कक्षा 9 हिंदी NCERT समाधान: महादेवी वर्मा - मेरे बचपन के दिन

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यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की पाठ्यपुस्तक 'क्षितिज' के अध्याय 7, 'मेरे बचपन के दिन' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह महादेवी वर्मा के बचपन के अनुभवों, उनके परिवार की सामाजिक पृष्ठभूमि और उस समय लड़कियों की स्थिति पर प्रकाश डालता है। समाधानों में लेखिका के जन्म के समय समाज में लड़कियों के प्रति दृष्टिकोण, उनकी शिक्षा के अवसर, और तत्कालीन सामाजिक कुरीतियों का वर्णन किया गया है। इसमें लेखिका की उर्दू-फ़ारसी सीखने की अनिच्छा, उनकी माँ के धार्मिक और साहित्यिक व्यक्तित्व के प्रभाव, और छात्रावास के बहुभाषी परिवेश का भी उल्लेख है। ये समाधान छात्रों को महादेवी वर्मा के जीवन और उस काल की सामाजिक वास्तविकताओं को समझने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter7. महादेवी वर्मा - मेरे बचपन के दिन

Chapter summary

कक्षा 9 हिंदी के अध्याय 'मेरे बचपन के दिन' के ये NCERT समाधान महादेवी वर्मा के प्रारंभिक जीवन और उस समय के सामाजिक परिदृश्य का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। इसमें लड़कियों की दयनीय स्थिति, शिक्षा के प्रति समाज का रवैया, और लेखिका के व्यक्तिगत अनुभवों जैसे उर्दू-फ़ारसी सीखने में उनकी अरुचि और माँ के प्रभाव का वर्णन है। साथ ही, छात्रावास के बहुभाषी वातावरण और पारिवारिक संबंधों की आत्मीयता पर भी प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • उस समय लड़कियों की सामाजिक और पारिवारिक स्थिति को समझना।
  • महादेवी वर्मा के बचपन के अनुभवों और शिक्षा के प्रति उनके दृष्टिकोण का विश्लेषण करना।
  • तत्कालीन समाज में प्रचलित सामाजिक कुरीतियों और उनके प्रभावों को पहचानना।
  • महादेवी वर्मा की माँ के व्यक्तित्व और उनके प्रभाव का वर्णन करना।
  • छात्रावास के बहुभाषी परिवेश और उसके महत्व को समझना।
  • पारिवारिक संबंधों की आत्मीयता और उसके बदलते स्वरूप पर विचार करना।

Topics covered

Paper topics

  • महादेवी वर्मा का बचपन
  • लड़कियों की तत्कालीन सामाजिक स्थिति
  • शिक्षा और समाज का दृष्टिकोण
  • उर्दू-फ़ारसी सीखने में अरुचि
  • माँ का व्यक्तित्व और प्रभाव
  • छात्रावास का बहुभाषी परिवेश
  • पारिवारिक संबंध और आत्मीयता
  • सामाजिक कुरीतियाँ (बाल-विवाह, दहेज)
  • संस्मरण लेखन शैली
  • सांस्कृतिक विविधता

Important topics

  • लड़कियों की तत्कालीन सामाजिक और पारिवारिक स्थिति का विस्तृत वर्णन।
  • महादेवी वर्मा की माँ के धार्मिक और साहित्यिक प्रभाव का विश्लेषण।
  • छात्रावास के बहुभाषी परिवेश का महत्व और उसमें सीखी गई भाषाएँ।
  • जवारा के नवाब के साथ पारिवारिक संबंधों की आत्मीयता और आज के संदर्भ में उसका तुलनात्मक अध्ययन।

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Questions and Solutions

प्रश्न 1.1

"मैं उत्पन्न हुई तो मेरी बड़ी खातिर हुई और मुझे वह सब नहीं सहना पड़ा जो अन्य लड़कियों को सहना पड़ता है।" इस कथन के आलोक में आप यह पता लगाएँ कि - उस समय लड़कियों की दशा कैसी थी ?
Solution:

लेखिका का जन्म उनके परिवार में दो सौ वर्षों के बाद हुआ था, जिसके कारण उनका जन्म एक उत्सव की तरह मनाया गया और उनकी विशेष खातिरदारी की गई। इसके विपरीत, उस समय, अर्थात् सन् 1900 के आसपास, भारत में लड़कियों की दशा अत्यंत दयनीय थी। समाज का दृष्टिकोण संकीर्ण था और लड़कियों को अक्सर बोझ समझा जाता था। कई बार तो उन्हें जन्म लेते ही मार दिया जाता था। यदि किसी घर में लड़की का जन्म होता था, तो उसे मातम जैसा माना जाता था, जबकि लड़के के जन्म पर खुशियाँ मनाई जाती थीं। महादेवी वर्मा स्वयं लिखती हैं कि बैंड वाले और नौकर-चाकर भी लड़के के जन्म की प्रतीक्षा में रहते थे और लड़की होने पर चुपचाप चले जाते थे। ऐसे वातावरण में लड़कियों के पालन-पोषण, शिक्षा और भविष्य पर ध्यान नहीं दिया जाता था। समाज में बाल-विवाह, दहेज-प्रथा और सती-प्रथा जैसी कुरीतियाँ भी व्याप्त थीं, जो लड़कियों के जीवन को और भी कठिन बना देती थीं।

