CBSE Class 10 Hindi A Syllabus 2026-27
CBSE Class 10 Hindi A Session 2026-27. This syllabus is designed to boost language skills, keeping in line with the National Education Policy 2020. It champions competency-based, art-integrated, and experiential learning to deepen student understanding. Building on prior knowledge, the curriculum sharpens critical thinking, creative expression, and analytical skills. Students will explore diverse literary works, master grammar essentials like prefixes, suffixes, gender, number, case, conjunctions, and compounds, and hone their writing across various formats. The course promotes a sensitive and inclusive use of language, encouraging effective communication and an appreciation for cultural diversity. Key learning outcomes include improved speaking and writing, the ability to connect Hindi with other subjects, and practical application of the language in everyday situations.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | 10 |
| Subject | Hindi A |
| Session | 2026-27 |
| Language | English |
| Type | Syllabus |
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Full document text
हिंदी मातृभाषा
विषय कोड - 002
कक्षा -10वीं (2026-27)
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा समय-समय पर दक्षता आधारित शिक्षा, कला समेकित अधिगम, अनुभवात्मक अधिगम को अपनाने की बात की गई है, जो शिक्षार्थियों की प्रतिभा को उजागर करने, खेल-खेल में सीखने पर बल देने, आनंदपूर्ण ज्ञानार्जन और विद्यार्जन के विविध तरीकों को अपनाने तथा अनुभव के द्वारा सीखने पर बल देती है।
दक्षता आधारित शिक्षा से तात्पर्य है- सीखने और मूल्यांकन करने का एक ऐसा दृष्टिकोण, जो शिक्षार्थी के सीखने के प्रतिफल और विषय में विशेष दक्षता को प्राप्त करने पर बल देता है। दक्षता वह क्षमता, कौशल, ज्ञान और दृष्टिकोण है, जो व्यक्ति को वास्तविक जीवन में कार्य करने में सहायता करती है। इससे शिक्षार्थी यह सीख सकते हैं कि ज्ञान और कौशल को किस प्रकार प्राप्त किया जाए तथा उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं पर कैसे लागू किया जाए। जीवनोपयोगी बनाना तथा वास्तविक जीवन के अनुभवों से पाठ को समृद्ध करना, ही दक्षता आधारित शिक्षा है। इसके लिए उच्च स्तरीय चिंतन कौशल पर विशेष बल देने की आवश्यकता है।
कला समेकित अधिगम को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में सुनिश्चित करना अत्यधिक आवश्यक है। कला के संसार में कल्पना की एक अलग ही उड़ान होती है। कला एक व्यक्ति की रचनात्मक अभिव्यक्ति है। कला समेकित अधिगम से तात्पर्य है- कला के विविध रूपों संगीत, नृत्य, नाटक, कविता, रंगशाला, पात्र, मूर्तिकला, आभूषण बनाना, गीत लिखना, नुक्कड़ नाटक, कोलाज, पोस्टर, कला प्रदर्शनी को शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना। किसी विषय को आरंभ करने के लिए आइस ब्रेकिंग गतिविधि के रूप में तथा सामंजस्यपूर्ण समझ पैदा करने के लिए अंतरविषयक या बहुविषयक परियोजनाओं के रूप में कला समेकित अधिगम का प्रयोग किया जाना चाहिए। इससे पाठ अधिक रोचक एवं ग्राह्य हो जाएगा।
