CBSE Class 7 Hindi Vasant Chapter 19: आश्रम का अनुमानित ब्याय (Ashram ka Anumanit Vyay) NCERT Solutions

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CBSE Class 7 Hindi Vasant Chapter 19, 'Ashram ka Anumanit Vyay' (Estimated Expenses of the Ashram), offers practical insights into financial planning and budgeting, inspired by Mahatma Gandhi's ashram management. The solutions explore the significance of detailed record-keeping and the reasoning behind acquiring essential tools. Students will learn to construct an estimated budget for a new initiative, such as a children's ashram, emphasizing meticulous planning. The chapter also incorporates language learning, focusing on suffix formation ('-it' and '-ik') and compound words. These NCERT Solutions aim to enhance students' understanding of financial responsibility, self-reliance, and the importance of thorough planning, thereby supporting their academic preparation.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
SubjectHindi Vasant
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 19

Chapter summary

Chapter 19 of Hindi Vasant for Class 7, 'Ashram ka Anumanit Vyay', focuses on the financial management and budgeting principles observed in an ashram setting, particularly through the lens of Mahatma Gandhi's practices. The NCERT Solutions cover exercises related to understanding the necessity of professional tools, analyzing Gandhi's financial acumen from biographical accounts, and constructing a hypothetical budget for a new ashram. It also explores personal skills and reasons for not learning certain tasks, and infers ashram objectives from its budget. Language-based questions on suffixes and compound words are also addressed.

Learning outcomes

  • Understand the importance of budgeting and financial planning in managing an institution.
  • Analyze the rationale behind purchasing specific tools and equipment for an ashram.
  • Develop skills in creating an estimated budget for a new project.
  • Infer the objectives and operational methods of an ashram from its financial estimates.
  • Identify and understand the formation of words using suffixes like '-it' and '-ik'.
  • Recognize and analyze compound words formed by combining two words.

Topics covered

Paper topics

  • Budget Estimation
  • Financial Planning
  • Ashram Management
  • Professional Tools
  • Record Keeping
  • Suffix Formation (-it)
  • Suffix Formation (-ik)
  • Compound Words
  • Word Formation
  • Grammar

Important topics

  • Budget Estimation and Planning
  • Understanding Ashram Objectives from Budget
  • Suffix Formation (-it and -ik)
  • Compound Word Analysis
  • Financial Prudence

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

हमारे यहाँ बहुत से काम लोग खुद नहीं करके किसी पेशेवर कारीगर से करवाते हैं। लेकिन गांधी जी पेशेवर कारीगरों के उपयोग में आनेवाले औजार- छेनी, हथौड़े, बसूले इत्यादि क्यों खरीदना चाहते होंगे?
Solution:

गांधी जी आश्रम के लिए एक विस्तृत बजट तैयार कर रहे थे। वे समझते थे कि आश्रम को आत्मनिर्भर और सुचारू रूप से चलाने के लिए विभिन्न प्रकार के कार्यों को करने की आवश्यकता होगी। पेशेवर कारीगरों द्वारा उपयोग किए जाने वाले औजार जैसे छेनी, हथौड़े, और बसूले, लकड़ी का काम करने, मरम्मत करने या अन्य हस्तशिल्प बनाने जैसे कार्यों के लिए आवश्यक होते हैं। गांधी जी शायद यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि आश्रम में ऐसे सभी आवश्यक औजार उपलब्ध हों ताकि सदस्य स्वयं ही विभिन्न प्रकार के काम कर सकें और बाहरी कारीगरों पर निर्भरता कम हो। इससे आश्रम की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और सदस्यों को व्यावहारिक कौशल भी प्राप्त होंगे।

प्रश्न 2

गांधी जी ने अखिल भारतीय कांग्रेस सहित कई संस्थाओं व आंदोलनों का नेतृत्व किया। उनकी जीवनी या उनपर लिखी गई किताबों से उन अंशों को चुनिए जिनसे हिसाब-किताब के प्रति गांधी जी की चुस्ती का पता चलता है।
Solution:

गांधी जी अपने जीवन में हिसाब-किताब के प्रति अत्यंत सजग और चुस्त थे। उनकी जीवनी और उन पर लिखी गई किताबों में ऐसे कई प्रसंग मिलते हैं जो उनकी इस विशेषता को दर्शाते हैं:

  1. सादा जीवन और मितव्ययिता: गांधी जी स्वयं बहुत सादा जीवन जीते थे और हर खर्च का हिसाब रखते थे। वे फिजूलखर्ची के सख्त विरोधी थे और आश्रम के धन का उपयोग अत्यंत सोच-समझकर करते थे।
  2. व्यक्तिगत हिसाब-किताब: वे अपने व्यक्तिगत खर्चों का भी पूरा हिसाब रखते थे, जिसमें उनके कपड़ों, भोजन और यात्रा व्यय शामिल थे। वे अपनी डायरी में इन सबका लेखा-जोखा लिखते थे।
  3. आश्रम का प्रबंधन: आश्रम चलाते समय, वे प्रत्येक वस्तु के मूल्य और उपयोग का ध्यान रखते थे। वे यह सुनिश्चित करते थे कि आश्रम का बजट संतुलित रहे और आय से अधिक व्यय न हो।
  4. ईमानदारी और पारदर्शिता: गांधी जी हिसाब-किताब में पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता बरतते थे। वे कभी भी किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या छिपाने की प्रवृत्ति को पसंद नहीं करते थे।
  5. छोटी से छोटी राशि का महत्व: वे छोटी से छोटी राशि के महत्व को समझते थे और उसे व्यर्थ नहीं जाने देते थे। यह उनकी वित्तीय प्रबंधन की गहरी समझ को दर्शाता है।

इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि गांधी जी न केवल बड़े आंदोलनों के नेता थे, बल्कि वे हिसाब-किताब के मामले में भी अत्यंत कुशल और जिम्मेदार व्यक्ति थे।

प्रश्न 3

मान लीजिए, आपको कोई बाल आश्रम खोलना है। इस बजट से प्रेरणा लेते हुए उसका अनुमानित बजट बनाइए। इस बजट में दिए गए किन-किन मदों पर आप कितना खर्च करना चाहेंगे। किन नयी मदों को जोडना-हटाना चाहेंगे?
Solution:

यदि मुझे एक बाल आश्रम खोलना हो, तो मैं इस दिए गए बजट से प्रेरणा लेते हुए एक अनुमानित बजट तैयार करूँगा। मैं निम्नलिखित मदों पर विचार करूँगा और कुछ नई मदें भी जोड़ना चाहूँगा:

बाल आश्रम का अनुमानित बजट (उदाहरण):

मद का नाम अनुमानित व्यय (रुपये में) टिप्पणी
भवन किराया/निर्माण 50,000 बच्चों के रहने और खेलने के लिए पर्याप्त जगह।
भोजन (प्रति माह) 30,000 पौष्टिक और संतुलित आहार।
शिक्षा सामग्री (पुस्तकें, स्टेशनरी) 15,000 पढ़ाई के लिए आवश्यक सामग्री।
खेलकूद सामग्री 10,000 शारीरिक विकास के लिए खेल के उपकरण।
चिकित्सा व्यय (दवाइयाँ, डॉक्टर) 10,000 बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल।
कर्मचारी वेतन (शिक्षक, सहायक, रसोइया) 40,000 योग्य और अनुभवी स्टाफ।
आंतरिक सजावट और फर्नीचर 20,000 बच्चों के अनुकूल माहौल।
आकस्मिक व्यय (अनपेक्षित खर्चे) 15,000 किसी भी आपात स्थिति के लिए।
नई मदें:
कौशल विकास कार्यशालाएं (कला, संगीत, नृत्य) 25,000 बच्चों की रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए।
परिवहन (यदि आवश्यक हो) 10,000 बच्चों को स्कूल या अन्य गतिविधियों के लिए ले जाने हेतु।
कुल अनुमानित व्यय: 2,25,000 (यह एक अनुमानित आंकड़ा है, वास्तविक व्यय भिन्न हो सकता है)

जोड़ने या हटाने वाली मदें:

  • जोड़ना: मैं कौशल विकास कार्यशालाओं और परिवहन जैसी मदों को जोड़ना चाहूँगा ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सके।
  • हटाना/कम करना: यदि आश्रम का उद्देश्य केवल बुनियादी शिक्षा और आश्रय प्रदान करना है, तो कुछ विलासितापूर्ण मदों (जैसे अत्यधिक सजावट) को कम किया जा सकता है या हटाया जा सकता है। साथ ही, यदि भवन स्वयं का हो तो किराए का खर्च नहीं लगेगा।

यह बजट बच्चों की आवश्यकताओं और आश्रम के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

प्रश्न 4

आपको कई बार लगता होगा कि आप कई छोटे-मोटे काम (जैसे-घर की पुताई, दूध दुहना, खाट बुनना) करना चाहें तो कर सकते हैं। ऐसे कामों की सूची बनाइए, जिन्हें आप चाहकर भी नहीं सीख पाते। इसके क्या कारण रहे होंगे? उन कामों की सूची भी बनाइए, जिन्हें आप सीखकर ही छोड़ेंगे।
Solution:

यह सच है कि कुछ काम ऐसे लगते हैं जिन्हें हम आसानी से सीख सकते हैं, लेकिन कुछ काम ऐसे भी होते हैं जिन्हें सीखना मुश्किल होता है।

ऐसे काम जिन्हें मैं चाहकर भी नहीं सीख पाता/पाती:

  • जटिल मशीनरी चलाना: जैसे कि भारी निर्माण मशीनें या उन्नत औद्योगिक मशीनें।
  • विशेषज्ञ चिकित्सा प्रक्रियाएं: जैसे सर्जरी करना या जटिल बीमारियों का निदान करना।
  • उच्च स्तरीय कोडिंग या सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट: बहुत उन्नत प्रोग्रामिंग भाषाएं और जटिल सॉफ्टवेयर बनाना।
  • विमान उड़ाना: एक पायलट बनना जिसके लिए विशेष प्रशिक्षण और लाइसेंस की आवश्यकता होती है।
  • अंतरिक्ष यान का संचालन: यह अत्यंत विशिष्ट और तकनीकी ज्ञान की मांग करता है।

इन कामों को न सीख पाने के कारण:

  • विशेषज्ञता और प्रशिक्षण की आवश्यकता: इन कामों के लिए वर्षों के गहन अध्ययन, विशेष प्रशिक्षण और अनुभव की आवश्यकता होती है।
  • उच्च लागत: प्रशिक्षण और आवश्यक उपकरण बहुत महंगे हो सकते हैं।
  • शारीरिक या मानसिक क्षमता की सीमा: कुछ कार्यों के लिए विशेष शारीरिक क्षमता या मानसिक एकाग्रता की आवश्यकता होती है जो हर किसी के पास नहीं होती।
  • अवसरों की कमी: ऐसे कामों को सीखने के अवसर या मार्गदर्शन आसानी से उपलब्ध नहीं होते।
  • सुरक्षा संबंधी चिंताएं: कुछ काम खतरनाक हो सकते हैं और उनके लिए कड़े सुरक्षा नियमों का पालन करना पड़ता है।

ऐसे काम जिन्हें मैं सीखकर ही छोड़ूँगा/छोड़ूँगी:

  • एक नई भाषा सीखना: जैसे कि स्पेनिश या फ्रेंच।
  • खाना पकाना: विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाना सीखना।
  • कंप्यूटर की मरम्मत: हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की सामान्य समस्याओं को ठीक करना।
  • बुनियादी सिलाई या कढ़ाई: छोटे-मोटे कपड़े ठीक करना या कुछ डिजाइन बनाना।
  • एक वाद्य यंत्र बजाना: जैसे गिटार या कीबोर्ड।

मैं इन कामों को सीखना चाहूँगा/चाहूँगी क्योंकि ये मेरे व्यक्तिगत विकास में सहायक होंगे और दैनिक जीवन में उपयोगी साबित होंगे।

प्रश्न 5

इस अनुमानित बजट को गहराई से पढ़ने के बाद आश्रम के उद्देश्यों और कार्यप्रणाली के बारे में क्या-क्या अनुमान लगाए जा सकते हैं?
Solution:

इस अनुमानित बजट का गहराई से अध्ययन करने पर आश्रम के उद्देश्यों और कार्यप्रणाली के बारे में निम्नलिखित अनुमान लगाए जा सकते हैं:

  1. आत्मनिर्भरता का उद्देश्य: बजट में औजारों (जैसे छेनी, हथौड़े, बसूले) की खरीद का उल्लेख यह दर्शाता है कि आश्रम का उद्देश्य आत्मनिर्भर बनना है, जहाँ सदस्य स्वयं ही आवश्यक वस्तुओं का निर्माण या मरम्मत कर सकें।
  2. व्यावहारिक शिक्षा और कौशल विकास: विभिन्न प्रकार के औजारों और सामग्रियों की खरीद से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि आश्रम केवल आध्यात्मिक या बौद्धिक विकास पर ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल सिखाने पर भी जोर देता है।
  3. सादा जीवन और मितव्ययिता: बजट में भोजन, वस्त्र और आवास जैसी बुनियादी आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो सादा जीवन जीने और अनावश्यक खर्चों से बचने के उद्देश्य को दर्शाता है।
  4. सामुदायिक जीवन और सहयोग: आश्रम का संचालन संभवतः एक सामुदायिक प्रयास है, जहाँ सभी सदस्य मिलकर काम करते हैं और एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। बजट में कर्मचारियों के वेतन का उल्लेख भी इसी ओर इशारा करता है।
  5. स्वास्थ्य और कल्याण: चिकित्सा व्यय के लिए प्रावधान यह दर्शाता है कि आश्रम अपने सदस्यों के स्वास्थ्य और कल्याण का भी ध्यान रखता है।
  6. वित्तीय प्रबंधन और योजना: एक विस्तृत बजट का होना यह साबित करता है कि आश्रम के संचालक वित्तीय प्रबंधन और भविष्य की योजना बनाने के महत्व को समझते हैं।
  7. सेवा और परोपकार: यदि यह आश्रम किसी विशेष समुदाय या जरूरतमंदों की सेवा के लिए स्थापित किया गया है, तो बजट में उस दिशा में किए जाने वाले खर्चों का भी प्रावधान हो सकता है।

संक्षेप में, यह बजट एक ऐसे आश्रम की तस्वीर पेश करता है जो आत्मनिर्भरता, व्यावहारिक कौशल, सादा जीवन, सामुदायिक भावना और सुनियोजित प्रबंधन पर आधारित है।

भाषा की बात - प्रश्न 1

अनुमानित शब्द अनुमान में इत प्रत्यय जोड़कर बना है। इत प्रत्यय जोड़ने पर अनुमान का न नित में परिवर्तित हो जाता है। नीचे-इत प्रत्यय वाले कुछ और शब्द लिखे हैं। उनमें मूल शब्द पहचानिए और देखिए कि क्या परिवर्तन हो रहा है- प्रमाणित झंकृत व्यथित शिक्षित द्रवित मोहित मुखरित चर्चित

इत प्रत्यय की भाँति इक प्रत्यय से भी शब्द बनते हैं और तब शब्द के पहले अक्षर में भी परिवर्तन हो जाता है, जैसे-सप्ताह + इक = साप्ताहिक । नीचे इक प्रत्यय से बनाए गए शब्द दिए गए हैं। इनमें मूल शब्द पहचानिए और देखिए कि क्या परिवर्तन हो रहा है- मौखिक नैतिक संवैधानिक पौराणिक प्राथमिक दैनिक

Solution:

आइए, दिए गए शब्दों में मूल शब्द और प्रत्यय पहचानें और उनमें होने वाले परिवर्तन को समझें:

1. 'इत' प्रत्यय वाले शब्द:

  • प्रमाणित: मूल शब्द - प्रमाण, प्रत्यय - इत। परिवर्तन: 'ण' का 'णि' में परिवर्तन नहीं हुआ, 'प्रमाण' + 'इत' = 'प्रमाणित'। (यहाँ 'न' का 'नित' में परिवर्तन नहीं हुआ, बल्कि 'प्रमाण' शब्द में 'इत' जुड़ा है।)
  • झंकृत: मूल शब्द - झंकार, प्रत्यय - इत। परिवर्तन: 'झंकार' + 'इत' = 'झंकृत'। (यहाँ 'आ' की मात्रा हटकर 'इत' जुड़ा है।)
  • व्यथित: मूल शब्द - व्यथा, प्रत्यय - इत। परिवर्तन: 'व्यथा' + 'इत' = 'व्यथित'। (यहाँ 'आ' की मात्रा हटकर 'इत' जुड़ा है।)
  • शिक्षित: मूल शब्द - शिक्षा, प्रत्यय - इत। परिवर्तन: 'शिक्षा' + 'इत' = 'शिक्षित'। (यहाँ 'आ' की मात्रा हटकर 'इत' जुड़ा है।)
  • द्रवित: मूल शब्द - द्रव, प्रत्यय - इत। परिवर्तन: 'द्रव' + 'इत' = 'द्रवित'। (यहाँ कोई विशेष परिवर्तन नहीं, बस 'इत' जुड़ा है।)
  • मोहित: मूल शब्द - मोह, प्रत्यय - इत। परिवर्तन: 'मोह' + 'इत' = 'मोहित'। (यहाँ कोई विशेष परिवर्तन नहीं, बस 'इत' जुड़ा है।)
  • मुखरित: मूल शब्द - मुखर, प्रत्यय - इत। परिवर्तन: 'मुखर' + 'इत' = 'मुखरित'। (यहाँ कोई विशेष परिवर्तन नहीं, बस 'इत' जुड़ा है।)
  • चर्चित: मूल शब्द - चर्चा, प्रत्यय - इत। परिवर्तन: 'चर्चा' + 'इत' = 'चर्चित'। (यहाँ 'आ' की मात्रा हटकर 'इत' जुड़ा है।)

'इत' प्रत्यय के प्रयोग में सामान्य परिवर्तन: 'इत' प्रत्यय लगने पर कई बार मूल शब्द के अंत में 'आ' की मात्रा हट जाती है (जैसे शिक्षा -> शिक्षित) या कभी-कभी शब्द के अंत में 'न' का 'नित' हो जाता है (जैसा कि 'अनुमान' के उदाहरण में दिया गया है, हालांकि यह हमेशा नहीं होता)।

2. 'इक' प्रत्यय वाले शब्द:

  • मौखिक: मूल शब्द - मुख, प्रत्यय - इक। परिवर्तन: 'मु' का 'मौ' हो गया (उ का औ हो गया)। 'मुख' + 'इक' = 'मौखिक'।
  • नैतिक: मूल शब्द - नीति, प्रत्यय - इक। परिवर्तन: 'नी' का 'नै' हो गया (ई का ऐ हो गया)। 'नीति' + 'इक' = 'नैतिक'।
  • संवैधानिक: मूल शब्द - संविधान, प्रत्यय -इक। परिवर्तन: 'संवि' का 'संवै' हो गया (इ का ऐ हो गया)। 'संविधान' + 'इक' = 'संवैधानिक'।
  • पौराणिक: मूल शब्द - पुराण, प्रत्यय -इक। परिवर्तन: 'पु' का 'पौ' हो गया (उ का औ हो गया)। 'पुराण' + 'इक' = 'पौराणिक'।
  • प्राथमिक: मूल शब्द - प्रथम, प्रत्यय -इक। परिवर्तन: 'प्रथ' का 'प्राथ' हो गया (अ का आ हो गया)। 'प्रथम' + 'इक' = 'प्राथमिक'।
  • दैनिक: मूल शब्द - दिन, प्रत्यय -इक। परिवर्तन: 'दि' का 'दै' हो गया (इ का ऐ हो गया)। 'दिन' + 'इक' = 'दैनिक'।

'इक' प्रत्यय के प्रयोग में सामान्य परिवर्तन: 'इक' प्रत्यय लगने पर मूल शब्द के पहले अक्षर में अक्सर परिवर्तन होता है। यह परिवर्तन स्वर संधि के नियमों के अनुसार होता है, जैसे 'उ' का 'औ', 'ई' का 'ऐ', 'अ' का 'आ' आदि हो जाता है।

भाषा की बात - प्रश्न 2

बैलगाड़ी और घोड़ागाड़ी शब्द दो शब्दों को जोड़ने से बने हैं। इसमें दूसरा शब्द प्रधान है, यानी शब्द का प्रमुख अर्थ दूसरे शब्द पर निर्भर करता है। ऐसे ही कुछ और शब्द लिखिए।
Solution:

बैलगाड़ी और घोड़ागाड़ी जैसे शब्द दो शब्दों के मेल से बने हैं, जिन्हें यौगिक शब्द कहते हैं। इनमें दूसरा शब्द (गाड़ी) प्रधान होता है और पहले शब्द (बैल, घोड़ा) से यह पता चलता है कि वह गाड़ी किस प्रकार की है या किससे चलती है। ऐसे ही कुछ और शब्द निम्नलिखित हैं:

  • रेलगाड़ी: रेल + गाड़ी (रेल पर चलने वाली गाड़ी)
  • हाथीगाड़ा: हाथी + गाड़ा (हाथी द्वारा खींचा जाने वाला गाड़ी)
  • शब्दकोश: शब्द + कोश (शब्दों का कोश)
  • राजपुत्र: राज + पुत्र (राजा का पुत्र)
  • वनमानुष: वन + मानुष (वन में रहने वाला मानुष)
  • जलयान: जल + यान (जल में चलने वाला यान)
  • वायुयान: वायु + यान (वायु में उड़ने वाला यान)
  • गृहकार्य: गृह + कार्य (घर का कार्य)
  • पाठशाला: पाठ + शाला (पढ़ने का स्थान)

इन सभी शब्दों में, दूसरा शब्द (गाड़ी, कोश, पुत्र, मानुष, यान, कार्य, शाला) मुख्य अर्थ को दर्शाता है, जबकि पहला शब्द उसकी विशेषता या प्रकार बताता है।

Common mistakes

  • Underestimating the cost of essential tools and materials.
  • Failing to account for unforeseen expenses in a budget.
  • Not clearly defining the purpose and scope of new projects when budgeting.
  • Difficulty in understanding the grammatical rules for suffix formation.
  • Overlooking the significance of detailed record-keeping in financial management.

Revision tips

  • Carefully review the sample budget provided in the chapter to understand its components.
  • Practice creating a hypothetical budget for a similar institution, considering various expenses.
  • Pay close attention to the explanations of suffix formation ('-it', '-ik') and compound words.
  • Reflect on the connection between the ashram's budget and its overall objectives.
  • Discuss with peers or teachers any doubts regarding financial planning or language concepts.

Practice MCQs

Q1. गांधी जी पेशेवर कारीगरों के लिए कौन से औजार खरीदना चाहते थे?

Q2. आश्रम के अनुमानित बजट से किस बात का पता चलता है?

Q3. 'अनुमानित' शब्द में कौन सा प्रत्यय लगा है?

Q4. 'साप्ताहिक' शब्द में मूल शब्द और प्रत्यय क्या हैं?

Q5. बैलगाड़ी शब्द किन दो शब्दों के मेल से बना है?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह समाधान कक्षा 7 के हिंदी वसंत पाठ्यक्रम के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 19 'आश्रम का अनुमानित ब्याय' पर केंद्रित हैं।

आश्रम का अनुमानित बजट क्यों महत्वपूर्ण है?

अनुमानित बजट आश्रम के उद्देश्यों, उसकी कार्यप्रणाली और आवश्यक संसाधनों की योजना बनाने में मदद करता है, जिससे वित्तीय प्रबंधन सुचारू रूप से हो सके।

क्या इन समाधानों में भाषा से संबंधित प्रश्न भी शामिल हैं?

हाँ, इन समाधानों में 'इत' और 'इक' जैसे प्रत्ययों से शब्द निर्माण और बैलगाड़ी जैसे यौगिक शब्दों के विश्लेषण से संबंधित भाषा के प्रश्न भी शामिल हैं।

गांधी जी पेशेवर कारीगरों के औजार क्यों खरीदना चाहते थे?

गांधी जी आश्रम में आत्मनिर्भरता और विभिन्न कार्यों को कुशलतापूर्वक करने के लिए आवश्यक औजारों, जैसे छेनी, हथौड़े, बसूले आदि, को खरीदना चाहते थे।

यह समाधान छात्रों की परीक्षा तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान अध्याय की अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं, बजट बनाने की प्रक्रिया समझाते हैं, और भाषा के नियमों को सरल बनाते हैं, जिससे छात्रों को परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलती है।

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