कक्षा 6 संस्कृत NCERT समाधान: कृषिकाः कर्मवीरः

NCERT Solutions PDF Class 6 PDF

यह पृष्ठ कक्षा 6 के संस्कृत अध्याय 10, 'कृषिकाः कर्मवीरः' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय अन्नदाताओं, यानी किसानों के अथक परिश्रम, उनके संघर्षमय जीवन और समाज के प्रति उनके महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डालता है। समाधानों में किसानों द्वारा सर्दी, गर्मी और बरसात की कठिनाइयों को सहन करते हुए अन्न उत्पादन के उनके समर्पण को समझाया गया है। यह भी बताया गया है कि अत्यधिक परिश्रम के बावजूद, वे अक्सर गरीबी और अभाव में जीवन व्यतीत करते हैं। पाठ किसानों की कर्मठता और उनके जीवन की चुनौतियों के बीच उनके अटूट संकल्प को दर्शाता है। ये समाधान छात्रों को किसानों के जीवन की वास्तविकताओं को समझने और उनके प्रति सम्मान विकसित करने में मदद करेंगे, जो परीक्षा की तैयारी के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 6
Subjectसंस्कृत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter10. कृषिकाः कर्मवीरः

Chapter summary

कक्षा 6 के संस्कृत अध्याय 10, 'कृषिकाः कर्मवीरः' के ये NCERT समाधान किसानों के कर्मठ जीवन पर केंद्रित हैं। समाधानों में किसानों द्वारा विभिन्न मौसमों में किए जाने वाले कठिन परिश्रम, उनकी साधारण जीवनशैली और समाज के लिए उनके योगदान का वर्णन किया गया है। यह पाठ किसानों की कठिनाइयों और उनके अटूट समर्पण को दर्शाता है, जो उन्हें 'कर्मवीर' बनाता है। ये समाधान छात्रों को पाठ के श्लोकों, उनके अर्थों और किसानों के महत्व को समझने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • किसानों के कठिन परिश्रम और समर्पण को समझना।
  • संस्कृत श्लोकों का हिंदी में अर्थ समझना।
  • किसानों के जीवन की चुनौतियों का विश्लेषण करना।
  • समाज में किसानों के महत्व को पहचानना।
  • अध्याय के मुख्य शब्दों और अवधारणाओं को सीखना।

Topics covered

Paper topics

  • किसानों का जीवन
  • कर्मठता का महत्व
  • संस्कृत श्लोक
  • श्लोकों का हिंदी अनुवाद
  • मौसम की कठिनाइयाँ
  • किसानों की गरीबी
  • अन्न उत्पादन
  • समाज में किसानों का योगदान
  • कक्षा 6 संस्कृत
  • NCERT समाधान

Important topics

  • किसानों की कर्मठता और समर्पण
  • कठिन परिश्रम का महत्व
  • किसानों के जीवन की चुनौतियाँ
  • समाज के लिए किसानों का योगदान
  • श्लोकों का भावार्थ समझना

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

श्लोक 1 एवं 2

चाहे सूरज तपाये या बादल अत्यधिक बरसें, किसान तथा उसकी पत्नी सदा सरदी में भी काम में लगे रहते हैं। गरमी में शरीर पसीने से भरा हुआ होता और ठंड में कंपनयुक्त अर्थात् काँपता रहता है किंतु फिर भी वे दोनों हल से अथवा कुदाल से खेतों को जोतते रहते हैं।
Solution:

यह श्लोक किसानों के अथक परिश्रम और मौसम की परवाह किए बिना उनके निरंतर कार्य करने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। चाहे कितनी भी गर्मी हो या अत्यधिक वर्षा हो, किसान और उनकी पत्नी हमेशा अपने काम में लगे रहते हैं।

विस्तार से समझें:

