कक्षा 7 हिंदी वसंत अध्याय 3: हिमालय की बेटियां - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 7 की हिंदी वसंत पुस्तक के अध्याय 3, 'हिमालय की बेटियां' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय नदियों के प्रति लेखक के गहरे लगाव और उनके उद्गम स्थल, हिमालय, के साथ उनके अनूठे संबंध की पड़ताल करता है। समाधान नदियों को केवल जलधाराओं के रूप में नहीं, बल्कि मां, बहन और बेटी जैसे विभिन्न मानवीय रूपों में देखने के लेखक के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हैं। इसमें सिंधु, ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों की विशेषताओं, काका कालेलकर द्वारा नदियों को 'लोकमाता' कहने के कारणों और हिमालय की यात्रा के दौरान लेखक द्वारा की गई प्रशंसाओं पर प्रकाश डाला गया है। इसके अतिरिक्त, यह खंड कविताओं के माध्यम से नदियों के चित्रण की तुलना, नदियों की सुरक्षा के उपाय और नदियों से होने वाले लाभों पर भी चर्चा करता है। ये समाधान छात्रों को नदियों के प्रति सम्मान और उनके संरक्षण के महत्व को समझने में मदद करेंगे, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
SubjectHindi Vasant
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 3

Chapter summary

कक्षा 7 हिंदी वसंत के अध्याय 3, 'हिमालय की बेटियां' के ये NCERT समाधान छात्रों को नदियों के प्रति लेखक के भावनात्मक जुड़ाव को समझने में मदद करते हैं। यह अध्याय नदियों को मानवीय रिश्तों जैसे बेटी, मां और बहन के रूप में चित्रित करता है। समाधान सिंधु और ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख नदियों की विशेषताओं, काका कालेलकर के 'लोकमाता' संबोधन के पीछे के कारणों और हिमालय से उनके उद्गम की यात्रा का विस्तृत विश्लेषण प्रदान करते हैं। यह छात्रों को नदियों के संरक्षण और उनके महत्व पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

Learning outcomes

  • नदियों को विभिन्न मानवीय रूपों में देखने के लेखक के दृष्टिकोण को समझना।
  • सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियों की प्रमुख विशेषताओं की पहचान करना।
  • काका कालेलकर द्वारा नदियों को 'लोकमाता' कहने के कारणों का विश्लेषण करना।
  • हिमालय और नदियों के बीच संबंध को समझना।
  • नदियों के संरक्षण के महत्व पर विचार करना।
  • भाषा के प्रयोग में उपमाओं और तुलनाओं के महत्व को पहचानना।

Topics covered

Paper topics

  • नदियों का मानवीकरण
  • हिमालय और नदियों का संबंध
  • सिंधु नदी
  • ब्रह्मपुत्र नदी
  • लोकमाता की अवधारणा
  • नदियों का उद्गम स्थल
  • नदियों का सांस्कृतिक महत्व
  • नदियों का संरक्षण
  • लेखक का भावनात्मक जुड़ाव
  • कालिदास और हिमालय
  • तुलनात्मक भाषा प्रयोग
  • नदियों से लाभ

Important topics

  • नदियों का मानवीकरण और लेखक का दृष्टिकोण
  • सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियों की विशेषताएं
  • काका कालेलकर द्वारा 'लोकमाता' का संबोधन
  • नदियों का संरक्षण और महत्व
  • हिमालय और नदियों का अनूठा रिश्ता

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

प्रश्न 1. नदियों को मां मानने की परंपरा हमारे यहां काफ़ी पुरानी है। लेकिन लेखक नागार्जुन उन्हें और किन रूपों में देखते हैं?
Solution: हमारे देश में नदियों को आदिकाल से ही मां का दर्जा दिया जाता रहा है, और उन्हें पूजनीय माना जाता है। लेखक नागार्जुन भी इस परंपरा को स्वीकार करते हैं, लेकिन वे नदियों को केवल मां के रूप में ही नहीं देखते। वे नदियों को अपनी छोटी बहनों, प्रेयसी और यहां तक कि हिमालय की बेटियों के रूप में भी देखते हैं। लेखक का नदियों के प्रति यह गहरा लगाव और आत्मीयता उन्हें इन रूपों में देखने के लिए प्रेरित करती है। वे नदियों के कलकल प्रवाह, उनके उछलते-कूदते रूप और उनके शांत, सौम्य व्यवहार का वर्णन करते हुए उन्हें विभिन्न मानवीय रूपों में चित्रित करते हैं।

