कक्षा 9 संस्कृत शेमुषी: अध्याय 9 सिकतासेतुः NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 की संस्कृत शेमुषी पुस्तक के अध्याय 9, 'सिकतासेतुः' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय एक ऐसे व्यक्ति की कहानी बताता है जो रेत से पुल बनाने का असंभव कार्य करने का प्रयास करता है, जिससे तपोदत्त नामक एक व्यक्ति को अपनी मूर्खता का एहसास होता है। समाधानों में एक-शब्द उत्तर, विस्तृत प्रश्नोत्तर, भिन्नवर्गीयं पदं चिनुत (गलत शब्द चुनना), सर्वनामों का प्रयोग और कथनों के वक्ता-श्रोता की पहचान शामिल है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने, व्याकरणिक अवधारणाओं को स्पष्ट करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट और संक्षिप्त तरीके से समझाया गया है, जिससे छात्रों को पाठ की मुख्य शिक्षाओं को आत्मसात करने में सहायता मिलती है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | Shemushi |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 9 |
Chapter summary
अध्याय 9 'सिकतासेतुः' के ये NCERT समाधान छात्रों को पाठ की मुख्य कहानी और नैतिक शिक्षा को समझने में मदद करते हैं। इसमें एक व्यक्ति द्वारा रेत से पुल बनाने के व्यर्थ प्रयास और उसके माध्यम से तपोदत्त को अपनी मूर्खता का बोध कराने की कहानी शामिल है। समाधानों में विभिन्न प्रकार के प्रश्न शामिल हैं, जैसे कि एक-शब्द उत्तर, विस्तृत व्याख्यात्मक प्रश्न, व्याकरणिक अभ्यास (भिन्नवर्गीयं पदं चिनुत), सर्वनामों के प्रयोग की पहचान और संवादों में वक्ता-श्रोता का निर्धारण। ये अभ्यास छात्रों की पाठ की समझ और संस्कृत भाषा के प्रयोग कौशल को बढ़ाते हैं।
Learning outcomes
- पाठ 'सिकतासेतुः' की मुख्य कहानी और पात्रों को समझना।
- रेत से पुल बनाने के असंभव कार्य के पीछे के प्रतीकात्मक अर्थ को पहचानना।
- पाठ में प्रयुक्त व्याकरणिक संरचनाओं, जैसे सर्वनामों और क्रियाओं को समझना।
- दिए गए वाक्यों में वक्ता और श्रोता की पहचान करने का अभ्यास करना।
- संस्कृत में एक-शब्द और विस्तृत उत्तर लिखने की क्षमता विकसित करना।
- पाठ से प्राप्त नैतिक शिक्षाओं को आत्मसात करना।
Topics covered
Paper topics
- सिकतासेतुः पाठ का सारांश
- तपोदत्त का चरित्र चित्रण
- रेत से पुल बनाने का प्रतीकात्मक अर्थ
- असंभव कार्य और व्यर्थ प्रयास
- संस्कृत व्याकरण: सर्वनाम प्रयोग
- संस्कृत व्याकरण: भिन्नवर्गीयं पदं चिनुत
- संस्कृत व्याकरण: पूर्वकालिक क्रियाएँ
- संवादों में वक्ता और श्रोता की पहचान
- पाठ आधारित प्रश्नोत्तर
- नैतिक शिक्षा: ज्ञान प्राप्ति के सही साधन
Important topics
- पाठ 'सिकतासेतुः' का मुख्य संदेश और शिक्षा
- सर्वनामपदानि कस्मै प्रयुक्तानि (प्रश्न 4 क)
- कथनानि कः कं प्रति कथयति (प्रश्न 4 ख)
- भिन्नवर्गीयं पदं चिनुत (प्रश्न 3)
- विस्तृत प्रश्नोत्तर (प्रश्न 2)
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Questions and Solutions
प्रश्न 1. एकपदेन उत्तरं लिखत
- (क) कः बाल्ये विद्यां न अधीतवान्? (किसने बचपन में विद्या प्राप्त नहीं की?)
- (ख) तपोदत्तः कया विद्याम् अवाप्तुं प्रवृत्तः अस्ति? (तपोदत्त किसके द्वारा विद्या प्राप्त करने के लिए प्रवृत्त हुआ?)
- (ग) मकरालये कः शिलाभिः सेतुं बबन्धे? (मगरमच्छों के स्थान पर किसने पत्थरों से पुल बाँधा?)
