CBSE Class 10 Hindi Kritika Chapter 5: मैं क्यों लिखता हूँ? NCERT Solutions

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This chapter, 'Main Kyon Likhta Hun?' (Why I Write?), delves into the profound motivations behind a writer's creative process. The NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 5 explore the interplay between direct experience and inner feeling (anubhuti) in shaping literary work. It examines how external factors like societal pressures, editorial demands, and the pursuit of recognition, alongside personal compulsion, drive an author to write. The solutions also touch upon the devastating impact of scientific advancements when misused, using the Hiroshima bombing as a stark example. These solutions provide clear explanations and detailed answers to help students grasp the nuances of literary inspiration and the responsibilities associated with creative expression, aiding in their exam preparation.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter5. मैं क्यों लिखता हूँ

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 5, 'Main Kyon Likhta Hun?', focuses on the author's personal reflections on the reasons behind writing. It clarifies the distinction between direct experience and inner feeling as sources of inspiration, emphasizing the latter's importance. The chapter also discusses external pressures like economic needs, editorial requests, and societal expectations that can motivate writing. The solutions explain how these elements, along with the artist's inner drive, contribute to creative output, using the Hiroshima bombing as a case study for the misuse of science.

Learning outcomes

  • Understand the difference between direct experience and inner feeling in writing.
  • Identify various internal and external factors that motivate writers.
  • Analyze the role of societal and editorial pressures on creative work.
  • Reflect on the misuse of scientific advancements through the Hiroshima example.
  • Explain how an artist's personal experiences and external stimuli lead to creation.

Topics covered

Paper topics

  • लेखक की प्रेरणा
  • प्रत्यक्ष अनुभव बनाम अनुभूति
  • आंतरिक विवशता
  • बाह्य दबाव (आर्थिक, सामाजिक, संपादकीय)
  • रचनात्मक प्रक्रिया
  • हिरोशिमा बम-विस्फोट
  • विज्ञान का दुरुपयोग
  • कलाकारों पर दबाव

Important topics

  • लेखक की प्रेरणा के स्रोत (आंतरिक और बाह्य)
  • अनुभूति का महत्व
  • हिरोशिमा का उदाहरण और विज्ञान का दुरुपयोग
  • रचनाकार पर विभिन्न दबावों का प्रभाव

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

लेखक के अनुसार प्रत्यक्ष अनुभव की अपेक्षा अनुभूति उनके लेखन में कहीं अधिक मदद करती है, क्यों?
Solution: लेखक के विचार में, प्रत्यक्ष अनुभव वह है जिसे हम घटित होते हुए देखते हैं, जबकि अनुभूति संवेदना और कल्पना के माध्यम से उस सत्य को आत्मसात करती है, भले ही वह सीधे तौर पर कृतिकार के साथ न घटा हो। अनुभूति लेखक के हृदय के सभी भावों को बाहर निकालने में अधिक सहायक होती है। जब तक हृदय में अनुभूति की गहराई न जागे, तब तक प्रभावी लेखन संभव नहीं है, क्योंकि यही संवेदना को जागृत करती है और लेखक को लिखने के लिए प्रेरित करती है। लेखक अपनी आंतरिक विवशता के कारण लिखने के लिए प्रेरित होता है, और यही अनुभूति उसे लिखने के लिए मजबूर करती है। इसलिए, लेखक लेखन के लिए अनुभूति को प्रत्यक्ष अनुभव से अधिक महत्व देता है।

