कक्षा 10 विज्ञान: ऊर्जा के स्रोत NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 10 विज्ञान के अध्याय 14, 'ऊर्जा के स्रोत' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों, जैसे कि जीवाश्मी ईंधन, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा और नाभिकीय ऊर्जा की गहन चर्चा शामिल है। समाधान यह भी बताते हैं कि एक आदर्श ऊर्जा स्रोत में क्या गुण होने चाहिए और उत्तम ईंधन की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हैं। छात्रों को ऊर्जा के अनवीकरणीय स्रोतों की सीमाओं और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ने की आवश्यकता को समझने में मदद मिलेगी। यह समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करने और विभिन्न प्रकार के ऊर्जा स्रोतों के लाभों और हानियों का विश्लेषण करने में सहायता करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectविज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter14. ऊर्जा के स्रोत

Chapter summary

कक्षा 10 विज्ञान के अध्याय 14 'ऊर्जा के स्रोत' के ये NCERT समाधान ऊर्जा के विभिन्न प्रकारों पर केंद्रित हैं। इसमें आदर्श ऊर्जा स्रोत और उत्तम ईंधन के गुणों की व्याख्या की गई है। समाधान जीवाश्मी ईंधन की हानियों, जैसे प्रदूषण और सीमित भंडार, पर प्रकाश डालते हैं और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता को स्पष्ट करते हैं। सौर कूकर, महासागरों से प्राप्त ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा और नाभिकीय ऊर्जा जैसे स्रोतों की कार्यप्रणाली और सीमाओं का भी वर्णन किया गया है। यह अध्याय छात्रों को ऊर्जा संरक्षण और टिकाऊ ऊर्जा विकल्पों के महत्व को समझने में मदद करता है।

Learning outcomes

  • ऊर्जा के उत्तम स्रोत के गुणों को समझना।
  • उत्तम ईंधन की विशेषताओं का वर्णन करना।
  • जीवाश्मी ईंधन की हानियों और उनके अनवीकरणीय प्रकृति को पहचानना।
  • ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की आवश्यकता को स्पष्ट करना।
  • सौर कूकर, महासागरीय ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा और नाभिकीय ऊर्जा जैसे स्रोतों की कार्यप्रणाली और सीमाओं का विश्लेषण करना।
  • ऊर्जा स्रोतों के उपयोग से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों का मूल्यांकन करना।

Topics covered

Paper topics

  • ऊर्जा का उत्तम स्रोत
  • उत्तम ईंधन के गुण
  • जीवाश्मी ईंधन
  • ऊर्जा के अनवीकरणीय स्रोत
  • ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोत
  • सौर ऊर्जा
  • सौर कूकर
  • महासागरीय ऊर्जा (तरंग और ज्वारीय)
  • भूतापीय ऊर्जा
  • नाभिकीय ऊर्जा
  • ऊर्जा संरक्षण
  • पर्यावरणीय प्रभाव

Important topics

  • ऊर्जा के उत्तम स्रोत और उत्तम ईंधन के गुण
  • जीवाश्मी ईंधन की हानियाँ और अनवीकरणीय प्रकृति
  • ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की आवश्यकता
  • सौर कूकर का कार्य सिद्धांत
  • भूतापीय ऊर्जा की प्रक्रिया
  • नाभिकीय ऊर्जा का महत्व

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

ऊर्जा का उत्तम स्रोत किसे कहते हैं?
Solution: ऊर्जा का उत्तम स्रोत वह है जिसमें निम्नलिखित गुण हों:
  1. यह प्रति एकांक आयतन अथवा प्रति एकांक द्रव्यमान में अधिक कार्य करने की क्षमता रखता हो।
  2. यह आसानी से उपलब्ध हो।
  3. इसका भंडारण तथा परिवहन सरल हो।
  4. यह सस्ता हो।
  5. इसके जलने से कोई हानिकारक प्रदूषण न फैले।