प्रश्न 1.2

"मैं उत्पन्न हुई तो मेरी बड़ी खातिर हुई और मुझे वह सब नहीं सहना पड़ा जो अन्य लड़कियों को सहना पड़ता है।" इस कथन के आलोक में आप यह पता लगाएँ कि - लड़कियों के जन्म के संबंध में आज कैसी परिस्थितियाँ हैं ?
Solution:

आज लड़कियों के जन्म के संबंध में परिस्थितियाँ पहले की तुलना में काफी बदली हैं, हालाँकि पूरी तरह से समानता अभी भी नहीं आई है। शिक्षा के प्रसार और सामाजिक जागरूकता के कारण लोगों का दृष्टिकोण अधिक सकारात्मक हुआ है। लड़का-लड़की के बीच भेदभाव धीरे-धीरे कम हो रहा है, और आज लड़कियों को लड़कों के समान शिक्षा और उन्नति के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। फिर भी, कुछ क्षेत्रों में आज भी भ्रूण-हत्या जैसी गंभीर समस्याएँ मौजूद हैं और कहीं-कहीं दहेज संबंधी अत्याचार भी होते हैं। सरकार लड़कियों की स्थिति सुधारने और उन्हें समान अधिकार दिलाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

प्रश्न 3

लेखिका उर्दू-फ़ारसी क्यों नहीं सीख पाई ?
Solution:

लेखिका महादेवी वर्मा को उर्दू-फ़ारसी सीखने में बिल्कुल भी रुचि नहीं थी। उनके पिता चाहते थे कि वे उर्दू-फ़ारसी सीखें, लेकिन यह उनकी क्षमता या इच्छा के बाहर था। जब भी उर्दू पढ़ाने के लिए मौलवी साहब घर आते थे, तो लेखिका शरारत में चारपाई के नीचे छिप जाती थीं, ताकि वे पढ़ाई से बच सकें। उनकी इस अरुचि के कारण वे उर्दू-फ़ारसी सीखने में सफल नहीं हो पाईं।

प्रश्न 4

लेखिका ने अपनी माँ के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है ?
Solution:

महादेवी वर्मा ने अपनी माँ के व्यक्तित्व की कई विशेषताओं का उल्लेख किया है। उनकी माँ अत्यंत धार्मिक स्वभाव की महिला थीं और नित्य पूजा-पाठ करती थीं। वे ईश्वर में गहरी आस्था रखती थीं। वे सुबह प्रभाती और शाम को मीरा के पद गाया करती थीं, तथा रामायण का पाठ भी करती थीं। माँ को हिंदी और संस्कृत का अच्छा ज्ञान था। उन्होंने ही महादेवी को सबसे पहले 'पंचतंत्र' पढ़ने के लिए दिया था, जिससे उनकी हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति गहरी रुचि जाग्रत हुई। इस प्रकार, माँ का धार्मिक और साहित्यिक प्रभाव महादेवी के जीवन में महत्वपूर्ण रहा।

प्रश्न 5

जवारा के नवाब के साथ अपने पारिवारिक संबंधों को लेखिका ने आज के संदर्भ में स्वप्न जैसे क्यों कहा है ?
Solution:

लेखिका महादेवी वर्मा ने जवारा के नवाब के साथ अपने पारिवारिक संबंधों को आज के संदर्भ में 'स्वप्न जैसा' इसलिए कहा है क्योंकि उस समय उनके संबंध इतने गहरे और आत्मीय थे कि वे सगे-संबंधियों से भी बढ़कर थे। दोनों परिवारों के बच्चे एक-दूसरे के घर जन्मदिन मनाते थे। लेखिका जवारा की बेगम को 'ताई' कहकर बुलाती थीं और उन्होंने ही उनके भाई का नामकरण भी किया था। वे सभी त्योहार एक साथ मनाते थे, और यहाँ तक कि राखी बंधने तक नवाब के बेटे पानी भी नहीं पीते थे। बेगम साहिबा के घर अवधी बोली जाती थी, लेकिन हिंदी और उर्दू का भी प्रयोग होता था। लेखिका का मानना है कि उस समय के वातावरण में जो आपसी निकटता, प्रेम और सौहार्द था, वह आज के समय में लगभग असंभव है। आज के समाज में आपसी भेदभाव, दिखावा और एक-दूसरे को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति ने ऐसी आत्मीयता की जगह ले ली है, इसलिए वे उन संबंधों को एक स्वप्न की तरह मानती हैं।

