कक्षा 9 संस्कृत शेमुषी: अध्याय 10 जटायु शौर्यम NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 संस्कृत शेमुषी पाठ्यपुस्तक के अध्याय 10, 'जटायु शौर्यम' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। यह अध्याय महान पक्षी जटायु के वीर कार्यों और रावण के विरुद्ध उसके साहस पर केंद्रित है, जब उसने सीता को बचाने का प्रयास किया था। समाधानों में पाठ के विभिन्न अभ्यासों को शामिल किया गया है, जिसमें एक-शब्द उत्तर, पूर्ण वाक्य उत्तर, प्रत्यय-आधारित शब्द निर्माण और विशेषणों का पृथक्करण शामिल है। ये समाधान छात्रों को जटायु के चरित्र, उसकी वीरता और संस्कृत भाषा की बारीकियों को समझने में मदद करते हैं। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से दिया गया है, जिससे छात्रों को परीक्षा की तैयारी में सहायता मिलती है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | Shemushi |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 10 |
Chapter summary
कक्षा 9 संस्कृत शेमुषी के अध्याय 10, 'जटायु शौर्यम' के ये NCERT समाधान छात्रों को जटायु की वीरता और रावण के विरुद्ध उसके संघर्ष की कहानी को समझने में मदद करते हैं। समाधानों में एक-शब्द उत्तर, विस्तृत प्रश्नोत्तर, णिनि-प्रत्यय का प्रयोग करके शब्द निर्माण, और रावण व जटायु के विशेषणों को अलग करना सिखाया गया है। यह अध्याय संस्कृत भाषा के माध्यम से वीरता और कर्तव्यनिष्ठा के मूल्यों को उजागर करता है।
Learning outcomes
- जटायु और रावण के बीच हुए युद्ध के प्रसंग को समझना।
- संस्कृत में एक-शब्द और पूर्ण-वाक्य उत्तर देने का अभ्यास करना।
- णिनि-प्रत्यय का प्रयोग करके संज्ञा शब्दों का निर्माण सीखना।
- संज्ञाओं के लिए प्रयुक्त विशेषणों को पहचानना और अलग करना।
- पाठ के माध्यम से संस्कृत शब्दावली और व्याकरण को समझना।
Topics covered
Paper topics
- जटायु का शौर्य
- सीता हरण का प्रसंग
- रावण का जटायु से युद्ध
- संस्कृत व्याकरण: णिनि प्रत्यय
- विशेषण और विशेष्य
- शब्द निर्माण
- संस्कृत पाठ विश्लेषण
- कक्षा 9 संस्कृत शेमुषी
Important topics
- जटायु का शौर्य और पराक्रम
- णिनि प्रत्यय का प्रयोग
- विशेषणों का पृथक्करण
- सीता हरण का प्रसंग
- संस्कृत में उत्तर लेखन
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Questions and Solutions
प्रश्न 1. एकपदेन उत्तरं लिखत
- (क) आयतलोचना का अस्ति?
- (ख) सा कं ददर्श?
- (ग) खगोत्तमः कीदृशीं गिरं व्याजहार?
- (घ) जटायुः काभ्यां रावणस्य गात्रे व्रणं चकार?
- (ङ) अरिन्दमः खगाधिपः कति बाहून् व्यपाहरत्?
यहाँ एक-शब्द में उत्तर दिए गए हैं:
- (क) सीता
- (ख) जटायुम् (या गृध्रम्)
- (ग) शुभाम्
- (घ) तीक्ष्णनखाभ्याम्
- (ङ) दश
प्रश्न 2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत
- (क) "जटायो! पश्य" इति का वदति?
- (ख) जटायुः रावणं किं कथयति?
- (ग) क्रोधवंशात् रावणः किं कर्तुम् उद्यतः अभवत्?
- (घ) पतगेश्वरः रावणस्य कीदृशं चापं सशरं बभञ्ज?
- (ङ) जटायुः केन वामबाहु दंशति?
- (क) "जटायो! पश्य" इति वैदेही (अर्थात् सीता) वदति।
- (ख) जटायुः रावण को समझाते हुए कहता है कि हे वीर, पराई स्त्री को स्पर्श करने जैसे नीच कर्म से दूर रहो और ऐसा कोई कार्य मत करो जिससे तुम्हारा विनाश हो।
- (ग) क्रोध के वशीभूत होकर रावण ने वैदेही (सीता) को अपनी बाईं बाँह से पकड़ लिया और जटायु पर अपने हाथ से शीघ्रता से प्रहार किया।
- (घ) पक्षियों के राजा (पतगेश्वर) ने रावण के उस धनुष को तोड़ दिया जो मोतियों से सुशोभित था और जिसमें बाण लगे थे।
- (ङ) जटायु अपनी चोंच से रावण की बाईं बाँह को काटता है।
प्रश्न 3. उदाहरणमनुसृत्य णिनि-प्रत्ययप्रयोगं कृत्वा पदानि रचयत
उदाहरण: गुण + णिनि — गुणिन् (गुणी)
उदाहरण: दान + णिनि — दानिन् (दानी)
- (क) कवच + णिनि — .....
- (ख) शर + णिनि — .....
- (ग) कुशल + णिनि — .....