प्रश्न 2

उत्तम ईंधन किसे कहते हैं?
Solution: उत्तम ईंधन में निम्नलिखित गुण होने चाहिए:
  1. इसके दहन से प्रति एकांक द्रव्यमान से अधिक ऊष्मा मुक्त हो।
  2. यह आसानी से और सस्ती दर पर उपलब्ध हो।
  3. जलने पर यह अत्याधिक धुआं उत्पन्न न करे।
  4. इसका ज्वलन ताप उपयुक्त हो तथा उष्मीयमान (कैलोरी मान) अधिक हो।

प्रश्न 3

यदि आप अपने भोजन को गर्म करने के लिए किसी भी ऊर्जा स्रोत का उपयोग कर सकते हैं, तो आप किसका उपयोग करेंगे और क्यों?
Solution: यदि मुझे अपने भोजन को गर्म करने के लिए किसी भी ऊर्जा स्रोत का उपयोग करने का विकल्प मिले, तो मैं एलपीजी (LPG) गैस या विद्युतीय उपकरण का उपयोग करना पसंद करूँगा। इसके कारण निम्नलिखित हैं:
  1. उच्च ऊष्मा उत्पादन: एलपीजी और बिजली से पर्याप्त मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है, जो भोजन को जल्दी और कुशलता से गर्म करने के लिए पर्याप्त है।
  2. स्वच्छ दहन: एलपीजी के जलने से धुआं या हानिकारक अवशेष नहीं निकलते हैं, जिससे यह एक स्वच्छ विकल्प है। विद्युतीय उपकरण भी उपयोग के दौरान कोई दहन उत्पाद नहीं छोड़ते।
  3. सुविधा और उपलब्धता: ये स्रोत आसानी से उपलब्ध हैं और इनका उपयोग किसी भी समय सुगमतापूर्वक किया जा सकता है।
  4. लागत और भंडारण: एलपीजी अपेक्षाकृत सस्ता है और इसका भंडारण तथा परिवहन आसानी से किया जा सकता है। बिजली का उपयोग भी सुविधाजनक है।
  5. नियंत्रण: इन स्रोतों से प्राप्त ऊर्जा की मात्रा को आवश्यकतानुसार नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रश्न 4

जीवाश्मी ईंधन की क्या हानियाँ हैं?
Solution: जीवाश्मी ईंधन (जैसे कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस) की निम्नलिखित प्रमुख हानियाँ हैं:
  1. सीमित भंडार: जीवाश्मी ईंधन को बनने में करोड़ों वर्ष लगते हैं और पृथ्वी पर इनके भंडार सीमित मात्रा में हैं।
  2. अनवीकरणीय स्रोत: ये ऊर्जा के अनवीकरणीय स्रोत हैं, जिसका अर्थ है कि एक बार उपयोग होने के बाद इन्हें प्राकृतिक रूप से पुनः उत्पन्न होने में बहुत लंबा समय लगता है, या ये समाप्त हो जाते हैं।
  3. वायु प्रदूषण: जीवाश्मी ईंधन को जलाने से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) जैसी हानिकारक गैसें उत्सर्जित होती हैं, जो वायु प्रदूषण का कारण बनती हैं।
  4. ग्रीन हाउस प्रभाव: वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से पृथ्वी का तापमान बढ़ता है, जिसे ग्रीन हाउस प्रभाव कहा जाता है। यह जलवायु परिवर्तन का एक प्रमुख कारण है।

