CBSE Class 6 Hindi Chapter 31: नादान दोस्त (Nadan Dost) NCERT Solutions
CBSE कक्षा 6 हिंदी पाठ 31 'नादान दोस्त' के लिए विस्तृत समाधान यहाँ दिए गए हैं। यह अध्याय केशव और श्यामा नामक दो भाई-बहनों की मासूम जिज्ञासा और पक्षी के अंडों के प्रति उनके नेक इरादों, लेकिन गलत कामों की पड़ताल करता है। समाधान बच्चों के अंडों के बारे में कल्पनाशील विचारों, उनकी सुरक्षा के प्रयासों और उनके कार्यों के परिणामों पर गहराई से विचार करते हैं। यह छात्रों को जानवरों के प्रति अपनी जिज्ञासा और सहानुभूति के अनुभवों पर विचार करने के लिए भी प्रेरित करता है। इन समाधानों का उद्देश्य छात्रों को कहानी की बारीकियों को समझने, पात्रों की प्रेरणाओं का विश्लेषण करके आलोचनात्मक सोच कौशल विकसित करने और अध्याय से संबंधित सभी प्रश्नों के स्पष्ट और संक्षिप्त उत्तर प्रदान करके उनकी हिंदी परीक्षाओं के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करना है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 6 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 31 |
Chapter summary
Chapter 31, 'Nadan Dost', focuses on the innocent curiosity of children, Keshav and Shyama, towards a bird's nest. The NCERT Solutions cover questions about their assumptions regarding the eggs, their efforts to care for them, and the eventual outcome. It encourages students to reflect on empathy, the consequences of actions, and imaginative thinking, providing clear answers to all questions from the 'Kahani Se', 'Kahani Se Aage', and 'Anuman Aur Kalpana' sections.
Learning outcomes
- Understand the story 'Nadan Dost' and its characters.
- Analyze the motivations and actions of Keshav and Shyama.
- Develop empathy towards animals and nature.
- Formulate hypotheses and make inferences based on textual information.
- Express personal experiences related to curiosity and observation.
- Answer comprehension questions based on the chapter.
Topics covered
Paper topics
- Understanding the story 'Nadan Dost'
- Character analysis of Keshav and Shyama
- Themes of innocence and good intentions
- Consequences of actions
- Empathy towards animals
- Children's curiosity and imagination
- Inferring from the text
- Personal reflection on similar experiences
Important topics
- The 'Nadan Dost' concept and its implications
- Children's attempts to help and their unintended consequences
- Developing empathy for nature
- Analyzing character motivations
- Connecting story themes to personal experiences
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Questions and Solutions
प्रश्न 1 (कहानी से)
केशव और श्यामा के मन में चिड़िया के अंडों को लेकर कई तरह के सवाल उठते थे। वे सोचते थे कि चिड़िया अंडों को कैसे सेती होगी, अंडों से बच्चे कैसे निकलेंगे, बच्चे कब उड़ने लायक होंगे, और चिड़िया उन्हें खाना कैसे खिलाती होगी। वे यह भी सोचते थे कि अंडों को गर्मी लग रही होगी या नहीं।
चूंकि वे छोटे थे और उनके पास इन सवालों के जवाब जानने का कोई तरीका नहीं था, इसलिए वे आपस में ही अनुमान लगाकर, एक-दूसरे से सवाल पूछकर और फिर खुद ही जवाब देकर अपने मन को समझा लिया करते थे। इस तरह वे अपनी जिज्ञासा को शांत करते थे और अपने मन को तसल्ली दे लेते थे कि वे अंडों की चिंता कर रहे हैं और उनकी मदद कर रहे हैं।