प्रश्न 2

लेखक ने अपने आपको हिरोशिमा के विस्फोट का भोक्ता कब और किस तरह महसूस किया?
Solution: लेखक ने हिरोशिमा के बम-विस्फोट के परिणामों को पहले अख़बारों में पढ़ा था और जापान यात्रा के दौरान उस अस्पताल का दौरा भी किया था जहाँ आज भी उस भयानक विस्फोट से पीड़ित लोगों का इलाज हो रहा था। हालाँकि, इन अनुभवों से वह स्वयं को विस्फोट का भोक्ता नहीं मानता था। कुछ दिन बाद, जब उसने एक बड़े से पत्थर पर एक व्यक्ति की उजली छाया देखी, तो उसे अनुभूति हुई। संभवतः विस्फोट के समय कोई व्यक्ति उस स्थान पर खड़ा रहा होगा, और विस्फोट से निकले रेडियोधर्मी पदार्थ ने उसे भाप बनाकर उड़ा दिया और पत्थर को झुलसा दिया। इस प्रकार, जैसे समूची दुर्घटना उस पत्थर पर अंकित हो गई हो। इस प्रत्यक्ष अनुभूति ने लेखक के हृदय को गहराई से झकझोर दिया और उसे हिरोशिमा के विस्फोट का भोक्ता बना दिया।

प्रश्न 3.1

'मैं क्यों लिखता हूँ?' के आधार पर बताइए कि लेखक को कौन-सी बातें लिखने के लिए प्रेरित करती हैं?
Solution: 'मैं क्यों लिखता हूँ?' पाठ के अनुसार, किसी भी लेखक को लिखने के लिए कई कारक प्रेरित करते हैं। इनमें प्रमुख हैं: आर्थिक विवशता (धन कमाने की आवश्यकता), आंतरिक विवशता (मन की गहरी भावनाएँ और संवेदनाएँ), प्रसिद्धि पाने की इच्छा, तथा संपादक और प्रकाशक का आग्रह या दबाव। ये सभी मिलकर लेखक को अपनी रचनाएँ प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

प्रश्न 3.2

'मैं क्यों लिखता हूँ?' के आधार पर बताइए कि किसी रचनाकार के प्रेरणा स्रोत किसी दूसरे को कुछ भी रचने के लिए किस तरह उत्साहित कर सकते हैं?
Solution: किसी रचनाकार को उसकी आंतरिक विवशता और संवेदनाएँ रचना करने के लिए प्रेरित करती हैं। हालाँकि, कई बार संपादकों के दबाव या आग्रह के कारण भी उसे रचना लिखने का प्रयास करना पड़ता है। जब कोई रचनाकार अपनी आंतरिक व्याकुलता या बाहरी दबाव के कारण कुछ रचता है, तो उसकी रचनाएँ दूसरों को भी प्रेरित कर सकती हैं। वे उन रचनाओं को पढ़कर या उनके पीछे की प्रेरणा को समझकर स्वयं भी कुछ रचने के लिए उत्साहित हो सकते हैं। इस प्रकार, एक रचनाकार का कार्य दूसरे के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

प्रश्न 4

कुछ रचनाकारों के लिए आत्मानुभूति/स्वयं के अनुभव के साथ-साथ बाह्य दबाव भी महत्वपूर्ण होता है। ये बाह्य दबाव कौन-कौन से हो सकते हैं?
Solution: रचनाकारों के लिए आत्मानुभूति और स्वयं के अनुभव लेखन के मुख्य स्रोत होते हैं, लेकिन इनके साथ-साथ बाह्य दबाव भी उन्हें लिखने के लिए प्रेरित करते हैं। ये बाह्य दबाव निम्नलिखित हो सकते हैं:
  1. आर्थिक लाभ की आकांक्षा: लेखन से धन कमाने या आर्थिक सुरक्षा प्राप्त करने की इच्छा।
  2. सामाजिक परिस्थितियाँ: समाज की तत्कालीन घटनाएँ, समस्याएँ या अपेक्षाएँ जो लेखक को लिखने के लिए प्रेरित करें।
  3. संपादकों का आग्रह: पत्रिकाओं या प्रकाशन गृहों के संपादकों द्वारा किसी विशेष विषय पर लिखने का अनुरोध या दबाव।
  4. विशिष्ट के पक्ष में प्रस्तुत करने का दबाव: किसी विशेष विचार, व्यक्ति या घटना के समर्थन में लिखने का दबाव।
ये बाहरी कारक लेखक की आंतरिक प्रेरणा के साथ मिलकर उसकी रचना प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 5