प्रश्न 2

प्रश्न 2. सिंधु और ब्रह्मपुत्र की क्या विशेषताएं बताई गई हैं?
Solution: लेखक नागार्जुन ने सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियों को हिमालय की दो ऐसी जुड़वां बेटियों के रूप में वर्णित किया है जो हिमालय के हृदय से निकलती हैं। वे बताती हैं कि जिस तरह एक पिता अपनी बेटियों के लिए चिंतित रहता है, उसी तरह हिमालय भी इन नदियों के भविष्य को लेकर चिंतित रहता है। लेखक इन नदियों के विशाल और शक्तिशाली स्वरूप का वर्णन करते हैं, जो हिमालय के बर्फीले प्रदेशों से निकलकर मैदानों की ओर बहती हैं। उनकी यात्रा में वे कई घाटियों और मैदानों को पार करती हैं, और अंततः समुद्र में मिल जाती हैं।

प्रश्न 3

प्रश्न 3. काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता क्यों कहा है?
Solution: काका कालेलकर ने नदियों को 'लोकमाता' की उपाधि इसलिए दी है क्योंकि वे सदियों से धरती पर जीवन का पोषण करती आई हैं। नदियां न केवल प्यास बुझाती हैं, बल्कि कृषि, सिंचाई और अन्य मानवीय गतिविधियों के लिए जल प्रदान करती हैं। वे अपने जल से धरती को सींचकर उसे उपजाऊ बनाती हैं और जीवन का आधार बनती हैं। जिस प्रकार एक मां अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है और उनका कल्याण करती है, उसी प्रकार नदियां भी संपूर्ण लोक (जनता) का कल्याण करती हैं और उन्हें जीवन प्रदान करती हैं। इसलिए, उनके इस व्यापक और जीवनदायिनी योगदान के कारण उन्हें 'लोकमाता' कहा गया है।

प्रश्न 4

प्रश्न 4. हिमालय की यात्रा में लेखक ने किन - किन की प्रशंसा की है?
Solution: हिमालय की अपनी यात्रा के दौरान, लेखक नागार्जुन ने मुख्य रूप से दो प्रमुख तत्वों की हृदय से प्रशंसा की है: पहला, स्वयं विशाल और भव्य हिमालय पर्वत, और दूसरा, उस हिमालय से निकलने वाली नदियाँ। लेखक हिमालय के ऊँचे शिखरों, उसकी भव्यता और उसके रहस्यमय स्वरूप से बहुत प्रभावित हुए। साथ ही, उन्होंने नदियों के कलकल प्रवाह, उनके चंचल स्वभाव और उनके जीवनदायिनी गुणों की भी मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने नदियों को हिमालय की बेटियां कहकर उनके उद्गम स्थल के साथ उनके गहरे संबंध को भी रेखांकित किया।

प्रश्न 1

प्रश्न 1. नदियों और हिमालय पर अनेक कवियों ने कविताएं लिखी हैं। उन कविताओं का चयन कर उनकी तुलना पाठ में निहित निदयों के वर्णन से कीजिए।
Solution: यह प्रश्न छात्रों को नदियों और हिमालय पर आधारित अन्य काव्यों से तुलना करने के लिए प्रोत्साहित करता है। छात्र विभिन्न कवियों जैसे सुमित्रानंदन पंत, जयशंकर प्रसाद, या अन्य कवियों द्वारा रचित नदियों और हिमालय पर कविताओं का चयन कर सकते हैं। इन कविताओं में नदियों के चित्रण (जैसे उनकी पवित्रता, शक्ति, सौंदर्य, या जीवनदायिनी प्रकृति) की तुलना नागार्जुन के वर्णन से की जा सकती है। उदाहरण के लिए, पंत जी नदियों को 'कलकल बहती धारा' के रूप में चित्रित करते हैं, जबकि नागार्जुन उन्हें 'हिमालय की बेटियां' कहकर एक भावनात्मक रिश्ता जोड़ते हैं। इस तुलना से छात्र विभिन्न साहित्यिक दृष्टियों और भावों को समझ पाएंगे।

