कक्षा 10 भारत में राष्ट्रवाद NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 10 के लिए 'भारत में राष्ट्रवाद' अध्याय पर विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें उपनिवेशवाद के खिलाफ राष्ट्रवाद के उदय, प्रथम विश्व युद्ध के प्रभाव, रॉलेट एक्ट, असहयोग आंदोलन, सत्याग्रह के सिद्धांत, जलियांवाला बाग हत्याकांड, साइमन कमीशन, और भारत माता की छवि जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए स्पष्टीकरण और चरण-दर-चरण मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को इन अवधारणाओं को गहराई से समझने में मदद मिलती है। यह संसाधन परीक्षा की तैयारी और विषय की गहन समीक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectभारत और समकालीन विश्व - 2
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2. भारत में राष्ट्रवाद

Chapter summary

यह अध्याय भारत में राष्ट्रवाद के विकास की पड़ताल करता है, जिसमें उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलनों से इसके संबंध, प्रथम विश्व युद्ध के प्रभाव और विभिन्न सामाजिक समूहों की भागीदारी पर प्रकाश डाला गया है। इसमें सत्याग्रह के सिद्धांत, रॉलेट एक्ट का विरोध, असहयोग आंदोलन की वापसी के कारण, जलियांवाला बाग हत्याकांड और साइमन कमीशन जैसे प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं का विश्लेषण किया गया है। साथ ही, राष्ट्रवाद के प्रतीकों जैसे भारत माता की छवि पर भी चर्चा की गई है।

Learning outcomes

  • उपनिवेशवाद के संदर्भ में राष्ट्रवाद के उदय को समझना।
  • प्रथम विश्व युद्ध के भारत के राष्ट्रीय आंदोलन पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करना।
  • रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग हत्याकांड जैसे दमनकारी उपायों के विरोध के कारणों को स्पष्ट करना।
  • असहयोग आंदोलन के विभिन्न चरणों और गांधीजी द्वारा इसे वापस लेने के कारणों को समझना।
  • सत्याग्रह के सिद्धांत और उसके अहिंसक स्वरूप की व्याख्या करना।
  • साइमन कमीशन के बहिष्कार के कारणों और उसके परिणामों का वर्णन करना।
  • राष्ट्रवाद के प्रतीकों और छवियों के महत्व को पहचानना।

Topics covered

Paper topics

  • राष्ट्रवाद का उदय
  • उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन
  • प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव
  • रॉलेट एक्ट
  • असहयोग आंदोलन
  • सत्याग्रह
  • चौरी-चौरा की घटना
  • जलियांवाला बाग हत्याकांड
  • साइमन कमीशन
  • भारत माता की छवि
  • राष्ट्रीय आंदोलन में सामाजिक समूह

Important topics

  • असहयोग आंदोलन
  • सत्याग्रह का सिद्धांत
  • जलियांवाला बाग हत्याकांड
  • साइमन कमीशन का बहिष्कार
  • उपनिवेशवाद के विरुद्ध राष्ट्रवाद

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

1. व्याख्या करें-

(क) उपनिवेशो में राष्ट्रवाद के उदय की प्रक्रिया उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन से जुड़ी हुई क्यों थी?

(ख) पहले विश्व युद्ध में भारत ने राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में किस प्रकार योगदान दिया?

(ग) भारत के लोग रॉलेट एक्ट के विरोध में क्यों थे?

(घ) गांधी जी ने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फैसला क्यों लिया?

