कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान: निर्धनता: एक चुनौती - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 के लिए सामाजिक विज्ञान के अध्याय 3, 'निर्धनता: एक चुनौती' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें भारत में निर्धनता रेखा के आकलन की विधियों, निर्धनता की प्रवृत्तियों, अंतर-राज्यीय असमानताओं और निर्धनता के प्रति संवेदनशील सामाजिक-आर्थिक समूहों पर विस्तृत चर्चा शामिल है। समाधानों में निर्धनता के कारणों और वैश्विक प्रवृत्तियों का भी विश्लेषण किया गया है। ये समाधान छात्रों को निर्धनता की जटिलताओं को समझने, विभिन्न राज्यों में इसके प्रसार में भिन्नताओं का विश्लेषण करने और उन सामाजिक समूहों की पहचान करने में मदद करते हैं जो सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। परीक्षा की तैयारी के लिए, ये समाधान प्रमुख अवधारणाओं की स्पष्ट समझ प्रदान करते हैं और महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर देने के लिए एक ठोस आधार तैयार करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | सामाजिक विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 3. निर्धनता एक चुनौती |
Chapter summary
कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान के अध्याय 3 'निर्धनता: एक चुनौती' के ये NCERT समाधान छात्रों को भारत में निर्धनता की बहुआयामी प्रकृति को समझने में मदद करते हैं। समाधानों में निर्धनता रेखा के निर्धारण के तरीके, 1973 से अब तक की निर्धनता की प्रवृत्तियों, विभिन्न राज्यों में निर्धनता की असमानताओं और निर्धनता के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील सामाजिक व आर्थिक समूहों का विस्तृत विश्लेषण शामिल है। यह अध्याय वैश्विक निर्धनता की प्रवृत्तियों पर भी प्रकाश डालता है, जिससे छात्रों को इस गंभीर मुद्दे की व्यापक समझ मिलती है।
Learning outcomes
- भारत में निर्धनता रेखा के आकलन की प्रक्रिया को समझना।
- निर्धनता की प्रवृत्तियों और इसके ऐतिहासिक विकास का विश्लेषण करना।
- भारत के विभिन्न राज्यों में निर्धनता की असमानताओं की पहचान करना।
- निर्धनता के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील सामाजिक और आर्थिक समूहों को सूचीबद्ध करना।
- अंतर्राज्यीय निर्धनता में भिन्नता के कारणों का वर्णन करना।
- वैश्विक निर्धनता की प्रवृत्तियों से परिचित होना।
Topics covered
Paper topics
- निर्धनता रेखा का आकलन
- कैलोरी आवश्यकता
- निर्धनता की प्रवृत्तियाँ (1973-2000)
- अंतर-राज्यीय निर्धनता असमानताएँ
- निर्धनता के प्रति संवेदनशील समूह
- ग्रामीण और शहरी निर्धनता
- निर्धनता के कारण
- वैश्विक निर्धनता
Important topics
- निर्धनता रेखा का आकलन और कैलोरी आवश्यकता
- भारत में निर्धनता की प्रवृत्तियाँ
- अंतर-राज्यीय निर्धनता असमानताएँ और उनके कारण
- निर्धनता के प्रति संवेदनशील सामाजिक-आर्थिक समूह
PDF preview
Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.
