CBSE Class 12 Hindi Elective Syllabus 2026-27

CBSE Class 12 2026-27 Syllabus

CBSE Class 12 Hindi Elective for the 2026-27 session is designed to enhance students' advanced language and literary capabilities. The curriculum aims to provide a deep understanding and proficient use of Hindi for communication, preparing students for future academic and professional pursuits. It encourages critical and creative thinking, nurturing an appreciation for various literary genres and writers. The syllabus also focuses on developing practical writing abilities and effective oral expression. Key goals include grasping language subtleties, valuing literary creations, and cultivating an awareness of societal differences. Embracing competency-based, art-integrated, and experiential learning, the course makes Hindi study engaging and applicable to real-world scenarios. Evaluation methods incorporate listening and speaking skills with clear assessment criteria.

Quick info

BoardCBSE
Class12
SubjectHindi Elective
Session2026-27
LanguageEnglish
TypeSyllabus

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हिंदी (ऐच्छिक) विषय कोड - 002 कक्षा 12वीं (2026-27)

उच्चतर माध्यमिक स्तर में प्रवेश लेने वाला विद्यार्थी पहली बार सामान्य शिक्षा से विशेष अनुशासन की शिक्षा की ओर उन्मुख होता है। दस वर्षों में विद्यार्थी भाषा के विविध कौशलों का सार्थक उपयोग करने लग जाता है। भाषा और साहित्य के स्तर पर उसका दायरा अब घर, पास-पड़ोस, स्कूल, प्रांत और देश से होता हुआ धीरे-धीरे विश्व तक फैल जाता है। वह इस उम्र में पहुँच चुका है कि देश की सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं पर विचार-विमर्श कर सके, एक ज़िम्मेदार नागरिक की तरह अपनी ज़िम्मेदारियों को समझ सके तथा देश और स्वयं को सही दिशा दे सकने में भाषा की ताकत को पहचान सके। ऐसे दृढ़ भाषिक और वैचारिक आधार के साथ जब विद्यार्थी आता है तो उसे विमर्श की भाषा के रूप में हिंदी की व्यापक समझ और प्रयोग में दक्ष बनाना सबसे पहला उद्देश्य होगा। किशोरावस्था से युवावस्था के इस नाजुक मोड़ पर किसी भी विषय का चुनाव करते समय बच्चे और उनके अभिभावक इस बात को लेकर सबसे अधिक चिंतित रहते हैं कि चयनित विषय उनके भविष्य और जीविका के अवसरों में मदद करेगा कि नहीं। इस उम्र के विद्यार्थियों में चिंतन और निर्णय करने की प्रवृत्ति भी प्रबल होती है। इसी आधार पर वे अपने मानसिक, सामाजिक, बौद्धिक और भाषिक विकास के प्रति भी सचेत होते हैं और अपने भावी अध्ययन की दिशा तय करते हैं। इस स्तर पर ऐच्छिक हिंदी का अध्ययन एक सृजनात्मक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और विभिन्न प्रयुक्तियों की भाषा के रूप में होगा। इस बात पर भी बल दिया जाएगा कि निरंतर विकसित होती हिंदी के अखिल भारतीय स्वरूप से बच्चे का रिश्ता बन सके।

इस स्तर पर विद्यार्थियों में भाषा के लिखित प्रयोग के साथ-साथ उसके मौखिक प्रयोग की कुशलता और दक्षता का विकास भी ज़रूरी है। प्रयास यह भी होगा कि विद्यार्थी अपने बिखरे हुए विचारों और भावों की सहज और मौलिक अभिव्यक्ति की क्षमता हासिल कर सके।

नई शिक्षा नीति 2020 तथा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा समय-समय पर दक्षता आधारित शिक्षा, कला समेकित अधिगम, अनुभवात्मक अधिगम को अपनाने की बात की गई है जो शिक्षार्थियों की प्रतिभा को उजागर करने, खेल-खेल में सीखने पर बल देने, आनंदपूर्ण ज्ञानार्जन और विद्यार्जन के विविध तरीकों को अपनाने तथा अनुभव के द्वारा सीखने पर बल देती है।

दक्षता आधारित शिक्षा से तात्पर्य है सीखने और मूल्यांकन करने का एक ऐसा दृष्टिकोण जो शिक्षार्थी के सीखने के प्रतिफल और विषय में विशेष दक्षता को प्राप्त करने पर बल देता है। योग्यता वह क्षमता, कौशल, ज्ञान और दृष्टिकोण है जो व्यक्ति को वास्तविक जीवन में कार्य करने में सहायता करती है। इससे शिक्षार्थी यह सीख सकते हैं कि ज्ञान और कौशल को किस प्रकार प्राप्त किया जाए तथा उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं पर कैसे लागू किया जाए। प्रत्येक विषय, प्रत्येक पाठ को जीवनोपयोगी बनाना तथा वास्तविक जीवन के अनुभवों से पाठ को समृद्ध करना ही दक्षता आधारित शिक्षा है। इसके लिए उच्च स्तरीय चिंतन कौशल पर विशेष बल देने की आवश्यकता है।

