कक्षा 7 हमारे अतीत: अध्याय 6 नगर, व्यापारी और शिल्पीजन NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 7 के सामाजिक विज्ञान के लिए 'हमारे अतीत' पुस्तक के अध्याय 6, 'नगर, व्यापारी और शिल्पीजन' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें तंजावूर जैसे महत्वपूर्ण नगरों, लुप्तमोम तकनीक जैसी शिल्पकलाओं, और सूरत व मसूलीपट्टनम जैसे व्यापारिक केंद्रों के बारे में विस्तृत जानकारी शामिल है। समाधान छात्रों को विभिन्न नगरों के महत्व, व्यापारियों की भूमिका, शिल्पकला की तकनीकों और औपनिवेशिक काल में व्यापारिक बस्तियों के विकास को समझने में मदद करते हैं। यह अध्याय छात्रों को मध्यकालीन और प्रारंभिक आधुनिक भारत के आर्थिक और शहरी जीवन की एक झलक प्रदान करता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए स्पष्ट और संक्षिप्त उत्तर प्रदान करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
Subjectहमारे अतीत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter6. नगर, व्यापारी और शिल्पीजन

Chapter summary

कक्षा 7 के लिए 'हमारे अतीत' के अध्याय 6 के NCERT समाधान, 'नगर, व्यापारी और शिल्पीजन', मध्यकालीन भारत के शहरी केंद्रों, व्यापारिक गतिविधियों और शिल्प उत्पादन पर प्रकाश डालते हैं। यह अध्याय तंजावूर जैसे मंदिर नगरों, हम्पी जैसे शाही केंद्रों और सूरत जैसे व्यापारिक बंदरगाहों के विकास की पड़ताल करता है। इसमें लुप्तमोम जैसी शिल्पकला की तकनीकों और व्यापारियों के संगठनों (जैसे काफ़िले) के महत्व पर भी चर्चा की गई है। समाधान छात्रों को इन नगरों के सामाजिक-आर्थिक जीवन और औपनिवेशिक शक्तियों के आगमन के साथ हुए परिवर्तनों को समझने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • विभिन्न ऐतिहासिक नगरों के महत्व को समझना।
  • लुप्तमोम जैसी शिल्पकला की तकनीकों का वर्णन करना।
  • व्यापारियों और शिल्पीजनों की भूमिका का विश्लेषण करना।
  • मध्यकालीन भारत में शहरीकरण और व्यापार के पैटर्न की पहचान करना।
  • औपनिवेशिक काल में व्यापारिक बस्तियों के विकास को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • तंजावूर: एक मंदिर नगर
  • लुप्तमोम तकनीक
  • हम्पी: विजयनगर की राजधानी
  • सूरत: एक व्यापारिक केंद्र
  • मसूलीपट्टनम: एक बंदरगाह नगर
  • व्यापारी और शिल्पीजन
  • काफ़िले और सराय
  • ब्लैक टाउन्स
  • नगरों का प्रशासन
  • चोल साम्राज्य के नगर
  • विजयनगर साम्राज्य के नगर
  • औपनिवेशिक काल में व्यापार

Important topics

  • तंजावूर और हम्पी जैसे प्रमुख नगरों का महत्व
  • लुप्तमोम तकनीक और अन्य शिल्पकलाएँ
  • सूरत और मसूलीपट्टनम जैसे व्यापारिक केंद्रों का विकास
  • व्यापारियों की भूमिका और उनके संगठन (काफ़िले)
  • ब्लैक टाउन्स का उदय

