CBSE Class 7 Hindi Vasant Chapter 17: वीर कुँवर सिंह जीवनी NCERT Solutions
This chapter delves into the inspiring life of Veer Kunwar Singh, a prominent figure in the Indian independence movement. The NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant, Chapter 17, provide a detailed exploration of his personality, highlighting his immense courage, unwavering patriotism, and commitment to communal harmony. Students will learn about his childhood interests, his strategic use of fairs for revolutionary activities, and his significant contributions to the 1857 uprising. The solutions also touch upon the linguistic aspects of Hindi, focusing on changes in word forms when shifting between singular and plural. These solutions are designed to offer a clear understanding of Veer Kunwar Singh's legacy and his role in India's struggle for freedom, aiding students in their exam preparation by offering insights into historical figures and language nuances.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 7 |
| Subject | वसंत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 17. वीर कुँवर सिह जीवनी |
Chapter summary
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Vasant, Chapter 17, focuses on the biography of Veer Kunwar Singh. It covers his remarkable personality traits such as bravery, generosity, and self-respect, illustrated through specific incidents from his life. The solutions also explore his childhood activities, his unique approach to using fairs for revolutionary purposes, and his role in fostering communal harmony. Additionally, a section on language discusses the transformation of words from singular to plural, enhancing students' understanding of Hindi grammar.
Learning outcomes
- Understand the key personality traits of Veer Kunwar Singh.
- Analyze specific incidents that demonstrate his courage, generosity, and self-respect.
- Recognize his contributions to the Indian independence movement.
- Explain his efforts in promoting communal harmony.
- Identify his childhood interests and their influence on his later life.
- Learn about the grammatical concept of changing singular nouns to plural in Hindi.
Topics covered
Paper topics
- Veer Kunwar Singh's Biography
- Personality Traits (Courage, Generosity, Self-respect)
- Childhood and Early Influences
- Role in the 1857 Uprising
- Communal Harmony
- Strategic Use of Fairs
- Hindi Grammar: Singular and Plural Nouns
- Notable Freedom Fighters of 1857
Important topics
- Veer Kunwar Singh's Courageous Acts
- Veer Kunwar Singh's Contribution to Communal Harmony
- Veer Kunwar Singh's Role in 1857
- Hindi Grammar: Noun Pluralization Rules
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- साहस: उनके जीवन के अनेक प्रसंग उनके अदम्य साहस को दर्शाते हैं। सबसे उल्लेखनीय उदाहरण वह है जब अंग्रेजी सेना से मुकाबला करते समय उनके हाथ में गोली लग गई थी। जहर फैलने के खतरे को भांपते हुए, उन्होंने तत्काल अपनी घायल भुजा को काटकर गंगा नदी में समर्पित कर दिया। यह कार्य उनके असाधारण साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।
- उदारता: वीर कुँवर सिंह अत्यंत उदार हृदय के व्यक्ति थे। अपनी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी न होने के बावजूद, वे सदैव निर्धनों और जरूरतमंदों की सहायता के लिए तत्पर रहते थे। उन्होंने जनता की भलाई के लिए अनेक तालाबों, कुओं, स्कूलों और सड़कों का निर्माण करवाया, जो उनकी उदारता को प्रदर्शित करता है।
- स्वाभिमानी: वे एक स्वाभिमानी व्यक्ति थे जिन्होंने बुढ़ापे में भी अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके। उन्होंने अंतिम सांस तक स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया, जो उनके आत्म-सम्मान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है।
- सांप्रदायिक सद्भाव: कुँवर सिंह विभिन्न समुदायों के बीच एकता और सद्भाव में गहरी आस्था रखते थे। उनकी सेना में इब्राहिम खाँ और किफायत हुसैन जैसे मुस्लिम अधिकारी उनकी कार्यकुशलता और वीरता के कारण उच्च पदों पर थे, न कि धर्म के आधार पर। उनके घर पर हिंदुओं और मुसलमानों के त्योहार मिलजुलकर मनाए जाते थे, जो उनके समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाता है।