प्रश्न 5

हम ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर क्यों ध्यान दे रहे हैं?
Solution: हम ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर निम्नलिखित कारणों से ध्यान दे रहे हैं:
  1. जीवाश्मी ईंधन की सीमितता: जीवाश्मी ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस) ऊर्जा के अनवीकरणीय स्रोत हैं और पृथ्वी पर इनकी मात्रा सीमित है। यदि हम इनका उपयोग इसी दर से करते रहे, तो ये भविष्य में समाप्त हो जाएंगे।
  2. पर्यावरणीय चिंताएँ: जीवाश्मी ईंधन के जलने से भारी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें और अन्य प्रदूषक उत्सर्जित होते हैं, जो जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण जैसी गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं का कारण बनते हैं।
  3. ऊर्जा सुरक्षा: वैकल्पिक और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाकर, हम ऊर्जा के लिए जीवाश्मी ईंधन पर अपनी निर्भरता कम कर सकते हैं, जिससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ती है।
  4. टिकाऊ विकास: वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत, जैसे सौर, पवन और जल ऊर्जा, पर्यावरण के अनुकूल होते हैं और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देते हैं।
इसलिए, भविष्य की पीढ़ियों के लिए ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करने और पर्यावरण की रक्षा के लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है।

प्रश्न 6

सौर कूकर के लिए कौन सा दर्पण - अवतल, उत्तल, अथवा समतल - सर्वाधिक उपयुक्त है?
Solution: सौर कूकर के लिए अवतल दर्पण सर्वाधिक उपयुक्त है। इसका कारण यह है कि अवतल दर्पण एक अभिसारी दर्पण होता है। यह सूर्य से आने वाली समानांतर प्रकाश किरणों को परावर्तित करके एक बिंदु पर (फोकस पर) केंद्रित करता है। इस प्रकार, सूर्य की ऊर्जा एक छोटे से क्षेत्र में केंद्रित हो जाती है, जिससे वहाँ का ताप बहुत अधिक बढ़ जाता है। यह बढ़ी हुई ऊष्मा सौर कूकर के अंदर रखे भोजन को पकाने में सहायक होती है। उत्तल दर्पण प्रकाश को फैलाता है और समतल दर्पण प्रकाश को बिना केंद्रित किए परावर्तित करता है, इसलिए वे सौर कूकर के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

प्रश्न 7

महासागरों से प्राप्त होने वाली ऊर्जा की क्या सीमाएँ हैं?
Solution: महासागरों से प्राप्त होने वाली ऊर्जा की कई सीमाएँ हैं, जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं:
  1. तरंग ऊर्जा की सीमाएँ: तरंग ऊर्जा के व्यावसायिक उपयोग के लिए, तरंगों का अत्यंत प्रबल होना आवश्यक है। सभी स्थानों पर या हर समय ऐसी प्रबल तरंगें उपलब्ध नहीं होतीं।
  2. ज्वारीय ऊर्जा की सीमाएँ: ज्वारीय ऊर्जा प्राप्त करने के लिए बाँधों का निर्माण करना पड़ता है, जो केवल कुछ विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों में ही संभव है जहाँ ज्वार-भाटे का स्तर पर्याप्त हो। इन बाँधों के निर्माण से तटीय पारिस्थितिकी तंत्र पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
  3. महासागरीय तापीय ऊर्जा की सीमाएँ: महासागरों की सतह और गहराई के तापमान में अंतर का उपयोग करके ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है, लेकिन इसके लिए बड़े और जटिल संयंत्रों की आवश्यकता होती है। इन संयंत्रों की स्थापना और संचालन की लागत बहुत अधिक होती है, और ऊर्जा उत्पादन की दक्षता भी अक्सर कम होती है।
  4. लागत और अवसंरचना: महासागरों से ऊर्जा प्राप्त करने वाले संयंत्रों के निर्माण की प्रारंभिक लागत बहुत अधिक होती है। इसके अतिरिक्त, इन संयंत्रों को स्थापित करने और बनाए रखने के लिए विशेष अवसंरचना की आवश्यकता होती है।
इन सीमाओं के कारण, महासागरों से प्राप्त ऊर्जा का व्यापक व्यावसायिक उपयोग अभी भी सीमित है।

