CBSE Class 9 Hindi Syllabus 2026-27
CBSE Class 9 Hindi Session 2026-27. This syllabus aims to cultivate Hindi as a vibrant language for expressing experiences, values, creativity, and communication, in line with NEP 2020 and NCF-SE 2023. It focuses on sharpening students' critical thinking, analytical skills, and expressive capabilities through engaging with literature and practical language application. The curriculum is divided into four key areas: Unseen Passages (14 marks), Practical Grammar (16 marks), Textbook content (30 marks), and Creative Writing (20 marks), contributing to an 80-mark annual examination, complemented by 20 marks for internal assessment. Students will develop essential skills in effective communication across diverse writing formats and new media, analyzing audio-visual content, participating in critical discussions, and appreciating India's rich linguistic and cultural legacy.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | 9 |
| Subject | Hindi |
| Session | 2026-27 |
| Language | English |
| Type | Syllabus |
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Full document text
हिंदी पाठ्यक्रम (2026-27) कक्षा-नवीं (आर -1)
भाषा किसी भी ज्ञान-क्षेत्र की आधारशिला है। हम प्रकृति और समाज को बह्त हद तक अपनी भाषा के ढाँचे के माध्यम से ही समझते और विश्लेषित करते हैं। इस कार्य को करने में भाषा का साहित्य हमारी विशेष सहायता करता है। माध्यमिक स्तर पर प्रवेश करने वाले विद्यार्थी सामान्य भाषा-ज्ञान से विशिष्ट अन्शासनात्मक अध्ययन की ओर बढ़ते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और विद्यालयी शिक्षा हेत् राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 की दृष्टि के अन्रूप यह पाठ्यक्रम हिंदी को केवल एक विषय नहीं बल्कि अन्भवों, मूल्यों, बह्सांस्कृतिकता, मृजनात्मकता और संवाद की एक समृद्ध प्रक्रिया के रूप में प्रस्त्त करता है। यह ज्ञान के संग्रह तक सीमित नहीं रहता बल्कि विद्यार्थियों को सोचने, कल्पना करने, विश्लेषण करने और अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित करता है। पाठ्यक्रम का लक्ष्य विद्यार्थियों की चेतना को इस दिशा की ओर ले जाना है कि हिंदी भाषा के माध्यम से यथार्थ को अर्थात जो भी घटित हो रहा है, उसे समझा जाए और उसमें अपनी आकांक्षाओं का चित्र रचा जाए।इस पाठ्यक्रम का केंद्रीय उद्देश्य पाठों का पठन-पाठन मात्र नहीं बल्कि उनके माध्यम से विद्यार्थियों में गहन पाठान्भूति, संवेदनशील अभिव्यक्ति, तार्किक विश्लेषण, संदर्भ-आधारित लेखन तथा भाषिक एवं सांस्कृतिक विविधता की समझ को विकसित करना है।हिंदी भाषा के सीखने-सिखाने के माध्यम से विद्यार्थियों में भाषा, संस्कृति का समावेशी दृष्टिकोण पैदा करना, जीवन के विविध संदर्भों को समझना, विविधता के प्रति सकारात्मकता का बोध पैदा करना- यह सब आवश्यक रूप से अपेक्षित है।
