CBSE Class 7 Hindi Vasant Chapter 17: Veer Kunwar Singh NCERT Solutions
This chapter, 'Veer Kunwar Singh', from CBSE Class 7 Hindi Vasant, delves into the life and contributions of a prominent freedom fighter of the 1857 revolt. The NCERT Solutions provide detailed answers to questions based on the essay, exploring Kunwar Singh's personality traits such as bravery, generosity, and self-respect. It also examines his commitment to communal harmony and his innovative use of the Sonpur fair for strategic planning. The solutions further touch upon the broader context of the 1857 uprising, encouraging students to research other freedom fighters and explore related folk songs. Additionally, language-based exercises focus on grammatical concepts like noun pluralization. These solutions are designed to help students understand the historical significance of Veer Kunwar Singh and the 1857 movement, aiding in their exam preparation by offering clear explanations and insights into the text.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 7 |
| Subject | Hindi Vasant |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 17 |
Chapter summary
Chapter 17, 'Veer Kunwar Singh', of CBSE Class 7 Hindi Vasant, focuses on the life and character of the brave warrior Kunwar Singh, a key figure in the 1857 rebellion. The NCERT Solutions cover questions related to his personality, his childhood interests, his belief in communal harmony, and his courageous actions. It also includes sections on historical context, encouraging research on other freedom fighters and folk songs from the era, as well as language exercises. These solutions aim to provide a thorough understanding of the chapter's content and historical significance.
Learning outcomes
- Understand the personality traits of Veer Kunwar Singh.
- Analyze the role of Veer Kunwar Singh in the 1857 revolt.
- Explain the importance of communal harmony as depicted in the chapter.
- Identify the strategic use of the Sonpur fair by Kunwar Singh.
- Research and write about other freedom fighters of 1857.
- Practice Hindi grammar related to noun pluralization.
Topics covered
Paper topics
- Veer Kunwar Singh's personality
- Childhood interests of Kunwar Singh
- Communal harmony
- 1857 revolt
- Freedom fighters of 1857
- Sonpur fair
- Strategic planning
- Hindi grammar: Noun pluralization
- Historical context
- Folk songs of 1857
Important topics
- Veer Kunwar Singh's character and contributions
- Significance of the 1857 revolt
- Communal harmony in historical context
- Grammar: Noun pluralization
- Role of fairs in historical events
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
प्रश्न 2
प्रश्न 3
प्रश्न 4
साहस: 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ हथियार उठाए, जो उनके अत्यधिक साहस का प्रतीक है। अपनी उम्र के बावजूद, उन्होंने युद्ध के मैदान में डटकर मुकाबला किया।
उदारता: वे अपनी प्रजा के प्रति बहुत दयालु और उदार थे। उन्होंने हमेशा गरीबों और जरूरतमंदों की मदद की। यह भी उल्लेख है कि उन्होंने अपनी रियासत के विकास के लिए कई कार्य किए।
स्वाभिमान: जब गंगा नदी पार करते समय उनके हाथ में गोली लग गई, तो उन्होंने अपने सम्मान की रक्षा के लिए और दुश्मन के हाथ न लगने देने के लिए अपना हाथ काटकर गंगा में बहा दिया। यह कार्य उनके गहरे स्वाभिमान और आत्म-सम्मान को दर्शाता है।
प्रश्न 5
प्रश्न 1
1. रानी लक्ष्मीबाई: झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई एक अत्यंत वीर और साहसी योद्धा थीं। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी और 'मेरी झांसी नहीं दूंगी' का नारा दिया।