प्रश्न 8

भूतापीय ऊर्जा क्या है?
Solution: भूतापीय ऊर्जा पृथ्वी के आंतरिक भाग से प्राप्त होने वाली ऊष्मा ऊर्जा है। जब भूमिगत जल पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद तप्त स्थलों (hot spots) के संपर्क में आता है, तो वह गर्म होकर भाप में परिवर्तित हो जाता है। यह उच्च दाब वाली भाप चट्टानों के बीच फंस सकती है। इस फंसी हुई भाप को पाइपों द्वारा बाहर निकाला जाता है। इस उच्च दाब वाली भाप का उपयोग विद्युत जनरेटर की टरबाइन को घुमाने के लिए किया जाता है, जिससे विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है। इस प्रकार, पृथ्वी की आंतरिक गर्मी से प्राप्त होने वाली ऊर्जा को भूतापीय ऊर्जा कहते हैं।

प्रश्न 9

नाभिकीय ऊर्जा का क्या महत्व है?
Solution: नाभिकीय ऊर्जा का महत्व इस तथ्य में निहित है कि यह एक अत्यंत शक्तिशाली ऊर्जा स्रोत है। नाभिकीय विखंडन (nuclear fission) या नाभिकीय संलयन (nuclear fusion) जैसी प्रक्रियाओं द्वारा परमाणुओं के नाभिक से अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। इस ऊर्जा का उपयोग पानी को गर्म करके भाप बनाने में किया जाता है, और इस भाप से टरबाइन चलाकर विद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जाती है। एक छोटी मात्रा में नाभिकीय ईंधन से बहुत अधिक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है, जो इसे ऊर्जा उत्पादन का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनाती है, हालांकि इसके सुरक्षित प्रबंधन और अपशिष्ट निपटान की चुनौतियाँ भी हैं।

प्रश्न 10

क्या कोई ऊर्जा स्रोत प्रदूषण मुक्त हो सकता है? क्यों अथवा क्यों नहीं?
Solution: यह कहना मुश्किल है कि कोई भी ऊर्जा स्रोत 'पूरी तरह' प्रदूषण मुक्त हो सकता है या नहीं। हालांकि, कुछ ऊर्जा स्रोत, जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, और जल ऊर्जा, अपने संचालन के दौरान जीवाश्मी ईंधन की तुलना में बहुत कम या नगण्य प्रदूषण फैलाते हैं। कारण:
  • नवीकरणीय स्रोत: ये स्रोत प्राकृतिक रूप से पुनः उत्पन्न होते हैं और इनके उपयोग से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं होता।
  • प्रत्यक्ष उत्सर्जन की कमी: सौर पैनल सूर्य के प्रकाश को सीधे बिजली में बदलते हैं, और पवन टरबाइन हवा की गति से घूमते हैं, जिससे कोई दहन या प्रत्यक्ष उत्सर्जन नहीं होता।
लेकिन, कुछ अप्रत्यक्ष प्रभाव हो सकते हैं:
  • इन स्रोतों से जुड़े संयंत्रों (जैसे सौर पैनल, पवन टरबाइन) के निर्माण, स्थापना, रखरखाव और निपटान में ऊर्जा की खपत होती है और कुछ मात्रा में प्रदूषण या पर्यावरणीय प्रभाव हो सकता है।
  • बड़े जलविद्युत बांधों से पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव पड़ सकता है।
इसलिए, जबकि कई नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत जीवाश्मी ईंधन की तुलना में कहीं अधिक स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल हैं, 'पूर्णतः' प्रदूषण मुक्त होना एक आदर्श स्थिति है जिसे प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिर भी, प्रदूषण को कम करने की दिशा में ये महत्वपूर्ण कदम हैं।

Common mistakes

  • ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों के बीच अंतर करने में कठिनाई।
  • नवीकरणीय और अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को गलत वर्गीकृत करना।
  • जीवाश्मी ईंधन के जलने से होने वाले प्रदूषण के प्रभावों को कम आंकना।
  • सौर कूकर जैसे उपकरणों के लिए सही दर्पण के चुनाव के पीछे के सिद्धांत को न समझना।

