Class 10 Hindi Kritika Chapter 4: एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! NCERT Solutions

NCERT Solutions PDF Class 10 PDF

CBSE कक्षा 10 हिंदी कृतिका, अध्याय 4, 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!' के लिए विस्तृत समाधान प्रस्तुत हैं। यह अध्याय स्वतंत्रता संग्राम में समाज के वंचित वर्गों के योगदान को उजागर करता है, जिसे टुन्नू और दुलारी जैसे पात्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। दुलारी के जटिल चरित्र का अन्वेषण किया गया है, जो बाहर से कठोर प्रतीत होती है लेकिन भीतर से कोमल हृदय रखती है, और टुन्नू की मृत्यु पर उसकी भावनात्मक प्रतिक्रिया का वर्णन है। पाठ में कजरी दंगल जैसी पारंपरिक लोक कलाओं, उनके उद्देश्य और अन्य क्षेत्रीय लोक आयोजनों पर भी चर्चा की गई है। इसके अतिरिक्त, दुलारी के बहुआयामी व्यक्तित्व का विश्लेषण किया गया है, जिसमें उसे एक प्रतिभाशाली गायिका, एक सशक्त महिला, एक देशभक्त, एक समर्पित प्रेमिका, एक दयालु आत्मा, एक निडर व्यक्ति और आत्म-सम्मान वाली महिला के रूप में प्रस्तुत किया गया है। समाधान दुलारी और टुन्नू की पहली मुलाकात का भी विवरण देते हैं और जीवन की अनिश्चितताओं के बारे में दुलारी के कथन का विश्लेषण करते हैं, जो आज के युवाओं के लिए एक संदेश प्रदान करता है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter4. एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 4, 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!', focuses on the role of the underprivileged in the freedom movement, exemplified by characters Tunnu and Dulari. It examines Dulari's character, her hidden emotions, and her relationship with Tunnu. The chapter also touches upon folk art forms like Kajli Dangal and their social significance. Key character traits of Dulari, such as her singing prowess, strength, patriotism, and hidden love, are analyzed. The solutions also cover the initial encounter between Dulari and Tunnu and interpret a dialogue conveying life's unpredictability, offering a message for young readers.

Learning outcomes

  • Understand the contribution of marginalized communities to India's freedom struggle.
  • Analyze the complex character of Dulari, her perceived harshness, and inner emotions.
  • Explain the significance of folk art forms like Kajli Dangal and their social role.
  • Identify and describe Dulari's key character traits: singer, strong woman, patriot, lover, compassionate, fearless, and proud.
  • Interpret dialogues and understand the underlying messages for contemporary youth.
  • Describe the first meeting and developing relationship between Dulari and Tunnu.

Topics covered

Paper topics

  • Contribution of marginalized sections to freedom struggle
  • Character analysis of Dulari
  • Character analysis of Tunnu
  • Dulari's hidden emotions and love
  • Kajli Dangal and folk art forms
  • Social significance of folk performances
  • Dulari's personality traits (singer, strong, patriot, lover, compassionate, fearless, proud)
  • First meeting of Dulari and Tunnu
  • Life's uncertainties and messages for youth
  • Social perception of 'Gaunharin'

Important topics

  • Character analysis of Dulari
  • Contribution of marginalized sections to freedom struggle
  • Dulari's relationship with Tunnu
  • Social and cultural context of folk art
  • Dulari's multifaceted personality

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

हमारी आज़ादी की लड़ाई में समाज के उपेक्षित माने जाने वाले वर्ग का योगदान भी कम नहीं रहा है। इस कहानी में ऐसे लोगों के योगदान को लेखक ने किस प्रकार उभारा है?
Solution:

भारत की स्वतंत्रता संग्राम में समाज के विभिन्न वर्गों, जिनमें उपेक्षित माने जाने वाले लोग भी शामिल थे, का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इस कहानी में लेखक ने टुन्नू और दुलारी जैसे पात्रों के माध्यम से इस योगदान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। टुन्नू और दुलारी दोनों ही कजली गाने वाले कलाकार हैं। टुन्नू ने स्वतंत्रता के लिए आयोजित जुलूसों में सक्रिय रूप से भाग लिया और अंततः अपने प्राणों की आहुति देकर यह सिद्ध किया कि वे केवल मनोरंजन के लिए नहीं थे, बल्कि उनके दिलों में भी आज़ादी पाने की तीव्र इच्छा थी। इसी प्रकार, दुलारी ने देशभक्ति का परिचय देते हुए रेशमी साड़ियों के बंडल को विदेशी वस्त्रों की होली जलाने के लिए दे दिया। जलसे में गायिका के रूप में उसका जाना और वहाँ नाचना-गाना भी उसके अप्रत्यक्ष योगदान का प्रतीक है। इस प्रकार, लेखक ने समाज के इन उपेक्षित वर्गों के स्वतंत्रता आंदोलन में अमूल्य योगदान को रेखांकित किया है।