कला समेकित अधिगम को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में सुनिश्चित करना अत्यधिक आवश्यक है। कला के संसार में कल्पना की एक अलग ही उड़ान होती है। कला एक व्यक्ति की रचनात्मक अभिव्यक्ति है। कला समेकित अधिगम से तात्पर्य है कला के विविध रूपों संगीत, नृत्य, नाटक, कविता, रंगशाला, यात्रा, मूर्तिकला, आभूषण बनाना, गीत लिखना, नुक्कड़ नाटक, कोलाज, पोस्टर, कला प्रदर्शनी आदि 1

को शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना। किसी विषय को आरंभ करने के लिए आइस ब्रेकिंग गतिविधि के रूप में तथा सामंजस्यपूर्ण समझ पैदा करने के लिए अंतरविषयक या बहुविषयक परियोजनाओं के रूप में कला समेकित अधिगम का प्रयोग किया जाना चाहिए। इससे पाठ अधिक रोचक एवं ग्राह्य हो जाएगा।

अनुभवात्मक अधिगम या आनुभविक ज्ञानार्जन का उद्देश्य शैक्षिक वातावरण को छात्र केंद्रित बनाने के साथ-साथ स्वयं मूल्यांकन करने, आलोचनात्मक रूप से सोचने, निर्णय लेने तथा ज्ञान का निर्माण कर उसमें पारंगत होने से है। यहाँ शिक्षक की भूमिका सुविधा प्रदाता व प्रेक्षक की रहती है। ज्ञानार्जन आनुभाविक, सहयोगात्मक तथा स्वतंत्र रूप से होता है और यह शिक्षार्थियों को एक साथ कार्य करने तथा स्वयं के अनुभव द्वारा सीखने पर बल देता है। यह सिद्धांत और व्यवहार के बीच की दूरी को कम करता है।

इस पाठ्यक्रम के अध्ययन से:

  1. विद्यार्थी अपनी रुचि और आवश्यकता के अनुरूप साहित्य का गहन और विशेष अध्ययन जारी रख सकेंगे।
  2. विश्वविद्यालय स्तर पर निर्धारित हिंदी-साहित्य से संबंधित पाठ्यक्रम के साथ सहज संबंध स्थापित कर सकेंगे।

लेखन-कौशल के व्यावहारिक और सृजनात्मक रूपों की अभिव्यक्ति में सक्षम हो सकेंगे।

  1. रोज़गार के किसी भी क्षेत्र में जाने पर भाषा का प्रयोग प्रभावी ढंग से कर सकेंगे।
  2. यह पाठ्यक्रम विद्यार्थी को जनसंचार तथा प्रकाशन जैसे विभिन्न-क्षेत्रों में अपनी क्षमता व्यक्त करने का अवसर प्रदान कर सकता है।
  3. विद्यार्थी दो भिन्न पाठों की पाठ्यवस्तु पर चिंतन करके उनके मध्य की संबद्धता पर अपने विचार अभिव्यक्त करने में सक्षम हो सकेंगे।
  4. विद्यार्थी रटे-रटाए वाक्यों के स्थान पर अभिव्यक्तिपरक / स्थिति आधारित / उच्च चिंतन क्षमता के प्रश्नों पर सहजता से अपने विचार प्रकट कर सकेंगे।

उद्देश्य:

  • सृजनात्मक साहित्य की सराहना, उसका आनंद उठाना और उसके प्रति सृजनात्मक और आलोचनात्मक दृष्टि का विकास करना।

<math>\blacktriangle</math> साहित्य की विविध विधाओं (कविता, कहानी, निबंध आदि), महत्त्वपूर्ण कवियों और रचनाकारों, प्रमुख धाराओं और शैलियों का परिचय करवाना।

<math>\blacktriangle</math> भाषा की सृजनात्मक बारीकियों और व्यावहारिक प्रयोगों का बोध तथा संदर्भ और समय के अनुसार प्रभावशाली ढंग से उसकी मौखिक और लिखित अभिव्यक्ति करना।

<math>\blacktriangle</math> विभिन्न ज्ञानानुशासनों के विमर्श की भाषा के रूप में हिंदी की विशिष्ट प्रकृति एवं क्षमता का बोध करवाना।

<math>\blacktriangle</math> साहित्य की प्रभावशाली क्षमता का उपयोग करते हुए सभी प्रकार की विविधताओं (धर्म, जाति, लिंग, वर्ग, भाषा आदि) एवं असमानताओं के प्रति सकारात्मक और संवेदनशील व्यवहार का विकास करना।