अनुभवात्मक अधिगम या आनुभविक ज्ञानार्जन का उद्देश्य शैक्षिक वातावरण को शिक्षार्थी केंद्रित बनाने के साथ-साथ स्वयं मूल्यांकन करने, आलोचनात्मक रूप से सोचने, निर्णय लेने तथा ज्ञान का निर्माण कर उसमें पारंगत होने से है। यहाँ शिक्षक की भूमिका सुविधा प्रदाता व प्रेक्षक की रहती है। आकलन, अनुभावात्मक ज्ञानार्जन, सहयोगात्मक तथा स्वयं सहर्ष के होना, और यह शिक्षार्थियों को एक साथ काम करने तथा अनुभव के द्वारा सीखने पर बल देता है। यह सिद्धांत इस धारणा पर बल देता है कि ज्ञान अनुभव है।
सामाजिक स्तर तक आते-आते विद्यार्थी किशोर हो चुकता होता है और उसमें सुनने, बोलने, पढ़ने, लिखने के साथ-साथ व्यावसायिक दृष्टि विकसित होने लगती है। भाषा के कौशलोंपरक गद्य,
कथासाहित्य/कवितासहित्य, एकांकी, व्यंग्य और चित्र की रचना की क्षमता उसमें परिपक्वता भी सामान्य हिंदी साहित्य, अलंकार, रस का परिचय, लेखन की विभिन्न कला रूपों और आलोचनात्मक और अनुसार, व्याकरण में उपसर्ग, प्रत्यय, लिंग, वचन, कारक, संधि, समास का परिचय एवं सामान्य हिंदी से विद्यार्थी परिचित हो जाता है। इतना ही नहीं वह विविध विधाओं और अभिव्यक्ति की अनेक शैलियों से भी परिचित हो चुका होता है। नव विद्यार्थियों की रुचि आस-पास, समाज, देश की सोच को सीखने हेतु वैश्विक विभिन्न तक फैला जाती है।
इन बच्चों की दुनिया में समाचार, खेल, फ़िल्म तथा अन्य कलाओं के साथ-साथ पत्र-पत्रिकाएँ और अलग-अलग तरह की किताबें भी प्रवेश पा चुकी होती हैं।
इस स्तर पर मातृभाषा हिंदी का अध्ययन साहित्यिक, सांस्कृतिक और व्यावहारिक भाषा के रूप में कुछ इस तरह से हो कि उच्चतर माध्यमिक स्तर पर पहुँचते-पहुँचते यह विद्यार्थियों की पहचान, आत्मविश्वास और विमर्श की भाषा बन सके। प्रयास यह भी हो कि विद्यार्थी भाषा के लिखित प्रयोग के साथ-साथ सहज और स्वाभाविक मौखिक अभिव्यक्ति में भी सक्षम हो सके।
इस पाठ्यक्रम के अध्ययन से -
- (क) विद्यार्थी अगले स्तरों पर अपनी रुचि और आवश्यकता के अनुरूप हिंदी की पढ़ाई कर सकेंगे तथा हिंदी में बोलने और लिखने में सक्षम हो सकेंगे।
- (ख) अपनी भाषा दक्षता के चलते उच्चतर माध्यमिक स्तर पर विज्ञान, समाज विज्ञान और अन्य के साथ सहज संबद्धता (अंतर्संबंध) स्थापित कर सकेंगे।
- (ग) दैनिक जीवन व्यवहार के विविध क्षेत्रों में हिंदी के औपचारिक/अनौपचारिक उपयोग की दक्षता हासिल कर सकेंगे।
- (घ) भाषा प्रयोग के परंपरागत तौर-तरीकों एवं विधाओं की जानकारी एवं उनके समसामयिक संदर्भों की समझ विकसित कर सकेंगे।
- (ङ) हिंदी भाषा में दक्षता का इस्तेमाल वे अन्य भाषा-संरचनाओं की समझ विकसित करने के लिए कर सकेंगे। दृश्य-श्रव्य, मल्टी मीडिया तथा विविध प्रिंट माध्यमों से प्रसारित सूचनाओं को समझना विश्लेषित करना और सप्रेषित कर सकेंगे।
कक्षा आठवीं तक अर्जित भाषिक कौशलों (सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना) का उत्तरोत्तर विकास।
सृजनात्मक साहित्य के आलोचनात्मक आस्वाद की क्षमता का विकास।
स्वतंत्र और मौखिक रूप से अपने विचारों की अभिव्यक्ति का विकास।
ज्ञान के विभिन्न अनुशासनों के विमर्श की भाषा के रूप में हिंदी की विशिष्ट प्रकृति एवं क्षमता का बोध कराना।
साहित्य की प्रभावकारी क्षमता का उपयोग करते हुए सभी प्रकार की विविधताओं (राष्ट्रीयता, धर्म, जाति, लिंग एवं भाषा) के प्रति सकारात्मक और संवेदनशील आचार-विचार का विकास।
भारतीय भाषाओं एवं विदेशी भाषाओं की सांस्कृतिक विविधता से परिचय।
्र व्यावहारिक और दैनिक जीवन में विविध अभिव्यक्तियों की मौखिक व लिखित क्षमता का विकास।
संचार माध्यमों (प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक) में प्रयुक्त हिंदी की प्रकृति से अवगत कराना और नवीन भाषा प्रयोग करने की क्षमता से परिचय। (मल्टीमीडिया, सोशल मीडिया, पौडकास्ट, ब्लाग)