प्रश्न 2

कठोर ह्रदयी समझी जाने वाली दुलारी टुन्नू की मृत्यु पर क्यों विचलित हो उठी?
Solution:

दुलारी को अक्सर उसके कठोर स्वभाव के लिए जाना जाता था, लेकिन उसका यह कठोर आचरण नारियल की भांति बाहरी था, जबकि भीतर से वह अत्यंत कोमल हृदय की थी। एक अकेली स्त्री होने के नाते, वह अपनी सुरक्षा के लिए कठोर व्यवहार अपनाती थी। टुन्नू, जो उससे उम्र में काफी छोटा था और उससे प्रेम करता था, दुलारी के हृदय में एक विशेष स्थान रखता था। यद्यपि वह अक्सर टुन्नू को दुत्कारती रहती थी, पर वह जानती थी कि टुन्नू का प्रेम उसके शरीर के लिए नहीं, बल्कि उसकी गायन कला के प्रति था। जब फेंकू ने टुन्नू की मृत्यु का समाचार दिया, तो दुलारी का हृदय अत्यंत व्यथित हो गया और उसकी आँखों से आँसूओं की धारा बह निकली। जिस हृदय को कोई नहीं पिघला पाता था, वह आज टुन्नू की मृत्यु पर चीत्कार कर रहा था। टुन्नू की मृत्यु ने दुलारी के मन में उसके प्रति छिपे प्रेम को सबके सामने ला दिया। उसने टुन्नू द्वारा दी गई खादी की धोती पहनकर अपनी संवेदना व्यक्त की।

प्रश्न 3

कजली दंगल जैसी गतिविधियों का आयोजन क्यों हुआ करता होगा? कुछ और परंपरागत लोक आयोजनों का उल्लेख कीजिए।
Solution:

कजली, लोकगायन की एक पारंपरिक शैली है, जिसे विशेष रूप से भादों के महीने में तीज के अवसर पर गाया जाता है। उस समय, इस प्रकार के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य लोगों का मनोरंजन करना होता था। इसके अतिरिक्त, ये आयोजन जन-प्रचार का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी थे, जहाँ सामाजिक संदेशों या समसामयिक मुद्दों को लोगों तक पहुँचाया जाता था। कजली गायकों के लिए इन आयोजनों में भाग लेना प्रतिष्ठा का विषय बन जाता था, और आयोजक अपनी प्रतिष्ठा को इन कलाकारों से जोड़कर समारोहों का आयोजन करते थे।

भारत में विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार के पारंपरिक लोक आयोजन होते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:

  • राजस्थान में लोक संगीत और पशु मेलों का आयोजन।
  • पंजाब में लोकनृत्य (जैसे भांगड़ा, गिद्दा) और लोकसंगीत के कार्यक्रम।
  • उत्तर भारत में कुश्ती या पहलवानी के दंगल।
  • दक्षिण भारत में बैलों की दौड़ (जल्लीकट्टू जैसे आयोजन) और कभी-कभी हाथी-युद्ध के प्रदर्शन।

प्रश्न 4

दुलारी विशिष्ट कहे जाने वाले सामाजिक - सांस्कृतिक दायरे से बाहर है फिर भी अति विशिष्ट है। इस कथन को ध्यान में रखते हुए दुलारी की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए।
Solution:

दुलारी को सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से विशिष्ट माने जाने वाले दायरे से बाहर माना जाता है क्योंकि वह एक 'गौनहारिन' (गायक/नर्तकी) है, और पारंपरिक रूप से ऐसे कलाकारों को समाज में उच्च प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं होती थी। इसके बावजूद, उसकी प्रतिभाएँ और व्यक्तित्व उसे अत्यंत विशिष्ट बनाते हैं। दुलारी की चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. प्रबुद्ध गायिका: दुलारी एक अत्यंत प्रभावशाली और कुशल गायिका है। उसकी आवाज़ में मधुरता और लय का अद्भुत संगम है। वह पद्य में सवाल-जवाब करने में माहिर है और उसकी गायन क्षमता के समक्ष अन्य गायक फीके पड़ जाते हैं।
  2. सबला नारी: एक स्त्री होते हुए भी, दुलारी पुरुषों को चुनौती देने की क्षमता रखती है। वह पुरुषों की तरह ही शारीरिक कसरत और दंड लगाने में सक्षम है, जो उसकी शारीरिक शक्ति और आत्म-निर्भरता को दर्शाता है।
  3. देशभक्त: यद्यपि दुलारी प्रत्यक्ष रूप से स्वतंत्रता संग्राम में शामिल नहीं हुई, वह अपने देश के प्रति समर्पित थी। इसका प्रमाण तब मिलता है जब उसने फेंकू द्वारा दी गई रेशमी साड़ियों के बंडल को विदेशी वस्त्रों की होली जलाने के लिए जुलूस में आए लोगों को दे दिया।
  4. समर्पित प्रेमिका: दुलारी टुन्नू से मन ही मन गहरा प्रेम करती थी, परन्तु उसने अपने जीते जी इस प्रेम को कभी व्यक्त नहीं किया। टुन्नू की मृत्यु के पश्चात ही उसके हृदय में दबा हुआ प्रेम आँसुओं के रूप में प्रवाहित हुआ।
  5. सहृदया नारी: वह अत्यंत भावुक और संवेदनशील है। टुन्नू की मृत्यु पर उसकी आँखों से आँसुओं की धारा बह निकली, जो उसके गहरे भावनात्मक लगाव को दर्शाती है।
  6. निडर स्त्री: दुलारी एक निडर और साहसी महिला थी। अकेली होने के कारण उसने स्वयं की रक्षा के लिए अपने आपको निडर बना लिया था। इसी निडरता के बल पर उसने फेंकू की दी हुई साड़ी को जुलूस में फेंक दिया और टुन्नू की मृत्यु के बाद खादी पहनकर समारोह में गायन प्रस्तुत किया।
  7. स्वाभिमानी स्त्री: दुलारी अपने आत्म-सम्मान से समझौता करने वाली नहीं थी। वह अपने स्वाभिमान को सर्वोपरि रखती थी, जिसके कारण उसने सरदार फेंकू द्वारा दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

प्रश्न 5

दुलारी का दुन्नू से पहली बार परिचय कहाँ और किस रूप में हुआ?
Solution:

टुन्नू और दुलारी का पहली बार परिचय भादों के महीने में तीज के अवसर पर खोजवाँ बाज़ार में हुआ था। उस समय दुलारी को वहाँ गाने के लिए बुलाया गया था। दुलारी का कजली गायन में, विशेषकर पद्य में सवाल-जवाब करने की शैली में, खासा नाम था और बड़े-बड़े गायक भी उसके सामने नहीं टिक पाते थे। उसी कजली दंगल में उसकी मुलाकात टुन्नू से हुई, जो स्वयं भी पद्यात्मक शैली में प्रश्न-उत्तर करने में कुशल था। टुन्नू ने दुलारी की चुनौती को स्वीकार किया और अपनी कला से उसे इतना प्रभावित किया कि दुलारी उसे मुग्ध होकर सुनती रही। टुन्नू ने अपनी कला से दुलारी को नतमस्तक कर दिया था, और यहीं से उनके परिचय की शुरुआत हुई।

प्रश्न 6

दुलारी का दुन्नू को यह कहना कहाँ तक उचित था - "तैं सरबउला बोल ज़िन्नगी में कब देखने लोट?...! "दुलारी से इस आक्षेप में आज के युवा वर्ग के लिए क्या संदेश छिपा है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
Solution:

दुलारी का दुन्नू को यह कहना कि, "तैं सरबउला बोल ज़िन्दगी में कब देखने लोट?...!" काफी हद तक उचित था। इस कथन के पीछे कई कारण थे:

  • आयु और अनुभव का अंतर: दुन्नू उस समय केवल सोलह-सत्रह वर्ष का था। उसके पिता एक गरीब पुरोहित थे जो बड़ी मुश्किल से घर चला पाते थे। दुन्नू ने जीवन की वास्तविक आर्थिक कठिनाइयों और धन के महत्व को शायद ही कभी समझा हो। उसने कभी 'लोट' (नोट) नहीं देखे थे और उसे यह अंदाज़ा नहीं था कि लोग किस प्रकार कौड़ी-कौड़ी जोड़कर अपना घर चलाते हैं।
  • जीवन की अनिश्चितता: दुलारी इस कथन के माध्यम से जीवन की अनिश्चितता की ओर इशारा कर रही थी। वह कहना चाहती थी कि जीवन में कब क्या हो जाए, कोई नहीं जानता। कब धन-संपत्ति हाथ लगे या कब सब कुछ छिन जाए, यह कहना मुश्किल है। इसलिए, हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।

