कक्षा 10 हिंदी NCERT समाधान: अध्याय 7 छाया मत छूना
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक के 'छाया मत छूना' कविता के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह समाधान छात्रों को कविता के गहन अर्थों को समझने में मदद करते हैं, जिसमें कवि द्वारा कठिन यथार्थ का सामना करने, प्रभुता की मृगतृष्णा से बचने और अतीत की स्मृतियों के मोह से दूर रहने के महत्व पर जोर दिया गया है। समाधानों में कविता की पंक्तियों का भावार्थ, विशेषणों के प्रयोग से उत्पन्न विशिष्टता और 'मृगतृष्णा' जैसे शब्दों के अर्थ को स्पष्ट किया गया है। यह छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए कविता के मुख्य संदेशों को याद रखने और लागू करने में सहायता करेगा।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 7 छाया मत छूना |
Chapter summary
कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक के 'छाया मत छूना' कविता के ये NCERT समाधान छात्रों को कविता के केंद्रीय भावों को समझने में मदद करते हैं। इसमें कठिन यथार्थ को स्वीकार करने, अतीत की सुखद स्मृतियों के मोह से बचने और भविष्य की ओर सकारात्मक दृष्टिकोण रखने पर बल दिया गया है। समाधान कविता की पंक्तियों के भावार्थ, विशेषणों के प्रयोग और प्रतीकात्मक शब्दों जैसे 'मृगतृष्णा' की व्याख्या करते हैं।
Learning outcomes
- कठिन यथार्थ के पूजन के महत्व को समझना।
- कविता की पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट करना।
- जीवन में सुख और दुख की द्वंद्वात्मकता को पहचानना।
- अतीत की स्मृतियों के मोह से बचने की आवश्यकता को समझना।
- विशेषणों के प्रयोग से शब्दों के अर्थ में उत्पन्न विशिष्टता का विश्लेषण करना।
- 'मृगतृष्णा' जैसे प्रतीकात्मक शब्दों का अर्थ और प्रयोग समझना।
Topics covered
Paper topics
- कठिन यथार्थ का सामना
- अतीत की स्मृतियों का प्रभाव
- भविष्य की ओर उन्मुखता
- प्रभुता की मृगतृष्णा
- सुख-दुख का द्वंद्व
- विशेषणों का काव्य में प्रयोग
- कविता का भावार्थ
- प्रतीकात्मक शब्दों की व्याख्या
Important topics
- कठिन यथार्थ का पूजन
- अतीत की स्मृतियों (छाया) से दूरी
- प्रभुता की मृगतृष्णा का खंडन
- सुख-दुख की अनिवार्यता
- भविष्य का वरण
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
प्रश्न 2
प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है,
हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।
प्रश्न 3
प्रश्न 4
- दुख दूना - यहाँ 'दूना' विशेषण का प्रयोग दुख की अधिकता को दर्शाने के लिए किया गया है, जिससे दुख की तीव्रता का बोध होता है।
- जीवित क्षण - 'जीवित' विशेषण यहाँ क्षण को सजीव और गतिशील बनाता है, जिससे क्षण की जीवंतता का अनुभव होता है।
- सुरंग-सुधियाँ - 'सुरंग' विशेषण यादों (सुधि) को रंग-बिरंगा और आकर्षक रूप में प्रस्तुत करता है, जिससे उनकी विविधता और सुंदरता का पता चलता है।
- एक रात कृष्णा - 'कृष्णा' विशेषण रात के गहरे अंधकार और कालिमा को उजागर करता है, जिससे रात की भयावहता का बोध होता है।
- शरद रात - 'शरद' विशेषण रात की सुंदरता, मोहकता और विशेष वातावरण को दर्शाता है, जो शरद ऋतु की रात से जुड़ा है।
- रस बसंत - 'रस' विशेषण बसंत ऋतु को और अधिक मधुर, आनंददायक और मनमोहक बनाता है, जिससे उसकी रसीली प्रकृति का पता चलता है।
प्रश्न 5
प्रश्न 6
क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर? जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण।
ये पंक्तियाँ हमें सिखाती हैं कि जो अवसर हाथ से निकल गया या जो सुख प्राप्त नहीं हुआ, उसे भूलकर भविष्य की ओर देखना चाहिए और आने वाले समय का स्वागत करना चाहिए।प्रश्न 7
Common mistakes
- अतीत की सुखद स्मृतियों में खोए रहना और वर्तमान की उपेक्षा करना।
- जीवन की कठिनाइयों से भागना और उनका सामना न करना।
- प्रभुता या बड़प्पन की झूठी चाह में भटकते रहना।
- सुख और दुख को जीवन के अभिन्न अंग के रूप में न देखना।
Revision tips
- कविता के मुख्य संदेश - यथार्थ का सामना, अतीत को भूलना, भविष्य की ओर बढ़ना - को याद करें।
- कठिन शब्दों और प्रतीकों जैसे 'छाया', 'मृगतृष्णा' के अर्थ को समझें।
- विशेषणों के प्रयोग वाले उदाहरणों पर ध्यान दें और उनके प्रभाव को समझें।
- कविता की पंक्तियों का भावार्थ अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात क्यों कही है?