Questions and Solutions
प्रश्न 1
- आवश्यकताओं का निर्धारण: सबसे पहले, जीवन निर्वाह के लिए आवश्यक न्यूनतम भौतिक मात्राओं का निर्धारण किया जाता है। इनमें खाद्य पदार्थ (कैलोरी की आवश्यकता के आधार पर), कपड़े, जूते, ईंधन, प्रकाश, शैक्षिक और चिकित्सा संबंधी आवश्यकताएं शामिल हैं।
- मूल्य निर्धारण: इन निर्धारित भौतिक मात्राओं को वर्तमान बाजार मूल्यों से गुणा करके उनकी मौद्रिक लागत निकाली जाती है।
- कैलोरी आवश्यकता: निर्धनता रेखा का आकलन मुख्य रूप से वांछित कैलोरी आवश्यकताओं पर आधारित है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2400 कैलोरी और शहरी क्षेत्रों के लिए 2100 कैलोरी निर्धारित की गई है।
- आय सीमा: इन कैलोरी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक न्यूनतम आय निर्धारित की जाती है। वर्तमान में, यह ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लगभग 328 रुपये प्रति माह और शहरी क्षेत्रों के लिए 454 रुपये प्रति माह है। इस आय सीमा से नीचे जीवन यापन करने वाले व्यक्ति निर्धन माने जाते हैं।
प्रश्न 2
- कैलोरी की आवश्यकता: वर्तमान में कैलोरी की आवश्यकता का निर्धारण केवल न्यूनतम जीवन निर्वाह के लिए किया जाता है, जो कि पर्याप्त नहीं हो सकता है।
- विविधता की उपेक्षा: यह तरीका विभिन्न सामाजिक-आर्थिक समूहों की विशिष्ट आवश्यकताओं और जीवनशैली की विविधता को पूरी तरह से ध्यान में नहीं रखता है। उदाहरण के लिए, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन यापन की लागत और आवश्यकताएं भिन्न होती हैं, जिन्हें वर्तमान में केवल कैलोरी के आधार पर समायोजित किया जाता है।
- अन्य आवश्यकताएं: यद्यपि कपड़ों, जूतों, ईंधन, प्रकाश, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी अन्य आवश्यकताओं को भी शामिल किया गया है, लेकिन उनके लिए निर्धारित न्यूनतम मानक अक्सर अपर्याप्त हो सकते हैं।
- बदलती जीवनशैली: समय के साथ लोगों की जीवनशैली और अपेक्षाएं बदलती हैं, जिसके लिए निर्धनता रेखा के निर्धारण के तरीकों को भी अद्यतन करने की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 3
- अनुपात में गिरावट: निर्धनता रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के अनुपात में लगातार गिरावट आई है। 1973 में जहाँ यह लगभग 55 प्रतिशत था, वहीं 1993 में घटकर 36 प्रतिशत हो गया। वर्ष 2000 तक यह अनुपात और भी गिरकर लगभग 26 प्रतिशत पर आ गया। यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो भविष्य में यह 20 प्रतिशत से भी नीचे जा सकती है।
- निर्धन लोगों की संख्या: अनुपात में गिरावट के बावजूद, निर्धन लोगों की निरपेक्ष संख्या लंबे समय तक काफी अधिक बनी रही। 1973 से 1993 तक, निर्धन लोगों की संख्या लगभग 32 करोड़ के आसपास स्थिर रही।
- हालिया सुधार: नवीनतम अनुमानों के अनुसार, निर्धन लोगों की संख्या में कमी आई है, जो लगभग 26 करोड़ तक पहुँच गई है। यह एक सकारात्मक संकेत है, जो दर्शाता है कि निर्धनता उन्मूलन के प्रयासों का कुछ प्रभाव पड़ा है।
- भविष्य की संभावना: यदि वर्तमान प्रवृत्तियाँ जारी रहती हैं, तो निर्धनता अनुपात में और कमी आने की उम्मीद है, जिससे निर्धनता रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में भी कमी आएगी।
प्रश्न 4
- राष्ट्रीय औसत से कम निर्धनता: 1970 के दशक की शुरुआत से ही राज्य स्तरीय निर्धनता में कमी आई है। वर्तमान में, भारत के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में निर्धनता का अनुपात राष्ट्रीय औसत से कम है।
- गंभीर निर्धनता वाले राज्य: निर्धनता अभी भी उड़ीसा, बिहार, असम, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में एक गंभीर समस्या बनी हुई है। इनमें से, उड़ीसा (47% निर्धनता) और बिहार (43% निर्धनता) सर्वाधिक निर्धन राज्य हैं।
- ग्रामीण और शहरी निर्धनता: उड़ीसा, मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में न केवल ग्रामीण निर्धनता अधिक है, बल्कि शहरी निर्धनता भी चिंताजनक स्तर पर है।
- सुधार वाले राज्य: इसकी तुलना में, केरल, जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में निर्धनता में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
- सफल राज्यों के उदाहरण: पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों ने उच्च कृषि वृद्धि दर हासिल करके निर्धनता को कम करने में सफलता पाई है। पश्चिम बंगाल में भूमि सुधार उपायों ने निर्धनता कम करने में सहायता की है। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (अनाज का वितरण) ने भी सुधार में योगदान दिया हो सकता है।
प्रश्न 5
- अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST): ऐतिहासिक रूप से सामाजिक भेदभाव और आर्थिक अवसरों की कमी के कारण ये समुदाय अक्सर निर्धनता के जाल में फंसे रहते हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों के श्रमिक परिवार: विशेष रूप से वे परिवार जो भूमिहीन हैं या कृषि पर निर्भर हैं और जिन्हें अनियमित रोजगार मिलता है, वे मौसमी बेरोजगारी और आय की अनिश्चितता के कारण निर्धनता का सामना करते हैं।
- नगरीय अनियमित मजदूर परिवार: शहरी क्षेत्रों में भी, जो मजदूर अनियमित या दिहाड़ी पर काम करते हैं (जैसे कि निर्माण श्रमिक, फेरीवाले, घरेलू कामगार), उन्हें अक्सर कम मजदूरी, असुरक्षित काम करने की स्थिति और सामाजिक सुरक्षा की कमी का सामना करना पड़ता है, जिससे वे निर्धनता के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
प्रश्न 6
- ऐतिहासिक कारण: ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान अपनाई गई नीतियों के कारण भारत के कुछ क्षेत्रों में आर्थिक विकास का स्तर निम्न रहा, जिसका प्रभाव आज भी कुछ राज्यों में निर्धनता के रूप में देखा जाता है।
- सरकारी नीतियों की उपेक्षा: कुछ राज्य सरकारों द्वारा हस्तशिल्प, कृषि, घरेलू उद्योग और वस्त्र जैसे पारंपरिक उद्योगों की उपेक्षा के कारण इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सीमित रहे और निर्धनता बढ़ी।
- कृषि विकास का असमान प्रसार: सिंचाई सुविधाओं और हरित क्रांति के प्रसार से कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े, लेकिन इनका लाभ देश के सभी हिस्सों तक समान रूप से नहीं पहुँच पाया। कुछ राज्यों को इसका अधिक लाभ मिला, जबकि अन्य पिछड़ गए।
- रोजगार के अवसरों की कमी: सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों द्वारा रोजगार सृजन के प्रयास किए गए, लेकिन ये प्रयास देश की विशाल जनसंख्या और रोजगार की मांग को पूरा करने के लिए अपर्याप्त रहे हैं।
- जनसंख्या और संसाधन असंतुलन: असम, उड़ीसा, बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाले राज्यों में भूमि जैसे प्राकृतिक संसाधनों की कमी एक प्रमुख कारण है, जो प्रति व्यक्ति आय को कम करता है और निर्धनता को बढ़ाता है।
- अन्य कारक: इसके अतिरिक्त, प्राकृतिक आपदाएं, सामाजिक असमानताएं, और शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं तक असमान पहुंच भी अंतर्राज्यीय निर्धनता में भिन्नता के लिए जिम्मेदार हैं।
प्रश्न 7
- कमी की प्रवृत्ति: पिछले कुछ दशकों में, विशेष रूप से एशिया के कुछ देशों (जैसे चीन और भारत) में तीव्र आर्थिक विकास के कारण वैश्विक निर्धनता में उल्लेखनीय कमी आई है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अनुमानों के अनुसार, अत्यधिक निर्धनता (प्रतिदिन $1.90 से कम आय वाले लोग) का अनुपात कम हुआ है।
- असमानता: हालाँकि वैश्विक स्तर पर कमी आई है, लेकिन यह कमी सभी देशों में समान नहीं है। कुछ देशों, विशेष रूप से उप-सहारा अफ्रीका के कुछ हिस्सों में, निर्धनता अभी भी एक गंभीर समस्या बनी हुई है और इसमें कमी की गति धीमी है।
- कारण: वैश्विक निर्धनता के कारणों में आर्थिक विकास की धीमी गति, राजनीतिक अस्थिरता, संघर्ष, प्राकृतिक आपदाएं, जलवायु परिवर्तन, और शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाओं तक असमान पहुंच शामिल हैं।
- चुनौतियाँ: भविष्य में वैश्विक निर्धनता को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए सतत आर्थिक विकास, समावेशी नीतियों, बेहतर शासन, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है। विशेष रूप से कमजोर देशों और समुदायों पर ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण है।
Common mistakes
- निर्धनता रेखा के निर्धारण के लिए कैलोरी और आय की आवश्यकताओं के बीच अंतर को समझने में भ्रम।
- अंतर-राज्यीय निर्धनता असमानताओं के कारणों को केवल एक कारक तक सीमित करना।
- निर्धनता की प्रवृत्तियों का विश्लेषण करते समय केवल प्रतिशत पर ध्यान केंद्रित करना, न कि निरपेक्ष संख्या पर।
- सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर समूहों की पहचान में चूक।
Revision tips
- निर्धनता रेखा के निर्धारण के लिए आवश्यक कैलोरी और आय की मात्रा को याद करें।
- विभिन्न राज्यों में निर्धनता के स्तर की तुलना करें और इसके कारणों पर विचार करें।
- निर्धनता की प्रवृत्तियों को दर्शाने वाले वर्षों और प्रतिशत को नोट करें।
- उन सामाजिक और आर्थिक समूहों की सूची बनाएं जो निर्धनता से सबसे अधिक प्रभावित हैं।
Practice MCQs
Q1. भारत में निर्धनता रेखा का आकलन करते समय किन आवश्यकताओं पर विचार किया जाता है?