नवीं कक्षा में प्रवेश करने वाले विद्यार्थी की भाषा-शैली और विचार-बोध का एक ऐसा आधार बन चुका होता है कि अब उसे उसके भाषिक दायरे के विस्तार और वैचारिक समृद्धि के लिए आवश्यक संसाधन मुहैया कराए जाने की आवश्यकता होती है। माध्यमिक स्तर तक आते-आते विद्यार्थी किशोरावस्था में प्रवेश कर चुके होते हैं और उनमें सुनने, बोलने, पढ़ने, लिखने एवं समझने के साथ- साथ आलोचनात्मक दृष्टि विकसित होने लगती है। उनमें भाषा के सौंदर्यात्मक पक्ष, कथात्मकता, गीतात्मकता, समाचार-पत्रों की समझ, शब्द-शक्तियों के बीच अंतर की समझ, राजनैतिक चेतना एवं सामाजिक चेतना का विकास हो जाता है। वे आस-पड़ोस की भाषा और आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त भाषा-प्रयोग, शब्दों के सुविचारित प्रयोग, भाषा की नियमबद्ध प्रकृति आदि से परिचित हो जाते हैं। इतना ही नहीं, वे विभिन्न विधाओं और अभिव्यक्ति की अनेक शैलियों से भी परिचित हो चुके होते हैं। अब विद्यार्थियों का अध्ययन आस-पड़ोस, राज्य-देश की सीमा को लाँघते हुए वैश्विक क्षितिज तक फैल जाता है। इन विद्यार्थियों की दुनिया में समाचार, खेल, फ़िल्म तथा अन्य कलाओं के साथ-साथ पत्र-पत्रिकाएँ और अलग-अलग तरह की पुस्तकें भी प्रवेश पा चुकी होती हैं। [1]
एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम और पाठ्यप्स्तकों में आर1 और आर2 के संदर्भ एनसीसीएफ-एसई 2023 के परिप्रेक्ष्य पर आधारित सांकेतिक और प्रासंगिक हैं। इन संदर्भों का उददेश्य माध्यमिक स्तर पर आर1 और आर2 के बीच किसी भी प्रकार का संरचनात्मक या योग्यता-आधारित अंतर दर्शाना नहीं है।
पाठ्यप्स्तक की विषयवस्त्, अधिगम परिणाम और मूल्यांकन माध्यमिक स्तर पर आर 1 और आर 2 के लिए परिकल्पित सामान्य योग्यता ढाँचे के अनुरूप हैं, इसलिए संदर्भ के अनुसार इन पाठ्यप्रत्तकों का लचीले ढंग से उपयोग किया जा सकता है।
इस स्तर पर हिंदी का अध्ययन-अध्यापन साहित्यिक, सांस्कृतिक और व्यावहारिक भाषा के रूप में कुछ इस तरह से हो कि माध्यमिक स्तर तक पहुँचते-पहुँचते यह विद्यार्थियों की पहचान, आत्मविश्वास और विमर्श की भाषा बन सके। आवश्यकता इस बात की है कि विद्यार्थी भाषा के लिखित प्रयोग के साथ-साथ सहज और स्वाभाविक मौखिक अभिव्यक्ति में भी सक्षम हो सकें। वे हिंदी की प्रकृति के अनुसार वर्तनी और उच्चारण के आपसी संबंधों को समझ सकें ताकि उनकी लिखित और मौखिक भाषा में समानता एवं स्पष्टता हो।
CG-1: लेखन के विभिन्न रूपों (निबंध, पत्र, लेख, चर्चा, साक्षात्कार, सार्वजनिक भाषण) और नव मीडिया (ईमेल, श्रव्य और दृश्य सामग्री) के माध्यम से प्रभावी संप्रेषण के लिए भाषा का उपयोग करना।
दक्षताएँ सीखने के संकेत बिंद्/गतिविधियाँ
C-3.1-विभिन्न श्रव्य और लिखित सामग्री का विभिन्न प्रकार की श्रव्य और लिखित सामग्री
विश्लेषण और मूल्यांकन करना। में विवरणों का अवलोकन और विश्लेषण करके
उन्हें व्यवस्थित रूप से लिखते हैं।
किसी एक विषय पर विभिन्न स्रोतों से प्राप्त
सामग्री का विश्लेषण करके उसकी
विश्वसनीयता की जाँच करते हैं।
C-3.2-रचना में परिवेश का सावधानीपूर्वक • पाठ्यवस्तु को पढ़ते और सुनते समय स्वयं के
मूल्यांकन करके उचित तकों के साथ चर्चा- पूर्वग्रहों को पहचानते हैं और साक्ष्यों का
परिचर्चा करना। मूल्यांकन करके पाठ्यवस्तु/श्रव्य-सामग्री की
विश्वसनीयता का निर्धारण करते हैं। [2]
पाठ्यचर्या CG-4: भारतीय भाषाई विविधता से जुड़ी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत की सराहना करना।
दक्षताएँ सीखने के संकेत बिंदु/गतिविधियाँ
C-4.1-पाठ को पढ़ते हुए विभिन्न शैलियों की • भारतीय समाज की बहुभाषी प्रकृति को
सामग्री के अवलोकन के माध्यम से भारतीय पहचानने के लिए विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं के
समाज और साहित्यिक विविधता की बह्भाषी चलचित्र और वृत्तचित्र देखते हैं और उनके बारे
प्रकृति की पहचान करना। में अपने विचार साझा करते हैं।
C-4.2-भारतीय भाषाओं की विभिन्न • पढ़ी गई साहित्यिक रचनाओं को विषयों, पात्रों
साहित्यिक रचनाओं में निहित संस्कृति एवं और परिस्थितियों के आधार पर अपने
