कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 10: किशोरावस्था की ओर NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 8 विज्ञान के अध्याय 10, 'किशोरावस्था की ओर' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें किशोरावस्था की परिभाषा, यौवनारंभ के दौरान होने वाले महत्वपूर्ण शारीरिक और जनन संबंधी परिवर्तन, अंतःस्रावी ग्रंथियों और हार्मोन की भूमिका, गौण लैंगिक लक्षण, ऋतुस्राव की प्रक्रिया और मनुष्य में लिंग निर्धारण जैसे विषयों को शामिल किया गया है। समाधानों को स्पष्ट और समझने योग्य तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जिससे छात्रों को इन जटिल अवधारणाओं को आसानी से समझने में मदद मिलेगी। यह विस्तृत समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी और विषय की गहरी समझ विकसित करने में सहायक होंगे।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 8
Subjectविज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter10. किशोरावस्था की ओर

Chapter summary

कक्षा 8 विज्ञान के अध्याय 10 'किशोरावस्था की ओर' के ये NCERT समाधान किशोरावस्था की शुरुआत, यौवनारंभ के शारीरिक परिवर्तनों, अंतःस्रावी ग्रंथियों और हार्मोन की भूमिका पर केंद्रित हैं। इसमें गौण लैंगिक लक्षणों, ऋतुस्राव की प्रक्रिया और लिंग निर्धारण जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी शामिल किया गया है। ये समाधान छात्रों को इन अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से समझने में मदद करते हैं।

Learning outcomes

  • किशोरावस्था की परिभाषा को समझना।
  • यौवनारंभ के दौरान होने वाले शारीरिक परिवर्तनों की पहचान करना।
  • अंतःस्रावी ग्रंथियों और हार्मोन के कार्यों का वर्णन करना।
  • गौण लैंगिक लक्षणों को परिभाषित करना।
  • ऋतुस्राव की प्रक्रिया को समझना।
  • मनुष्यों में लिंग निर्धारण की प्रक्रिया को समझाना।

Topics covered

Paper topics

  • किशोरावस्था
  • यौवनारंभ
  • शारीरिक परिवर्तन
  • अंतःस्रावी ग्रंथियाँ
  • हार्मोन
  • गौण लैंगिक लक्षण
  • ऋतुस्राव
  • लिंग निर्धारण
  • नर हार्मोन
  • मादा हार्मोन
  • जनन क्षमता
  • तैलिय ग्रंथियाँ

Important topics

  • किशोरावस्था और यौवनारंभ
  • अंतःस्रावी ग्रंथियाँ और हार्मोन
  • गौण लैंगिक लक्षण
  • ऋतुस्राव की प्रक्रिया
  • मनुष्यों में लिंग निर्धारण

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

किशोरावस्था किसे कहते है ?
Solution: किशोरावस्था जीवन काल की वह प्राकृतिक अवस्था है जब शरीर में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति जनन रूप से परिपक्व हो जाता है। यह अवस्था बचपन और वयस्कता के बीच की संक्रमणकालीन अवधि होती है।

प्रश्न 2

यौवनारंभ का सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन क्या है ?
Solution: यौवनारंभ का सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन लड़के एवं लड़कियों में जनन क्षमता का विकास होना है। इस चरण में जननांग परिपक्व होते हैं और प्रजनन के लिए सक्षम हो जाते हैं।

प्रश्न 3

यौवनारंभ की दिखाई देने वाली सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन क्या है ?
Solution: यौवनारंभ के दौरान होने वाला सबसे स्पष्ट और दिखाई देने वाला परिवर्तन व्यक्ति की लंबाई में एकाएक वृद्धि है। इस अवधि में बच्चे तेजी से बढ़ते हैं।

प्रश्न 4

अंतःस्रावी ग्रंथियों को नलिकाविहीन ग्रंथियाँ क्यों कहते है ?
Solution: अंतःस्रावी ग्रंथियों को नलिका-विहीन ग्रंथियाँ इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे अपने द्वारा स्रावित हार्मोन को किसी नलिका के माध्यम से बाहर निकालने के बजाय सीधे रक्त प्रवाह में निर्मोचित करती हैं।

