CBSE Class 8 Hindi NCERT Solutions: पाठ 3 - बस की यात्रा

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सीबीएसई कक्षा 8 हिंदी की पुस्तक 'बस की यात्रा' हरिशंकर परसाई द्वारा लिखित एक व्यंग्यात्मक पाठ है। यह पाठ स्वतंत्रता के बाद भारत में सार्वजनिक परिवहन, विशेषकर बसों की दयनीय स्थिति पर एक हास्यप्रद टिप्पणी प्रस्तुत करता है। लेखक अपनी बस यात्रा के दौरान के अनुभवों और हाजिरजवाबी भरे अवलोकनों को साझा करते हैं। प्रश्न-उत्तर के माध्यम से, विद्यार्थी बस की जर्जर हालत, मालिक की उदासीनता और यात्रियों की चिंता को समझेंगे। समाधान पाठ के गहरे व्यंग्य, लेखक की भावनाओं और 'सविनय अवज्ञा' जैसे प्रतीकात्मक भाषा के प्रयोग को स्पष्ट करते हैं। यह अध्याय नागरिक मुद्दों और विश्वसनीय सार्वजनिक सेवाओं के महत्व पर आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देता है। इन समाधानों का उद्देश्य छात्रों को पाठ को गहराई से समझने और जटिल विचारों को स्पष्ट करके परीक्षा की तैयारी प्रभावी ढंग से करने में मदद करना है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 8
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter3. बस की यात्रा - हरिशंकर परसाई

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 8 Hindi, Chapter 3 'Bas Ki Yatra' by Harishankar Parsai, focuses on a satirical narrative about a bus journey. The solutions cover questions related to the author's observations on the bus's poor condition, the owner's perspective, and the passengers' fear. It also touches upon the historical context of the 'Savinyay Avagya Andolan' and its symbolic use in the story. The exercises aim to enhance comprehension and analytical skills regarding satire and social commentary.

Learning outcomes

  • Understand the satirical tone and humor in Harishankar Parsai's writing.
  • Analyze the social commentary on public transport and civic issues.
  • Explain the author's feelings and reactions during the bus journey.
  • Identify and interpret the symbolic meaning of 'Savinyay Avagya' in the context of the story.
  • Differentiate between the various meanings of the word 'बस' and its related forms.

Topics covered

Paper topics

  • Satire and Humor
  • Public Transport Issues
  • Author's Observations
  • Symbolic Language
  • Historical Context (Savinyay Avagya Andolan)
  • Word Meanings and Usage
  • Character Analysis (Owner, Passengers)
  • Narrative Style

Important topics

  • Understanding Satire in 'Bas Ki Yatra'
  • The Condition of Public Buses
  • Symbolic Meaning of 'Savinyay Avagya'
  • Author's Feelings and Reactions
  • Vocabulary: 'बस', 'वश', 'बस'

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Questions and Solutions

कारण बताएँ 1

"मैंने उस कंपनी के हिस्सेदार की तरफ़ पहली बार श्रद्धाभाव से देखा।" लेखक के मन में हिस्सेदार साहब के लिए श्रद्धा क्यों जग गई?

लेखक के मन में बस कंपनी के हिस्सेदार के प्रति श्रद्धा का भाव इसलिए उत्पन्न हुआ क्योंकि हिस्सेदार अपनी पुरानी, जर्जर बस की टायर की स्थिति से भली-भाँति परिचित होने के बावजूद उसे चलाने का साहस कर रहा था। लेखक को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि अर्थ-मोह (पैसों का लालच) के कारण कोई व्यक्ति अपनी जान जोखिम में डालने को भी तैयार है। इस प्रकार के आत्म-बलिदान की भावना को देखकर लेखक को लगा कि ऐसे व्यक्ति को किसी क्रांतिकारी आंदोलन का नेता होना चाहिए, और इसी विचार से उनके मन में हिस्सेदार के प्रति श्रद्धा जागृत हुई।

कारण बताएँ 2

"लोगों ने सलाह दी कि समझदार आदमी इस शाम वाली बस से सफ़र नहीं करते।" लोगों ने यह सलाह क्यों दी?

लोगों ने लेखक और अन्य यात्रियों को शाम वाली बस से यात्रा न करने की सलाह इसलिए दी क्योंकि वे बस की अत्यंत खस्ता हालत से परिचित थे। उन्हें पता था कि बस कभी भी, कहीं भी खराब हो सकती है और उसके ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं है। शाम ढलने के बाद रात हो जाती है, और ऐसे में बस के रास्ते में कहीं भी रुक जाने का मतलब था कि यात्रियों को रात वहीं बितानी पड़ती, जो असुरक्षित हो सकता था। इसलिए, समझदार लोग ऐसी अनिश्चित और खतरनाक यात्रा से बचते थे।

कारण बताएँ 3

"ऐसा जैसे सारी बस ही इंजन है और हम इंजन के भीतर बैठे हैं।" लेखक को ऐसा क्यों लगा?