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Questions and Solutions

पाठगत प्रश्न 1

आपके मत से लोग तंजावूर को एक महान नगर क्यों मानते थे? (एन॰सी॰ई॰आर॰टी॰ पाठ्यपुस्तक, पेज-76)
Solution: लोग तंजावूर को एक महान नगर कई कारणों से मानते थे:
  1. राजधानी: यह चोल राजाओं की एक महत्वपूर्ण राजधानी थी, जो इसे राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व प्रदान करता था।
  2. भौगोलिक स्थिति: नगर के पास कावेरी नदी बारह महीने बहती थी, जो जल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करती थी और इसे एक उपजाऊ क्षेत्र बनाती थी।
  3. वास्तुकला और मंदिर: तंजावूर में सुंदर और भव्य ऐतिहासिक इमारतें, राजमहल और विशेष रूप से राजराजेश्वर मंदिर जैसे विशाल मंदिर थे। इन मंदिरों में कई मंडप थे जहाँ राजा अपना दरबार लगाते थे।
  4. मंदिर नगर: यह एक उत्कृष्ट 'मंदिर नगर' का उदाहरण था, जो नगरीकरण का एक महत्वपूर्ण प्रतिरूप प्रस्तुत करता है, जहाँ मंदिर न केवल धार्मिक स्थल थे बल्कि आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के केंद्र भी थे।
  5. बाजार: नगर विभिन्न प्रकार के बाजारों से भरा हुआ था, जो इसकी आर्थिक हलचल को दर्शाता था।
इन सभी विशेषताओं ने मिलकर तंजावूर को एक समृद्ध और महत्वपूर्ण नगर बनाया था।

पाठगत प्रश्न 2

आपके विचार से इस प्रविधि के प्रयोग (लुप्तमोम तकनीक) के क्या-क्या लाभ थे? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-77)
Solution: लुप्तमोम तकनीक, जिसे लॉस्ट-वैक्स कास्टिंग भी कहा जाता है, के कई लाभ थे, जिसके कारण इसका प्रयोग मूर्तिकला में व्यापक रूप से होता था:
  1. जटिल डिजाइन: इस तकनीक से अत्यंत बारीक और जटिल डिजाइनों वाली मूर्तियाँ बनाना संभव था, जिन्हें अन्य विधियों से बनाना कठिन होता।
  2. सुंदरता और चमक: इससे बनी प्रतिमाओं में एक विशेष प्रकार की चमक और सुंदरता आती थी, जो उन्हें आकर्षक बनाती थी।
  3. मजबूती: मिट्टी और मोम से बने साँचे का उपयोग करने के बावजूद, धातु की ठोस प्रतिमाएँ काफी मजबूत होती थीं।
  4. सटीकता: मोम की मूल प्रतिमा के सभी बारीक विवरण धातु की अंतिम प्रतिमा में सटीक रूप से स्थानांतरित हो जाते थे।
  5. लागत-प्रभावी: कुछ मामलों में, यह तकनीक जटिल मूर्तियों को अपेक्षाकृत कम लागत में बनाने का एक प्रभावी तरीका प्रदान करती थी।
इस प्रकार, यह विधि सुंदर, मजबूत और विस्तृत धातु की मूर्तियाँ बनाने के लिए अत्यंत उपयोगी थी।

पाठगत प्रश्न 3

आज बाज़ार पर लगने वाले करों के बारे में कुछ और जानकारी प्राप्त करें। इन्हें कौन इकट्ठा करता है, वे किस प्रकार वसूल किए जाते हैं और उनका प्रयोग किस काम के लिए होता है? (एन॰सी॰ई॰आर॰टी॰ पाठ्यपुस्तक, पेज-79)
Solution: आज के समय में बाज़ारों पर लगने वाले करों को मुख्य रूप से 'वस्तु एवं सेवा कर' (GST) या अन्य बिक्री करों के रूप में जाना जाता है।
  1. कौन इकट्ठा करता है: इन करों को मुख्य रूप से सरकार के विभिन्न कर संग्रह विभाग, जैसे आयकर विभाग या जीएसटी परिषद के अधिकारी और कर्मचारी इकट्ठा करते हैं।
  2. कैसे वसूल किए जाते हैं: ये कर मुख्य रूप से विक्रेताओं (व्यापारियों और व्यवसायों) से वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री पर वसूले जाते हैं। व्यवसायों को अपनी आय और बिक्री का रिकॉर्ड रखना होता है और सरकार को निर्धारित दर से कर का भुगतान करना होता है।
  3. किस काम के लिए प्रयोग: इन करों से प्राप्त राजस्व का उपयोग सरकार द्वारा विभिन्न सार्वजनिक कार्यों और सेवाओं के लिए किया जाता है, जैसे कि देश का प्रशासन चलाना, बुनियादी ढांचे का विकास (सड़कें, पुल, बिजली), शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, रक्षा और अन्य लोक कल्याणकारी योजनाओं को लागू करना।
यह कर प्रणाली सरकार के संचालन और देश के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय स्रोत है।