प्रश्न 2

प्रश्न 2. गोपालसिंह नेपाली की कविता ' हिमालय और हम ', रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता ' हिमालय' तथा जयशंकर प्रसाद की कविता ' हिमालय के आंगन में ' पढ़िए और तुलना कीजिए।
Solution: इस प्रश्न के उत्तर के लिए छात्रों को दी गई कविताओं को पढ़ना होगा और फिर उनकी तुलना 'हिमालय की बेटियां' पाठ में प्रस्तुत नदियों और हिमालय के वर्णन से करनी होगी। * **गोपालसिंह नेपाली की कविता ' हिमालय और हम '**: इसमें हिमालय के महत्व और मानव जीवन पर उसके प्रभाव का वर्णन हो सकता है। * **रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता ' हिमालय'**: दिनकर की कविता में हिमालय की शक्ति, गौरव और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ाव का भाव हो सकता है। * **जयशंकर प्रसाद की कविता ' हिमालय के आंगन में '**: प्रसाद की कविता में हिमालय को देवत्व और प्राचीनता से जोड़कर देखा जा सकता है। छात्रों को इन कविताओं में हिमालय और नदियों के चित्रण की तुलना नागार्जुन के वर्णन से करनी चाहिए, जिसमें नदियों को बेटियों के रूप में देखा गया है। यह तुलना हिमालय के प्रति विभिन्न कवियों के दृष्टिकोण और भावों को समझने में सहायक होगी।

प्रश्न 3

प्रश्न 3. यह लेख 1947 में लिखा गया था। तब से हिमालय से निकलनेवाली नदियों में क्या - क्या बदलाव आए हैं?
Solution: यह लेख 1947 में लिखा गया था, जो कि भारत की स्वतंत्रता का वर्ष था। तब से लेकर आज तक, हिमालय से निकलने वाली नदियों में कई महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख बदलाव निम्नलिखित हैं: 1. **प्रदूषण में वृद्धि**: औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि के कारण नदियों में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है। पहले की तुलना में अब इन नदियों का जल कई जगहों पर पीने योग्य नहीं रहा है। 2. **जल स्तर में परिवर्तन**: जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के पिघलने की दर में बदलाव आया है, जिससे नदियों के जल स्तर में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। कुछ नदियों में गर्मियों में पानी की कमी हो सकती है, जबकि बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है। 3. **बांधों का निर्माण**: नदियों पर बड़े-बड़े बांधों का निर्माण हुआ है, जिससे उनके प्राकृतिक प्रवाह में बाधा आई है और पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव पड़ा है। 4. **जल के उपयोग में वृद्धि**: सिंचाई, बिजली उत्पादन और औद्योगिक उपयोग के लिए नदियों के जल का दोहन काफी बढ़ गया है, जिससे उनके प्राकृतिक स्वरूप में परिवर्तन आया है। 5. **संरक्षण के प्रयास**: हालांकि, इन बदलावों के साथ-साथ नदियों को बचाने और उनके संरक्षण के लिए सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर कई प्रयास भी शुरू हुए हैं, जो पहले इतने व्यापक नहीं थे।

प्रश्न 4

प्रश्न 4. अपने संस्कृत शिक्षक से पूछिए कि कालिदास ने हिमालय को देवात्मा क्यों कहा है?
Solution: कालिदास ने हिमालय को 'देवात्मा' कहा है क्योंकि वे हिमालय को केवल एक पर्वत नहीं मानते थे, बल्कि उसे एक पवित्र और दिव्य स्थान मानते थे। 'देवात्मा' का अर्थ है 'देवताओं की आत्मा' या 'दिव्य आत्मा वाला'। कालिदास के अनुसार, हिमालय इतना ऊंचा, भव्य और पवित्र है कि वह देवताओं का निवास स्थान प्रतीत होता है। इसकी ऊंचाइयों पर देवत्व का वास है और यह प्रकृति की अद्भुत रचनाओं का प्रतीक है। हिमालय की शांति, शीतलता और भव्यता उसे एक आध्यात्मिक और दिव्य आभा प्रदान करती है, जिसके कारण कालिदास ने उसे 'देवात्मा' कहकर संबोधित किया है। यह उपाधि हिमालय के प्रति उनके गहरे सम्मान और उसकी अलौकिक सुंदरता के प्रति उनके आकर्षण को दर्शाती है।

