Class 7 Hindi Chapter 18 संघर्ष के कारण मैं तुनुकमिजाज हो गयाःधनराज साक्षात्कार NCERT Solutions

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CBSE Class 7 Hindi Vasant Chapter 18, 'संघर्ष के कारण मैं तुनुकमिजाज हो गयाःधनराज साक्षात्कार', presents an insightful interview with hockey legend Dhanraj Pillay. This chapter explores his inspiring journey from humble beginnings, detailing the significant challenges he overcame to achieve his dream of playing hockey. It sheds light on his simple lifestyle, deep family connections, and unwavering humility even after reaching international fame. The interview also addresses the reasons behind his reputation for being short-tempered, revealing valuable life lessons imparted by his mother on managing success. Furthermore, the chapter pays tribute to the iconic hockey player Major Dhyan Chand, often referred to as the 'Magician of Hockey', and explains why hockey holds the status of India's national sport. These solutions offer a thorough understanding of Dhanraj Pillay's life and the sport's significance, aiding students in their exam preparation.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
Subjectवसंत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter18. संघर्ष के कारण मैं तुनुकमिजाज हो गयाःधनराज साक्षात्कार

Chapter summary

This chapter's NCERT Solutions for Class 7 Hindi, 'संघर्ष के कारण मैं तुनुकमिजाज हो गयाःधनराज साक्षात्कार', focuses on an interview with hockey player Dhanraj Pillay. It covers his life journey, the challenges he overcame, his humble personality, and his views on fame and money. The solutions also explain the reasons behind hockey being considered India's national sport and touch upon the legendary Major Dhyan Chand. The language section provides practice with related words derived from suffixes.

Learning outcomes

  • Understand the life journey and struggles of Dhanraj Pillay.
  • Analyze the qualities that make Dhanraj Pillay a respected personality.
  • Explain the significance of humility in the face of success.
  • Identify the reasons for hockey being considered India's national sport.
  • Learn about the contributions of Major Dhyan Chand to Indian hockey.
  • Practice using words with different suffixes in Hindi sentences.

Topics covered

Paper topics

  • Dhanraj Pillay's Biography
  • Struggles in Sports
  • Humility and Fame
  • Hockey as a Sport
  • Major Dhyan Chand
  • National Game of India
  • Interview Analysis
  • Hindi Vocabulary (Suffixes)
  • Character Traits
  • Overcoming Adversity

Important topics

  • Dhanraj Pillay's Life Journey and Struggles
  • The Importance of Humility
  • Reasons for Hockey being India's National Sport
  • Major Dhyan Chand's Legacy
  • Understanding Dhanraj Pillay's Personality

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

साक्षात्कार पढ़कर आपके मन में धनराज पिल्लै की कैसी छवि उभरती है? वर्णन कीजिए।
Solution: साक्षात्कार को पढ़ने के बाद, धनराज पिल्लै की एक ऐसी छवि हमारे मन में बनती है कि वे स्वभाव से बहुत ही सीधे-सरल, भावुक और स्पष्टवादी व्यक्ति हैं। वे अपने परिवार से गहरा जुड़ाव रखते हैं और स्वाभिमानी हैं। जीवन में अनेक कठिन संघर्षों और आर्थिक तंगी से गुजरने के कारण, वे कभी-कभी खुद को असुरक्षित महसूस करने लगते थे। इतनी प्रसिद्धि मिलने के बावजूद, उनमें ज़रा भी अभिमान नहीं आया। उन्हें आज भी लोकल ट्रेनों में यात्रा करने में कोई संकोच नहीं है। लोगों को लग सकता है कि उनके स्वभाव में थोड़ी तुनकमिजाजी आ गई है, लेकिन वास्तव में वे आज भी उतने ही सरल और सहज व्यक्ति हैं।

प्रश्न 2

धनराज पिल्लै ने ज़मीन से उठकर आसमान का सितारा बनने तक की यात्रा तय की है। लगभग सौ शब्दों में इस सफ़र का वर्णन कीजिए।
Solution: धनराज पिल्लै की ज़मीन से उठकर आसमान का सितारा बनने तक की यात्रा अत्यंत कठिनाइयों और संघर्षों से भरी रही है। एक साधारण और गरीब परिवार से होने के कारण, उनके लिए हॉकी खेलने का शौक पूरा करना आसान नहीं था। शुरुआत में, उनके पास हॉकी स्टिक खरीदने के लिए भी पैसे नहीं होते थे, और उन्हें अपने दोस्तों से स्टिक उधार लेनी पड़ती थी। लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी और पुरानी स्टिक से ही निष्ठा और लगन के साथ लगातार अभ्यास करते रहे। ऑलविन एशिया कैंप में चुने जाने के बाद, धनराज पिल्लै ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और वे लगातार सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए एक विश्व स्तरीय खिलाड़ी बने।