<math>\blacktriangle</math> देश–विदेश में प्रचलित हिंदी के रूपों से परिचित करवाना।

  • संचार-माध्यमों (प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक) में प्रयुक्त हिंदी की प्रकृति से अवगत करवाना और नवीन विधियों के प्रयोग की क्षमता का विकास करना।

<math>\blacktriangle</math> साहित्य की व्यापक धारा के बीच रखकर विशिष्ट रचनाओं का विश्लेषण और विवेचन करने की क्षमता हासिल करना। 2

  • अमूर्त संकल्पनाओं/विचारों को अभिव्यक्त करने की भाषा का विकास कल्पनाशीलता और मौलिक चिंतन को अभिव्यक्ति प्रदान करने की भाषा का विकास।

शिक्षण-युक्तियाँ:

इन कक्षाओं में उचित वातावरण-निर्माण में अध्यापकों की भूमिका सदैव उत्प्रेरक एवं सहायक की होनी चाहिए। उनको भाषा और साहित्य की पढ़ाई में इस बात पर ध्यान देने की ज़रूरत होगी कि –

कक्षा का वातावरण संवादात्मक हो ताकि अध्यापक, विद्यार्थी और पुस्तक-तीनों के बीच एक रिश्ता बन सके।

<math>\blacktriangle</math> बच्चों को स्वतंत्र रूप से बोलने, लिखने और पढ़ने दिया जाए और फिर उनसे होने वाली भूलों की पहचान करवाकर अध्यापक अपनी पढाने की शैली में परिवर्तन करे।

  • ऐसे शिक्षण-बिंदुओं की पहचान की जाए, जिससे कक्षा में विद्यार्थी की सक्रिय भागीदारी रहे और अध्यापक भी उनका साथी बना रहे।
  • भिन्न क्षमता वाले विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त शिक्षण-सामग्री का उपयोग किया जाए तथा किसी भी प्रकार से उन्हें अन्य विद्यार्थियों से कमतर या अलग न समझा जाए।
  • कक्षा में अध्यापक को हर प्रकार की विविधताओं (लिंग, धर्म, जाति, वर्ग आदि) के प्रति सकारात्मक और संवेदनशील वातावरण निर्मित करना चाहिए।

सुजनात्मकता के अभ्यास के लिए विद्यार्थी से साल में कम से कम दो रचनाएँ लिखवाई जाएँ।

श्रवण तथा वाचन परीक्षा हेतु दिशा निर्देश (किसी रिकॉर्ड अंश को सुनना)

श्रवण (सुनना) (5 अंक) : वर्णित या पठित सामग्री को सुनकर अर्थग्रहण करना, वार्तालाप करना, वाद-विवाद, भाषण, कवितापाठ आदि को सुनकर समझना, मूल्यांकन करना और अभिव्यक्ति के ढंग को समझना।

वाचन (बोलना) (5 अंक): भाषण, सस्वर कविता-पाठ, वार्तालाप और उसकी औपचारिकता, कार्यक्रम-प्रस्तुति, कथा-कहानी अथवा घटना सुनाना, परिचय देना, भावानुकूल संवाद-वाचन।

टिप्पणी: वार्तालाप की दक्षताओं का मूल्यांकन निरंतरता के आधार पर परीक्षा के समय ही होगा। निर्धारित 10 अंकों में से 5 श्रवण (सुनना) कौशल के मूल्यांकन के लिए और 5 वाचन (बोलना) कौशल के मूल्यांकन के लिए होंगे।

श्रवण (सुनना) एवं वाचन (बोलना) कौशल का मूल्यांकन:

  • परीक्षक किसी प्रासंगिक विषय पर एक का स्पष्ट वाचन करेगा। अनुच्छेद तथ्यात्मक या सुझावात्मक हो सकता है। अनुच्छेद लगभग 250) शब्दों का होना चाहिए।

या

परीक्षक 2-3 मिनट का श्रव्य अंश (ऑडियो क्लिप) सुनवाएगा। अंश रोचक होना चाहिए। कथ्य/घटना पूर्ण एवं स्पष्ट होनी चाहिए। वाचक का उच्चारण शुद्ध, स्पष्ट एवं विराम चिह्नों के उचित प्रयोग सहित होना चाहिए।

परीक्षार्थी ध्यानपूर्वक परीक्षक / ऑडियो क्लिप को सुनने के पश्चात परीक्षक द्वारा पूछे गए प्रश्नों का अपनी समझ से मौखिक उत्तर देंगे।

किसी निर्धारित विषय पर बोलना:जिससे विद्यार्थी अपने व्यक्तिगत अनुभवों का प्रत्यास्मरण कर सकें।

कोई कहानी सुनाना या किसी घटना का वर्णन करना। 3

  • परिचय देना। (स्व/ परिवार/ वातावरण/ वस्तु/ व्यक्ति/ पर्यावरण/ कवि /लेखक आदि)