प्रश्न 2 (कहानी से)
केशव ने श्यामा से चीथड़े, टोकरी और दाना-पानी इसलिए मँगाकर कार्निस पर रखे थे क्योंकि उसे लगा कि गर्मी के कारण अंडे बहुत गर्म हो रहे होंगे और चिड़िया उन्हें ठीक से नहीं सेक पा रही होगी। उसने सोचा कि इन चीथड़ों से वह अंडों के लिए एक नरम बिस्तर बना देगा और टोकरी को घोंसले के ऊपर रखकर अंडों को सीधी धूप से बचाएगा। दाना-पानी इसलिए रखा था ताकि चिड़िया के आने पर वह बच्चों को खिला सके और खुद भी खा सके। यह सब केशव की अंडों के प्रति चिंता और उनकी मदद करने की नादानी भरी कोशिश थी।
प्रश्न 3 (कहानी से)
केशव और श्यामा ने चिड़िया के अंडों की रक्षा करने की कोशिश की, लेकिन उनकी हरकतें असल में नादानी थीं। वे अंडों को बचाने के नेक इरादे से प्रेरित थे, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं थी कि इंसानी हस्तक्षेप से अंडों को नुकसान पहुँच सकता है। उन्होंने अंडों को छूने की कोशिश की, उनके लिए बिस्तर बनाया और उन्हें धूप से बचाने का प्रयास किया। इन सब कामों के कारण शायद चिड़िया डर गई या अंडों को नुकसान पहुँचा, जिसके परिणामस्वरूप वे बच्चे फिर वहाँ नहीं दिखे। इसलिए, उनके इरादे भले ही रक्षा करने के थे, पर परिणाम नादानी भरा था।
प्रश्न 1 (कहानी से आगे)
केशव और श्यामा ने अनुमान लगाया कि गर्मी के कारण अंडे बहुत गर्म हो रहे होंगे और चिड़िया उन्हें ठीक से नहीं सेक पा रही होगी। उन्होंने यह भी सोचा कि शायद अंडों से बच्चे निकल आए हों और उन्हें भूख लग रही हो।
यदि मैं उस जगह होता, तो मैं भी शायद यही अनुमान लगाता कि अंडों को गर्मी लग रही होगी या उन्हें किसी खतरे का सामना करना पड़ रहा होगा। मैं यह भी सोचता कि चिड़िया कहाँ है और वह वापस क्यों नहीं आ रही।
मैं यह करता:
- सबसे पहले, मैं चिड़िया को दूर से देखने की कोशिश करता कि वह आसपास है या नहीं।
- मैं अंडों को बिना छुए, दूर से ही उनकी स्थिति का जायजा लेता।
- मैं यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता कि घोंसले के आसपास कोई बिल्ली या अन्य शिकारी जानवर न हो।
- मैं किसी बड़े या शिक्षक से सलाह लेता कि ऐसी स्थिति में क्या करना उचित होगा, बजाय इसके कि खुद ही कोई कदम उठाऊँ।
- मैं अंडों को छेड़ने या छूने से बचता, क्योंकि मुझे पता होता कि प्रकृति का अपना तरीका है और उसमें हस्तक्षेप करना ठीक नहीं है।
प्रश्न 2 (कहानी से आगे)
माँ के सोते ही केशव और श्यामा दोपहर में इसलिए बाहर निकल आए क्योंकि वे चिड़िया के अंडों की चिंता कर रहे थे। उन्हें लग रहा था कि अंडे बहुत गर्म हो रहे हैं और उन्हें मदद की ज़रूरत है। वे चाहते थे कि जल्दी से अंडों के लिए कुछ करें, जैसे कि उन्हें छाया देना या पानी देना।
माँ के पूछने पर भी दोनों में से किसी ने किवाड़ खोलकर दोपहर में बाहर निकलने का कारण इसलिए नहीं बताया क्योंकि वे जानते थे कि माँ उन्हें दोपहर में बाहर निकलने की इजाजत कभी नहीं देती, खासकर जब वह सो रही हो। वे पकड़े जाने से डर रहे थे और माँ की डाँट से बचना चाहते थे। इसलिए, उन्होंने सच छिपाने का फैसला किया और कहा कि वे बस ऐसे ही बाहर आ गए थे।
प्रश्न 3 (कहानी से आगे)
प्रेमचंद जी ने कहानी का शीर्षक 'नादान दोस्त' बहुत सोच-समझकर रखा है, जो कहानी के सार को दर्शाता है। यदि मुझे इस कहानी को शीर्षक देना हो, तो मैं कुछ ऐसे शीर्षक सुझा सकता हूँ:
- चिंता और नादानी: यह शीर्षक बच्चों की अंडों के प्रति चिंता और उनकी नादानी भरी कोशिशों को उजागर करता है।