क्या बाह्य दबाव केवल लेखन से जुड़े रचनाकारों को ही प्रभावित करते हैं या अन्य क्षेत्रों से जुड़े कलाकारों को भी प्रभावित करते हैं, कैसे?
Solution: बिल्कुल! बाह्य दबाव केवल लेखन से जुड़े रचनाकारों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि ये किसी भी क्षेत्र के कलाकारों को समान रूप से प्रभावित करते हैं। कलाकार अपनी अनुभूति या खुशी के लिए कला का प्रदर्शन करते हैं, लेकिन उनके क्षेत्र की अपनी विवशताएँ और दबाव होते हैं जो लेखन से भिन्न नहीं होते। उदाहरण के लिए:
  • अभिनेता, मंच कलाकार या नर्तक: इन पर निर्देशक का दबाव रहता है कि वे उसकी अपेक्षाओं के अनुसार प्रदर्शन करें।
  • गायक-गायिकाएँ: इन पर आयोजकों और श्रोताओं की अपेक्षाओं का दबाव बना रहता है कि वे लोकप्रिय गीत गाएँ या अच्छा प्रदर्शन करें।
  • मूर्तिकार और चित्रकार: इन पर बनवाने वाले ग्राहकों की इच्छाओं, पसंद और बजट का दबाव रहता है कि वे वैसा ही निर्माण करें जैसा ग्राहक चाहता है।
इस प्रकार, विभिन्न कला क्षेत्रों में कलाकारों को भी बाहरी दबावों का सामना करना पड़ता है।

प्रश्न 6

'हिरोशिमा' पर लिखी कविता लेखक के अंत: व बाह्य दोनों दबाव का परिणाम है, यह आप कैसे कह सकते हैं?
Solution: यह कहा जा सकता है कि 'हिरोशिमा' पर लिखी कविता लेखक के आंतरिक और बाह्य दोनों दबावों का परिणाम है। जापान यात्रा के दौरान हिरोशिमा में पीड़ितों को देखकर लेखक को थोड़ी पीड़ा हुई, जो एक प्रकार का बाह्य प्रभाव था। हालाँकि, उस समय उसका मन सीधे तौर पर लिखने के लिए प्रेरित नहीं हो पा रहा था। बाद में, जब उसने जले हुए पत्थर पर किसी व्यक्ति की उजली छाया देखी, तो उसे विस्फोट से प्रभावित लोगों के दर्द की गहरी अनुभूति हुई। इस आंतरिक अनुभूति ने उसे लिखने के लिए तीव्र रूप से प्रेरित किया। इस प्रकार, हिरोशिमा की घटना का प्रत्यक्ष अनुभव (बाह्य) और उससे उत्पन्न गहरी अनुभूति (आंतरिक) दोनों ने मिलकर कविता लिखने के लिए लेखक पर दबाव बनाया, जिससे यह कविता उसके आंतरिक और बाह्य दोनों दबावों का परिणाम बनी।

प्रश्न 7

हिरोशिमा की घटना विज्ञान का भयानकतम दुरुपयोग है। आपकी दृष्टि में विज्ञान का दुरुपयोग कहाँ-कहाँ और किस तरह से हो रहा है?
Solution: हिरोशिमा की घटना वास्तव में विज्ञान के दुरुपयोग का एक ज्वलंत उदाहरण है। इसके अतिरिक्त, मनुष्य द्वारा विज्ञान का दुरुपयोग कई अन्य क्षेत्रों में भी हो रहा है, जैसे:
  1. पर्यावरण प्रदूषण: विज्ञान ने यात्रा को सुगम बनाने के लिए हवाई जहाज़, गाड़ियाँ आदि का निर्माण किया, लेकिन इनके अत्यधिक उपयोग से हमने अपने वातावरण को गंभीर रूप से प्रदूषित कर दिया है।
  2. मानव अंगों का व्यापार: विज्ञान की प्रगति से अंग प्रत्यारोपण संभव हुआ है, लेकिन इसका दुरुपयोग करके मानव अंगों का अवैध व्यापार किया जा रहा है।
  3. भ्रूण हत्याएँ: वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करके लिंग-निर्धारण और उसके आधार पर भ्रूण हत्याएँ की जा रही हैं, जो एक गंभीर नैतिक और सामाजिक दुरुपयोग है।
ये उदाहरण दर्शाते हैं कि कैसे वैज्ञानिक उपलब्धियों का उपयोग विनाशकारी या अनैतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।