Explanation: भारत में निर्धनता रेखा का निर्धारण करते समय जीवन निर्वाह के लिए खाद्य, कपड़े, जूते, ईंधन और प्रकाश, शैक्षिक एवं चिकित्सा संबंधी आवश्यकताओं जैसी विभिन्न भौतिक मात्राओं पर विचार किया जाता है।
Q2. ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धनता रेखा के लिए प्रतिदिन कितनी कैलोरी की आवश्यकता मानी जाती है?
Explanation: ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धनता रेखा के आकलन के लिए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2400 कैलोरी की आवश्यकता मानी जाती है।
Q3. 1973 से 2000 के बीच भारत में निर्धनता अनुपात में क्या प्रवृत्ति देखी गई?
Explanation: भारत में निर्धनता अनुपात 1973 में लगभग 55 प्रतिशत से घटकर 2000 में 26 प्रतिशत हो गया, जो एक महत्त्वपूर्ण गिरावट दर्शाता है।
Q4. भारत में निर्धनता के मामले में कौन से दो राज्य सर्वाधिक निर्धन माने जाते हैं?
Explanation: उड़ीसा और बिहार क्रमशः 47% और 43% निर्धनता औसत के साथ भारत के दो सर्वाधिक निर्धन राज्य हैं।
Q5. निम्नलिखित में से कौन सा समूह भारत में निर्धनता के समक्ष सबसे अधिक निरुपाय (असुरक्षित) है?
Explanation: ग्रामीण इलाकों के श्रमिक परिवार और नगरीय अनियमित मजदूर परिवार भारत में निर्धनता के समक्ष सबसे अधिक निरुपाय या असुरक्षित सामाजिक एवं आर्थिक समूह हैं।
Frequently asked questions
निर्धनता रेखा क्या है और इसका आकलन कैसे किया जाता है?
निर्धनता रेखा एक काल्पनिक रेखा है जो किसी देश में न्यूनतम जीवन स्तर को दर्शाती है। भारत में, इसका आकलन खाद्य, कपड़े, जूते, ईंधन, प्रकाश, शिक्षा और चिकित्सा जैसी बुनियादी आवश्यकताओं के लिए आवश्यक कैलोरी और आय के आधार पर किया जाता है।
क्या भारत में निर्धनता कम हो रही है?
हाँ, भारत में निर्धनता अनुपात में 1973 से लगातार गिरावट आई है। 1973 में जहाँ यह 55% थी, वहीं 2000 तक यह घटकर 26% रह गई। हालाँकि, निर्धन लोगों की संख्या अभी भी काफी अधिक है।
किन राज्यों में निर्धनता एक गंभीर समस्या है?
उड़ीसा, बिहार, असम, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में निर्धनता अभी भी एक गंभीर समस्या है। उड़ीसा और बिहार में निर्धनता का अनुपात राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है।
कौन से सामाजिक और आर्थिक समूह निर्धनता से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं?
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियाँ, ग्रामीण इलाकों के श्रमिक परिवार, और नगरीय अनियमित मजदूर परिवार भारत में निर्धनता के समक्ष सबसे अधिक निरुपाय या असुरक्षित समूह हैं।
अंतर्राज्यीय निर्धनता में भिन्नता के मुख्य कारण क्या हैं?
अंतर्राज्यीय निर्धनता में भिन्नता के कारणों में औपनिवेशिक काल से चली आ रही आर्थिक असमानता, राज्य सरकारों द्वारा कुछ उद्योगों की उपेक्षा, सिंचाई और हरित क्रांति का असमान प्रसार, और जनसंख्या घनत्व वाले राज्यों में भूमि संसाधनों की कमी शामिल हैं।
Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy
NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.