कक्षा 7 विज्ञान NCERT समाधान: जल हमारी जीवन रेखा
यह पृष्ठ कक्षा 7 के विज्ञान के अध्याय 16, 'जल हमारी जीवन रेखा' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय जल के महत्व, जल की कमी के कारणों और जल संरक्षण की विधियों पर प्रकाश डालता है। समाधानों में भौमजल, अंतःस्यंदन, जलभर और वर्षा जल संचयन जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट किया गया है। इसमें सत्य/असत्य प्रश्न, कारण बताएं, और रिक्त स्थान भरें जैसे अभ्यास शामिल हैं, जो छात्रों को जल के विभिन्न पहलुओं को समझने में मदद करते हैं। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और संक्षिप्त मार्गदर्शिका प्रदान करते हैं, जिससे वे जल संसाधनों के प्रबंधन और संरक्षण के महत्व को समझ सकें।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 7 |
| Subject | विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 16. जल हमारी जीवन रेखा |
Chapter summary
कक्षा 7 विज्ञान के अध्याय 16 'जल हमारी जीवन रेखा' के लिए NCERT समाधान जल के महत्व और संरक्षण पर केंद्रित हैं। ये समाधान भौमजल की पुनर्भरण प्रक्रिया, जल की कमी के कारणों जैसे बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिकीकरण, और जल संरक्षण की तकनीकों जैसे ड्रिप सिंचाई की व्याख्या करते हैं। अभ्यास प्रश्नों के उत्तर छात्रों को जल संसाधनों के प्रबंधन और भूमिगत जल स्तर को बनाए रखने के महत्व को समझने में सहायता करते हैं।
Learning outcomes
- जल के विभिन्न स्रोतों और उनके महत्व को समझना।
- भौमजल की पुनर्भरण प्रक्रिया का वर्णन करना।
- जल की कमी के कारणों की पहचान करना।
- जल संरक्षण की विधियों को समझाना।
- वर्षा जल के महत्व और उसके संचयन के तरीकों को जानना।
Topics covered
Paper topics
- जल का महत्व
- जल के स्रोत
- भौमजल
- अंतःस्यंदन
- जलभर
- जल की कमी के कारण
- बढ़ती जनसंख्या का प्रभाव
- औद्योगिकीकरण का प्रभाव
- शहरीकरण का प्रभाव
- जल संरक्षण
- ड्रिप सिंचाई
- वर्षा जल
Important topics
- भौमजल की पुनर्भरण प्रक्रिया
- जल की कमी के प्रमुख कारण
- जल संरक्षण की विधियाँ
- वर्षा जल का महत्व
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
(क) भौमजल विश्वभर की नदियों और झीलों में पाए जाने वाले जल से कहीं अधिक है।
(ख) जल की कमी की समस्या का सामना केवल ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी करते हैं।
(ग) नदियों का जल खेतों में सिंचाई का एकमात्र स्रोत है।
(घ) वर्षा जल का चरम स्रोत है।
(क) सत्य। भौमजल की मात्रा नदियों और झीलों में उपलब्ध जल की कुल मात्रा से कहीं अधिक होती है।
(ख) असत्य। जल की कमी की समस्या का सामना ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के निवासी करते हैं, हालांकि इसके कारण और प्रभाव भिन्न हो सकते हैं।
(ग) असत्य। खेतों में सिंचाई के लिए नदियों के जल के अलावा नहरों, तालाबों, कुओं और वर्षा जल का भी उपयोग किया जाता है।
(घ) सत्य। वर्षा पृथ्वी पर जल का मुख्य और प्राकृतिक स्रोत है, जो सभी जल निकायों को पुनः भरता है।
प्रश्न 2
भौमजल की पुन:पूर्ति मुख्य रूप से वर्षा जल और अन्य सतही जल स्रोतों जैसे नदियों और तालाबों के जल के भूमि में रिसने से होती है। यह प्रक्रिया 'अंतःस्यंदन' कहलाती है। जब वर्षा होती है या नदियाँ बहती हैं, तो उनका जल धीरे-धीरे मिट्टी और चट्टानों की परतों से रिसकर नीचे जाता है। यह जल भूमि के नीचे के खाली स्थानों और दरारों को भर देता है, जिससे भौमजल स्तर की पुनर्भरण होता है। इस प्रकार, उपयोग किए गए भौमजल की भरपाई हो जाती है।