Common mistakes

  • Confusing direct experience with inner feeling (anubhuti).
  • Underestimating the impact of external pressures on writers.
  • Not connecting the Hiroshima example to the broader theme of scientific misuse.
  • Providing superficial answers without elaborating on the author's perspective.

Revision tips

  • Focus on the distinction between 'anubhav' (experience) and 'anubhuti' (feeling) as explained by the author.
  • List all the internal and external motivations mentioned for writing.
  • Analyze the Hiroshima example and its connection to the misuse of science.
  • Relate the pressures faced by writers to those faced by artists in other fields.
  • Summarize the author's personal journey of feeling like a 'bhokta' (victim) of the Hiroshima bombing.

Practice MCQs

Q1. लेखक के अनुसार, प्रत्यक्ष अनुभव की अपेक्षा लेखन में अधिक सहायक क्या है?

Q2. लेखक ने हिरोशिमा के विस्फोट का भोक्ता स्वयं को कब महसूस किया?

Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा लेखक को लिखने के लिए प्रेरित करने वाला आंतरिक कारक है?

Q4. किसी रचनाकार के लिए बाह्य दबाव का एक उदाहरण क्या हो सकता है?

Q5. विज्ञान के दुरुपयोग का ज्वलंत उदाहरण क्या है?

Frequently asked questions

कक्षा 10 हिंदी कृतिका के अध्याय 5 'मैं क्यों लिखता हूँ?' में मुख्य रूप से क्या समझाया गया है?

इस अध्याय में लेखक अपनी लेखन प्रेरणा के कारणों पर विचार करता है, जिसमें प्रत्यक्ष अनुभव और आंतरिक अनुभूति के बीच का अंतर, तथा आर्थिक, सामाजिक और संपादकीय जैसे बाहरी दबावों की भूमिका शामिल है।

लेखक के अनुसार, प्रत्यक्ष अनुभव से अधिक महत्वपूर्ण क्या है और क्यों?

लेखक के अनुसार, अनुभूति (संवेदना और कल्पना से उत्पन्न) प्रत्यक्ष अनुभव से अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हृदय के भावों को बाहर निकालने और लेखन के लिए प्रेरित करने में अधिक सहायक होती है।

लेखक को हिरोशिमा के विस्फोट का भोक्ता बनने का अनुभव कैसे हुआ?

जापान यात्रा के दौरान हिरोशिमा में एक जले हुए पत्थर पर व्यक्ति की उजली छाया देखकर लेखक को विस्फोट की भयावहता का प्रत्यक्ष अनुभव हुआ और उसने स्वयं को उसका भोक्ता महसूस किया।

लेखन के लिए कौन-कौन से बाह्य दबाव महत्वपूर्ण हो सकते हैं?

लेखन के लिए बाह्य दबावों में आर्थिक लाभ की आकांक्षा, सामाजिक परिस्थितियाँ, संपादकों का आग्रह और किसी विशिष्ट पक्ष में प्रस्तुत करने का दबाव शामिल हो सकते हैं।

क्या बाह्य दबाव केवल लेखकों को ही प्रभावित करते हैं?

नहीं, बाह्य दबाव किसी भी क्षेत्र के कलाकारों को प्रभावित करते हैं, जैसे अभिनेताओं पर निर्देशक का, गायकों पर आयोजकों का, और मूर्तिकारों/चित्रकारों पर ग्राहकों का दबाव।

हिरोशिमा की घटना को विज्ञान के दुरुपयोग से कैसे जोड़ा गया है?

हिरोशिमा की घटना को विज्ञान के भयानकतम दुरुपयोग के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो दर्शाता है कि कैसे वैज्ञानिक प्रगति विनाशकारी उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।

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