प्रश्न 2
प्रश्न 3
- धार्मिक भेदभाव रहित नियुक्ति: उन्होंने अपनी सेना में इब्राहिम खाँ और किफायत हुसैन जैसे मुस्लिम अधिकारियों को उनकी योग्यता, कार्यकुशलता और वीरता के आधार पर उच्च पद प्रदान किए थे। उनकी नियुक्ति का आधार धर्म नहीं, बल्कि उनकी क्षमता थी।
- सामूहिक उत्सव: उनके निवास पर हिंदुओं और मुसलमानों के सभी प्रमुख त्योहारों को एक साथ मिलकर मनाया जाता था, जो विभिन्न समुदायों के बीच भाईचारे और एकता का प्रतीक था।
- शैक्षणिक समानता: उन्होंने न केवल पाठशालाएँ बनवाईं बल्कि मकतब (मुस्लिम शिक्षा केंद्र) भी स्थापित करवाए। इससे यह स्पष्ट होता है कि वे सभी समुदायों की शिक्षा और विकास के लिए समान रूप से प्रयासरत थे और उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कोई भेदभाव नहीं रखा।
प्रश्न 4
- साहस का प्रसंग: जब अंग्रेजी सेना से लड़ते हुए उनके हाथ में गोली लग गई और जहर फैलने का खतरा था, तब उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी घायल भुजा को तुरंत काटकर गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया। यह उनके असाधारण साहस और जीवन रक्षा के लिए त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का अद्भुत उदाहरण है।
- उदारता के प्रसंग: उन्होंने अपनी प्रजा की भलाई के लिए कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य करवाए, जैसे कि जनता के लिए कुएँ खुदवाना, धर्मशालाएँ बनवाना और पाठशालाओं का निर्माण करवाना। ये कार्य उनकी प्रजा के प्रति गहरी चिंता और उदारता को दर्शाते हैं। उनकी सेना में हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के सैनिक थे, जिन्हें वे समान महत्व देते थे।
- स्वाभिमान का प्रसंग: अपने वृद्धावस्था के बावजूद, उन्होंने कभी भी अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया और न ही उनके आगे झुके। उन्होंने अंतिम क्षण तक स्वतंत्रता के लिए संघर्ष जारी रखा, जो उनके स्वाभिमान और देश के प्रति अटूट निष्ठा का प्रमाण है।
प्रश्न 5
प्रश्न 6
- तात्या टोपे: तात्या टोपे का जन्म सन् 1814 में हुआ था और उनका पूरा नाम रघुनाथ राव पांडू यवलेकर था। उन्होंने जून 1858 से लेकर 1859 तक अंग्रेजों के विरुद्ध अत्यंत वीरता से लड़ाई लड़ी और स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- मंगल पांडे: मंगल पांडे का जन्म 19 जुलाई 1827 को बलिया जिले के नागवा गाँव में हुआ था। 1857 के विद्रोह की शुरुआत उन्हीं से मानी जाती है, जब उन्होंने गाय और सुअर की चर्बी लगे कारतूसों का प्रयोग करने से इनकार कर दिया और विरोध में अंग्रेज अफसर पर हमला कर दिया।
- बहादुर शाह ज़फ़र: बहादुर शाह ज़फ़र (1775-1862) भारत के अंतिम मुगल सम्राट थे और एक प्रसिद्ध शायर भी थे। उन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय सिपाहियों का नेतृत्व किया। युद्ध में हार के बाद अंग्रेजों ने उन्हें बर्मा (म्यांमार) निर्वासित कर दिया, जहाँ उनका निधन हुआ।
- रानी लक्ष्मीबाई: रानी लक्ष्मीबाई ने तात्या टोपे के साथ मिलकर ग्वालियर के विद्रोही सैनिकों की सहायता से ग्वालियर के किले पर कब्जा किया। 17 जून 1858 को ग्वालियर के पास ब्रिटिश सेना से लड़ते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की। ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज़ ने भी उनकी वीरता, सुंदरता और दृढ़ता की प्रशंसा की थी।
प्रश्न 7
- नीति (एकवचन) - नीतियों (बहुवचन)
- स्थिति (एकवचन) - स्थितियों (बहुवचन)
- जिम्मेदारी (एकवचन) - जिम्मेदारियों (बहुवचन)
- सलामी (एकवचन) - सलामियों (बहुवचन)
- स्वाभिमानी (एकवचन) - स्वाभिमानी (बहुवचन) - *यहाँ ध्यान दें कि 'स्वाभिमानी' शब्द का प्रयोग एकवचन और बहुवचन दोनों में समान रूप से हो सकता है, या इसे 'स्वाभिमानी लोग' जैसे वाक्यांशों से स्पष्ट किया जा सकता है। यदि इसे सीधे बहुवचन में बदलना हो तो 'स्वाभिमानी' ही रहेगा या 'स्वाभिमानी जन' जैसे प्रयोग होंगे। दिए गए स्रोत के अनुसार, 'स्वाभिमानी' को 'स्वाभिमानी' ही रखा गया है, जो कि एक सामान्य प्रयोग है।*
- गोली (एकवचन) - गोलियों (बहुवचन)
Common mistakes
- Confusing the specific incidents that highlight different personality traits.
- Not understanding the unique way Veer Kunwar Singh utilized fairs.
- Difficulty in applying the grammatical rule for changing singular to plural nouns ending in 'ee' sound.