विश्लेषण और तर्क क्षमता का विकास।
भावाभिव्यक्ति क्षमताओं का उत्तरोत्तर विकास। 2
मतभेद, विरोध और टकराव की परिस्थितियों में भी भाषा को संवेदनशील और तर्कपूर्ण इस्तेमाल से शांतिपूर्ण संवाद की क्षमता का विकास।
भाषा की समावेशी और बहुभाषिक प्रकृति की समझ और व्यवहार का विकास करना।
शिक्षण युक्तियाँ
माध्यमिक कक्षाओं में अध्यापक की भूमिका उचित वातावरण के निर्माण में सहायक होनी चाहिए। भाषा और साहित्य की पढ़ाई में इस बात पर ध्यान देने की ज़रूरत होगी कि -
विद्यार्थी द्वारा की जा रही गलतियों को भाषा के विकास के अनिवार्य चरण के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थी अबाध रूप से बिना झिझक के लिखित और मौखिक अभिव्यक्ति करने में उत्साह का अनुभव करें। विद्यार्थियों पर शुद्धि का ऐसा दबाव नहीं होना चाहिए कि वे तनाव महसूस करने लगें। उन्हें भाषा के सहज, कारगर और रचनात्मक रूपों से इस तरह परिचित कराना उचित है कि वे स्वयं, सहज रूप से भाषिक योग्यताओं का विकास कर सकें।
विद्यार्थी स्वतंत्र और अबाध रूप से लिखित और मौखिक अभिव्यक्ति करें। अधिगम बाधित होने पर अध्यापक, अध्यापन शैली में परिवर्तन करें।
- ऐसे शिक्षण-बिंदुओं की पहचान की जाए, जिनसे कक्षा में विद्यार्थी निरंतर सक्रिय भागीदारी करें और अध्यापक भी इस प्रक्रिया में उनके साथी बनें।
हर भाषा का अपना व्याकरण होता है। भाषा की इस प्रकृति की पहचान कराने में परिवेशगत और पाठगत संदर्भों का प्रयोग करना चाहिए। यह पूरी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए कि विद्यार्थी स्वयं को शोधकर्ता समझें तथा अध्यापक इसमें केवल निर्देशन करें।
हिंदी में क्षेत्रीय प्रयोगों, अन्य भाषाओं के प्रयोगों के उदाहरण से यह बात स्पष्ट की जानी चाहिए कि ये प्रयोग विभेदीकरण नहीं उत्पन्न करते हैं, बल्कि लिपि भाषा के समावेशी स्वरूप को पुष्ट करते हैं और उसका परिवेश अनिवार्य रूप से बहुभाषिक होता है।
- भिन्न क्षमता वाले विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त शिक्षण-सामग्री का इस्तेमाल किया जाए तथा किसी भी प्रकार से उन्हें अन्य विद्यार्थियों से कमतर या अलग न समझा जाए।
कक्षा में अध्यापक को हर प्रकार की विविधताओं (लिंग, जाति, वर्ग, धर्म आदि) के प्रति सकारात्मक और संवेदनशील वातावरण निर्मित करना चाहिए।
काव्य भाषा के मर्म से विद्यार्थी का परिचय कराने के लिए ज़रूरी होगा कि किताबों में आए काव्यांशों की लयबद्ध प्रस्तुतियों के ऑडियो-वीडियो कैसेट तैयार किए जाएँ। अगर आसानी से कोई गायक/गायिका मिले तो कक्षा में मध्यकालीन साहित्य के अध्यापन-शिक्षण में उससे मदद ली जानी चाहिए। 3
- रा.शै.अ. और प्र.प.,(एन.सी.ई.आर.टी.) द्वारा उपलब्ध कराए गए अधिगम प्रतिफल/सीखने-सिखाने की प्रक्रिया जो इस पाठ्यचर्या के साथ संलग्नक के रूप में उपलब्ध है, को शिक्षक द्वारा दक्षता आधारित शिक्षा का लक्ष्य प्राप्त करने के लिये अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने की आवश्यकता है।
- शिक्षा मंत्रालय के विभिन्न संगठनों तथा स्वतंत्र निर्माताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए कराए गए अन्य कार्यक्रम/ ई-सामग्री वृत्तचित्रों और फ़ीचर फ़िल्मों को शिक्षण-सामग्री के तौर पर इस्तेमाल करने की ज़रूरत है। इनके प्रदर्शन के क्रम में इन पर लगातार बातचीत के ज़रिए सिनेमा के माध्यम से भाषा के प्रयोग कि विशिष्टता की पहचान कराई जा सकती है और हिंदी की अलग-अलग छटा दिखाई जा सकती है।