परीक्षकों के लिए अनुदेश :-

  • परीक्षण से पूर्व परीक्षार्थी को तैयारी के लिए कुछ समय दिया जाए।

विवरणात्मक भाषा में विषय के अनुकूल तीनों कालों का प्रयोग अपेक्षित है।

निर्धारित विषय परीक्षार्थी के अनुभव–जगत के हों।

  • शिक्षार्थी को विषय केंद्रित स्वतंत्र अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करें।

कौशलों के अंतरण का मूल्यांकन

(इस बात का निश्चय करना कि क्या विद्यार्थी में श्रवण और वाचन की निम्नलिखित योग्यताएँ हैं)

श्रवण (सुनना) वाचन (बोलना)

1 परिचित संदर्भों में प्रयुक्त शब्दों और पदों को 1 केवल अलग अलग शब्दों और पदों के प्रयोग

समझने की सामान्य योग्यता है। की योग्यता प्रदर्शित करता है।

2 छोटे सुसंबद्ध कथनों को परिचित संदभीं में 2 परिचित संदभीं में केवल छोटे सुसंबद्ध कथनों

समझने की योग्यता है। का सीमित शुद्धता से प्रयोग करता है।

3 परिचित या अपरिचित दोनों संदभींं में कथित 3 अपेक्षाकृत दीर्घ भाषण में अधिक जटिल

सूचना को स्पष्ट समझने की योग्यता है। कथनों के प्रयोग की योग्यता प्रदर्शित करता

है। 4 दीर्घ कथनों की श्रृंखला को पर्याप्त शुद्धता से 4 अपरिचित स्थितियों में विचारों को तार्किक ढंग

समझने के ढंग और निष्कर्ष निकाल सकने से संगठित कर धारा-प्रवाह रूप में प्रस्तुत

की योग्यता है। करता है 5 जटिल कथनों के विचार बिंदुओं को समझने 5 उद्देश्य और श्रोता के लिए उपयुक्त शैली को

की योग्यता प्रदर्शित करने की क्षमता है। वह अपना सकता है, ऐसा करते समय वह केवल

उद्देश्य के अनुकूल सुनने की कुशलता मामूली गलतियाँ करता है।

प्रदर्शित करते हैं।

परियोजना कार्य - कुल अंक 10

विषय वस्तु – ५ अंक भाषा एवं प्रस्तुति – ३ अंक शोध एवं मौलिकता – २ अंक

हिंदी भाषा और साहित्य से जुड़े विविध विषयों /साहित्यकारों/ समकालीन लेखनों/ भाषा के तकनीकी पक्ष/ प्रभाव/ अनुप्रयोग/ साहित्य के सामाजिक संदर्भीं एवं जीवन-मूल्य संबंधी प्रभावों आदि पर परियोजना कार्य दिए जाने चाहिए ।

  • सत्र के प्रारंभ में ही विद्यार्थी को विषय चुनने का अवसर मिले ताकि उसे शोध, तैयारी और लेखन के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

परियोजना-कार्य

ेपरियोजनाः शब्द योजना में ेपरिः उपसर्ग लगने से बना है। ेपरिः का अर्थ है ेपूर्णताः अर्थात ऐसी योजना जो अपने आप में पूर्ण हो परियोजना कहलाती है। किसी विशेष लक्ष्य की प्राप्ति हेतु जो योजना बनाई और कार्यान्वित की जाती है, उसे परियोजना कहते हैं। यह किसी समस्या के निदान या किसी विषय के तथ्यों को प्रकाशित करने के लिए तैयार की गई एक पूर्ण विचार योजना होती है। 4

Frequently asked questions

What is the main goal of the CBSE Class 12 Hindi Elective syllabus for 2026-27?

The main goal is to develop students' comprehensive understanding and effective use of Hindi as a medium of discourse, preparing them for higher education and career opportunities.

What learning approaches are emphasized in this syllabus?

The syllabus emphasizes competency-based education, art-integrated learning, and experiential learning to make the study engaging and relevant to real-life situations.

How are listening and speaking skills assessed?

Listening and speaking skills are assessed for 5 marks each. This involves evaluating comprehension of spoken content and oral presentation skills like speeches or poetry recitation.

What kind of literary appreciation is encouraged?

Students are encouraged to appreciate creative literature, understand various literary forms (poetry, story, essay), and develop a critical perspective towards them.

Does the syllabus prepare students for future careers?

Yes, the syllabus aims to enable students to use language effectively in any field of employment and provides opportunities in mass communication and publishing.

What is the role of the teacher according to the syllabus?

Teachers are expected to act as facilitators and catalysts, creating a conversational classroom environment and encouraging active student participation.

CBSE Class 12 Hindi Elective syllabus 2026-27. Last updated 10 Aug 2026.