Explanation: कवि का मानना है कि जीवन की कठिनाइयों और सच्चाइयों का सामना करना ही प्रगति का मार्ग है, केवल सुखद स्मृतियों या भविष्य के सपनों में खोए रहना व्यर्थ है।
Q2. कविता में 'प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है' का क्या अर्थ है?
Explanation: यह पंक्ति समझाती है कि बड़प्पन या महानता की खोज एक मृगतृष्णा (भ्रम) के समान है, जो मनुष्य को भटकाती है और कभी संतुष्टि नहीं देती।
Q3. 'हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है' पंक्ति का भाव स्पष्ट करें।
Explanation: इस पंक्ति का अर्थ है कि जीवन में सुख (चंद्रिका) के साथ दुख (कृष्णा रात) भी अवश्यंभावी है, इसलिए हमें दोनों स्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए।
Q4. कविता में 'छाया' शब्द का प्रयोग किसके लिए हुआ है?
Explanation: कवि ने 'छाया' शब्द का प्रयोग जीवन की उन मधुर स्मृतियों के लिए किया है जो वर्तमान के दुखों को और अधिक कष्टदायक बना सकती हैं।
Q5. कवि ने 'छाया' को छूने से मना क्यों किया है?
Explanation: कवि का मानना है कि अतीत की सुखद स्मृतियों में खोए रहने से वर्तमान की कठिनाइयाँ और भी असहनीय हो जाती हैं, इसलिए उनसे दूर रहने की सलाह दी गई है।
Frequently asked questions
कक्षा 10 हिंदी के लिए 'छाया मत छूना' कविता के NCERT समाधान क्यों महत्वपूर्ण हैं?
ये समाधान छात्रों को कविता के गहन अर्थ, केंद्रीय भाव और महत्वपूर्ण पंक्तियों की विस्तृत व्याख्या समझने में मदद करते हैं, जो परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए आवश्यक है।
'छाया मत छूना' कविता का मुख्य संदेश क्या है?
कविता का मुख्य संदेश यह है कि हमें जीवन की कठिनाइयों का सामना करना चाहिए, अतीत की सुखद स्मृतियों में नहीं खोना चाहिए और भविष्य की ओर सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ बढ़ना चाहिए।
कविता में 'कठिन यथार्थ के पूजन' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है जीवन की वास्तविकताओं और कठिनाइयों को स्वीकार करना, उनसे मुंह न मोड़ना और उनका सामना करना, क्योंकि यही प्रगति का मार्ग है।
'मृगतृष्णा' शब्द का प्रयोग कविता में किस संदर्भ में हुआ है?
कविता में 'मृगतृष्णा' का प्रयोग प्रभुता या बड़प्पन की निरर्थक और भ्रामक खोज के संदर्भ में हुआ है, जो मनुष्य को भ्रमित करती है।
क्या यह समाधान परीक्षा की तैयारी में सहायक हैं?
हाँ, ये समाधान कविता के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को कवर करते हैं और अभ्यास के लिए प्रश्नोत्तर प्रदान करते हैं, जिससे परीक्षा की तैयारी प्रभावी होती है।
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