Solution:

(क) उपनिवेशवाद के तहत, विदेशी शक्तियों ने भारतीय लोगों की स्वतंत्रता और संसाधनों पर नियंत्रण कर लिया था। इस दमन और शोषण के अनुभव ने विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को एकजुट किया, जिससे उनमें साझा शत्रु के खिलाफ लड़ने की भावना पैदा हुई। साम्राज्यवादी शासन के खिलाफ संघर्ष ने स्वाभाविक रूप से राष्ट्रवादी भावनाओं को बढ़ावा दिया, क्योंकि लोग अपनी पहचान और स्वतंत्रता के लिए लड़ने लगे। इस प्रकार, उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन राष्ट्रवाद के उदय का एक प्रत्यक्ष परिणाम और माध्यम बन गया।

(ख) प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, ब्रिटिश सरकार ने भारत में अपनी सेना के लिए जबरन सैनिक भर्ती की, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष फैला। युद्ध के खर्चों को पूरा करने के लिए, सरकार ने सीमा शुल्क और आयकर जैसे करों में वृद्धि की, जिससे आम लोगों पर आर्थिक बोझ पड़ा। इसी समय, भारत के कई हिस्सों में फसलें खराब होने से खाद्यान्न की कमी हो गई। इन सभी कठिनाइयों ने ब्रिटिश शासन के प्रति व्यापक रोष पैदा किया और राष्ट्रीय आंदोलन को और अधिक मजबूत और संगठित होने के लिए प्रेरित किया।

(ग) रॉलेट एक्ट को 1919 में इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल द्वारा जल्दबाजी में पारित किया गया था, भले ही भारतीय सदस्यों ने इसका कड़ा विरोध किया था। इस कानून ने सरकार को बिना किसी मुकदमे के दो साल तक किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक कैदी के रूप में हिरासत में रखने की असीमित शक्ति प्रदान की। यह भारतीयों के लिए स्पष्ट रूप से अलोकतांत्रिक और दमनकारी था, क्योंकि इसने उनकी नागरिक स्वतंत्रता का हनन किया और राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचाई। इसलिए, भारतीय इस कानून के विरोध में थे।

(घ) गांधीजी ने फरवरी 1922 में असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फैसला किया, क्योंकि आंदोलन के दौरान कई स्थानों पर हिंसा की घटनाएँ हुई थीं। विशेष रूप से चौरी-चौरा की घटना में, भीड़ ने एक पुलिस स्टेशन में आग लगा दी थी, जिसमें कई पुलिसकर्मी मारे गए थे। गांधीजी का मानना था कि सत्याग्रह को अहिंसक रहना चाहिए और जनता अभी तक इस तरह के बड़े पैमाने पर अहिंसक आंदोलन के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं थी। उन्होंने महसूस किया कि सत्याग्रहियों को अहिंसा के सिद्धांतों का ठीक से प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है।

प्रश्न 2

2. सत्याग्रह के विचार का क्या मतलब है?
Solution:

सत्याग्रह एक अनूठी जन आंदोलन की विधि है जो सत्य की शक्ति और आत्म-बल पर जोर देती है। इसका मूल विचार यह है कि यदि संघर्ष का कारण सत्य है और लड़ाई अन्याय के खिलाफ है, तो उत्पीड़क के खिलाफ शारीरिक बल या जबरदस्ती की आवश्यकता नहीं होती है। सत्याग्रह का अर्थ है अहिंसक प्रतिरोध, जहाँ न्याय की खोज के लिए उत्पीड़क की अंतरात्मा पर अपील की जाती है। महात्मा गांधी का मानना था कि अहिंसा का यह धर्म राष्ट्रीय एकता और सद्भाव को बढ़ावा दे सकता है।

प्रश्न 3

3. निम्नलिखित पर अखबार के लिए रिपोर्ट लिखें -

(क) जलियाँवाला बाग हत्याकांड

(ख) साइमन कमीशन

Solution:

(क) जलियाँवाला बाग हत्याकांड: 13 अप्रैल, 1919 को, अमृतसर के जलियाँवाला बाग में एक शांतिपूर्ण सभा पर जनरल डायर के आदेश पर अंधाधुंध गोलीबारी की गई। यह भीड़ ब्रिटिश सरकार के दमनकारी उपायों के विरोध में और बैसाखी मेले में भाग लेने के लिए एकत्र हुई थी। डायर का उद्देश्य लोगों में भय पैदा करना था। इस गोलीबारी में महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों निर्दोष लोग मारे गए। इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश फैला दिया, जिसके परिणामस्वरूप देश भर में विरोध प्रदर्शन, पुलिस के साथ झड़पें और सरकारी इमारतों पर हमले हुए।