2. तात्या टोपे: तात्या टोपे एक कुशल सेनापति थे जिन्होंने 1857 के विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे छापामार युद्ध शैली के लिए जाने जाते थे और उन्होंने कई वर्षों तक अंग्रेजों को सफलतापूर्वक छकाया।
3. मंगल पांडे: मंगल पांडे एक ऐसे वीर सिपाही थे जिन्होंने बैरकपुर में ब्रिटिश अधिकारियों पर हमला करके विद्रोह की चिंगारी जलाई। उनके बलिदान ने अन्य सैनिकों को भी प्रेरित किया।
4. बेगम हजरत महल: अवध की बेगम हजरत महल ने लखनऊ में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया। उन्होंने अपने नाबालिग बेटे को अवध का नवाब घोषित किया और अंग्रेजों का कड़ा विरोध किया।
प्रश्न 2
1. 'झाँसी की रानी' (हिंदी): सुभद्रा कुमारी चौहान की यह कविता वीर रस से ओत-प्रोत है और रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य का वर्णन करती है। इसके बोल जैसे "बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी" बहुत प्रसिद्ध हैं।
2. लोकगीत (अवधी/ब्रज भाषा): अवध और आस-पास के क्षेत्रों में ऐसे कई लोकगीत प्रचलित हैं जो बेगम हजरत महल के संघर्ष और 1857 के विद्रोह के दौरान आम लोगों की भावनाओं को व्यक्त करते हैं।
3. वीर रस की कविताएँ (अन्य भाषाएँ): पंजाब, बिहार, राजस्थान आदि क्षेत्रों में भी 1857 के शहीदों और क्रांतिकारियों के बलिदान पर आधारित वीर रस की कविताएँ और गीत मिलते हैं, जो उस समय के संघर्ष को दर्शाते हैं।
छात्र इन गीतों को पुस्तकालयों, इंटरनेट या बुजुर्गों से सुनकर संकलित कर सकते हैं।
प्रश्न 1
प्रश्न 2
मैं शायद स्वतंत्रता सेनानियों के लिए संदेशवाहक का काम कर सकता था, या घायलों की सेवा में मदद कर सकता था। मैं अपने साथियों के साथ मिलकर देशभक्ति के गीत गाता और लोगों को स्वतंत्रता के महत्व के बारे में बताता। मैं अपने बड़े-बुजुर्गों से स्वतंत्रता संग्राम की कहानियाँ सुनता और उन्हें याद रखता ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी इस संघर्ष की जानकारी मिल सके। मैं यह भी कोशिश करता कि जो भी छोटी-मोटी मदद मुझसे हो सके, जैसे भोजन या अन्य आवश्यक सामग्री पहुँचाना, वह जरूर करता।
प्रश्न 3
1. विशाल जनसमूह का एकत्र होना: सोनपुर का मेला उस समय एशिया के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक था। यहाँ दूर-दूर से व्यापारी, सैनिक, आम लोग और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि आते थे। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का एक स्थान पर एकत्र होना योजनाओं को फैलाने और समर्थन जुटाने के लिए एक आदर्श अवसर था।
2. गुप्त बैठकों की सुविधा: मेले के शोरगुल और भीड़भाड़ के बीच, गुप्त रूप से मिलना और योजनाएँ बनाना आसान होता होगा। लोगों का ध्यान मुख्य रूप से व्यापार और मनोरंजन पर होता था, जिससे क्रांतिकारी गतिविधियों पर संदेह कम होता।
3. विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से संपर्क: मेले में विभिन्न क्षेत्रों के लोग आते थे, जिससे वीर कुँवर सिंह और उनके साथियों को अपनी बात फैलाने, नए सहयोगी बनाने और विद्रोह के लिए व्यापक समर्थन तैयार करने का मौका मिलता था।
4. संसाधनों की उपलब्धता: मेले में विभिन्न प्रकार के सामान और लोग उपलब्ध होते थे, जिनका उपयोग सेना के लिए रसद, हथियार या अन्य आवश्यक सामग्री जुटाने में किया जा सकता था।
प्रश्न 1
सेनानी - सेनानियों
दृष्टि - दृष्टियों
नदी - नदियों
लड़की - लड़कियों
टोपी - टोपियों
तिथि - तिथियों
नीति - नीतियों
रीति - रीतियों
पार्टी - पार्टियों
नारी - नारियों
व्याख्या: जैसा कि पाठ में बताया गया है, जिन शब्दों के अंत में दीर्घ 'ई' (ी) की मात्रा होती है, उनका बहुवचन बनाने पर वह ह्रस्व 'इ' (ि) की मात्रा में बदल जाती है और अंत में 'यों' जुड़ जाता है। जैसे 'सेनानी' का बहुवचन 'सेनानियों' होता है।
Common mistakes
- Confusing the historical context of the 1857 revolt.
