CBSE Class 10 Hindi NCERT Solutions: Chapter 8 कन्यादान

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CBSE Class 10 हिंदी के अध्याय 8 'कन्यादान' के लिए विस्तृत समाधान यहाँ दिए गए हैं। यह कविता माँ की भावनाओं और समाज पर उसकी आलोचना को गहराई से दर्शाती है। विद्यार्थी अपनी बेटी को विदाई के समय माँ की मार्मिक सलाह का अन्वेषण करेंगे, जिसमें स्त्रीत्व, सामाजिक अपेक्षाओं और महिलाओं द्वारा सामना की जाने वाली अंतर्निहित कमजोरियों जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। स्पष्टीकरण 'लड़की होना पर लड़की जैसी मत दिखाई देना' और 'आग रोटियाँ सेंकने के लिए है, जलने के लिए नहीं' जैसे वाक्यांशों के प्रतीकात्मक अर्थों को स्पष्ट करते हैं। ये समाधान छात्रों को कविता की गहरी बारीकियों को समझने, माँ-बेटी के रिश्ते का विश्लेषण करने और सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ को समझने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जिससे परीक्षा की तैयारी प्रभावी हो सके और अध्याय के संदेश की पूरी समझ विकसित हो सके।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter8 कन्यादान

Chapter summary

Chapter 8, 'Kanyadan', of the CBSE Class 10 Hindi curriculum focuses on the emotional and societal aspects of a daughter's wedding from a mother's perspective. The NCERT Solutions provided here break down the poem's core messages, including the mother's heartfelt advice to her daughter about navigating life's challenges, maintaining self-respect, and avoiding exploitation. The solutions explain the symbolic language used and address critical questions about the societal treatment of women and the concept of 'kanyadan' itself.

Learning outcomes

  • Understand the emotional depth of a mother's feelings during her daughter's wedding.
  • Analyze the symbolic meanings of key phrases in the poem 'Kanyadan'.
  • Explain the societal critique presented in the poem regarding the treatment of women.
  • Discuss the mother's advice on maintaining dignity and self-reliance.
  • Evaluate the appropriateness of the term 'kanyadan' in contemporary society.

Topics covered

Paper topics

  • Mother's advice to daughter
  • Womanhood and societal expectations
  • Critique of societal exploitation
  • Symbolic language in poetry
  • Emotional bond between mother and daughter
  • The concept of 'Kanyadan'
  • Poetic analysis of 'Kanyadan'
  • Themes of innocence and maturity

Important topics

  • Mother's advice on self-respect and avoiding exploitation
  • Symbolism of fire (rotiyan senkne vs. jalne)
  • The emotional significance of 'kanyadan' for the mother
  • Critique of the term 'kanyadan' and its implications

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

आपके विचार से माँ ने ऐसा क्यों कहा कि लड़की होना पर लड़की जैसी मत दिखाई देना?
Solution: माँ की यह उक्ति बेटी को जीवन की कठोर वास्तविकताओं के प्रति सचेत करने के लिए है। माँ जानती है कि समाज में लड़कियों की कोमलता और सौम्यता का अक्सर फायदा उठाया जाता है। इसलिए, वह अपनी बेटी को सलाह देती है कि वह एक लड़की होने के नाते अपनी कोमलता को बनाए रखे, लेकिन अपनी कमज़ोरी को इस तरह प्रकट न करे कि कोई उसका शोषण कर सके। माँ चाहती है कि बेटी स्वाभिमानी और आत्मरक्षा में सक्षम बने, न कि केवल कोमल हृदय वाली बनकर आसानी से प्रताड़ित हो जाए।

प्रश्न 2 (क)

'आग रोटियाँ सेंकने के लिए है। जलने के लिए नहीं' - इन पंक्तियों में समाज में स्त्री की किस स्थिति की ओर संकेत किया गया है?
Solution: इन पंक्तियों के माध्यम से कवि समाज में स्त्री की दयनीय और शोषित स्थिति की ओर संकेत करता है। 'आग रोटियाँ सेंकने के लिए' का अर्थ है कि घर की अग्नि (रसोई) का उपयोग परिवार के भरण-पोषण के लिए होना चाहिए। परन्तु, 'जलने के लिए नहीं' का अर्थ है कि स्त्री को ससुराल में अग्नि (कष्ट, अत्याचार) में जलाया नहीं जाना चाहिए। यह पंक्ति दर्शाती है कि अनेक स्त्रियाँ ससुराल में घर-गृहस्थी का सारा काम करने के बावजूद अत्याचार और उपेक्षा का शिकार होती हैं, उन्हें अग्नि के समान कष्टों में झोंक दिया जाता है।