प्रश्न 3

'मेरी माँ ने मुझे अपनी प्रसिद्धि को विनम्रता से सँभालने की सीख दी है' - धनराज पिल्लै की इस बात का क्या अर्थ है?
Solution: धनराज पिल्लै की यह बात कि 'मेरी माँ ने मुझे अपनी प्रसिद्धि को विनम्रता से सँभालने की सीख दी है', का गहरा अर्थ है। इसका तात्पर्य यह है कि उनकी माँ ने उन्हें यह सिखाया था कि जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी सफलता या प्रसिद्धि मिल जाए, कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए। उन्होंने समझाया कि यह सफलता उन्हें अथक संघर्ष के बाद मिली है, और इसे बनाए रखने के लिए विनम्रता अत्यंत आवश्यक है। इंसान को हमेशा जमीन से जुड़े रहना चाहिए, क्योंकि घमंड ही पतन का कारण बनता है।

प्रश्न 4

ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता है। क्यों? पता लगाइए।
Solution: मेजर ध्यानचंद सिंह को 'हॉकी का जादूगर' कहा जाता है क्योंकि उनकी हॉकी खेलने की शैली अद्भुत और अद्वितीय थी। उनकी स्टिक से गेंद इस तरह चिपक जाती थी मानो उसमें कोई जादू हो। उनकी इस कलाकारी को देखकर प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी भी अक्सर हैरान रह जाते थे और खेल भूलकर उन्हें देखते रह जाते थे। हॉलैंड में तो उनकी स्टिक में चुंबक होने की आशंका से उसे तोड़कर भी देखा गया था। जापान में भी उनकी स्टिक से गेंद के चिपके रहने को देखकर यह कहा गया कि शायद उसमें गोंद लगा है। उनकी इस जादुई प्रतिभा से प्रभावित होकर जर्मनी के तानाशाह हिटलर ने भी उन्हें जर्मनी के लिए खेलने का प्रस्ताव दिया था।

प्रश्न 5

किन विशेषताओं के कारण हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल माना जाता है?
Solution: हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल मानने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। हॉकी भारत में अत्यंत लोकप्रिय खेल है और यह देश के लगभग हर प्रदेश में खेला जाता है। इस खेल के माध्यम से भारत ने विश्व पटल पर काफी प्रसिद्धि हासिल की है। विशेष रूप से, भारतीय हॉकी टीम ने सन् 1928 से 1956 तक लगातार छह ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया था। इन उपलब्धियों और खेल की व्यापक लोकप्रियता के कारण हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल माना जाता है।

प्रश्न 6

'यह कोई ज़रूरी नहीं कि शोहरत पैसा भी साथ लेकर आए' - क्या आप धनराज पिल्लै की इस बात से सहमत हैं? अपने अनुभव और बडों की बातचीत के आधार पर लिखिए।
Solution: हम धनराज पिल्लै की इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि 'यह कोई ज़रूरी नहीं कि शोहरत पैसा भी साथ लेकर आए'। हमारे समाज में ऐसे अनेक उदाहरण देखने को मिलते हैं जहाँ कई प्रतिभाशाली व्यक्ति, जैसे संगीतकार, साहित्यकार, रंगकर्मी और खिलाड़ी, अपनी कला या खेल के लिए बहुत प्रसिद्ध तो हुए, लेकिन उन्हें उनके काम का उचित आर्थिक मूल्य या पहचान नहीं मिल पाई। ऐसे कई लोग अपना पूरा जीवन आर्थिक संकटों से जूझते हुए बिता देते हैं। प्रसिद्धि और आर्थिक संपन्नता का हमेशा सीधा संबंध नहीं होता है।