- बच्चों की दोस्ती और भूल: यह शीर्षक बच्चों के नेक इरादों और उनकी अनजाने में हुई गलती को बताता है।
- अंडों की कहानी: यह शीर्षक सीधे तौर पर कहानी के मुख्य विषय, यानी चिड़िया के अंडों पर केंद्रित है।
- अनजाने में मदद: यह शीर्षक इस बात पर जोर देता है कि कैसे बच्चों की मदद करने की कोशिशें अनजाने में नुकसानदेह साबित हुईं।
हालांकि, 'नादान दोस्त' शीर्षक सबसे उपयुक्त लगता है क्योंकि यह कहानी के केंद्रीय भाव - बच्चों की मासूमियत और उनकी अनजाने में की गई गलतियों - को बखूबी व्यक्त करता है।
प्रश्न 1 (अनुमान और कल्पना)
अगर सर्दी या बरसात के दिन होते, तो स्थिति काफी अलग होती:
सर्दी के दिनों में:
- ठंड से बचाव: चिड़िया को अंडों को सेने के लिए अधिक समय तक बैठना पड़ता ताकि वे ठंडे न हों।
- भोजन की कमी: सर्दी में कीड़े-मकोड़े कम मिलते हैं, इसलिए चिड़िया को भोजन की तलाश में दूर जाना पड़ सकता था, जिससे अंडों को अकेला छोड़ने का खतरा बढ़ जाता।
- बच्चों का निकलना: अंडों से बच्चे निकलने पर उन्हें ठंड से बचाने के लिए चिड़िया को अधिक मेहनत करनी पड़ती।
- बच्चों की हरकतें: केशव और श्यामा शायद अंडों को गर्मी देने की चिंता करते, न कि गर्मी से बचाने की। वे शायद अंडों को ढकने या गर्म रखने के तरीके सोचते।
बरसात के दिनों में:
- घोंसले का गीला होना: लगातार बारिश से घोंसला गीला हो सकता था, जिससे अंडे खराब होने का खतरा होता।
- कीड़े-मकोड़ों की अधिकता: बरसात में कीड़े-मकोड़े बढ़ जाते हैं, जिससे चिड़िया को भोजन आसानी से मिल सकता था।
- सुरक्षा का खतरा: तेज हवाओं और बारिश से घोंसला गिर सकता था या उड़ सकता था।
- बच्चों की हरकतें: केशव और श्यामा शायद घोंसले को बारिश से बचाने की चिंता करते। वे उसे किसी सुरक्षित जगह ले जाने या ढकने का प्रयास कर सकते थे, जो फिर से नादानी हो सकती थी।
दोनों ही स्थितियों में, बच्चों की चिंता का विषय बदल जाता, लेकिन उनकी मदद करने की कोशिशें शायद फिर भी अनजाने में नुकसानदेह साबित हो सकती थीं।
प्रश्न 2 (अनुमान और कल्पना)
पाठ पढ़कर ऐसा लगता है कि दोनों चिड़िया वहाँ फिर इसलिए नहीं दिखाई दीं क्योंकि केशव और श्यामा द्वारा अंडों को छूने और उनके लिए व्यवस्था करने की कोशिशों से शायद चिड़िया डर गई होगी या अंडों को कोई नुकसान पहुँच गया होगा। इंसानी हस्तक्षेप से चिड़िया अक्सर अपने घोंसले को छोड़ देती हैं।
वे कहाँ गयी होंगी, इस पर बातचीत के कुछ बिंदु ये हो सकते हैं:
- कहीं और नया घोंसला बनाया: हो सकता है कि चिड़िया ने किसी सुरक्षित जगह पर जाकर नया घोंसला बनाया हो और वहाँ अंडे दिए हों।
- अंडों को छोड़ दिया: यदि अंडों को नुकसान पहुँचा हो या वे बहुत डर गई हों, तो वे उन्हें वहीं छोड़कर चली गई होंगी।
- किसी और जगह प्रवास कर गईं: यह भी संभव है कि मौसम बदलने या किसी अन्य कारण से वे उस इलाके से कहीं और चली गई हों।
- दुर्घटना का शिकार: यह एक दुखद संभावना है कि वे किसी शिकारी (जैसे बिल्ली) का शिकार बन गई हों या किसी दुर्घटना का शिकार हो गई हों।
सबसे अधिक संभावना यही है कि बच्चों की दखलअंदाजी के कारण वे वहाँ से चली गईं, शायद अंडों को बचाने के लिए या डर के कारण।
प्रश्न 3 (अनुमान और कल्पना)
हाँ, मुझे भी कई बार नई चीजों को लेकर कौतूहल महसूस हुआ है। एक बार मेरे घर के पास एक पेड़ पर एक गिलहरी ने अपना घोंसला बनाया था। मैं रोज़ उसे देखती थी और उसके बारे में जानने के लिए बहुत उत्सुक रहती थी।
मेरे मन में ये सवाल उठते थे:
- गिलहरी घोंसला कैसे बनाती है? वह इतनी छोटी-छोटी टहनियों और पत्तों को कैसे इकट्ठा करती होगी?
