CBSE Class 10 Hindi B Syllabus 2026-27

CBSE Class 10 2026-27 Syllabus

This syllabus for CBSE Class 10 Hindi B (Subject Code 085) for the 2026-27 session emphasizes competency-based, art-integrated, and experiential learning. It aims to develop students' understanding, speaking, and writing skills in Hindi for daily life, and their ability to comprehend and enjoy Hindi literature, newspapers, and magazines. The curriculum focuses on enhancing participation in formal discussions, enabling creative expression through writing, and understanding various forms of Hindi in print and electronic media. It also promotes sensitivity towards multilingual and multicultural contexts and understanding social issues like caste, gender, and economic disparity. Teaching strategies include continuous practice, engaging activities like storytelling, debates, and role-playing, and utilizing audio-visual aids. The syllabus outlines specific learning outcomes for listening and speaking skills, including comprehension, pronunciation, participation in conversations, and delivering short speeches.

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BoardCBSE
Class10
SubjectHindi B
Session2026-27
LanguageEnglish
TypeSyllabus

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द्वितीय भाषा के रूप में हिंदी

विषय कोड - 085

कक्षा - 10वीं (2026-27)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा समय-समय पर दक्षता आधारित शिक्षा, कला समेकित अधिगम, अनुभवात्मक अधिगम को अपनाने की प्रेरणा दी गई है, जो शिक्षार्थियों की प्रतिभा को उजागर करने, खेल-खेल में सीखने पर बल देने, आनंदपूर्ण ज्ञानार्जन और विद्यार्जन के विविध तरीकों को अपनाने तथा अनुभव के द्वारा सीखने पर बल देती है।

दक्षता आधारित शिक्षा से तात्पर्य है सीखने और मूल्यांकन करने का एक ऐसा दृष्टिकोण, जो शिक्षार्थी के सीखने के प्रतिफल और विषय में विशेष दक्षता को प्राप्त करने पर बल देता है। दक्षता वह क्षमता, कौशल, ज्ञान और दृष्टिकोण है, जो व्यक्ति को वास्तविक जीवन में कार्य करने में सहायता करती है। इससे शिक्षार्थी यह सीख सकते हैं कि ज्ञान और कौशल को किस प्रकार प्राप्त किया जाए तथा उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं पर कैसे लागू किया जाए। जीवनोपयोगी बनाना तथा वास्तविक जीवन के अनुभवों से पाठ को समृद्ध करना ही दक्षता आधारित शिक्षा है। इसके लिए उच्च स्तरीय चिंतन कौशल पर विशेष बल देने की आवश्यकता है।

कला समेकित अधिगम को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में सुनिश्चित करना अत्यधिक आवश्यक है। कला के संसार में कल्पना की एक अलग ही उड़ान होती है। कला एक व्यक्ति की रचनात्मक अभिव्यक्ति है। कला समेकित अधिगम से तात्पर्य है- कला के विविध रूपों संगीत, नृत्य, नाटक, कविता, रंगशाला, यात्रा, मूर्तिकला, आभूषण बनाना, गीत लिखना, नुक्कड़ नाटक, कोलाज, पोस्टर, कला प्रदर्शनी को शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना। किसी विषय को आरंभ करने के लिए आइस ब्रेकिंग गतिविधि के रूप में तथा सामंजस्यपूर्ण समझ पैदा करने के लिए अंतरविषयक या बहुविषयक परियोजनाओं के रूप में कला समेकित अधिगम का प्रयोग किया जाना चाहिए। इससे पाठ अधिक रोचक एवं ग्राह्य हो जाएगा।

अनुभवात्मक अधिगम या आनुभविक ज्ञानार्जन का उद्देश्य शैक्षिक वातावरण को शिक्षार्थी केंद्रित बनाने के साथ-साथ स्वयं मूल्यांकन करने, आलोचनात्मक रूप से सोचने, निर्णय लेने तथा ज्ञान का निर्माण कर उसमें पारंगत होने से है। यहाँ शिक्षक की भूमिका सुविधा प्रदाता व प्रेक्षक की रहती है। ज्ञानार्जन आनुभाविक ज्ञानार्जन, सहयोगात्मक तथा स्वतंत्र रूप से होता है और यह शिक्षार्थियों को एक साथ कार्य करने तथा स्वयं के अनुभव द्वारा सीखने पर बल देता है। यह सिद्धांत और व्यवहार के बीच की दूरी को कम करता है।