- Overlooking the significance of communal harmony in his actions.
Revision tips
- Focus on the specific examples provided in the text to illustrate Veer Kunwar Singh's bravery and generosity.
- Create a timeline of key events in Veer Kunwar Singh's life as described in the chapter.
- Practice changing the given Hindi nouns from singular to plural, paying attention to the vowel changes.
- Discuss with classmates the importance of communal harmony as exemplified by Veer Kunwar Singh.
Practice MCQs
Q1. वीर कुँवर सिंह के व्यक्तित्व की कौन सी विशेषता का उदाहरण उनकी घायल भुजा को काटकर गंगा में समर्पित करना है?
Explanation: अपनी घायल भुजा को काटकर गंगा में समर्पित करना वीर कुँवर सिंह के असाधारण साहस का सबसे बड़ा प्रमाण है।
Q2. कुँवर सिंह ने बचपन में किन गतिविधियों में आनंद लिया, जिनसे उनके वीर सैनिक बनने में मदद मिली?
Explanation: बचपन में घुड़सवारी, तलवारबाजी और कुश्ती जैसे शारीरिक खेलों में उनकी रुचि ने उनमें साहस और वीरता का विकास किया, जो बाद में स्वतंत्रता संग्राम में उपयोगी सिद्ध हुआ।
Q3. पाठ के अनुसार, कुँवर सिंह ने सांप्रदायिक सद्भाव को कैसे बढ़ावा दिया?
Explanation: कुँवर सिंह ने इब्राहिम खाँ और किफायत हुसैन जैसे मुस्लिम अधिकारियों को उनकी योग्यता के आधार पर उच्च पद दिए और हिंदुओं-मुसलमानों के त्योहार साथ मनाए, जो उनके सांप्रदायिक सद्भाव को दर्शाता है।
Q4. वीर कुँवर सिंह ने मेले का उपयोग किस क्रांतिकारी उद्देश्य के लिए किया?
Explanation: आम मेलों के विपरीत, वीर कुँवर सिंह ने मेले की भीड़ का उपयोग अंग्रेजी शासन के विरुद्ध गुप्त योजनाएँ बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने के लिए एक मंच के रूप में किया।
Q5. निम्नलिखित में से किस शब्द का बहुवचन बनाने पर अंत में 'ई' की मात्रा 'इ' में बदल जाती है?
Explanation: दिए गए शब्दों में से 'नीति' का बहुवचन 'नीतियों' होता है, जिसमें 'ई' की मात्रा 'इ' में बदल जाती है। 'स्थिति' का 'स्थितियों', 'सलामी' का 'सलामियों' और 'गोली' का 'गोलियों' होता है, जहाँ 'ई' की मात्रा 'इ' में बदल जाती है।
Frequently asked questions
यह पाठ किस स्वतंत्रता सेनानी के जीवन पर आधारित है?
यह पाठ वीर कुँवर सिंह नामक एक महान स्वतंत्रता सेनानी के जीवन पर आधारित है, जो 1857 के विद्रोह में एक प्रमुख व्यक्ति थे।
वीर कुँवर सिंह के किन गुणों का वर्णन पाठ में किया गया है?
पाठ में वीर कुँवर सिंह के साहस, उदारता, स्वाभिमान और सांप्रदायिक सद्भाव जैसे गुणों का वर्णन किया गया है।
क्या वीर कुँवर सिंह ने बचपन में कोई विशेष खेल खेले थे?
हाँ, वीर कुँवर सिंह को बचपन में घुड़सवारी, तलवारबाजी और कुश्ती लड़ने में मजा आता था, जिसने उनके वीर व्यक्तित्व के विकास में योगदान दिया।
पाठ में भाषा की बात खंड में क्या सिखाया गया है?
भाषा की बात खंड में हिंदी व्याकरण के एक नियम को समझाया गया है कि कैसे कुछ शब्दों का बहुवचन बनाने पर उनके अंत में लगी दीर्घ 'ई' की मात्रा हृस्व 'इ' में बदल जाती है।
1857 के आंदोलन के अन्य सेनानियों के बारे में पाठ में क्या जानकारी है?
पाठ में तात्या टोपे, मंगल पांडे, बहादुर शाह ज़फ़र और रानी लक्ष्मीबाई जैसे 1857 के आंदोलन के चार अन्य सेनानियों का संक्षिप्त परिचय दिया गया है।
ये NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?
ये समाधान वीर कुँवर सिंह के जीवन और उनके योगदान की विस्तृत समझ प्रदान करते हैं, साथ ही हिंदी व्याकरण के एक महत्वपूर्ण नियम को स्पष्ट करते हैं, जिससे छात्रों को परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर देने में सहायता मिलती है।
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