- Incomplete understanding of Veer Kunwar Singh's motivations.
- Errors in pluralizing Hindi nouns, especially those ending in 'ee' (ई).
- Failing to connect childhood interests with later actions.
Revision tips
- Focus on the key personality traits of Veer Kunwar Singh and find evidence in the text.
- Understand the significance of the 1857 revolt and Kunwar Singh's role within it.
- Pay close attention to the language exercises, particularly noun pluralization rules.
- Research the other freedom fighters mentioned to broaden your historical knowledge.
- Discuss the concept of communal harmony and its importance in the chapter.
Practice MCQs
Q1. वीर कुँवर सिंह के व्यक्तित्व की कौन सी विशेषता पाठकों को सबसे अधिक प्रभावित करती है?
Explanation: पाठ में वीर कुँवर सिंह की वीरता, उदारता, स्वाभिमान और सांप्रदायिक सदभाव जैसी अनेक विशेषताओं का उल्लेख है जो पाठकों को प्रभावित करती हैं।
Q2. कुँवर सिंह को बचपन में किन गतिविधियों में मज़ा आता था?
Explanation: पाठ के अनुसार, कुँवर सिंह को पढ़ने के साथ-साथ कुश्ती और घुड़सवारी जैसी गतिविधियों में अधिक आनंद आता था।
Q3. पाठ के आधार पर, कुँवर सिंह किसमें गहरी आस्था रखते थे?
Explanation: पाठ स्पष्ट रूप से बताता है कि कुँवर सिंह सांप्रदायिक सदभाव में गहरी आस्था रखते थे और उन्होंने इसे अपने कार्यों से सिद्ध किया।
Q4. वीर कुँवर सिंह ने सोनपुर के मेले का उपयोग किस रूप में किया?
Explanation: वीर कुँवर सिंह ने सोनपुर के मेले को स्वाधीनता की योजना बनाने और अपनी सेना को संगठित करने के एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में इस्तेमाल किया।
Q5. भाषा की बात के अनुसार, 'सेनानी' शब्द का बहुवचन बनाने पर 'नी' की मात्रा में क्या परिवर्तन होता है?
Explanation: व्याकरण के नियम के अनुसार, 'सेनानी' जैसे शब्दों का बहुवचन बनाने पर अंत में लगी दीर्घ 'ई' की मात्रा ह्रस्व 'इ' में बदल जाती है, जैसे 'सेनानियों'।
Frequently asked questions
यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह समाधान सीबीएसई कक्षा 7 की हिंदी वसंत पुस्तक के अध्याय 17 'वीर कुँवर सिंह' के लिए है।
इस अध्याय में मुख्य रूप से किस स्वतंत्रता सेनानी के बारे में बताया गया है?
इस अध्याय में मुख्य रूप से 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख योद्धा वीर कुँवर सिंह के जीवन और व्यक्तित्व के बारे में बताया गया है।
समाधान में वीर कुँवर सिंह के किन गुणों पर प्रकाश डाला गया है?
समाधान में वीर कुँवर सिंह की वीरता, उदारता, स्वाभिमान और सांप्रदायिक सदभाव जैसी महत्वपूर्ण विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया है।
क्या इस समाधान में व्याकरण से संबंधित प्रश्न भी शामिल हैं?
हाँ, इसमें 'भाषा की बात' खंड के तहत संज्ञाओं के बहुवचन बनाने से संबंधित व्याकरण के प्रश्न भी शामिल हैं।
यह समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेगा?
यह समाधान पाठ के सभी प्रश्नों के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करके छात्रों को वीर कुँवर सिंह के बारे में उनकी समझ को गहरा करने और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में मदद करेगा।
1857 के आंदोलन से संबंधित कौन सी अन्य गतिविधियाँ इस अध्याय में शामिल हैं?
यह अध्याय छात्रों को 1857 के अन्य सेनानियों पर शोध करने और उस काल से संबंधित लोकगीतों को संकलित करने के लिए भी प्रोत्साहित करता है।
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