- वह अपने बच्चों को कैसे पालती होगी? क्या वह उन्हें कुछ खिलाती होगी?
- वह इतनी फुर्तीली कैसे है? वह इतनी ऊँचाई पर कैसे चढ़ जाती है और कूद जाती है?
- क्या वह इंसानों से डरती है? वह मुझे देखकर क्यों भाग जाती है?
- उसका घोंसला कितना सुरक्षित होगा? क्या कोई जानवर उसे नुकसान पहुँचा सकता है?
मैं उसे दूर से देखती थी और यह जानने की कोशिश करती थी कि वह क्या कर रही है। मैं उसे परेशान नहीं करती थी, बस उसे देखकर खुश होती थी और उसके बारे में सोचती रहती थी। यह कौतूहल मुझे प्रकृति के करीब ले गया और मुझे गिलहरियों के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला।
Common mistakes
- Confusing good intentions with correct actions.
- Underestimating the impact of human interference on nature.
- Not considering the perspective of the birds.
- Failing to connect personal experiences with the story's themes.
Revision tips
- Read the story 'Nadan Dost' carefully to grasp the plot and characters.
- Focus on understanding the children's thought process and their 'naadaan' (innocent but misguided) actions.
- Discuss the questions about empathy and consequences with classmates.
- Use the provided solutions to check your understanding and refine your answers.
- Reflect on your own experiences of curiosity and how you've acted upon them.
Practice MCQs
Q1. केशव और श्यामा ने चिड़िया के अंडों को बचाने के लिए क्या किया?
Explanation: केशव और श्यामा ने अंडों को गर्मी से बचाने और उन्हें आराम देने के लिए चीथड़े, टोकरी और दाना-पानी का इंतजाम किया था।
Q2. कहानी का शीर्षक 'नादान दोस्त' क्यों रखा गया है?
Explanation: शीर्षक 'नादान दोस्त' इसलिए है क्योंकि केशव और श्यामा ने अंडों की मदद करने की कोशिश में अनजाने में नुकसान पहुँचाया, जो उनकी नादानी को दर्शाता है।
Q3. केशव और श्यामा ने अंडों के बारे में क्या अनुमान लगाया?
Explanation: बच्चों ने अनुमान लगाया कि गर्मी के कारण अंडे बहुत गर्म हो रहे हैं और चिड़िया उन्हें ठीक से नहीं सेक पा रही है, इसलिए उन्होंने मदद करने की सोची।
Q4. माँ के पूछने पर भी केशव और श्यामा ने दोपहर में बाहर निकलने का कारण क्यों नहीं बताया?
Explanation: दोनों बच्चे माँ से छिपकर कार्निस पर चढ़े थे और उन्हें डर था कि पकड़े जाने पर माँ डाँटेगी, इसलिए उन्होंने सच नहीं बताया।
Q5. कहानी के अंत में दोनों चिड़िया वहाँ फिर क्यों नहीं दिखाई दीं?
Explanation: कहानी में यह अनुमान लगाया गया है कि शायद बच्चों की नादानी के कारण अंडों को नुकसान पहुँचा और इसलिए चिड़िया वहाँ फिर दिखाई नहीं दीं।
Frequently asked questions
What is Chapter 31 of CBSE Class 6 Hindi NCERT about?
Chapter 31, 'Nadan Dost', is a story about two siblings, Keshav and Shyama, who try to help a mother bird by caring for her eggs, but their well-intentioned actions turn out to be misguided due to their innocence.
What are the main themes in the 'Nadan Dost' chapter?
The main themes include children's innocence, their curiosity, the importance of understanding nature's ways, and how good intentions can sometimes lead to unintended negative consequences.
How do these NCERT Solutions help Class 6 students?
These solutions provide clear, step-by-step answers to all questions in Chapter 31, helping students understand the story better, analyze characters, and prepare effectively for their Hindi exams.
What kind of questions are covered in the solutions?
The solutions cover comprehension questions about the story's events, character analysis, imaginative scenarios, and personal reflections related to curiosity and empathy towards animals.
Why is the chapter titled 'Nadan Dost'?
The title 'Nadan Dost' (Innocent Friend/Helper) is given because Keshav and Shyama, despite being friends to the bird and wanting to help, acted out of innocence and lack of knowledge, which ultimately caused harm.
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