  1. मौसम की परवाह नहीं: श्लोक कहता है कि चाहे सूर्य कितना भी तपे (ग्रीष्म ऋतु) या बादल खूब जल बरसाएँ (वर्षा ऋतु), किसान और उनकी पत्नी (कृषिकाः कृषिकाः च) शीतकाल (सर्दी) में भी नित्य (हमेशा) कर्मठ (सक्रिय) रहते हैं।
  2. शारीरिक कष्ट: ग्रीष्म ऋतु में उनका शरीर पसीने से लथपथ रहता है (शरीरं सस्वेदम्), और शीत ऋतु में ठंड से काँपता रहता है (शीते कंपयमयं)।
  3. निरंतर कार्य: इन शारीरिक कष्टों के बावजूद, वे दोनों (तौ तु) हल (हलेन) और कुदाल (कुदालेन) जैसे औजारों से खेतों को जोतते (कर्षतः) रहते हैं। यह उनकी कर्मठता और समर्पण का प्रतीक है।

इस प्रकार, यह श्लोक किसानों के जीवन की कठिनाइयों और उनके अटूट परिश्रम को उजागर करता है।

श्लोक 3 एवं 4

पैरों में जूते नहीं, शरीर पर कपड़े नहीं, निर्धन, कष्टमय जीवन है, सुख सदा दूर ही रहता है। घर टूटा-फूटा (पुराना) है, वर्षा के समय बारिश (अर्थात् बारिश का पानी अंदर आने से) रोकने में असमर्थ है। तो भी किसानों की कर्मिनिष्ठा नष्ट नहीं होती अथात वे कृषि के काम में लगे रहते हैं।
Solution:

यह श्लोक किसानों की दयनीय आर्थिक स्थिति और उसके बावजूद उनके काम के प्रति अटूट निष्ठा को दर्शाता है। यह बताता है कि कैसे वे अभावों में जीवन जीते हुए भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते।

विस्तार से समझें:

  1. अभावग्रस्त जीवन: किसानों के पैरों में जूते नहीं होते (पादयोः उपानहौ नः), और शरीर पर पर्याप्त वस्त्र भी नहीं होते (शरीरे वसनानि नः)। उनका जीवन निर्धनता (निर्धनम् जीवनम्) और कष्टों (कष्टम्) से भरा होता है, जिसके कारण सुख (सुखम्) उनसे कोसों दूर रहता है (दूरं हि तिष्ठति)।
  2. टूटा-फूटा घर: उनका घर भी जीर्ण (पुराना और जर्जर) होता है (गृहं जीर्णम्)। यह घर इतना कमजोर होता है कि वर्षा के समय बारिश के पानी को अंदर आने से रोकने में सक्षम नहीं होता (वर्षासु वृष्टिं वारियतुं क्षमम् न अस्ति)।
  3. अडिग कर्मठता: इन सभी कठिनाइयों और अभावों के बावजूद, किसानों की कर्मठता (कर्मवीरत्वम्) कभी नष्ट नहीं होती (न नश्यति)। वे लगातार अपने कृषि कार्य में लगे रहते हैं।

यह श्लोक किसानों के त्याग और उनके अटूट परिश्रम को रेखांकित करता है, जो उन्हें समाज का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनाते हैं।

श्लोक 5 एवं 6

उन दोनों (किसान और उसकी पत्नी) के परिश्रम से खेत हमेशा फसलों से भरे रहते हैं। जो धरती सूखी और काँटों से ढकी हुई थी, वह (उनके परिश्रम से) हरी-भरी हो गई। सब्जी, अन्न, फल और दूध देकर वे दोनों (किसानों) सभी को (पोषण देते हैं)। वे भूख-प्यास से व्याकुल रहते हुए भी, विचित्र रूप से लोगों का पालन करते हैं।
Solution:

यह श्लोक किसानों के परिश्रम के सकारात्मक परिणाम और समाज के प्रति उनके निस्वार्थ योगदान का वर्णन करता है। यह दर्शाता है कि कैसे उनके अथक प्रयास न केवल धरती को उपजाऊ बनाते हैं, बल्कि सभी के लिए भोजन की व्यवस्था भी करते हैं।

विस्तार से समझें:

  1. धरती का उपजाऊपन: किसान और उसकी पत्नी के अथक परिश्रम (तयोः श्रमेण) से खेत हमेशा फसलों से परिपूर्ण (सस्यपूर्णानि सर्वदा) रहते हैं।
  2. बंजर भूमि का रूपांतरण: जिस धरती पर पहले केवल सूखी घास और काँटे (शुष्का कण्टकावृता) थे, वह उनके श्रम से रसपूर्ण और हरी-भरी (सरसा जाता) हो गई है। यह उनके परिश्रम की शक्ति को दर्शाता है।
  3. सभी के लिए पोषण: वे अपनी मेहनत से उगाई गई सब्जियाँ (शाकम्), अनाज (अन्नम्), फल (फलम्) और दूध (दुग्धम्) सभी को (सर्वेभ्यः एव) प्रदान करते हैं। इस प्रकार, वे सभी मनुष्यों के लिए पोषण का स्रोत बनते हैं।
  4. निस्वार्थ सेवा: स्वयं भूख और प्यास से व्याकुल (क्षुधा-तृषाकुलौ) रहते हुए भी, वे दूसरों का भरण-पोषण करते हैं। यह उनका विचित्र (अद्भुत) और महान कार्य है, जो उन्हें जन-पालक (लोगों का पालन करने वाला) बनाता है।

यह श्लोक किसानों के त्याग, समर्पण और समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।

Common mistakes

  • श्लोकों के कठिन शब्दों के अर्थ समझने में कठिनाई।
  • किसानों के जीवन की वास्तविकताओं को कम आंकना।
  • पाठ के भावार्थ को पूरी तरह न समझ पाना।

Revision tips

  • प्रत्येक श्लोक को ध्यान से पढ़ें और उसके हिंदी अर्थ को समझें।
  • किसानों के सामने आने वाली कठिनाइयों और उनके समाधानों पर चर्चा करें।
  • पाठ के मुख्य संदेश - किसानों की कर्मठता - को याद रखें।
  • अभ्यास के लिए दिए गए प्रश्नों के उत्तर स्वयं देने का प्रयास करें।

Practice MCQs

Q1. पाठ 'कृषिकाः कर्मवीरः' में किसानों के किस गुण पर बल दिया गया है?

Q2. किसान किन मौसमों की कठिनाइयों को सहन करते हैं?

Q3. किसानों के जीवन में सुख क्यों दूर रहता है?

Q4. किसानों के घर की क्या विशेषता बताई गई है?

Q5. किसानों के परिश्रम से धरती कैसी हो जाती है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह NCERT समाधान कक्षा 6 के संस्कृत विषय के लिए है, विशेष रूप से अध्याय 10 'कृषिकाः कर्मवीरः' पर केंद्रित है।

'कृषिकाः कर्मवीरः' पाठ का मुख्य विषय क्या है?

इस पाठ का मुख्य विषय किसानों (कृषकों) की कर्मठता, उनके कठिन परिश्रम, उनके संघर्षमय जीवन और समाज के प्रति उनके महत्वपूर्ण योगदान का वर्णन करना है।

क्या इन समाधानों में श्लोकों का अर्थ समझाया गया है?

हाँ, इन समाधानों में पाठ के श्लोकों का हिंदी में सरलार्थ (अर्थ) विस्तार से समझाया गया है, जिससे छात्रों को उन्हें समझने में आसानी हो।

यह समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

यह समाधान छात्रों को पाठ की अवधारणाओं, श्लोकों के अर्थ और किसानों के जीवन की वास्तविकताओं को गहराई से समझने में मदद करते हैं, जो परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने के लिए आवश्यक है।

किसानों के जीवन की किन कठिनाइयों का उल्लेख पाठ में किया गया है?

पाठ में किसानों के जीवन की कई कठिनाइयों का उल्लेख है, जैसे - मौसम की मार (सर्दी, गर्मी, बरसात), जूतों और कपड़ों का अभाव, निर्धनता, कष्टमय जीवन, और पुराने व असुरक्षित घर।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.