प्रश्न 2 (ख)

माँ ने बेटी को सचेत करना क्यों ज़रूरी समझा?
Solution: माँ ने अपनी बेटी को सचेत करना इसलिए ज़रूरी समझा क्योंकि बेटी अभी बहुत कम उम्र की थी और जीवन की कटु सच्चाइयों तथा समाज की बुराइयों से अनभिज्ञ थी। माँ स्वयं अपने जीवन में हुए अन्याय और कष्टों से गुज़री थी, और वह नहीं चाहती थी कि उसकी बेटी को भी उन्हीं या इसी तरह के कष्टों का सामना करना पड़े। इसलिए, बेटी को ससुराल में आने वाली कठिनाइयों और संभावित शोषण के प्रति आगाह करना माँ ने अपना कर्तव्य समझा।

प्रश्न 3

'पाठिका थी वह धुँधले प्रकाश की कुछ तुकों और कुछ लयबद्ध पंक्तियों की' - इन पंक्तियों को पढ़कर लड़की की जो छवि आपके सामने उभरकर आ रही है उसे शब्दबद्ध कीजिए।
Solution: इन पंक्तियों से लड़की की एक ऐसी छवि उभरती है जो अभी जीवन की वास्तविकताओं से पूरी तरह परिचित नहीं है। वह एक 'पाठिका' है, जिसका अर्थ है कि वह अभी सीख रही है और दुनिया को समझने की प्रक्रिया में है। 'धुँधले प्रकाश' का प्रतीक है कि उसका ज्ञान या समझ अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। वह 'कुछ तुकों और कुछ लयबद्ध पंक्तियों' में खोई हुई है, जो उसकी कल्पनाशीलता, आदर्शवाद और जीवन के प्रति एक काव्यात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह छवि एक ऐसी युवा लड़की की है जो अभी भी बचपन की मासूमियत और भविष्य की कोरी कल्पनाओं में जी रही है, और जीवन की कठोर सच्चाइयों से अंजान है।

प्रश्न 4

माँ को अपनी बेटी 'अंतिम पूँजी' क्यों लग रही थी?
Solution: माँ के लिए उसकी बेटी उसकी सबसे प्रिय और अनमोल 'पूँजी' थी, जिसे उसने बड़े स्नेह और सावधानी से पाला-पोसा था। कन्यादान के समय, जब बेटी अपने घर को छोड़कर ससुराल जा रही होती है, तो माँ को ऐसा महसूस होता है कि वह अपनी सबसे कीमती धरोहर को विदा कर रही है। इस विदाई के बाद, माँ के पास भावनात्मक रूप से कुछ भी शेष नहीं रहेगा, वह स्वयं को बिल्कुल अकेला और खाली महसूस करेगी। इसलिए, बेटी का जाना माँ के लिए अपनी 'अंतिम पूँजी' को खोने जैसा था, जो उसके जीवन का सबसे बड़ा संबल थी।

प्रश्न 5

माँ ने बेटी को क्या-क्या सीख दी?
Solution: माँ ने अपनी बेटी को विदा करते समय कई महत्वपूर्ण सीख दीं, जिनका उद्देश्य उसे जीवन की कठिनाइयों का सामना करने और अपना सम्मान बनाए रखने में मदद करना था। मुख्य सीखें इस प्रकार हैं:
  1. अपनी सुंदरता पर कभी घमंड न करना।
  2. दुःख या कष्ट में कभी भी आत्महत्या जैसा कदम न उठाना।
  3. धन-संपत्ति के आकर्षण से दूर रहना और लोभ में न पड़ना।
  4. अपनी कोमलता को बनाए रखना, लेकिन कमज़ोरी का प्रदर्शन करके शोषण का शिकार न बनना।
  5. घर-गृहस्थी के कार्यों को करते हुए भी अपने आत्म-सम्मान को बनाए रखना।
ये सीखें बेटी को एक सशक्त और स्वाभिमानी स्त्री के रूप में जीवन जीने के लिए प्रेरित करती हैं।