प्रश्न 5

किशोरावस्था में व्यक्तियों के चेहरे पर फुन्सियाँ और मुँहासे अधिक क्यों आते है ?
Solution: किशोरावस्था के दौरान, शरीर में हार्मोनल परिवर्तन के कारण तैलिय ग्रंथियाँ (sebaceous glands) अधिक सक्रिय हो जाती हैं। इन ग्रंथियों से अधिक मात्रा में तेल (सीबम) का स्राव होता है, जो त्वचा के छिद्रों को बंद कर सकता है और फुन्सियों व मुँहासों का कारण बन सकता है।

प्रश्न 6

गौंड लैंगिक लक्षण क्या है ?
Solution: गौण लैंगिक लक्षण वे शारीरिक विशेषताएँ हैं जो यौवनारंभ के दौरान विकसित होती हैं और पुरुषों तथा महिलाओं को पहचानने में मदद करती हैं, लेकिन सीधे प्रजनन से संबंधित नहीं होतीं। उदाहरण के लिए, लड़कों में आवाज का भारी होना और चेहरे पर दाढ़ी-मूंछ का उगना, तथा लड़कियों में स्तनों का विकास होना गौण लैंगिक लक्षण हैं। ये लक्षण प्राथमिक जननांगों (वृषण और अंडाशय) के विकास के साथ-साथ प्रकट होते हैं।

प्रश्न 7

किशोर तथा किशोरियों में यौवनारंभ के समय कौन कौन से शारीरिक परिवर्तन होते है ?
Solution: किशोरों और किशोरियों में यौवनारंभ के समय निम्नलिखित प्रमुख शारीरिक परिवर्तन होते हैं:
  1. लंबाई में वृद्धि: शरीर की ऊंचाई तेजी से बढ़ती है।
  2. शारीरिक आकृति में परिवर्तन: लड़कों में कंधे चौड़े होते हैं और मांसपेशियों का विकास होता है, जबकि लड़कियों में कूल्हे चौड़े होते हैं।
  3. स्वर में परिवर्तन: लड़कों की आवाज भारी हो जाती है (कंठमणि का विकास)।
  4. स्वेद एवं तैलग्रेथियों की क्रियाशीलता में वृद्धि: पसीने और तेल ग्रंथियाँ अधिक सक्रिय हो जाती हैं, जिससे शरीर गंध और मुँहासे की समस्या हो सकती है।
  5. जनन अंगों का विकास: वृषण और लिंग का आकार बढ़ता है, और अंडाशय, गर्भाशय और योनि का विकास होता है।
  6. मानसिक, बौद्धिक एवं संवेदनात्मक परिपक्वता: सोचने, समझने और भावनाओं को नियंत्रित करने की क्षमता विकसित होती है।
  7. गौण लैंगिक लक्षण: लड़कों में दाढ़ी-मूंछ आना और लड़कियों में स्तनों का विकास होना।

प्रश्न 8

शरीर में होने वाले परिवर्तनों के लिए उतरदायी अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्नावित पदार्थ का क्या नाम है?
Solution: शरीर में होने वाले परिवर्तनों के लिए उत्तरदायी अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित पदार्थ का नाम 'हार्मोन' है। ये रासायनिक संदेशवाहक होते हैं जो शरीर के विभिन्न कार्यों को नियंत्रित करते हैं।

प्रश्न 9

ऋतुस्राव क्या है? वर्णन कीजिए।
Solution: ऋतुस्राव, जिसे मासिक धर्म या रजोधर्म भी कहते हैं, एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है जो महिलाओं में होती है। जब अंडाशय से निकला अंडाणु शुक्राणु द्वारा निषेचित नहीं हो पाता है, तो गर्भाशय की दीवार, जो गर्भावस्था के लिए तैयार होती है, टूट जाती है। इस टूटी हुई दीवार के ऊतक और रक्त योनि मार्ग से लगभग 28 से 30 दिनों के चक्र में बाहर निकल जाते हैं। यह चक्र आमतौर पर 10-12 वर्ष की आयु में शुरू होता है और 40-45 वर्ष की आयु तक जारी रहता है।