प्रश्न 3
यदि पचास घरों के लिए केवल दस नलकूपों का उपयोग किया जाता है, तो प्रत्येक घर अपनी जल की आवश्यकता को पूरा करने के लिए इन नलकूपों से पानी खींचेगा। यदि इस पानी का निष्कर्षण (खींचना) लंबे समय तक जारी रहता है और वर्षा या अन्य स्रोतों से भौमजल की पुनर्भरण दर से अधिक होता है, तो इससे भौमजल स्तर में गिरावट आएगी। लगातार अधिक मात्रा में जल निकालने से भूमिगत जल भंडार कम हो जाएगा, जिससे दीर्घकाल में भौमजल स्तर काफी नीचे चला जाएगा।
प्रश्न 4
बगीचे के रखरखाव के लिए जल एक आवश्यक संसाधन है। जल का सदुपयोग सुनिश्चित करने के लिए, मैं निम्नलिखित कदम उठाऊँगा:
- ड्रिप सिंचाई (बूंद सिंचाई) का उपयोग: यह तकनीक पानी को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाती है, जिससे पानी की बर्बादी कम होती है और केवल आवश्यक मात्रा में ही पानी दिया जाता है।
- सही समय पर सिंचाई: बगीचे की सिंचाई सुबह जल्दी या शाम को देर से करनी चाहिए ताकि वाष्पीकरण से होने वाले जल हानि को कम किया जा सके।
- मल्चिंग (Mulching): पौधों के चारों ओर गीली घास, पुआल या अन्य जैविक सामग्री की परत बिछाने से मिट्टी की नमी बनी रहती है और बार-बार सिंचाई की आवश्यकता कम हो जाती है।
- वर्षा जल संचयन: यदि संभव हो, तो वर्षा जल को इकट्ठा करके उसका उपयोग बगीचे की सिंचाई के लिए किया जा सकता है।
प्रश्न 5
भौमजल स्तर के नीचे गिरने के लिए कई कारक उत्तरदायी हैं:
- बढ़ती जनसंख्या: जनसंख्या में वृद्धि के कारण पीने, घरेलू उपयोग, कृषि और उद्योगों के लिए जल की मांग बढ़ जाती है। इस बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए अधिक मात्रा में भौमजल निकाला जाता है, जिससे इसका स्तर गिरता है।
- बढ़ता औद्योगिकीकरण और शहरीकरण: उद्योगों को बड़ी मात्रा में जल की आवश्यकता होती है, और शहरीकरण के विस्तार से भी जल की खपत बढ़ती है। साथ ही, कंक्रीट के निर्माण से भूमि की जल सोखने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे अंतःस्यंदन घट जाता है।
- कृषि में जल का अत्यधिक उपयोग: सिंचाई के लिए नलकूपों और पंपों द्वारा भौमजल का अत्यधिक उपयोग भी इसके स्तर को गिराता है।
- वनों की कटाई: पेड़ों की कटाई से मृदा की जल धारण क्षमता कम हो जाती है और अंतःस्यंदन की दर घट जाती है, जिससे भौमजल पुनर्भरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- जल संसाधनों का कुप्रबंधन: जल के अनुचित वितरण और उपयोग से भी भौमजल स्तर पर दबाव बढ़ता है।
प्रश्न 6
(क) भौमजल प्राप्त करने के लिए ______ और ______ का उपयोग होता है।
(ख) जल की तीन अवस्थाएँ ______ , ______ और ______ हैं।
(ग) भूमि की जल धारण करने वाली परत ______ कहलाती है।
(घ) भूमि में जल के अवस्रवण के प्रक्रम को ______ कहते हैं।
(क) भौमजल प्राप्त करने के लिए नलकूप और हैंडपंप का उपयोग होता है।
(ख) जल की तीन अवस्थाएँ बर्फ़, जल और जलवाष्प हैं।
(ग) भूमि की जल धारण करने वाली परत जलभर कहलाती है।
(घ) भूमि में जल के अवस्रवण के प्रक्रम को अंतःस्यंदन कहते हैं।
प्रश्न 7
(क) औद्योगीकरण में वृद्धि
(ख) बढ़ती जनसंख्या
(ग) अत्यधिक वर्षा
(घ) जल संसाधनों का कुप्रबंधन
सही उत्तर है (ग) अत्यधिक वर्षा।
