यान दें।
  • वास्तविक दुनिया के उदाहरणों का उपयोग करके अवधारणाओं को स्पष्ट करें।

Practice MCQs

Q1. किसी गीजर द्वारा जल को गर्म करने के लिए आवश्यक ऊष्मा की गणना किस सूत्र से की जाती है?

Q2. स्थिर दाब पर नाइट्रोजन गैस के तापमान में वृद्धि के लिए आवश्यक ऊष्मा की गणना के लिए किस सूत्र का उपयोग किया जाता है?

Q3. ऊष्मागतिकी में, Cp और Cv के बीच क्या संबंध है?

Q4. जब दो भिन्न तापमानों वाली वस्तुएँ ऊष्मीय संपर्क में आती हैं, तो अंतिम तापमान आवश्यक रूप से उनके प्रारंभिक तापमान का औसत क्यों नहीं होता है?

Frequently asked questions

ऊष्मागतिकी क्या है?

ऊष्मागतिकी ऊष्मा, कार्य, तापमान और ऊर्जा के बीच संबंध का अध्ययन है। यह ऊर्जा के रूपांतरण और हस्तांतरण से संबंधित है।

ऊष्मागतिकी का पहला नियम क्या कहता है?

ऊष्मागतिकी का पहला नियम ऊर्जा संरक्षण का एक कथन है, जो बताता है कि किसी निकाय की आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन उसे दी गई ऊष्मा और उस पर किए गए कार्य के अंतर के बराबर होता है।

Cp और Cv में क्या अंतर है?

Cp स्थिर दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा है, जबकि Cv स्थिर आयतन पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा है। Cp हमेशा Cv से अधिक होता है क्योंकि स्थिर दाब पर ऊष्मा देने से आयतन भी बढ़ता है, जिसके लिए अतिरिक्त कार्य करना पड़ता है।

क्या ऊष्मागतिकी के समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करते हैं?

हाँ, ये समाधान महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं, गणनाओं का अभ्यास प्रदान करते हैं, और सामान्य प्रश्नों के उत्तर देते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक हैं।

गीजर के प्रश्न में ईंधन की दहन-ऊष्मा का क्या महत्व है?

ईंधन की दहन-ऊष्मा यह निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि जल को वांछित तापमान तक गर्म करने के लिए कितने ईंधन की आवश्यकता होगी, क्योंकि यह प्रति इकाई द्रव्यमान उत्पन्न ऊष्मा की मात्रा बताता है।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.