जब बस के चालक ने इंजन स्टार्ट किया, तो इंजन से सामान्य कंपन होने के बजाय पूरी बस ही बुरी तरह से झनझनाने लगी और कांपने लगी। यह कंपन इतना तीव्र था कि लेखक को ऐसा महसूस हुआ मानो वह बस के अंदर न बैठकर स्वयं इंजन के अंदर ही बैठा हो। इंजन के पुर्जों की तरह पूरी बस ही हिल रही थी, और खिड़की के शीशे भी शोर के साथ कांप रहे थे। इसी तीव्र कंपन और शोर के कारण लेखक ने यह उपमा दी।

कारण बताएँ 4

"गज़ब हो गया। ऐसी बस अपने आप चलती है।" लेखक को यह सुनकर हैरानी क्यों हुई?

लेखक को यह सुनकर हैरानी हुई क्योंकि उन्होंने बस की हालत देखकर यह अनुमान लगा लिया था कि वह शायद चलती भी नहीं होगी। बस की जर्जर अवस्था, टूटे-फूटे पुर्जे और इंजन की आवाज़ से ऐसा लग रहा था कि वह चलने में असमर्थ है। जब उन्होंने बस के हिस्सेदार से पूछा कि क्या यह बस चलती भी है, तो हिस्सेदार ने गर्व से कहा कि यह चलती ही नहीं, बल्कि 'अपने आप चलती है'। इस बात से लेखक को आश्चर्य हुआ कि इतनी खस्ताहाल बस भी स्वतः चल सकती है, जो उनकी अपेक्षा के विपरीत था।

कारण बताएँ 5

"मैं हर पेड़ को अपना दुश्मन समझ रहा था।" लेखक पेड़ों को अपना दुश्मन क्यों समझ रहा था?

लेखक पेड़ों को अपना दुश्मन इसलिए समझ रहा था क्योंकि बस की जर्जर हालत के कारण उन्हें लगातार यह डर सता रहा था कि कहीं बस का स्टीयरिंग फेल न हो जाए या ब्रेक काम करना बंद न कर दे। ऐसी स्थिति में बस अनियंत्रित होकर सड़क के किनारे लगे पेड़ों से टकरा सकती थी। हर पेड़ को पार करते समय लेखक को यह चिंता होती थी कि कहीं बस इस पेड़ से न टकरा जाए। इस निरंतर भय के कारण उन्हें हर पेड़ एक संभावित खतरे या दुश्मन की तरह लग रहा था।

इतिहास का प्रश्न 6

'सविनय अवज्ञा आंदोलन' किसके नेतृत्व में, किस उद्देश्य से तथा कब हुआ था? इतिहास की उपलब्ध पुस्तकों के आधार पर लिखिए।

सविनय अवज्ञा आंदोलन का नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया था। यह आंदोलन 1930 में ब्रिटिश सरकार की अन्यायपूर्ण नीतियों, विशेषकर नमक कानून के विरोध में, पूर्ण स्वाधीनता प्राप्त करने के उद्देश्य से चलाया गया था। गांधीजी ने 12 मार्च 1930 को दांडी मार्च की शुरुआत की और नमक कानून तोड़कर इस आंदोलन का शुभारंभ किया। इस आंदोलन का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के आदेशों का पालन न करके अहिंसक तरीके से स्वतंत्रता प्राप्त करना था।

भाषा की बात 7

सविनय अवज्ञा का उपयोग व्यंग्यकार ने किस रूप में किया है? लिखिए।

व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई ने 'सविनय अवज्ञा' शब्द का प्रयोग बस के संदर्भ में प्रतीकात्मक रूप से किया है। उन्होंने ऐतिहासिक 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' (जो ब्रिटिश सरकार के आदेशों का पालन न करने के लिए था) की भावना को बस की स्थिति से जोड़ा है। लेखक यह दर्शाना चाहते हैं कि जिस प्रकार आंदोलनकारी विनयपूर्वक लेकिन दृढ़ता से सरकार के अन्याय का विरोध कर रहे थे, उसी प्रकार यह जर्जर बस भी विनयपूर्वक अपने यात्रियों और मालिक से अनुरोध कर रही है कि उसे अब चलने के लिए मजबूर न किया जाए, क्योंकि वह चलने में असमर्थ है। यह बस की दयनीय स्थिति पर एक मार्मिक और व्यंग्यात्मक टिप्पणी है।