प्रश्न 10

लिंग हार्मोन क्या हैं? उनका नामकरण इस प्रकार क्यों किया गया? उनके प्रकार्य बताइए।
Solution: लिंग हार्मोन वे हार्मोन हैं जो वृषण (पुरुषों में) और अंडाशय (महिलाओं में) द्वारा स्रावित होते हैं। इनका नामकरण 'लिंग हार्मोन' इसलिए किया गया है क्योंकि ये गौण लैंगिक लक्षणों के विकास और यौन परिपक्वता के लिए जिम्मेदार होते हैं, जो पुरुषों और महिलाओं को विशिष्ट बनाते हैं। ये हार्मोन पीयूष ग्रंथि (pituitary gland) द्वारा स्रावित हार्मोन द्वारा नियंत्रित होते हैं। इनके मुख्य प्रकार्य यौन अंगों का विकास, द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का प्रकटीकरण और प्रजनन क्षमता का विनियमन करना है।

प्रश्न 11

लिंग गुणसूत्र किसे कहते है ?
Solution: लिंग गुणसूत्र वे गुणसूत्र होते हैं जो किसी जीव में लिंग का निर्धारण करते हैं। मनुष्यों में, ये गुणसूत्र X और Y होते हैं। एक सामान्य मनुष्य में 23 जोड़ी गुणसूत्र होते हैं, जिनमें से 22 जोड़ी ऑटोसोम होते हैं और एक जोड़ी लिंग गुणसूत्र होती है (XX मादा के लिए और XY नर के लिए)।

प्रश्न 12

एक नर हार्मोन का नाम बताइए ।
Solution: एक प्रमुख नर हार्मोन का नाम टेस्टोस्टेरॉन है। यह वृषण द्वारा स्रावित होता है और पुरुषों में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के विकास के लिए जिम्मेदार होता है।

प्रश्न 13

एक मादा हार्मोन का नाम बताइए।
Solution: एक प्रमुख मादा हार्मोन का नाम एस्ट्रोजन है। यह अंडाशय द्वारा स्रावित होता है और महिलाओं में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के विकास और मासिक धर्म चक्र के नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रश्न 14

किस ग्रंथि को मास्टर ग्रंथि कहते है ?
Solution: पीयूष ग्रंथि (Pituitary gland) को 'मास्टर ग्रंथि' कहा जाता है क्योंकि यह कई अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों के कार्यों को नियंत्रित करने वाले हार्मोन स्रावित करती है, जिससे यह शरीर के हार्मोनल संतुलन में एक केंद्रीय भूमिका निभाती है।

प्रश्न 15

लडकों में लैंगिक परिवर्तन के लिए उतरदायी हार्मोन का नाम लिखिए।
Solution: लड़कों में लैंगिक परिवर्तन के लिए मुख्य रूप से टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन उत्तरदायी होता है। यह हार्मोन यौवनारंभ के दौरान वृषण द्वारा स्रावित होता है और द्वितीयक लैंगिक लक्षणों जैसे आवाज का भारी होना, मांसपेशियों का विकास और जननांगों का परिपक्व होना सुनिश्चित करता है।

प्रश्न 16

लडिकयों में लैंगिक परिवर्तन के लिए उतरदायी हार्मोन का नाम लिखिए।
Solution: लड़कियों में लैंगिक परिवर्तन के लिए मुख्य रूप से एस्ट्रोजन हार्मोन उत्तरदायी होता है। यह हार्मोन अंडाशय द्वारा स्रावित होता है और यौवनारंभ के दौरान स्तनों का विकास, कूल्हों का चौड़ा होना और मासिक धर्म चक्र की शुरुआत जैसे परिवर्तनों के लिए जिम्मेदार है।

प्रश्न 17

स्त्रियों में जननकाल की अवधि कितने समय तक रहता है ?
Solution: स्त्रियों में जननकाल की अवधि आमतौर पर लगभग 10 से 12 वर्ष की आयु में शुरू होती है और लगभग 40 से 45 वर्ष की आयु तक रहती है। इस अवधि को 'रजोनिवृत्ति' (menopause) के साथ समाप्त माना जाता है, जब मासिक धर्म बंद हो जाता है।