पाठगत प्रश्न 4

आपके विचार से हम्पी नगर किलेबंद क्यों था? (एन॰सी॰ई॰आर॰टी॰ पाठ्यपुस्तक, पेज-83)
Solution: हम्पी नगर के किलेबंद होने के मुख्य कारण उसकी सुरक्षा और सामरिक महत्व से जुड़े थे:
  1. राजधानी की सुरक्षा: हम्पी विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी। राजधानी होने के नाते, इसे बाहरी आक्रमणों और हमलों से सुरक्षित रखना अत्यंत महत्वपूर्ण था ताकि साम्राज्य की सत्ता और स्थिरता बनी रहे।
  2. सामरिक महत्व: यह नगर तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित था और इसका भौगोलिक स्थान इसे व्यापार और सैन्य अभियानों के लिए महत्वपूर्ण बनाता था। किलेबंदी से इस क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखना आसान होता था।
  3. आक्रमणों से बचाव: उस काल में राज्यों के बीच अक्सर युद्ध होते रहते थे। एक मजबूत किलेबंदी शहर को दुश्मन की सेनाओं से बचाने में मदद करती थी, जिससे नागरिकों और शाही संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित होती थी।
  4. प्रशासनिक नियंत्रण: किलेबंद शहर शासकों को अपने क्षेत्र पर बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण रखने और व्यवस्था बनाए रखने में भी सहायता करते थे।
इस प्रकार, हम्पी की किलेबंदी उसकी राजधानी के रूप में सुरक्षा, सामरिक महत्व और साम्राज्य की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक थी।

पाठगत प्रश्न 5

अंग्रेज़ों और हॉलैंडवासियों ने मसूलीपट्टनम में अपनी बस्तियाँ बसाने का निर्णय क्यों लिया? (एन॰सी॰ई॰आर॰टी॰ पाठ्यपुस्तक, पेज-85)
Solution: अंग्रेज़ों और हॉलैंडवासियों (डच) ने मसूलीपट्टनम में अपनी बस्तियाँ बसाने का निर्णय मुख्य रूप से व्यापारिक और रणनीतिक कारणों से लिया था:
  1. प्रमुख बंदरगाह: मसूलीपट्टनम (जिसे मछलीपट्टनम भी कहा जाता है) समुद्र के किनारे स्थित एक महत्वपूर्ण बंदरगाह था। यह पूर्वी तट पर व्यापार के लिए एक प्रमुख स्थल था।
  2. व्यापारिक सुविधाएँ: इस स्थान पर जहाजों के लिए लंगर डालने की अच्छी व्यवस्था थी, जिससे समुद्री व्यापार सुगम होता था। यहाँ से वे भारत के आंतरिक भागों से माल प्राप्त कर सकते थे और उसे यूरोप भेज सकते थे।
  3. व्यापारिक संबंध: यह स्थान पहले से ही व्यापारियों के लिए एक केंद्र बन रहा था और यहाँ विभिन्न देशों के व्यापारी आते-जाते रहते थे। अंग्रेजों और डचों के लिए यह अन्य यूरोपीय शक्तियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने और अपने व्यापारिक हितों को सुरक्षित करने का एक अवसर था।
  4. सामरिक स्थिति: बंदरगाह पर नियंत्रण उन्हें समुद्री मार्गों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और व्यापार को नियंत्रित करने में मदद करता था।
इन व्यापारिक सुविधाओं और रणनीतिक स्थिति के कारण, मसूलीपट्टनम यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों के लिए एक आकर्षक स्थान बन गया था।

प्रश्न-अभ्यास: फिर से याद करें - 1. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

(क) राजराजेश्वर मंदिर ..... में बनाया गया था।
Solution: (क) राजराजेश्वर मंदिर ग्यारहवीं सदी में बनाया गया था। यह तंजावूर में स्थित है और चोल शासक राजराज प्रथम के शासनकाल में निर्मित हुआ था।