स्पष्टीकरण: अत्यधिक वर्षा जल की कमी का कारण नहीं बनती, बल्कि यह जल की उपलब्धता को बढ़ाती है। औद्योगीकरण में वृद्धि, बढ़ती जनसंख्या और जल संसाधनों का कुप्रबंधन - ये सभी कारक जल की कमी में योगदान करते हैं क्योंकि ये जल की मांग बढ़ाते हैं या जल स्रोतों को दूषित करते हैं।
Common mistakes
- जल की कमी के कारणों को केवल एक कारक तक सीमित समझना।
- भौमजल की पुनर्भरण प्रक्रिया को ठीक से न समझना।
- जल संरक्षण के व्यावहारिक उपायों को अनदेखा करना।
Revision tips
- जल के विभिन्न रूपों (ठोस, द्रव, गैस) और उनके चक्र को समझें।
- भौमजल स्तर पर मानवीय गतिविधियों के प्रभाव का विश्लेषण करें।
- जल संरक्षण के लिए व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर उठाए जाने वाले कदमों पर विचार करें।
- अभ्यास प्रश्नों के उत्तरों को अपने शब्दों में लिखने का प्रयास करें।
Practice MCQs
Q1. भूमि में जल के रिसाव के प्रक्रम को क्या कहते हैं?
Explanation: भूमि में जल के रिसकर नीचे जाने की प्रक्रिया को अंतःस्यंदन कहा जाता है, जो भौमजल की पुनर्भरण में सहायक है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
Explanation: वर्षा जल का एक प्रमुख स्रोत है, जो पृथ्वी पर जल की आपूर्ति को बनाए रखता है।
Q3. जलभर (Aquifer) क्या है?
Explanation: जलभर भूमिगत जल का वह भंडार है जो कठोर चट्टानों की परतों के बीच संचित होता है और जिसे नलकूपों द्वारा निकाला जाता है।
Q4. ड्रिप सिंचाई (बूंद सिंचाई) का मुख्य लाभ क्या है?
Explanation: ड्रिप सिंचाई एक ऐसी तकनीक है जो पानी को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाकर जल का संरक्षण करती है।
Q5. जल की कमी के लिए कौन सा कारक उत्तरदायी नहीं है?
Explanation: अत्यधिक वर्षा जल की कमी का कारण नहीं बनती, बल्कि यह जल की उपलब्धता को बढ़ाती है। अन्य विकल्प जल की कमी में योगदान करते हैं।
Frequently asked questions
कक्षा 7 विज्ञान के अध्याय 16 में किन मुख्य अवधारणाओं को शामिल किया गया है?
इस अध्याय में जल के महत्व, भौमजल, अंतःस्यंदन, जलभर, जल की कमी के कारण (जैसे बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिकीकरण), और जल संरक्षण की विधियों (जैसे ड्रिप सिंचाई) जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को शामिल किया गया है।
भौमजल की पुनर्भरण प्रक्रिया क्या है?
भौमजल की पुनर्भरण प्रक्रिया वह है जिसमें वर्षा जल और अन्य सतही जल (नदियों, तालाबों का जल) मृदा से रिसकर भूमि के नीचे रिक्त स्थानों को भरता है, जिससे भौमजल स्तर बना रहता है। इस प्रक्रिया को अंतःस्यंदन कहते हैं।
जल की कमी के मुख्य कारण क्या हैं?
जल की कमी के मुख्य कारणों में बढ़ती जनसंख्या, बढ़ता औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, वनों की कटाई से मृदा की नमी में कमी, और जल संसाधनों का कुप्रबंधन शामिल हैं।
जल संरक्षण के लिए कौन सी तकनीकें महत्वपूर्ण हैं?
जल संरक्षण के लिए ड्रिप सिंचाई (बूंद सिंचाई) जैसी तकनीकें महत्वपूर्ण हैं, जो सीधे पौधों की जड़ों तक पानी पहुंचाकर जल की बचत करती हैं। वर्षा जल संचयन भी एक महत्वपूर्ण विधि है।
ये NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा तैयारी में कैसे मदद करेंगे?
ये समाधान प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में आत्मविश्वास मिलता है। यह जल के महत्व और संरक्षण के बारे में उनकी समझ को भी मजबूत करता है।
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