भाषा की बात

नीचे कुछ शब्द लिखे हैं जिनमें अलग-अलग प्रत्ययों के कारण बारीक अंतर है। इस अंतर को समझाने के लिए इन शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए:
  1. प्रेरणा, प्रेरक, प्रेरित
  2. संभव, संभावित, संभवतः
  3. उत्साह, उत्साहित, उत्साहवर्धक
Solution:
  1. प्रेरणा, प्रेरक, प्रेरित
    • प्रेरणा: हमें स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
    • प्रेरक: मेरे दादाजी हमेशा प्रेरक कहानियाँ सुनाते हैं।
    • प्रेरित: मुझे देशभक्तों के प्रसंग प्रेरित करते हैं।
  2. संभव, संभावित, संभवतः
    • संभव: आज माँ का आना संभव है।
    • संभावित: हमारी संभावित यात्रा कल शुरू होगी।
    • संभवतः: यह कार्य संभवतः आज नहीं होगा।
  3. उत्साह, उत्साहित, उत्साहवर्धक
    • उत्साह: छात्रों में परीक्षा को लेकर काफी उत्साह है।
    • उत्साहित: नई नौकरी मिलने पर वह बहुत उत्साहित था।
    • उत्साहवर्धक: शिक्षक ने छात्रों को उत्साहवर्धक भाषण दिया।

Common mistakes

  • Confusing fame with financial success.
  • Misinterpreting Dhanraj Pillay's 'short temper' without understanding his background.
  • Not recognizing the importance of humility and grounding despite achievements.

Revision tips

  • Read the interview transcript carefully to grasp Dhanraj Pillay's personality.
  • Focus on the connection between struggle, success, and humility.
  • Note down the key reasons for hockey's popularity and national status.
  • Practice the 'Bhasha ki Baat' section to reinforce vocabulary skills.

Practice MCQs

Q1. साक्षात्कार पढ़कर धनराज पिल्लै के स्वभाव के बारे में क्या पता चलता है?

Q2. धनराज पिल्लै को हॉकी खेलने के लिए शुरुआत में किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?

Q3. धनराज पिल्लै की माँ ने उन्हें प्रसिद्धि को कैसे संभालने की सीख दी?

Q4. मेजर ध्यानचंद को 'हॉकी का जादूगर' क्यों कहा जाता है?

Q5. हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल क्यों माना जाता है?

Frequently asked questions

यह पाठ किस बारे में है?

यह पाठ हॉकी खिलाड़ी धनराज पिल्लै के एक साक्षात्कार पर आधारित है, जिसमें उनके जीवन के संघर्षों, उनकी विनम्रता और प्रसिद्धि को संभालने के तरीके पर चर्चा की गई है।

धनराज पिल्लै को किस कारण से तुनुकमिजाज समझा जाता था?

धनराज पिल्लै को जीवन के कठिन संघर्षों और आर्थिक तंगी के कारण कभी-कभी असुरक्षित महसूस करने की वजह से तुनुकमिजाज समझा जाता था, हालांकि वे मूल रूप से सरल स्वभाव के व्यक्ति हैं।

मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर क्यों कहा जाता है?

मेजर ध्यानचंद को उनकी गेंद पर अद्भुत नियंत्रण और जादुई खेल शैली के कारण 'हॉकी का जादूगर' कहा जाता था, जिससे प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी भी चकित रह जाते थे।

हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल क्यों माना जाता है?

हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल इसलिए माना जाता है क्योंकि इस खेल ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, विशेषकर ओलंपिक में, कई स्वर्ण पदक दिलाकर प्रसिद्धि दिलाई है।

इस पाठ के NCERT समाधान छात्रों की मदद कैसे करते हैं?

ये समाधान छात्रों को धनराज पिल्लै की जीवन यात्रा, खेल में आने वाली कठिनाइयों, विनम्रता के महत्व और हॉकी के राष्ट्रीय खेल होने के कारणों को समझने में मदद करते हैं, जिससे परीक्षा की तैयारी आसान होती है।

भाषा की बात खंड में क्या सिखाया गया है?

भाषा की बात खंड में छात्रों को 'प्रेरणा', 'संभव', और 'उत्साह' जैसे शब्दों से बनने वाले विभिन्न रूपों (जैसे प्रेरक, प्रेरित, संभावित, संभवतः, उत्साहित, उत्साहवर्धक) का वाक्यों में प्रयोग सिखाया गया है।

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