Revision tips

  • प्रत्येक ऊर्जा स्रोत के मुख्य लाभों और हानियों की एक सारणी बनाएं।
  • ऊर्जा के अनवीकरणीय और नवीकरणीय स्रोतों के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।
  • सौर कूकर और भूतापीय ऊर्जा जैसे उपकरणों के कार्य सिद्धांत को चित्र बनाकर समझने का प्रयास करें।
  • ऊर्जा स्रोतों के उपयोग से होने वाले पर्यावरणीय प्रभावों पर विशेष ध्यान दें।

Practice MCQs

Q1. निम्नलिखित में से कौन सा गुण एक उत्तम ऊर्जा स्रोत का नहीं है?

Q2. जीवाश्मी ईंधन की मुख्य हानि क्या है?

Q3. सौर कूकर के लिए किस प्रकार का दर्पण सबसे उपयुक्त होता है?

Q4. निम्नलिखित में से कौन सा ऊर्जा का अनवीकरणीय स्रोत है?

Q5. भूतापीय ऊर्जा कैसे प्राप्त की जाती है?

Frequently asked questions

ऊर्जा का उत्तम स्रोत किसे कहते हैं?

ऊर्जा का उत्तम स्रोत वह है जो प्रति एकांक आयतन या द्रव्यमान अधिक कार्य करे, आसानी से उपलब्ध हो, भंडारण व परिवहन में आसान हो, सस्ता हो और जलने पर प्रदूषण न फैलाए।

उत्तम ईंधन में क्या गुण होने चाहिए?

उत्तम ईंधन से दहन के बाद प्रति एकांक द्रव्यमान से अधिक ऊष्मा मुक्त होनी चाहिए, यह आसानी से और सस्ती दर पर उपलब्ध होना चाहिए, जलने पर अत्याधिक धुआं उत्पन्न नहीं करना चाहिए, और इसका ज्वलन ताप उपयुक्त तथा उष्मीयमान अधिक होना चाहिए।

जीवाश्मी ईंधन की प्रमुख हानियाँ क्या हैं?

जीवाश्मी ईंधन के बनने में करोड़ों वर्ष लगते हैं और इनके भंडार सीमित हैं। ये अनवीकरणीय स्रोत हैं और इनके जलने से वायु प्रदूषण होता है, जिससे ग्रीन हाउस प्रभाव बढ़ता है।

हमें ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर क्यों ध्यान देना चाहिए?

जीवाश्मी ईंधन सीमित मात्रा में हैं और अनवीकरणीय हैं। यदि हम इनका प्रयोग इसी प्रकार करते रहे तो ये शीघ्र ही समाप्त हो जाएंगे, इसलिए हमें ऊर्जा के वैकल्पिक और नवीकरणीय स्रोतों की ओर ध्यान देना आवश्यक है।

सौर कूकर के लिए अवतल दर्पण क्यों उपयुक्त है?

अवतल दर्पण एक अभिसारी दर्पण है जो सूर्य की किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करता है। इससे उस बिंदु पर ऊष्मा अत्यधिक बढ़ जाती है, जो भोजन पकाने के लिए आवश्यक है।

क्या कोई ऊर्जा स्रोत पूरी तरह प्रदूषण मुक्त हो सकता है?

यह एक जटिल प्रश्न है। कुछ ऊर्जा स्रोत, जैसे सौर और पवन ऊर्जा, अपने उपयोग के दौरान बहुत कम या कोई प्रदूषण नहीं फैलाते हैं। हालांकि, उनके निर्माण, स्थापना और रखरखाव में अप्रत्यक्ष रूप से कुछ पर्यावरणीय प्रभाव हो सकते हैं। इसलिए, 'पूरी तरह' प्रदूषण मुक्त होना कठिन है, लेकिन कई स्रोत जीवाश्मी ईंधन की तुलना में बहुत स्वच्छ होते हैं।

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