प्रश्न 18

मनुष्य में लिंग निर्धारण कैसे होता है ?
Solution: मनुष्य में लिंग निर्धारण निषेचन के समय शुक्राणु द्वारा लाए गए लिंग गुणसूत्र पर निर्भर करता है। मादा के अंडाणु में हमेशा एक X गुणसूत्र होता है। यदि शुक्राणु X गुणसूत्र वाला है, तो बनने वाले युग्मनज में XX गुणसूत्र होंगे और वह मादा शिशु में विकसित होगा। यदि शुक्राणु Y गुणसूत्र वाला है, तो बनने वाले युग्मनज में XY गुणसूत्र होंगे और वह नर शिशु में विकसित होगा। इस प्रकार, पिता के शुक्राणु का लिंग गुणसूत्र शिशु के लिंग का निर्धारण करता है।

Common mistakes

  • अंतःस्रावी ग्रंथियों और बहिःस्रावी ग्रंथियों के बीच अंतर को समझने में भ्रम।
  • हार्मोन के कार्यों और उनके स्राव के स्रोतों को गलत बताना।
  • लिंग निर्धारण में माता-पिता की भूमिका को गलत समझना।
  • गौण लैंगिक लक्षणों को प्राथमिक लैंगिक लक्षणों के साथ भ्रमित करना।

Revision tips

  • प्रत्येक हार्मोन और उसके कार्य को सूचीबद्ध करें।
  • यौवनारंभ के दौरान होने वाले परिवर्तनों की एक तालिका बनाएं।
  • लिंग निर्धारण की प्रक्रिया को चित्र की सहायता से समझें।
  • ऋतुस्राव चक्र को समझने के लिए फ्लोचार्ट का उपयोग करें।

Practice MCQs

Q1. किशोरावस्था जीवन की वह अवधि है जब शरीर में ऐसे परिवर्तन होते हैं जिसके परिणामस्वरूप क्या आता है?

Q2. अंतःस्रावी ग्रंथियों को नलिका-विहीन ग्रंथियाँ क्यों कहा जाता है?

Q3. लड़कों में दाढ़ी-मूंछ का उगना और लड़कियों में स्तनों का विकास किस प्रकार के लक्षणों का उदाहरण है?

Q4. मनुष्य में लिंग निर्धारण के लिए कौन से गुणसूत्र जिम्मेदार होते हैं?

Q5. निम्नलिखित में से कौन सा एक मादा हार्मोन है?

Frequently asked questions

किशोरावस्था क्या है?

किशोरावस्था जीवन काल की वह अवधि है जब शरीर में ऐसे परिवर्तन होते हैं जिनके परिणामस्वरूप जनन परिपक्वता आती है।

यौवनारंभ के दौरान लंबाई में वृद्धि क्यों महत्वपूर्ण है?

लंबाई में एकाएक वृद्धि यौवनारम्भ के दौरान होने वाला सबसे अधिक दृष्टिगोचर परिवर्तन है, जो शारीरिक विकास का संकेत देता है।

अंतःस्रावी ग्रंथियाँ हार्मोन कैसे स्रावित करती हैं?

अंतःस्रावी ग्रंथियाँ हार्मोन को सीधे रक्त प्रवाह में स्रावित करती हैं, न कि किसी नलिका के माध्यम से।

गौण लैंगिक लक्षण क्या होते हैं?

गौण लैंगिक लक्षण वे शारीरिक विशेषताएँ हैं जो पुरुषों और महिलाओं को अलग करती हैं, जैसे लड़कों में दाढ़ी-मूंछ आना और लड़कियों में स्तनों का विकास।

ऋतुस्राव क्यों होता है?

जब अंडाणु का निषेचन नहीं हो पाता, तो गर्भाशय का मोटा स्तर और रक्त वाहिकाओं सहित निस्तारित हो जाता है, जिसे ऋतुस्राव कहते हैं।

मनुष्यों में शिशु का लिंग कैसे निर्धारित होता है?

मनुष्यों में लिंग निर्धारण लिंग गुणसूत्रों (X और Y) द्वारा होता है। यदि शुक्राणु X गुणसूत्र वाला है तो मादा शिशु और यदि Y गुणसूत्र वाला है तो नर शिशु विकसित होता है।

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