आज के युवा वर्ग के लिए संदेश:

दुलारी के इस कथन में आज के युवा वर्ग के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश छिपा है। यह संदेश है कि जीवन की वास्तविकता को समझना, केवल दिवास्वप्न में न जीना, और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करना। युवा पीढ़ी को:

  • कड़ी मेहनत का महत्व समझना चाहिए: धन और सफलता आसानी से नहीं मिलती, उसके लिए परिश्रम आवश्यक है। उदाहरण के लिए, आज का युवा यदि केवल बड़े सपने देखे और मेहनत न करे, तो वह सफल नहीं हो सकता। उसे अपनी शिक्षा और कौशल विकास पर ध्यान देना चाहिए।
  • जीवन की अनिश्चितताओं के लिए तैयार रहना चाहिए: भविष्य अनिश्चित है। इसलिए, वित्तीय योजना बनाना, बचत करना और अप्रत्याशित परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहना महत्वपूर्ण है। जैसे, कोई युवा अचानक नौकरी खो सकता है, ऐसे में उसकी बचत उसे सहारा दे सकती है।
  • दूसरों के संघर्ष का सम्मान करना चाहिए: जो लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं या जीवन में संघर्ष कर रहे हैं, उनके प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए और उनके प्रयासों का सम्मान करना चाहिए।

संक्षेप में, दुलारी का यह कथन युवाओं को जीवन की यथार्थता से अवगत कराता है और उन्हें परिश्रम, दूरदर्शिता और संवेदनशीलता का पाठ पढ़ाता है।

Common mistakes

  • Misinterpreting Dulari's outward harshness as a lack of emotion.
  • Underestimating the role of seemingly 'unimportant' social groups in historical movements.
  • Failing to connect folk art forms to broader social and cultural contexts.
  • Superficially understanding character motivations without considering their background.

Revision tips

  • Focus on the character sketches of Dulari and Tunnu, noting their development and interactions.
  • Understand the historical context of the freedom struggle and the role of various social classes.
  • Analyze the symbolism of objects and actions, like the burning of sarees or wearing khadi.
  • Pay attention to the descriptions of folk art forms and their cultural significance.
  • Consider the dialogues for their deeper meanings and messages for young readers.

Practice MCQs

Q1. कहानी में समाज के उपेक्षित वर्ग के योगदान को किस पात्र के माध्यम से दर्शाया गया है?

Q2. दुलारी को कठोर ह्रदयी क्यों समझा जाता था, जबकि वह नरम दिल की थी?

Q3. कजली दंगल जैसी गतिविधियों का आयोजन मुख्य रूप से किस लिए होता था?

Q4. दुलारी ने फेंकू द्वारा दी गई रेशमी साड़ियों का क्या किया?

Q5. दुलारी का दुन्नू के प्रति प्रेम किस रूप में प्रकट हुआ?

Frequently asked questions

What is the main theme of Class 10 Hindi Kritika Chapter 4, 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!'?

The main theme is the significant contribution of marginalized sections of society, like singers and performers, to India's freedom struggle, and the exploration of complex human emotions through characters like Dulari and Tunnu.

Who are the main characters in this chapter and what do they represent?

The main characters are Dulari, a renowned singer perceived as harsh but inwardly compassionate, and Tunnu, a young admirer. They represent the often-overlooked contributions of artists and the lower strata of society.

What is Kajli Dangal and why is it mentioned in the chapter?

Kajli Dangal is a form of folk singing, often performed during the monsoon season (Bhado). It is mentioned to highlight traditional folk entertainment and its role in social gatherings and public expression.

How does the chapter portray Dulari's character?

Dulari is portrayed as a strong, independent, and talented singer who maintains a tough exterior to protect herself. However, she possesses a deep inner capacity for love and compassion, especially towards Tunnu.

What message does Dulari's statement to Tunnu convey?

Dulari's statement, 'तैं सरबउला बोल ज़िन्दगी में कब देखने लोट?...!', warns Tunnu about the unpredictability of life and the importance of understanding financial struggles, urging preparedness for any situation.

How do these NCERT Solutions help students?

These solutions provide clear, detailed explanations of the chapter's questions, helping students understand character motivations, themes, historical context, and cultural elements, thereby aiding in exam preparation.

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.