प्रश्न 1

प्रश्न 1. लेखक ने हिमालय से निकलनेवाली नदियों को ममता भरी आंखों से देखते हुए उन्हें हिमालय की बेटियां कहा है। आप उन्हें क्या कहना चाहेंगे? नदियों की सुरक्षा के लिए कौन – कौन से कार्य हो रहे है? जानकारी प्राप्त करें और अपना सुझाव दें।
Solution: लेखक ने नदियों को 'हिमालय की बेटियां' कहकर उनके उद्गम स्थल से भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाया है। मैं नदियों को 'जीवनदायिनी', 'धरती की मां', 'प्रकृति का उपहार' या 'अमृत धारा' कहना चाहूंगा, क्योंकि वे हमें जीवन प्रदान करती हैं और धरती को हरा-भरा रखती हैं। **नदियों की सुरक्षा के लिए हो रहे कार्य:** * **नमामि गंगे परियोजना**: गंगा नदी को स्वच्छ और अविरल बनाने के लिए यह एक प्रमुख सरकारी पहल है। * **राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (NRCP)**: यह योजना देश की विभिन्न प्रमुख नदियों के प्रदूषण को कम करने के लिए चलाई जा रही है। * **जल उपचार संयंत्रों की स्थापना**: शहरों और उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी को नदियों में जाने से पहले उपचारित करने के लिए संयंत्र लगाए जा रहे हैं। * **वृक्षारोपण अभियान**: नदियों के किनारे वृक्षारोपण करके मिट्टी के कटाव को रोका जा रहा है और जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। * **जन जागरूकता अभियान**: लोगों को नदियों के महत्व और उन्हें स्वच्छ रखने के बारे में जागरूक किया जा रहा है। **मेरे सुझाव:** 1. सभी उद्योगों और घरों से निकलने वाले अपशिष्ट जल का शोधन अनिवार्य किया जाए। 2. नदियों के किनारे प्लास्टिक और अन्य हानिकारक कचरा फेंकने पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो। 3. किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग को कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, ताकि वे नदियों में न मिलें। 4. नदियों के पुनर्जीवन और उनके प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने के लिए स्थानीय समुदायों को जोड़ा जाए। 5. स्कूलों के पाठ्यक्रम में नदी संरक्षण को एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया जाए।