(ख) साइमन कमीशन: 1928 में भारत आया साइमन कमीशन संवैधानिक सुधारों का सुझाव देने के लिए गठित किया गया था, लेकिन इसमें एक भी भारतीय सदस्य नहीं था। इस कारण, भारत में इसका व्यापक विरोध हुआ और 'साइमन वापस जाओ' के नारे लगाए गए। कांग्रेस और मुस्लिम लीग सहित प्रमुख राजनीतिक दलों ने इसके खिलाफ संयुक्त प्रदर्शन किया। अक्टूबर 1929 में, तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने भारत को एक अस्पष्ट 'डोमिनियन स्टेटस' का वादा किया और एक गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया, जो साइमन कमीशन के विरोध का ही परिणाम था।

प्रश्न 4

4. इस अध्याय में दी गई भारत माता की छवि और अध्याय 1 में दी गई जर्मेनिया की छवि की तुलना कीजिए।
Solution:

रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा चित्रित 'भारत माता' की छवि एक देवी के रूप में प्रस्तुत की गई है, जो ज्ञान, भोजन और वस्त्र प्रदान करती है। उनके हाथ में माला उनकी पवित्रता और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है। यह छवि, कुछ हद तक, फिलिप वीट द्वारा चित्रित जर्मेनिया की छवि से मिलती है, जो एक तलवार धारण करती है लेकिन अधिक स्त्री रूप में दिखाई देती है। हालाँकि, भारत माता की अन्य व्याख्याओं में, उन्हें अधिक मर्दाना और शक्तिशाली रूप में भी दर्शाया गया है, जैसे कि शेर या हाथी के साथ, जो शक्ति और अधिकार का प्रतीक हैं। यह बाद की छवि लोरेंज क्लसेन द्वारा चित्रित जर्मेनिया के समान है, जो तलवार और ढाल के साथ युद्ध के लिए तैयार दिखती है, जो राष्ट्र की रक्षा के लिए तत्परता को दर्शाता है। दोनों छवियाँ राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में मातृभूमि का प्रतिनिधित्व करती हैं, लेकिन उनकी प्रस्तुति में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार भिन्नता है।

चर्चा करें प्रश्न 1

1. 1921 में आंदोलन में शामिल होने वाले सभी सामाजिक समूहों की सूची बनाइए | इसके बाद उनकी आशाओं के बारे में लिखते हुए आंदोलन में शामिल हुए
Solution:

1921 के असहयोग आंदोलन में विभिन्न सामाजिक समूहों ने भाग लिया था, जिनमें प्रमुख थे:

  • शहरी मध्य वर्ग: इसमें वकील, शिक्षक, प्रधानाध्यापक और छात्र शामिल थे। उन्होंने ब्रिटिश संस्थानों का बहिष्कार किया और राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा देने की आशा रखी।
  • किसान: विशेषकर अवध जैसे क्षेत्रों में, किसानों ने जमींदारों और साहूकारों के खिलाफ संघर्ष के रूप में आंदोलन में भाग लिया। वे भारी लगान और अन्य कष्टों से मुक्ति की आशा रखते थे।
  • आदिवासी: मध्य भारत में, आदिवासी समुदायों ने औपनिवेशिक नीतियों के कारण अपने वन अधिकारों पर प्रतिबंधों के विरोध में आंदोलन में भाग लिया। वे अपने पारंपरिक अधिकारों की बहाली चाहते थे।
  • श्रमिक: विभिन्न औद्योगिक शहरों में श्रमिकों ने भी असहयोग आंदोलन में भाग लिया, अपनी मजदूरी बढ़ाने और काम करने की बेहतर परिस्थितियों की मांग की।