भाषा की बात 1

बस, वश, बस तीन शब्द हैं - इनमें बस सवारी के अर्थ में, वश अधीनता के अर्थ में, और बस पर्याप्त (काफी) के अर्थ में प्रयुक्त होता है, जैसे - बस से चलना होगा। मेरे वश में नहीं है। अब बस करो। उपर्युक्त वाक्यों के समान वश और बस शब्द से दो-दो वाक्य बनाइए।

यहाँ 'वश' और 'बस' (पर्याप्त के अर्थ में) शब्दों से दो-दो वाक्य दिए गए हैं, जो दिए गए उदाहरणों के समान हैं:

'वश' (अधीनता के अर्थ में) से वाक्य:

  1. यह समस्या अब मेरे वश में नहीं है, इसे सुलझाने के लिए विशेषज्ञ की मदद लेनी होगी।
  2. बच्चे अपनी माँ के वश में थे और वही करते थे जो वह कहती थी।

'बस' (पर्याप्त/काफी के अर्थ में) से वाक्य:

  1. अब बहुत देर हो चुकी है, बस करो और सो जाओ।
  2. परीक्षा में पास होने के लिए इतने अंक काफी हैं, अब बस

Common mistakes

  • Confusing the literal meaning of 'Savinyay Avagya' with its symbolic use in the story.
  • Misinterpreting the author's humor as simple narration.
  • Failing to connect the bus's condition to broader social or civic issues.
  • Difficulty in understanding the nuances of word meanings like 'बस', 'वश', and 'बस'.

Revision tips

  • Read the chapter carefully to grasp the author's humorous tone and underlying message.
  • Pay close attention to the author's descriptions of the bus and his feelings.
  • Understand the historical context of the 'Savinyay Avagya Andolan' and how it's used satirically.
  • Practice answering the questions by referring to the detailed solutions provided.
  • Review the 'Bhasha Ki Baat' section to reinforce vocabulary and word usage.

Practice MCQs

Q1. लेखक को बस के हिस्सेदार के प्रति श्रद्धा क्यों हुई?

Q2. लोगों ने शाम वाली बस से यात्रा न करने की सलाह क्यों दी?

Q3. लेखक को ऐसा क्यों लगा कि सारी बस ही इंजन है?

Q4. लेखक हर पेड़ को अपना दुश्मन क्यों समझ रहा था?

Q5. कहानी में 'सविनय अवज्ञा' का प्रयोग किस संदर्भ में किया गया है?

Frequently asked questions

यह पाठ 'बस की यात्रा' किस बारे में है?

यह पाठ हरिशंकर परसाई द्वारा लिखा गया एक व्यंग्य है, जिसमें वे एक जर्जर बस में अपनी यात्रा के अनुभव का वर्णन करते हैं। वे उस समय की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और लोगों की उदासीनता पर कटाक्ष करते हैं।

लेखक को बस के हिस्सेदार पर श्रद्धा क्यों आई?

लेखक को बस के हिस्सेदार पर इसलिए श्रद्धा आई क्योंकि वह टायर की खराब स्थिति जानने के बावजूद बस चलाने का साहस कर रहा था। लेखक ने इसे अर्थ-मोह में आत्म-बलिदान की दुर्लभ भावना माना।

पाठ में 'सविनय अवज्ञा' शब्द का प्रयोग किस अर्थ में हुआ है?

पाठ में 'सविनय अवज्ञा' का प्रयोग प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। लेखक यह दिखाना चाहते हैं कि बस जर्जर होने के बावजूद विनयपूर्वक चलती जा रही थी, जैसे कोई सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग ले रहा हो।

लेखक को हर पेड़ अपना दुश्मन क्यों लग रहा था?

बस की खराब हालत के कारण लेखक को डर था कि कहीं बस अनियंत्रित होकर किसी पेड़ से न टकरा जाए। इसलिए, वह हर आने वाले पेड़ को संभावित खतरे के रूप में देख रहा था।

यह पाठ किस प्रकार की भाषा शैली का प्रयोग करता है?

यह पाठ व्यंग्यात्मक और हास्यपूर्ण भाषा शैली का प्रयोग करता है। लेखक सामान्य घटनाओं का वर्णन करते हुए भी गहरी सामाजिक आलोचना प्रस्तुत करते हैं।

Class 8 Hindi के लिए इस पाठ के NCERT Solutions कैसे सहायक हैं?

ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ, व्यंग्य को पहचानने, पात्रों के इरादों को समझने और परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर तैयार करने में मदद करते हैं।

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