- (घ) मार्गभ्रान्तः सन्ध्यां कुत्र उपैति? (रास्ता भटक जाने वाला संध्या के समय कहाँ पहुँचता है?)
- (ङ) पुरुषः सिकताभिः किं करोति? (पुरुष रेत से क्या करता है?)
पाठ के आधार पर, इन प्रश्नों के एक-शब्द उत्तर निम्नलिखित हैं:
- (क) तपोदत्तः (तपोदत्त ने बचपन में विद्या प्राप्त नहीं की थी।)
- (ख) तपसा/तपस्यया/तपोभिः (तपोदत्त तपस्या या कठिन परिश्रम के द्वारा विद्या प्राप्त करने के लिए प्रवृत्त हुआ।)
- (ग) श्रीरामः (श्रीराम ने पत्थरों से पुल बाँधा था, यह एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।)
- (घ) गृहम् (रास्ता भटक जाने वाला व्यक्ति संध्या के समय घर पहुँचता है।)
- (ङ) सेतुनिर्माणम् (वह पुरुष रेत से पुल बनाने का कार्य कर रहा था।)
प्रश्न 2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत
- (क) अनधीतः तपोदत्तः कैः गर्हितोऽभवत? (विद्या प्राप्त न करने वाला तपोदत्त किसके द्वारा निन्दित हुआ?)
- (ख) तपोदत्तः केन प्रकारेण विद्यामवाप्तुं प्रवृत्तोऽभवत्? (तपोदत्त किस प्रकार विद्या प्राप्त करने के लिए प्रवृत्त हुआ?)
- (ग) तपोदत्तः पुरुषस्य कां चेष्टां दष्ट्वा अहसत्? (तपोदत्त ने पुरुष के किस प्रयास को देखकर हँसी की?)
- (घ) तपोमात्रेण विद्यां प्राप्तुं तस्य प्रयासः कीदृशः कथितः? (केवल तपस्या से विद्या प्राप्त करने के उसके प्रयास को कैसा कहा गया है?)
- (ङ) अन्ते तपोदत्तः विद्याग्रहणाय कुत्र गतः? (अंत में तपोदत्त विद्या ग्रहण करने के लिए कहाँ गया?)
पाठ के आधार पर इन प्रश्नों के विस्तृत उत्तर संस्कृत में इस प्रकार हैं:
- (क) अनधीतः तपोदत्तः सर्वैः कुटुम्बिभिः मित्रैः ज्ञातिजनैः च गर्हितः अभवत्। (विद्या प्राप्त न करने वाला तपोदत्त अपने सभी कुटुम्बियों, मित्रों और संबंधियों द्वारा निन्दित हुआ।)
- (ख) नरः केवलं परिधानैः अलङ्कारैः च भूषितः अपि विद्यां विना कुत्रापि न शोभते इति विचार्य सर्वैः निन्दितः अनधीतः तपोदत्तः विद्याम् अवाप्तुम् प्रवृतः अभवत्। (यह विचार करते हुए कि केवल वस्त्रों और आभूषणों से सुशोभित होने पर भी मनुष्य विद्या के बिना कहीं भी शोभा नहीं पाता, सभी द्वारा निन्दित होने पर, विद्या प्राप्त न करने वाला तपोदत्त विद्या प्राप्त करने के लिए प्रवृत्त हुआ।)
- (ग) सिकताभिः सेतुनिर्माण-प्रयासं कुर्वाणं पुरुषं दृष्ट्रा तपोदत्तः अहसत्। (तपोदत्त ने रेत से पुल बनाने का प्रयास कर रहे पुरुष को देखकर हँसी की।)
- (घ) तपोमात्रेण विद्यां प्राप्तुं तस्य प्रयासः सिकताभिः एव सेतुनिर्माण-प्रयासः कथितः। (केवल तपस्या से विद्या प्राप्त करने के उसके प्रयास को रेत से ही पुल बनाने के प्रयास के समान कहा गया है, जो कि असंभव है।)
- (ङ) अन्ते तपोदत्तः विद्याग्रहणाय गुरुकुलम् गतः। (अंत में, तपोदत्त विद्या ग्रहण करने के लिए गुरुकुल गया।)
प्रश्न 3. भिन्नवर्गीयं पदं चिनुत
- (क) निःश्वस्य, चिन्तय, विमृश्य, उपेत्य।
- (ख) विश्वसिमि, पश्यामि, करिष्यामि, अभिलषामि।
- (ग) तपोभिः, दुर्बुद्धिः, सिकताभिः, कुटुम्बिभिः।
दिए गए शब्दों के समूह में से भिन्न वर्ग के पद का चयन इस प्रकार है:
- (क) चिन्तय। (यहाँ 'चिन्तय' एक अव्यय है, जबकि 'निःश्वस्य', 'विमृश्य', और 'उपेत्य' ल्यप् प्रत्यय से बने पूर्वकालिक क्रियाएँ हैं।)
- (ख) करिष्यामि। (यहाँ 'करिष्यामि' उत्तम पुरुष, भविष्यत् काल की क्रिया है, जबकि 'विश्वसिमि', 'पश्यामि', और 'अभिलषामि' वर्तमान काल की उत्तम पुरुष की क्रियाएँ हैं।)
- (ग) दुर्बुद्धिः। (यहाँ 'दुर्बुद्धिः' एक विशेषण या संज्ञा है, जबकि 'तपोभिः', 'सिकताभिः', और 'कुटुम्बिभिः' सभी तृतीया विभक्ति बहुवचन के शब्द हैं जो साधन या समूह को दर्शाते हैं।)
प्रश्न 4. (क) रेखाङ्कितानि सर्वनामपदानि कस्मै प्रयुक्तानि?
- अलमलं तव श्रमेण।
- न अहं सोपानमा रट्टमधिरोढुं विश्वसिमि।
- चिन्तितं भवता न वा।
- गुरुगृहं गत्वैव विद्याभ्यासो मया करणीयः।
- भवद्भिः उन्मीलितं मे नयनयुगलम्।
पाठ के संदर्भ के अनुसार, इन वाक्यों में रेखांकित सर्वनाम पद निम्नलिखित के लिए प्रयुक्त हुए हैं:
- तव (तुम्हारे) - पुरुषाय (उस पुरुष के लिए)
- अहं (मैं) - पुरुषाय (उस पुरुष के लिए)
- भवता (आपके द्वारा) - पुरुषाय (उस पुरुष के लिए)
- मया (मेरे द्वारा) - तपोदत्ताय (तपोदत्त के लिए)
- मे (मेरी) - तपोदत्ताय (तपोदत्त के लिए)
प्रश्न 4. (ख) अधोलिखितानि कथनानि कः कं प्रति कथयति?
कथनानि (कथन):
- हा विधे! किमिदं मया कृतम्? (हाय विधाता! यह मुझसे क्या हो गया?)
- भो महाशय! किमिदं विधीयते। (हे महाशय! यह क्या किया जा रहा है?)
- भोस्तपस्विन्! कथं माम् अवरोधं करोषि। (हे तपस्वी! तुम मुझे क्यों रोक रहे हो?)
- सिकताः जलप्रवाहे स्थास्यन्ति किम्? (क्या रेत जल के प्रवाह में टिकेगी?)
- नाहं जाने कोऽस्ति भवान्? (मैं नहीं जानता कि आप कौन हैं?)
पाठ में दिए गए संवादों के अनुसार, इन कथनों को कहने वाले और सुनने वाले इस प्रकार हैं:
कः — कम् (कौन — किसको)
- तपोदत्तः — विधिम् (तपोदत्त विधि या विधाता से कह रहा है।)
- तपोदत्तः — पुरुषम् (तपोदत्त उस पुरुष से कह रहा है।)
- पुरुषः — तपोदत्तम् (पुरुष तपोदत्त से कह रहा है।)
- तपोदत्तः — पुरुषम् (तपोदत्त उस पुरुष से कह रहा है।)
- तपोदत्तः — पुरुषम् (तपोदत्त उस पुरुष से कह रहा है।)
Common mistakes
- सर्वनामों का प्रयोग किसके लिए किया गया है, इसे गलत पहचानना।
- संवादों में वक्ता और श्रोता को भ्रमित करना।
- भिन्नवर्गीयं पदं चिनुत अभ्यास में गलत शब्द का चयन करना।
- पाठ के मुख्य संदेश को सतही तौर पर समझना।
Revision tips
- पाठ को ध्यान से पढ़ें और मुख्य पात्रों तथा उनकी क्रियाओं को समझें।
- सभी प्रश्नों के उत्तरों को अच्छी तरह से याद करें, विशेषकर विस्तृत उत्तरों को।
- व्याकरणिक अभ्यासों (जैसे सर्वनाम और भिन्नवर्गीयं पदं चिनुत) का बार-बार अभ्यास करें।
- संवादों में वक्ता और श्रोता की पहचान करने का अभ्यास करें, यह परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
- पाठ से मिलने वाली सीख (जैसे असंभव कार्य का प्रयास न करना) पर विचार करें।
Practice MCQs
Q1. तपोदत्त ने बचपन में विद्या प्राप्त क्यों नहीं की?