प्रश्न 6

आपकी दृष्टि में कन्या के साथ 'दान' की बात करना कहाँ तक उचित है?
Solution: कन्या के साथ 'दान' शब्द का प्रयोग करना उचित नहीं है। कन्या कोई वस्तु या संपत्ति नहीं है जिसका दान किया जा सके। वह एक सजीव, भावनाशील इंसान है जिसका अपना एक स्वतंत्र अस्तित्व होता है। माता-पिता का कन्या के प्रति प्रेम और वात्सल्य किसी वस्तु के दान जैसा नहीं होता। विवाह एक पवित्र बंधन है जहाँ कन्या एक नए परिवार से जुड़ती है, न कि किसी वस्तु की तरह दान की जाती है। 'दान' शब्द का प्रयोग स्त्री को वस्तु के रूप में प्रस्तुत करता है, जो उसकी गरिमा के विरुद्ध है। इसलिए, इस शब्द के प्रयोग पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

Common mistakes

  • Misinterpreting the mother's advice as mere traditional warnings.
  • Overlooking the poem's critique of societal exploitation of women.
  • Failing to connect the symbolic language to broader themes of womanhood.
  • Understanding 'kanyadan' solely as a ritual without considering its implications.

Revision tips

  • Read the poem aloud to feel the emotional tone.
  • Focus on the mother's specific advice and its underlying reasons.
  • Analyze the meaning of each symbolic phrase provided in the solutions.
  • Discuss the questions about societal treatment of women and 'kanyadan' with peers.

Practice MCQs

Q1. माँ ने बेटी को 'लड़की जैसी मत दिखाई देना' कहकर क्या चेतावनी दी?

Q2. 'आग रोटियाँ सेंकने के लिए है, जलने के लिए नहीं' - इस पंक्ति में किस सामाजिक समस्या की ओर संकेत है?

Q3. माँ अपनी बेटी को 'अंतिम पूँजी' क्यों मानती थी?

Q4. कविता में 'धुँधले प्रकाश की कुछ तुकों और कुछ लयबद्ध पंक्तियों' का प्रयोग किसके लिए किया गया है?

Q5. लेखक की दृष्टि में 'कन्यादान' शब्द का प्रयोग कहाँ तक उचित है?

Frequently asked questions

कक्षा 10 हिंदी के लिए 'कन्यादान' पाठ के मुख्य विषय क्या हैं?

मुख्य विषय माँ की बेटी को विदाई के समय दी गई सीख, स्त्री की सामाजिक स्थिति, शोषण से बचाव और 'कन्यादान' की अवधारणा पर प्रश्न उठाना है।

माँ ने बेटी को 'लड़की जैसी मत दिखाई देना' क्यों कहा?

माँ ने यह इसलिए कहा क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि बेटी अपनी कोमलता या कमज़ोरी का प्रदर्शन करे, जिससे उसका शोषण हो सके।

'आग रोटियाँ सेंकने के लिए है, जलने के लिए नहीं' का क्या अर्थ है?

इस पंक्ति का अर्थ है कि घर की अग्नि (रसोई) का उपयोग भोजन बनाने के लिए होना चाहिए, न कि स्त्री को ससुराल में जलाकर या कष्ट देकर।

माँ को बेटी 'अंतिम पूँजी' क्यों लगती थी?

माँ के लिए बेटी उसका सबसे बड़ा भावनात्मक सहारा और संबल थी। उसके विवाह के बाद माँ स्वयं को अकेला और खाली महसूस करती थी।

क्या 'कन्यादान' शब्द का प्रयोग उचित है?

समाधान के अनुसार, यह शब्द अनुचित है क्योंकि कन्या कोई वस्तु नहीं है जिसका दान किया जा सके; उसका अपना अस्तित्व और भावनाएँ होती हैं।

ये समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान पाठ के गहन अर्थ, प्रतीकात्मक भाषा और सामाजिक संदेश को समझने में मदद करते हैं, जिससे छात्र परीक्षा में पूछे जाने वाले विश्लेषणात्मक प्रश्नों का उत्तर दे सकते हैं।

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