भारत एक बहुभाषी देश है जिसमें बहुत सी क्षेत्रीय भाषाएँ रची बसी है। भाषिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भिन्न होने के बावजूद भारतीय परंपरा में बहुत कुछ ऐसा है जो एक दूसरे को जोड़ता है। यही कारण है कि मातृभाषा के रूप में अलग भाषा को पढ़ने वाला विद्यार्थी जब दूसरी भाषा के रूप में हिंदी का चुनाव करता है तो उसके पास अभिव्यक्ति का एक रढ़ आधार पहली भाषा के रूप में पहले से ही मौजूद होता है। इसलिए छठी से आठवीं कक्षा में सीखी हुई हिंदी का विकास भी वह तेजी से करने लगता है। आठवीं कक्षा तक वह हिंदी भाषा में सुनने, पढ़ने, लिखने और कुछ-कुछ बोलने का अभ्यास कर चुका होता है। हिंदी की बात पत्रिकाएँ और छिटपुट रचनाएँ पढ़ना भी अब उसे आ गया है। इसलिए जब वह नवीं एवं दसवीं कक्षा में हिंदी पढ़ेगा तो जहाँ एक ओर हिंदी भाषा के माध्यम से सारे देश से जुड़ेगा वहीं दूसरी ओर अपने क्षेत्र और परिवेश को हिंदी भाषा के माध्यम से जानने की कोशिश भी करेगा, क्योंकि किशोरक्य के इन बच्चों के मानसिक धरातल का विकास विश्व सतर तक पहुँच चुका होता है।

शिक्षण उद्देश्य

दैनिक जीवन में हिंदी में समझने-बोलने के साथ-साथ लिखने की क्षमता का विकास करना।

हिंदी के किशोर-साहित्य, अखबार व पत्रिकाओं को पढ़कर समझ पाना और उसका आनंद उठाने की क्षमता का विकास करना।

  • औपचारिक विषयों और संदर्भों में बातचीत में भाग ले पाने की क्षमता का विकास करना।

हिंदी के ज़िरए अपने अनुभव संसार को लिखकर सहज अभिव्यक्ति कर पाने में सक्षम बनाना।

  • संचार के विभिन्न माध्यमों (प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक) में प्रयुक्त हिंदी के विभिन्न रूपों को समझने की योग्यता का विकास करना।
  • कक्षा में बहुभाषिक, बहुसांस्कृतिक संदर्भों के प्रति संवेदनशील सकारात्मक सोच बनाना।

अपनी मातृभाषा और परिवेशगत भाषा को साथ रखकर हिंदी की संरचनाओं की समझ बनाना।

  • सामाजिक मुद्दों पर समझ बनाना। (जाति, लिंग तथा आर्थिक विषमता)

कविता, कहानी तथा घटनाओं को रोचक ढंग से लिखना ।

भाषा एवं साहित्य को समझने एवं आत्मसात करने की दक्षता का विकास।

शिक्षण युक्तियाँ

  • द्वितीय भाषा के रूप में पढ़ाई जा रही हिंदी भाषा का स्तर ऐसा होना चाहिए कि उसकी गति धीरे-धीरे बढ़ सके, इसके लिए हिंदी अध्यापकों को बड़े धीरज से अपने अध्यापन कार्यक्रमों को नियोजित करना होगा। किसी भी द्वितीय भाषा में निपुणता प्राप्त करने-कराने का एक ही उपाय है-उस भाषा का लगातार रोचक अभ्यास करना-कराना। ये अभ्यास जितने अधिक रोचक, सक्रिय एवं प्रासंगिक होंगे विद्यार्थियों की भाषिक उपलब्धि भी उतनी ही तेज़ी से हो सकेगी। मुखर भाषिक अभ्यास के लिए वार्तालाप, रोचक कहानी सुनना-सुनाना, घटना- वर्णन, चित्र-वर्णन, संवाद, वाद-विवाद, अभिनय, भाषण प्रतियोगिताएँ, कविता पाठ और अंत्याक्षरी जैसी गतिविधियों का सहारा लिया जा सकता है।
  • काव्य भाषा के मर्म से विद्यार्थी का परिचय कराने के लिए ज़रूरी होगा कि किताबों में आए काव्यांशों की लयबद्ध प्रस्तुतियों के ऑडियो-वीडियो कैसेट तैयार किए जाएँ। अगर आसानी से कोई गायक/गायिका मिले तो कक्षा में मध्यकालीन साहित्य के अध्यापन-शिक्षण में उससे मदद ली जानी चाहिए।
  • एनसीईआरटी द्वारा तैयार किए गए अधिगम प्रतिफल /सीखने-सिखाने की प्रक्रिया जो इस पाठ्यचर्या के साथ संलग्नक के रूप में उपलब्ध है, को शिक्षक द्वारा क्षमता आधारित शिक्षा का लक्ष्य प्राप्त करने के लिये अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने की आवश्यकता है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के विभिन्न संगठनों तथा स्वतंत्र निर्माताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए अन्य कार्यक्रम/ई-सामग्री/ वृत्तचित्रों और सिनेमा को शिक्षण-सामग्री के तौर पर इस्तेमाल करने की ज़रूरत है। इनके प्रदर्शन के क्रम में इन पर लगातार बातचीत के ज़रिए सिनेमा के माध्यम से भाषा के प्रयोग की विशिष्टता की पहचान कराई जा सकती है और हिंदी की अलग-अलग छटा दिखाई जा सकती है।