प्रश्न 2

प्रश्न 2. नदियों से होनेवाले लाभों के विषय में चर्चा कीजिए और इस विषय पर बीस पंक्तियों का निबंध लिखिए।
Solution: नदियों से मानव जीवन और पर्यावरण को अनगिनत लाभ होते हैं। वे केवल जल का स्रोत नहीं हैं, बल्कि जीवन का आधार हैं। **नदियों से होने वाले लाभ:** 1. **पेयजल**: नदियाँ शहरों और गाँवों के लिए पीने के पानी का सबसे बड़ा स्रोत हैं। 2. **सिंचाई**: कृषि के लिए पानी की आपूर्ति नदियों से ही होती है, जिससे फसलें उगती हैं और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है। 3. **बिजली उत्पादन**: नदियों पर बांध बनाकर जलविद्युत (हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर) उत्पन्न की जाती है, जो एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है। 4. **परिवहन**: कई नदियाँ जलमार्ग के रूप में उपयोग की जाती हैं, जिससे माल और यात्रियों का परिवहन सस्ता और सुगम होता है। 5. **मत्स्य पालन**: नदियाँ मछलियों का घर होती हैं, जो लाखों लोगों के लिए भोजन और आजीविका का स्रोत हैं। 6. **पर्यावरण संतुलन**: नदियाँ अपने आसपास के वातावरण को हरा-भरा रखती हैं, जैव विविधता को बनाए रखती हैं और जलवायु को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। 7. **पर्यटन और मनोरंजन**: सुंदर नदियाँ और उनके किनारे पर्यटन को बढ़ावा देते हैं और लोगों को मनोरंजन के अवसर प्रदान करते हैं। 8. **धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व**: कई नदियाँ पवित्र मानी जाती हैं और उनका धार्मिक तथा सांस्कृतिक महत्व है, जो परंपराओं और त्योहारों का आधार बनती हैं। 9. **औद्योगिक उपयोग**: उद्योगों को पानी की आपूर्ति के लिए भी नदियाँ महत्वपूर्ण हैं। 10. **भूमि की उर्वरता**: बाढ़ के समय नदियाँ अपने साथ उपजाऊ गाद लाती हैं, जो भूमि को उपजाऊ बनाती है। **(लगभग 20 पंक्तियों का निबंध इसी जानकारी को विस्तृत करके लिखा जा सकता है, जिसमें इन लाभों को उदाहरणों सहित समझाया जाए और नदियों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया जाए।)**

प्रश्न 1

प्रश्न 1. अपनी बात कहते हुए लेखक ने अनेक समानताएं प्रस्तुत की हैं। ऐसी तुलना से अर्थ अधिक स्पष्ट एवं सुंदर बन जाता है। उदाहरण –
  1. संभ्रांत महिला की भांति वे प्रतीत होती थीं।
  2. मां और दादी, मौसी और मामी की गोद की तरह उनकी धारा में डुबिकयां लगाया करता।
अन्य पाठों से ऐसे पांच तुलनात्मक प्रयोग निकालकर कक्षा में सुनाइए और उन सुंदर प्रयोगों को कॉपी में भी लिखिए।
Solution: लेखक अपनी बात को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की उपमाओं और तुलनाओं का प्रयोग करते हैं। पाठ में दी गई दो तुलनाएं नदियों के प्रति उनके गहरे लगाव और कल्पनाशीलता को दर्शाती हैं: 1. **संभ्रांत महिला की भांति वे प्रतीत होती थीं**: यहाँ लेखक नदी के शांत, सौम्य और गरिमामय प्रवाह की तुलना एक संभ्रांत (उच्च कुल की, सभ्य और प्रतिष्ठित) महिला से करते हैं। यह तुलना नदी के सौंदर्य और उसकी शालीनता को उजागर करती है। 2. **मां और दादी, मौसी और मामी की गोद की तरह उनकी धारा में डुबिकयां लगाया करता**: इस तुलना में लेखक नदियों की धारा को अपने बचपन की उन सुखद स्मृतियों से जोड़ते हैं जब वे अपनी मां, दादी, मौसी और मामी की गोद में खेलते थे। यह तुलना नदियों के साथ अपने बचपन के गहरे जुड़ाव, सुरक्षा और आनंद की भावना को व्यक्त करती है। **अन्य पाठों से तुलनात्मक प्रयोग (उदाहरण):** 1. **'मधुर-मधुर मेरे दीपक जल' (निराला)**: 'मधुर-मधुर मेरे दीपक जल, युग-युग की अवसाद-तिमिर में, नव जीवन-आशा पर खुलकर।' यहाँ दीपक को आशा और प्रकाश के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो अंधकार को दूर करता है। 2. **'यह सबसे कठिन समय है' (जापानी लोककथा)**: 'चिड़िया चोंच में तिनका दबाए, जो उड़ रही है, केवल तिनका भर, अपनी गर्दन की डाँट से, जो खोंस ली है, उसने, वह तिनका भी, अपनी चोंच में दबाए, उड़ रही है।' यहाँ चिड़िया के छोटे से तिनके को बचाने के प्रयास को कठिन समय में भी आशा और कर्मठता के प्रतीक के रूप में दिखाया गया है। 3. **'कामचोर' (इसाअत पतेह)**: 'जैसे किसी ने खिड़की का पर्दा हटा दिया हो।' यहाँ अचानक हुई सफाई को ऐसे प्रस्तुत किया गया है जैसे किसी ने खिड़की का पर्दा हटाकर कमरे में उजाला कर दिया हो, जो एक अप्रत्याशित और सुखद परिवर्तन का बोध कराता है। 4. **'पर्वतारोहण' (अनुभव)**: 'पहाड़ एक विशालकाय दानव की तरह खड़ा था।' यहाँ पहाड़ की विशालता और भयावहता को दर्शाने के लिए उसकी तुलना एक दानव से की गई है। 5. **'नील नदी का उद्गम' (यात्रा वृत्तांत)**: 'सूरज आग के गोले की तरह तप रहा था।' यहाँ सूरज की अत्यधिक गर्मी को समझाने के लिए उसकी तुलना आग के गोले से की गई है। ये तुलनात्मक प्रयोग भाषा को सजीव बनाते हैं और पाठक को विषय को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं।