प्रश्न-अभ्यास: फिर से याद करें - 1. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

(ख) अजमेर सूफ़ी संत ..... से संबंधित है।
Solution: (ख) अजमेर सूफ़ी संत ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती से संबंधित है। उनका दरगाह अजमेर में स्थित है और एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।

प्रश्न-अभ्यास: फिर से याद करें - 1. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

(ग) हम्पी ..... साम्राज्य की राजधानी थी।
Solution: (ग) हम्पी विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी। यह तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित एक समृद्ध और महत्वपूर्ण शहर था।

प्रश्न-अभ्यास: फिर से याद करें - 1. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

(घ) हॉलैंडवासियों ने आंध्र प्रदेश में ...... पर अपनी बस्ती बसाई।
Solution: (घ) हॉलैंडवासियों ने आंध्र प्रदेश में मसूलीपट्टनम पर अपनी बस्ती बसाई। यह उस समय एक महत्वपूर्ण व्यापारिक बंदरगाह था।

प्रश्न-अभ्यास: फिर से याद करें - 2. बताएँ क्या सही है और क्या गलत

(क) हम राजराजेश्वर मंदिर के मूर्तिकार (स्थपति) का नाम एक शिलालेख से जानते हैं।
Solution: (क) सही। राजराजेश्वर मंदिर के निर्माण से संबंधित शिलालेखों से हमें उस समय के वास्तुकारों और कारीगरों के बारे में जानकारी मिलती है।

प्रश्न-अभ्यास: फिर से याद करें - 2. बताएँ क्या सही है और क्या गलत

(ख) सौदागर लोग काफ़िलों में यात्रा करने की बजाय अकेले यात्रा करना अधिक पसंद करते थे।
Solution: (ख) गलत। सौदागर अक्सर सुरक्षा के लिए काफ़िलों (समूहों) में यात्रा करते थे क्योंकि अकेले यात्रा करना खतरनाक हो सकता था।

प्रश्न-अभ्यास: फिर से याद करें - 2. बताएँ क्या सही है और क्या गलत

(ग) काबुल हाथियों के व्यापार का मुख्य केंद्र था।
Solution: (ग) गलत। काबुल एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था, लेकिन यह मुख्य रूप से घोड़ों और अन्य वस्तुओं के व्यापार के लिए जाना जाता था, न कि विशेष रूप से हाथियों के व्यापार के लिए। हाथियों का व्यापार अक्सर दक्षिण भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़ा था।

प्रश्न-अभ्यास: फिर से याद करें - 2. बताएँ क्या सही है और क्या गलत

(घ) सूरत बंगाल की खाड़ी पर स्थित एक महत्त्वपूर्ण व्यापारिक पत्तन था।
Solution: (घ) गलत। सूरत अरब सागर पर स्थित एक महत्वपूर्ण व्यापारिक पत्तन था, न कि बंगाल की खाड़ी पर। बंगाल की खाड़ी पर स्थित प्रमुख बंदरगाहों में से एक काकीनाडा या मछलीपट्टनम थे।

प्रश्न-अभ्यास: समझें - 3. तंजावूर नगर को जल की आपूर्ति कैसे की जाती थी?

तंजावूर नगर को जल की आपूर्ति कैसे की जाती थी?
Solution: तंजावूर नगर को जल की आपूर्ति मुख्य रूप से कावेरी नदी के जल और नगर में निर्मित कुओं तथा तालाबों के माध्यम से की जाती थी। कावेरी नदी बारह महीने बहती थी, जिससे पानी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित होती थी। इसके अतिरिक्त, स्थानीय निवासियों की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कुएँ और तालाब भी महत्वपूर्ण स्रोत थे।

प्रश्न-अभ्यास: समझें - 4. मद्रास जैसे बड़े नगरों में स्थित 'ब्लैक टाउन्स' में कौन रहता था?