कक्षा में सिर्फ़ एक पाठ्यपुस्तक की उपस्थिति से बेहतर होगा कि शिक्षक के हाथ में विभिन्न प्रकार की पाठ्यसामग्री को विद्यार्थी देखें और कक्षा में अलग-अलग मौकों पर शिक्षक उनका इस्तेमाल कर सकें। 2

  • भाषा लगातार ग्रहण करने की क्रिया में बनती है, इसे प्रदर्शित करने का एक तरीका यह भी है कि शिक्षक खुद यह सिखा सकें कि वे भी शब्दकोश, साहित्यकोश, संदर्भग्रंथ की लगातार मदद ले रहे हैं। इससे विद्यार्थियों में इनके इस्तेमाल करने को लेकर तत्परता बढ़ेगी। अनुमान के आधार पर निकटतम अर्थ तक पहुँचकर संतुष्ट होने की जगह वे सटीक अर्थ की खोज करने के लिए प्रेरित होंगे। इससे शब्दों की अलग-अलग रंगत का पता चलेगा, वे शब्दों के बारीक अंतर के प्रति और सजग हो पाएँगे।
  • भिन्न क्षमता वाले विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त शिक्षण-सामग्री का इस्तेमाल किया जाए तथा किसी भी प्रकार से उन्हें अन्य विद्यार्थियों से कमतर या अलग न समझा जाए।

कक्षा में अध्यापन को हर प्रकार की विविधताओं (लिंग, धर्म, जाति, वर्ग, भाषा आदि) के प्रति सकारात्मक और संवेदनशील वातावरण निर्मित करना चाहिए।

श्रवण (सुनने) और वाचन (बोलने) की योग्यताएँ

प्रवाह के साथ बोली जाती हुई हिंदी को अर्थबोध के साथ समझना।

  • हिंदी शब्दों का उचित उच्चारण करना तथा हिंदी के स्वाभाविक अनुतान का प्रयोग करना।

सामान्य विषयों पर बातचीत करना और परिचर्चा में भाग लेना।

  • हिंदी कविताओं को उचित लय, आरोह-अवरोह और भाव के साथ पढ़ना।
  • सरल विषयों पर कुछ तैयारी के साथ दो-चार मिनट का भाषण देना।

हिंदी में स्वागत करना, परिचय और धन्यवाद देना।

अभिनय में भाग लेना।

श्रवण तथा वाचन परीक्षा हेतु दिशा-निर्देश

  • श्रवण (सुनना) (2.5 अंक): वर्णित या पठित सामग्री को सुनकर अर्थग्रहण करना, वार्तालाप करना, वाद-विवाद, भाषण, कविता पाठ आदि को सुनकर समझना, विश्लेषण करना, मूल्यांकन करना और तद्नुसार अभिव्यक्ति के ढंग को समझना।

वाचन (बोलना) (2.5 अंक): भाषण, सस्वर कविता-पाठ, वार्तालाप और उसकी औपचारिकता, कार्यक्रम-प्रस्तुति, कथा-कहानी अथवा घटना सुनाना, परिचय देना, भावानुकूल संवाद-वाचन।

श्रवण (सुनना) एवं वाचन (बोलना) कौशल:

  • परीक्षक किसी प्रासंगिक विषय पर एक अनुच्छेद का स्पष्ट वाचन करेगा। अनुच्छेद तथ्यात्मक या सुझावात्मक हो सकता है। अनुच्छेद लगभग 120 शब्दों का होना चाहिए।