Common mistakes

  • नदियों को केवल जल स्रोत के रूप में देखना, उनके सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को अनदेखा करना।
  • लेखक के काव्यात्मक वर्णन और नदियों के प्रति उनके व्यक्तिगत जुड़ाव को समझने में कठिनाई।
  • नदियों के संरक्षण के प्रति उदासीनता।
  • भाषा के प्रयोग में तुलनात्मक शैली के महत्व को न समझना।

Revision tips

  • लेखक के नदियों के प्रति दृष्टिकोण को समझने के लिए पाठ को ध्यान से पढ़ें।
  • सिंधु और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों की विशेषताओं को सूचीबद्ध करें।
  • काका कालेलकर के 'लोकमाता' कहने के तर्क पर विचार करें।
  • नदियों के संरक्षण के उपायों पर चर्चा करें और अपने सुझाव दें।
  • पाठ में प्रयुक्त तुलनात्मक भाषा के उदाहरणों को पहचानें और उनका अभ्यास करें।

Practice MCQs

Q1. लेखक नागार्जुन नदियों को मां के अलावा और किन रूपों में देखते हैं?

Q2. लेखक के अनुसार सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियों की क्या विशेषता है?

Q3. काका कालेलकर ने नदियों को 'लोकमाता' क्यों कहा है?

Q4. लेखक ने हिमालय की यात्रा में किनकी प्रशंसा की है?

Q5. पाठ में 'संभ्रांत महिला की भांति वे प्रतीत होती थीं' वाक्य में 'वे' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?

Frequently asked questions

कक्षा 7 हिंदी वसंत के अध्याय 3 का क्या शीर्षक है?

कक्षा 7 हिंदी वसंत के अध्याय 3 का शीर्षक 'हिमालय की बेटियां' है।

लेखक नागार्जुन नदियों को किन रूपों में देखते हैं?

लेखक नागार्जुन नदियों को मां के रूप में तो देखते ही हैं, साथ ही उन्हें बहन और बेटी के रूप में भी देखते हैं।

सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियों की क्या विशेषता बताई गई है?

लेखक के अनुसार सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियां हिमालय की उन दो जुड़वां बेटियों की तरह हैं जो हिमालय के हृदय से निकलती हैं।

नदियों को 'लोकमाता' कहने का क्या अर्थ है?

नदियों को 'लोकमाता' कहने का अर्थ है कि वे युगों-युगों से धरती पर जीवन का पोषण करती आई हैं और मानव जाति के लिए कल्याणकारी रही हैं, ठीक उसी तरह जैसे एक मां अपने बच्चों का पालन करती है।

इस अध्याय के समाधान छात्रों की परीक्षा तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं, महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं, और नदियों के महत्व तथा संरक्षण जैसे विषयों पर उनकी सोच विकसित करते हैं, जो परीक्षा में पूछे जा सकते हैं।

क्या इस अध्याय में नदियों के संरक्षण पर भी चर्चा की गई है?

हाँ, 'अनुमान और कल्पना' खंड में नदियों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी प्राप्त करने और सुझाव देने के लिए कहा गया है, जो संरक्षण के महत्व को दर्शाता है।

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