Explanation: पाठ के अनुसार, तपोदत्त ने बचपन में विद्या प्राप्त नहीं की थी, जिसके कारण उसे बाद में पछताना पड़ा।
Q2. तपोदत्त विद्या प्राप्त करने के लिए किस असंभव कार्य का अनुकरण कर रहा था?
Explanation: तपोदत्त ने देखा कि एक व्यक्ति रेत से पुल बनाने का असंभव कार्य कर रहा था, और उसने उसी तरह विद्या प्राप्त करने का प्रयास किया।
Q3. पुरुष ने रेत से पुल बनाने का प्रयास क्यों किया?
Explanation: पुरुष रेत से पुल बनाने का असंभव कार्य करके तपोदत्त को यह समझाना चाहता था कि केवल तपस्या या असंभव प्रयासों से विद्या प्राप्त नहीं की जा सकती।
Q4. प्रश्न 3 (क) में 'भिन्नवर्गीयं पदं चिनुत' के अनुसार कौन सा शब्द भिन्न है?
Explanation: 'चिन्तय' एक अव्यय है, जबकि 'निःश्वस्य', 'विमृश्य', और 'उपेत्य' सभी ल्यप् प्रत्यय वाले पूर्वकालिक क्रियाएँ हैं।
Q5. प्रश्न 4 (ख) के अनुसार, 'सिकताः जलप्रवाहे स्थास्यन्ति किम्?' यह कथन किसने कहा?
Explanation: यह कथन तपोदत्त ने पुरुष से कहा था, जब वह रेत से पुल बनाने के उसके असंभव प्रयास को देख रहा था, यह पूछते हुए कि क्या रेत पानी के बहाव में टिकेगी।
Frequently asked questions
कक्षा 9 संस्कृत शेमुषी के अध्याय 9 का क्या नाम है?
कक्षा 9 संस्कृत शेमुषी के अध्याय 9 का नाम 'सिकतासेतुः' है।
'सिकतासेतुः' पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
इस पाठ का मुख्य संदेश यह है कि विद्या प्राप्त करने के लिए सही साधनों और प्रयासों की आवश्यकता होती है, न कि केवल असंभव या व्यर्थ के कार्यों से। यह पाठ हमें सिखाता है कि हमें अपनी मूर्खता को पहचानना चाहिए और ज्ञान प्राप्ति के लिए उचित मार्ग अपनाना चाहिए।
NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?
ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं, सभी अभ्यास प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट रूप से समझाते हैं, और व्याकरणिक अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं, जिससे वे परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों का सामना करने के लिए तैयार होते हैं।
प्रश्न 4 (क) में सर्वनामों का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
प्रश्न 4 (क) में दिए गए वाक्यों में रेखांकित सर्वनाम पद मुख्य रूप से पुरुष (रेत से पुल बनाने वाला) और तपोदत्त के लिए प्रयुक्त हुए हैं, जो पाठ के संदर्भ पर आधारित है।
प्रश्न 3 में 'भिन्नवर्गीयं पदं चिनुत' का क्या अर्थ है?
'भिन्नवर्गीयं पदं चिनुत' का अर्थ है 'भिन्न वर्ग का पद चुनें'। इसमें दिए गए शब्दों के समूह में से उस शब्द को चुनना होता है जो व्याकरणिक रूप से या अर्थ की दृष्टि से अन्य शब्दों से भिन्न हो।
क्या ये समाधान पाठ के सभी अभ्यासों को कवर करते हैं?
हाँ, ये समाधान पाठ के सभी अभ्यासों, जिनमें एक-शब्द उत्तर, विस्तृत प्रश्नोत्तर, व्याकरणिक अभ्यास और संवाद आधारित प्रश्न शामिल हैं, को कवर करते हैं।
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