प्रश्न 6

ज़ेबुन्निसा महादेवी वर्मा के लिए बहुत काम करती थी। ज़ेबुन्निसा के स्थान पर यदि आप होतीं / होते तो महादेवी से आपकी क्या अपेक्षा होती ?
Solution:

यदि मैं ज़ेबुन्निसा के स्थान पर होती और महादेवी वर्मा की सहायता करती, तो मेरी उनसे कुछ अपेक्षाएँ होतीं। केवल काम करने के बदले, मैं उनसे निम्नलिखित की अपेक्षा करती:

  1. प्रेम और आदर: मैं चाहती कि वे मुझसे केवल एक सेविका की तरह नहीं, बल्कि एक व्यक्ति की तरह प्रेम और आदर का व्यवहार करें।
  2. पढ़ाई में सहायता: यदि मैं भी पढ़ रही होती, तो मैं उनसे अपनी पढ़ाई में मार्गदर्शन या सहायता की अपेक्षा रखती।
  3. स्वरचित कविताएँ सुनना: मैं उनसे उनकी लिखी हुई कविताएँ सुनने की इच्छा रखती, क्योंकि वे एक महान कवयित्री थीं।
  4. प्रोत्साहन: मैं उनसे स्वयं कविता लिखने या अपनी रचनात्मकता को विकसित करने के लिए प्रोत्साहन पाने की अपेक्षा रखती।

संक्षेप में, मैं उनसे एक मानवीय और स्नेहमय संबंध की अपेक्षा करती, न कि केवल काम और सेवा का रिश्ता।

प्रश्न 7

महादेवी वर्मा को काव्य प्रतियोगिता में चाँदी का कटोरा मिला था। अनुमान लगाइए कि आपको इस तरह का कोई पुरस्कार मिला हो और वह देशहित में या किसी आपदा निवारण के काम में देना पड़े तो आप कैसा अनुभव करेंगे / करेंगी ?
Solution:

यदि मुझे महादेवी वर्मा की तरह कोई कीमती पुरस्कार, जैसे चाँदी का कटोरा, मिलता और उसे देशहित या किसी आपदा निवारण के लिए देना पड़ता, तो मुझे अत्यंत गर्व और संतोष की अनुभूति होती। बेशक, पुरस्कार के प्रति एक व्यक्तिगत लगाव हो सकता है, लेकिन देश प्रेम और मानवता की सेवा सर्वोपरि है। ऐसी स्थिति में, अपने पुरस्कार को राष्ट्र या जरूरतमंदों के काम आते देखकर मुझे खुशी होगी। यह मेरे लिए एक बड़े सम्मान की बात होगी कि मेरा पुरस्कार किसी नेक काम में योगदान दे सका। इस प्रकार के त्याग से मिलने वाली संतुष्टि किसी भी भौतिक वस्तु के मूल्य से कहीं अधिक होती है।

प्रश्न 8

लेखिका ने छात्रावास के जिस बहुभाषी परिवेश की चर्चा की है उसे अपनी मातृभाषा में लिखिए।
Solution:

मेरी मातृभाषा हिंदी है। लेखिका महादेवी वर्मा ने अपने संस्मरण में क्रास्थवेट गर्ल्स कॉलेज, इलाहाबाद के छात्रावास के बहुभाषी परिवेश का वर्णन किया है। जब उन्होंने पाँचवीं कक्षा में वहाँ प्रवेश लिया, तो उन्होंने देखा कि देश के विभिन्न प्रांतों से आई हुई छात्राएँ वहाँ पढ़ती थीं। ये सभी छात्राएँ आपस में अपनी-अपनी मातृभाषाओं में बातचीत करती थीं। इस छात्रावास में हिंदी के अलावा मराठी, अवधी, बुंदेली और ब्रजभाषा जैसी कई भाषाएँ सुनने को मिलती थीं। सभी छात्राएँ हिंदी और उर्दू का अध्ययन भी करती थीं। इस प्रकार, छात्रावास का वातावरण विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के मेलजोल का एक अनूठा उदाहरण था, जो एक समृद्ध बहुभाषी परिवेश का निर्माण करता था।

प्रश्न 9

महादेवी जी के इस संस्मरण को पढ़ते हुए आपके मानस-पटल पर भी अपने बचपन की स्मृति उभरकर आई होगी, उसे संस्मरण शैली में लिखिए।
Solution:

बचपन की यादें अक्सर मन को मोह लेती हैं। मुझे भी महादेवी वर्मा जी के संस्मरण को पढ़ते हुए अपने बचपन का एक दिन याद आ गया। मैं और मेरा सबसे प्रिय मित्र, रवि, उस दिन स्कूल से घर लौट रहे थे। हम दोनों लगभग एक ही उम्र के थे और हर दिन साथ खेलते-पढ़ते थे। घर पहुँचने के लिए हमें एक व्यस्त सड़क पार करनी पड़ती थी। मैं थोड़ा आगे था और मैंने सावधानी से सड़क पार कर ली थी। लेकिन जैसे ही मैं दूसरी तरफ पहुँचा, तभी ट्रैफिक सिग्नल हरा हो गया और गाड़ियाँ तेज़ी से आगे बढ़ने लगीं। रवि अभी सड़क के बीच में ही था। उसने शायद सड़क के दोनों ओर ठीक से नहीं देखा था और वह तेज़ी से आती गाड़ियों को देखकर घबरा गया। उस पल मुझे बहुत डर लगा। सौभाग्य से, एक कार चालक ने उसे देखा और ब्रेक लगा दिए, जिससे रवि सुरक्षित दूसरी तरफ पहुँच गया। उस दिन हमने सीखा कि सड़क पार करते समय हमेशा बहुत सावधान रहना चाहिए। यह घटना आज भी मेरे ज़हन में ताज़ा है, जैसे कल ही की बात हो।

Common mistakes

  • लड़कियों की तत्कालीन दयनीय स्थिति को कम आंकना।
  • महादेवी वर्मा की शिक्षा और रुचियों के बीच संबंध को न समझ पाना।
  • सामाजिक कुरीतियों के प्रभाव को केवल व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित रखना।
  • छात्रावास के बहुभाषी परिवेश के महत्व को अनदेखा करना।

Revision tips

  • लड़कियों की तत्कालीन स्थिति पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि यह पाठ का मुख्य बिंदु है।
  • महादेवी वर्मा की माँ के व्यक्तित्व और उनके प्रभाव को रेखांकित करें।
  • छात्रावास के बहुभाषी परिवेश के उदाहरणों को याद रखें।
  • जवारा के नवाब के साथ संबंधों को 'स्वप्न जैसा' कहने के कारण पर विचार करें।

Practice MCQs

Q1. महादेवी वर्मा के जन्म के समय उनके परिवार में उनकी खातिरदारी क्यों हुई?

Q2. सन् 1900 के आसपास भारत में लड़कियों की दशा कैसी थी?

Q3. लेखिका उर्दू-फ़ारसी क्यों नहीं सीख पाई?

Q4. महादेवी वर्मा की माँ की प्रमुख विशेषता क्या थी?

Q5. छात्रावास में लेखिका को किस प्रकार का परिवेश मिला?

Frequently asked questions

कक्षा 9 हिंदी के 'मेरे बचपन के दिन' पाठ में मुख्य रूप से क्या बताया गया है?

इस पाठ में महादेवी वर्मा ने अपने बचपन के अनुभवों, उस समय लड़कियों की दयनीय सामाजिक स्थिति, अपनी शिक्षा, माँ के प्रभाव और छात्रावास के बहुभाषी परिवेश का वर्णन किया है।

उस समय लड़कियों की दशा इतनी खराब क्यों थी?

उस समय लड़कियों को बोझ समझा जाता था, जन्म लेते ही मार दिया जाता था, और उन्हें शिक्षा व महत्व नहीं दिया जाता था। बाल-विवाह, दहेज जैसी कुरीतियाँ भी व्याप्त थीं।

महादेवी वर्मा ने उर्दू-फ़ारसी क्यों नहीं सीखी?

उन्हें उर्दू-फ़ारसी में कोई रुचि नहीं थी। वे इसे अपने वश की बात नहीं मानती थीं और मौलवी साहब के आने पर छिप जाती थीं।

महादेवी वर्मा की माँ का उनके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?

उनकी माँ धार्मिक थीं और उन्होंने ही महादेवी को पंचतंत्र पढ़ने को दी, जिससे उनकी हिंदी के प्रति रुचि जाग्रत हुई।

छात्रावास का बहुभाषी परिवेश क्या था?

छात्रावास में देश के विभिन्न हिस्सों से आई छात्राएँ अपनी-अपनी मातृभाषाओं में बात करती थीं, जिससे हिंदी, मराठी, अवधी, बुंदेली और ब्रजभाषा जैसी अनेक भाषाएँ सुनने को मिलती थीं।

जवारा के नवाब के साथ संबंधों को 'स्वप्न जैसा' क्यों कहा गया है?

क्योंकि उस समय दोनों परिवारों के बीच अत्यधिक आत्मीयता और निकटता थी, जो आज के समय में आपसी भेदभाव और दिखावे के कारण संभव नहीं है।

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