मद्रास जैसे बड़े नगरों में स्थित 'ब्लैक टाउन्स' में कौन रहता था?
Solution: मद्रास जैसे बड़े औपनिवेशिक नगरों में स्थित 'ब्लैक टाउन्स' में मुख्य रूप से भारतीय लोग निवास करते थे। इनमें भारतीय व्यापारी, शिल्पकार, औद्योगिक मजदूर, कारीगर और अन्य व्यवसायों से जुड़े लोग शामिल थे। ये क्षेत्र यूरोपीय प्रशासकों और व्यापारियों के निवास वाले 'व्हाइट टाउन्स' से अलग होते थे।

Common mistakes

  • व्यापारिक काफ़िलों के बजाय अकेले यात्रा करने की प्रवृत्ति को गलत समझना।
  • सूरत को बंगाल की खाड़ी पर स्थित एक महत्वपूर्ण व्यापारिक पत्तन के रूप में गलत पहचानना।
  • काबुल को हाथियों के व्यापार का मुख्य केंद्र मानना, जबकि यह अन्य व्यापारों के लिए महत्वपूर्ण था।
  • राजराजेश्वर मंदिर के मूर्तिकार (स्थपति) के नाम को शिलालेख से ज्ञात होने की गलत धारणा रखना।

Revision tips

  • प्रत्येक नगर की विशिष्ट विशेषताओं (जैसे तंजावूर का मंदिर, हम्पी का शाही महत्व) को सूचीबद्ध करें।
  • लुप्तमोम तकनीक जैसी शिल्पकलाओं की प्रक्रिया को चरण-दर-चरण समझने का प्रयास करें।
  • विभिन्न व्यापारिक केंद्रों (जैसे सूरत, मसूलीपट्टनम) और उनके महत्व की तुलना करें।
  • व्यापारी समूहों (जैसे काफ़िले) और उनके द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करें।

Practice MCQs

Q1. तंजावूर को एक महान नगर मानने का मुख्य कारण क्या था?

Q2. लुप्तमोम तकनीक का उपयोग मुख्य रूप से किस लिए किया जाता था?

Q3. सूरत को किस प्रकार का नगर माना जाता था?

Q4. मसूलीपट्टनम में अंग्रेजों और हॉलैंडवासियों ने अपनी बस्तियाँ क्यों बसाईं?

Q5. ब्लैक टाउन्स में मुख्य रूप से कौन रहते थे?

Frequently asked questions

कक्षा 7 के हमारे अतीत के अध्याय 6 में किन मुख्य विषयों को शामिल किया गया है?

इस अध्याय में मध्यकालीन भारत के प्रमुख नगरों जैसे तंजावूर, हम्पी, सूरत और मसूलीपट्टनम के विकास, व्यापारियों और शिल्पीजनों की भूमिका, लुप्तमोम जैसी शिल्पकला की तकनीकों और औपनिवेशिक काल में बस्तियों के निर्माण जैसे विषयों को शामिल किया गया है।

लुप्तमोम तकनीक क्या है और इसका क्या महत्व था?

लुप्तमोम तकनीक एक प्राचीन विधि है जिसका उपयोग धातु की जटिल और सुंदर मूर्तियाँ बनाने के लिए किया जाता था। इसमें पहले मोम की प्रतिमा बनाकर फिर उसे पिघली हुई धातु से बदला जाता था। इस तकनीक से बनी मूर्तियाँ काफी सजीव और चमकदार होती थीं।

सूरत को एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र क्यों माना जाता था?

सूरत खंभात की खाड़ी पर स्थित एक प्रमुख बंदरगाह था जहाँ से विभिन्न देशों के साथ व्यापार होता था। यह अपने वस्त्र उत्पादन के लिए भी प्रसिद्ध था, जिससे यह एक समृद्ध व्यापारिक केंद्र बन गया था।

ये NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्र अध्याय की अवधारणाओं को गहराई से समझ सकते हैं। यह उन्हें परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों के उत्तर देने के लिए तैयार करता है।

ब्लैक टाउन्स का क्या अर्थ है?

ब्लैक टाउन्स, विशेष रूप से मद्रास जैसे बड़े औपनिवेशिक नगरों में, वे क्षेत्र थे जहाँ भारतीय व्यापारी, शिल्पकार, मजदूर और अन्य स्थानीय लोग निवास करते थे, जो यूरोपीय बस्तियों से अलग थे।

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