या

  • परीक्षक 1-1.5 मिनट का श्रव्य अंश (ऑडियो क्लिप) सुनवाएगा। अंश रोचक होना चाहिए। कथ्य/ घटना पूर्ण एवं स्पष्ट होनी चाहिए। वाचक का उच्चारण शुद्ध, स्पष्ट एवं विराम चिह्नों के उचित प्रयोग सहित होना चाहिए।

परीक्षार्थी ध्यानपूर्वक परीक्षक / ऑडियो क्लिप को सुनने के पश्चात परीक्षक द्वारा पूछे गए प्रश्नों का अपनी समझ से मौखिक अथवा कार्यपत्रक के माध्यम से उत्तर देंगे। 3

कौशलों के अंतरण का मूल्यांकन

(इस बात का निश्चय करना कि क्या विद्यार्थी में श्रवण और वाचन की निम्नलिखित योग्यताएँ हैं)

श्रवण (सुनना) वाचन (बोलना)

परिचित संदर्भों में प्रयुक्त शब्दों और पदों को ? केवल अलग-अलग शब्दों और पदों के प्रयोग

समझने की सामान्य योग्यता है। की योग्यता प्रदर्शित करता है।

छोटे सुसंबद्ध कथनों को परिचित संदर्भों में समझने | 2 परिचित संदर्भों में शुद्धता से केवल छोटे संबद्ध

की योग्यता है। कथनों का सीमित प्रयोग करता है।

परिचित या अपरिचित दोनों संदर्भों में कथित सूचना | 3 अपेक्षाकृत दीर्घ भाषण में जटिल कथनों के प्रयोग

को स्पष्ट समझने की योग्यता है। की योग्यता प्रदर्शित करता है।

दीर्घ कथनों को पर्याप्त शुद्धता से समझता है और 4 अपरिचित स्थितियों में विचारों को तार्किक ढंग

निष्कर्ष निकाल सकता है। से संगठित कर धारा-प्रवाह रूप में प्रस्तुत करता

है। 5 जटिल कथनों के विचार-बिंदुओं को समझने और | 5 | उद्देश्य और श्रोता के लिए उपयुक्त शैली को

विश्लेषित करने की योग्यता प्रदर्शित करने की अपना सकता है। क्षमता है।

पठन कौशल

पढ़ने की योग्यताएँ

  • हिंदी में कहानी, निबंध, यात्रा-वर्णन, जीवनी, पत्र, डायरी आदि को अर्थबोध के साथ पढ़ना।
  • पाठ्यवस्तु के संबंध में विचार करना और अपना मत व्यक्त करना।

संदर्भ साहित्य को पढ़कर अपने काम के लायक सूचना एकत्र करना।

पठित सामग्री के विभिन्न अंशों का परस्पर संबंध समझना।

पठित वस्तु का सारांश तैयार करना।

भाषा, विचार एवं शैली की सराहना करना।

साहित्य के प्रति अभिरुचि का विकास करना।

लिखने की योग्यताएँ

लिखते हुए व्याकरण-सम्मत भाषा का प्रयोग करना।

हिंदी के परिचित और अपरिचित शब्दों की सही वर्तनी लिखना।

विराम चिह्नों का समुचित प्रयोग करना।

  • लेखन के लिए सक्रिय (व्यवहारोपयोगी) शब्द भंडार की वृद्धि करना।
  • प्रभावपूर्ण भाषा तथा लेखन-शैली का स्वाभाविक रूप से प्रयोग करना।

उपयुक्त अनुच्छेदों में बाँटकर लिखना। 4

Frequently asked questions

What is the main focus of the CBSE Class 10 Hindi B syllabus for 2026-27?

The syllabus focuses on competency-based, art-integrated, and experiential learning to enhance students' Hindi language skills in understanding, speaking, and writing.

What kind of literary content will students engage with?

Students will be able to comprehend and enjoy Hindi literature, newspapers, and magazines.

How will students' writing skills be developed?

The syllabus aims to enable students to express their experiences through writing and to write poems, stories, and events engagingly.

What are the key teaching strategies suggested in the syllabus?

Strategies include continuous practice, engaging activities like storytelling, debates, role-playing, and using audio-visual aids.

What is the weightage for Listening and Speaking skills in the assessment?

Listening skills are assessed for 2.5 marks and Speaking skills are assessed for 2.5 marks.

How will listening comprehension be assessed?

Students will listen to a passage or audio clip read by the examiner and answer questions based on their understanding.

What social issues are mentioned in the syllabus?

The syllabus aims to build understanding of social issues such as caste, gender, and economic disparity.

CBSE Class 10 Hindi B syllabus 2026-27. Last updated 10 Aug 2026.