विरासत की विविधता और उनके आपसी संबंधों व्यक्तिगत अनुभवों/जीवन से जोड़ते हैं।
की सराहना करना। विभिन्न भारतीय भाषाओं के साहित्य की
विशिष्टता और साहित्य जगत में उनके
योगदान की सराहना करते हैं।
C-4.3-हमारी संस्कृति और पहचान के निर्माण • भाषा में निहित सांस्कृतिक परंपराओं से
में भाषा की भूमिका को समझते ह्ए प्रभावित कहावतों/पहेलियों/मुहावरों के उदाहरण
अभिव्यक्त करना। साझा करते हैं।
लिखने और बोलने में सांस्कृतिक परंपराओं से
प्रभावित अपनी भाषा की शब्दावली का संद्रभों
के अनुसार उपयुक्त उपयोग करते हैं।
हिंदी पाठ्यक्रम - आर -1 (2026 - 27)
कक्षा - नवीं
खंड भारांक
क अपठित बोध 14
ख व्यावहारिक व्याकरण 16 [3]
ग पाठ्यपुस्तक 30 घ रचनात्मक लेखन 20 भारांक - 80 (वार्षिक परीक्षा) +20 (आंतरिक परीक्षा) खंड -क (अपठित बोध) उपभार कुल भार विषयवस्त् अपठित गद्यांश व काव्यांश पर बोध, चिंतन, विश्लेषण, सराहना आदि 14 पर बह्विकल्पीय, अतिलघूतरात्मक एवं लघूतरात्मक प्रश्न अ एक अपठित गद्यांश लगभग 200 शब्दों का | 7
इसके आधार पर एक अंकीय तीन बहुविकल्पी प्रश्न (1x3=3) पूछे जाएँगे, अतिलघूतरात्मक एवं लघूतरात्मक प्रश्न (2×2=4) पूछे जाएँगे | ब एक अपठित काव्यांश लगभग 80-100 शब्दों का | 7
इसके आधार पर एक अंकीय तीन बहुविकल्पी प्रश्न (1x3=3) पूछे जाएँगे, अतिलघूतरात्मक एवं लघूतरात्मक प्रश्न (2×2=4) पूछे जाएँगे खंड -ख (व्यावहारिक व्याकरण) 2 व्याकरण के लिए निर्धारित विषयों पर विषयवस्तु का बोध, भाषिक 16 बिंदु /संरचना आदि पर अतिलघूतरात्मक एवं लघूतरात्मक प्रश्न <math>(1X16 = 16)</math> क्ल 20 प्रश्न पूछे जाएँगे, जिनमें से केवल 16 प्रश्नों के उत्तर देने होंगे
- शब्द -निर्माण 4 उपसर्ग - 2 अंक ,प्रत्यय - 2 अंक 5 प्रश्नों में से 4 प्रश्न करने होंगे )
- संज्ञा, सर्वनाम,विशेषण,क्रिया 4 ( 5 प्रश्नों में से 4 प्रश्न करने होंगे )
- अर्थ की दृष्टि से वाक्य-भेद - 4 अंक 4 ( 5 प्रश्नों में से 4 प्रश्न करने होंगे )
[4]
Frequently asked questions
What is the total weightage for the CBSE Class 9 Hindi exam in 2026-27?
The total weightage for the annual examination is 80 marks, with an additional 20 marks allocated for internal assessment.
What are the main sections of the CBSE Class 9 Hindi syllabus?
The syllabus is divided into four main sections: Unseen Passages (अपठित बोध), Practical Grammar (व्यावहारिक व्याकरण), Textbook (पाठ्यपुस्तक), and Creative Writing (रचनात्मक लेखन).
What topics are covered under Practical Grammar?
Practical Grammar includes topics like word formation (prefixes, suffixes), parts of speech (nouns, pronouns, adjectives, verbs), and sentence types based on meaning.
What is the weightage for the Textbook section in the Hindi exam?
The Textbook section carries a weightage of 30 marks in the annual examination.
How are Unseen Passages assessed in the syllabus?
Unseen Passages include both prose and poetry sections, assessed through comprehension, thinking, analysis, and appreciation, with multiple-choice, very short, and short answer questions.
What is the objective of the Hindi syllabus for Class 9?
The syllabus aims to develop Hindi as a language of experience, values, creativity, and communication, enhancing students' critical thinking, analytical skills, and expressive abilities.
CBSE Class 9 Hindi syllabus 2026-27. Last updated 10 Aug 2026.