- (घ) धन + णिनि — .....
- (ङ) दण्ड + णिनि — .....
'णिनि' प्रत्यय का प्रयोग करके निम्नलिखित शब्द बनते हैं, जिनका अर्थ 'वाला' या 'युक्त' होता है:
- (क) कवच + णिनि — कवचिन् (कवची) - कवच धारण करने वाला
- (ख) शर + णिनि — शरिन् (शरी) - बाण धारण करने वाला या बाण चलाने वाला
- (ग) कुशल + णिनि — कुशलिन् (कुशली) - कुशल या निपुण
- (घ) धन + णिनि — धनिन् (धनी) - धनवान
- (ङ) दण्ड + णिनि — दण्डिन् (दण्डी) - दण्ड धारण करने वाला या दण्ड देने वाला
प्रश्न 4. (अ) रावणस्य जटायोश्च विशेषणानि सम्मिलितरूपेण लिखितानि तानि पृथक्-पृथक् कृत्वा लिखत
दिए गए विशेषण: युवा, सशरः, वृद्धः, हताश्वः, महाबलः, पतगसत्तमः, भग्नधन्वा, महागृधः, खगाधिपः, क्रोधमूच्छितः, पतगेश्वरः, सरथः, कवची, शरी
उदाहरण: रावणः — जटायुः
उदाहरण: युवा — वृद्धः
दिए गए विशेषणों को रावण और जटायु के लिए अलग-अलग करके इस प्रकार लिखा जा सकता है:
रावण: युवा, सरथः, महाबलः, हताश्वः, क्रोधमूच्छितः, सशरः, कवची, शरी
जटायुः: वृद्धः, पतगसत्तमः, भग्नधन्वा, महागृधः, खगाधिपः, पतगेश्वरः
Common mistakes
- प्रश्नों के उत्तर लिखते समय व्याकरण संबंधी त्रुटियाँ करना।
- विशेषणों को उनके संबंधित संज्ञाओं से गलत मिलाना।
- प्रत्यय-आधारित शब्द निर्माण में गलती करना।
- पाठ के पात्रों और घटनाओं के बारे में भ्रमित होना।
Revision tips
- जटायु के शौर्य और सीता के अपहरण की कहानी को फिर से पढ़ें।
- अभ्यास में दिए गए सभी प्रश्नों के उत्तरों को स्वयं लिखने का प्रयास करें।
- णिनि-प्रत्यय के प्रयोग के नियमों को समझें और अन्य शब्दों पर लागू करें।
- रावण और जटायु के विशेषणों की सूची बनाएं और उनके अर्थ समझें।
Practice MCQs
Q1. प्रश्न 1: 'आयतलोचना' किसे कहा गया है?
Explanation: पाठ के अनुसार, 'आयतलोचना' सीता को कहा गया है, जो रावण द्वारा हर ली गई थीं।
Q2. प्रश्न 2: जटायु ने रावण के कितने बाहुओं को काटा?
Explanation: समाधान के अनुसार, जटायु ने रावण की दस भुजाओं को काटा था।
Q3. प्रश्न 3: 'णिनि' प्रत्यय का प्रयोग करके 'कवच' शब्द से क्या बनता है?
Explanation: णिनि प्रत्यय के प्रयोग से 'कवच' शब्द 'कवचिन्' (कवची) बनता है, जिसका अर्थ है कवच धारण करने वाला।
Q4. प्रश्न 4: रावण के किस गुण का वर्णन 'युवा' विशेषण से किया गया है?
Explanation: पाठ में रावण के लिए 'युवा' विशेषण का प्रयोग उसकी युवावस्था को दर्शाने के लिए किया गया है, जबकि जटायु के लिए 'वृद्धः' (बूढ़ा) विशेषण है।
Q5. प्रश्न 5: जटायु ने रावण के किस अंग से प्रहार किया?
Explanation: समाधान के अनुसार, जटायु ने अपनी चोंच (तुण्डेन) से रावण की बाईं बाँह को काटा।
Frequently asked questions
यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह समाधान कक्षा 9 के लिए संस्कृत शेमुषी पाठ्यपुस्तक के अध्याय 10 'जटायु शौर्यम' के लिए है।
'जटायु शौर्यम' अध्याय का मुख्य विषय क्या है?
यह अध्याय महान पक्षी जटायु द्वारा सीता को रावण से बचाने के लिए किए गए वीर संघर्ष और उसके शौर्य का वर्णन करता है।
समाधान में किस प्रकार के अभ्यास शामिल हैं?
समाधान में एक-शब्द उत्तर, पूर्ण वाक्य उत्तर, णिनि-प्रत्यय का प्रयोग करके शब्द निर्माण, और रावण व जटायु के विशेषणों को अलग करने जैसे अभ्यास शामिल हैं।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं और व्याकरण अभ्यासों के माध्यम से छात्रों को परीक्षा के लिए बेहतर ढंग से तैयार करने में मदद करते हैं।
णिनि-प्रत्यय का क्या कार्य है?
णिनि-प्रत्यय का प्रयोग संज्ञा शब्दों के साथ किया जाता है ताकि 'वाला' या 'युक्त' का अर्थ दिया जा सके, जैसे 'गुण' से 'गुणी' (गुण वाला)।
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