इन सभी समूहों ने आंदोलन में अपनी विशिष्ट आशाओं और आकांक्षाओं के साथ भाग लिया, जो अंततः ब्रिटिश शासन से मुक्ति और आत्म-शासन की स्थापना की ओर ले जाती थीं।

Common mistakes

  • असहयोग आंदोलन के विभिन्न सामाजिक समूहों की भागीदारी और उनकी अपेक्षाओं को अलग-अलग समझने में भ्रम।
  • सत्याग्रह के सिद्धांत को केवल अहिंसा तक सीमित समझना, जबकि इसमें सत्य की शक्ति पर भी जोर दिया गया है।
  • जलियांवाला बाग हत्याकांड के कारणों और परिणामों को ठीक से न समझना।
  • साइमन कमीशन के बहिष्कार के पीछे के मुख्य कारण (सभी सदस्य अंग्रेज होना) को भूल जाना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को समझने के लिए मुख्य घटनाओं और तिथियों को रेखांकित करें।
  • सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन जैसे प्रमुख आंदोलनों के कारणों, तरीकों और परिणामों की तुलना करें।
  • भारत माता और जर्मेनिया जैसी छवियों के प्रतीकात्मक अर्थों पर ध्यान दें।
  • रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग जैसे दमनकारी उपायों के प्रभाव को समझें।

Practice MCQs

Q1. रॉलेट एक्ट किस वर्ष पारित किया गया था?

Q2. गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का निर्णय किस घटना के बाद लिया?

Q3. सत्याग्रह का मूल सिद्धांत क्या है?

Q4. जलियांवाला बाग हत्याकांड किस शहर में हुआ था?

Q5. साइमन कमीशन का भारत में विरोध क्यों किया गया?

Frequently asked questions

कक्षा 10 के लिए 'भारत में राष्ट्रवाद' अध्याय के मुख्य बिंदु क्या हैं?

इस अध्याय के मुख्य बिंदुओं में उपनिवेशवाद के संदर्भ में राष्ट्रवाद का उदय, प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव, रॉलेट एक्ट, असहयोग आंदोलन, सत्याग्रह का सिद्धांत, जलियांवाला बाग हत्याकांड, साइमन कमीशन और राष्ट्रवाद के प्रतीकों का महत्व शामिल है।

सत्याग्रह का क्या अर्थ है और यह कैसे काम करता है?

सत्याग्रह का अर्थ है सत्य की शक्ति और अहिंसा पर आधारित आंदोलन। यह उत्पीड़क की अंतरात्मा को जगाने और न्याय प्राप्त करने के लिए शारीरिक बल के बजाय नैतिक बल का उपयोग करता है।

गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को वापस क्यों लिया?

गांधीजी ने चौरी-चौरा जैसी हिंसक घटनाओं के कारण असहयोग आंदोलन को वापस लिया, क्योंकि उनका मानना था कि आंदोलन को अहिंसक रहना चाहिए और जनता अभी बड़े संघर्ष के लिए तैयार नहीं थी।

जलियांवाला बाग हत्याकांड क्यों हुआ?

जलियांवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर में हुआ था, जब जनरल डायर ने शांतिपूर्ण सभा पर गोली चलाने का आदेश दिया था, जिसका उद्देश्य सत्याग्रहियों में भय पैदा करना था।

साइमन कमीशन का विरोध क्यों किया गया?

साइमन कमीशन का विरोध इसलिए किया गया क्योंकि इसमें कोई भी भारतीय सदस्य शामिल नहीं था, जिससे यह भारतीयों के लिए अस्वीकार्य था और इसे 'श्वेतों का कमीशन' कहा गया।

ये NCERT समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को समझने, महत्वपूर्ण घटनाओं को याद रखने और परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने का अभ्यास करने में मदद मिलती है।

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