कक्षा में सिर्फ़ पाठ्यपुस्तक की उपस्थिति से बेहतर होगा कि शिक्षक के हाथ में तरह-तरह की पाठ्यसामग्री को विद्यार्थी देखें और कक्षा में अलग-अलग मौकों पर शिक्षक उनका इस्तेमाल करें।
भाषा लगातार ग्रहण करने की क्रिया में बनती है, इसे प्रदर्शित करने का एक तरीका यह भी है कि शिक्षक खुद यह सिखा सकें कि वे भी शब्दकोश, साहित्यकोश, संदर्भग्रंथ की लगातार मदद ले रहे हैं। इससे विद्यार्थियों में इनके इस्तेमाल करने को लेकर तत्परता बढ़ेगी। अनुमान के आधार पर निकटतम अर्थ तक पहुँचकर संतुष्ट होने की जगह वे सटीक अर्थ की खोज करने के लिए प्रेरित होंगे। इससे शब्दों की अलग-अलग रंगत का पता चलेगा, वे शब्दों के सूक्ष्म अंतर के प्रति और सजग हो पाएँगे।
श्रवण व वाचन (मौखिक बोलना) संबंधी योग्यताएँ
श्रवण (सुनना) कौशल
वर्णित या पठित सामग्री, वार्ता, भाषण, पिरचर्चा, वार्तालाप, वाद-विवाद, कविता-पाठ आदि को सुनकर अर्थ ग्रहण करना, विश्लेषित मूल्यांकन करना और अभिव्यक्ति के ढंग को जानना।
वक्तव्य के भाव, विनोद व उसमें निहित संदेश, व्यंग्य आदि को समझना।
वैचारिक मतभेद होने पर भी वक्ता की बात को ध्यानपूर्वक, धैर्यपूर्वक व शिष्टाचार के साथ सुनना व वक्ता के दृष्टिकोण को समझना।
ज्ञानार्जन मनोरंजन व प्रेरणा ग्रहण करने हेतु सुनना।
वक्तव्य का आलोचनात्मक विश्लेषण करना एवं सुनकर उसका सार ग्रहण करना।
श्रवण (सुनना) वाचन (बोलना) का परीक्षण : कुल 5 अंक (2.5+2.5)
- परीक्षक किसी प्रासंगिक विषय पर एक अनुच्छेद का स्पष्ट वाचन करेगा। अनुच्छेद तथ्यात्मक या सुझावात्मक हो सकता है। अनुच्छेद लगभग 100-150 शब्दों का होना चाहिए।
या परीक्षक 1-2 मिनट का श्रव्य अंश (ऑडियो क्लिप) सुनवाएगा। अंश रोचक होना चाहिए। कथ्य /घटनापूर्ण एवं स्पष्ट होना चाहिए। वाचक का उच्चारण शुद्ध, स्पष्ट एवं विराम चिह्नों के उचित प्रयोग सहित होना चाहिए। 4
Frequently asked questions
What is the main focus of the CBSE Class 10 Hindi A Syllabus 2026-27?
The syllabus focuses on competency-based education, art-integrated learning, and experiential learning to enhance students' language proficiency, critical thinking, and creative expression.
What linguistic skills are expected to be developed?
The syllabus aims for the progressive development of listening, speaking, reading, and writing skills, building upon those acquired in earlier classes.
What are the key areas covered in the syllabus?
The syllabus covers the development of linguistic skills, critical appreciation of creative literature, oral and written expression, understanding the nature of Hindi in discourse, and its practical application.
How does the syllabus promote a positive attitude?
It aims to develop a positive and sensitive attitude towards national identity, religion, caste, gender, and language diversity through the effective use of literature.
What is the role of the teacher according to the syllabus?
The teacher's role is to facilitate a conducive environment, accept student errors as a part of development, and guide students to develop language skills independently and creatively.
How does the syllabus address media and modern communication?
It aims to familiarize students with Hindi used in print and electronic media and introduce them to new language uses in multimedia, social media, podcasts, and blogs.
CBSE Class 10 Hindi A syllabus 2026-27. Last updated 10 Aug 2026.