CBSE Class 5 Hindi Rimjhim Chapter 7: वे दिन भी क्या दिन थे! NCERT Solutions
CBSE Class 5 Hindi Rimjhim, Chapter 7, 'वे दिन भी क्या दिन थे!' delves into the fascinating transformation of learning and reading. It contrasts the familiar world of paper books with the exciting possibilities of digital learning, like watching lessons on a TV screen. This chapter encourages young learners to ponder the pros and cons of both traditional and modern methods. Through relatable examples, it explores how things change over time, even the prices of everyday items, prompting discussions about the past, present, and future. Students are invited to imagine futuristic technologies and consider the impact of computers on our lives. These solutions offer clear insights and engaging questions to help students grasp these ideas and prepare effectively for their studies.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 5 |
| Subject | रिमझिम |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 7 |
Chapter summary
Chapter 7, 'वे दिन भी क्या दिन थे!' of CBSE Class 5 Hindi Rimjhim, focuses on the theme of change over time, particularly in the context of books and technology. It encourages students to compare past, present, and future scenarios, imagining how everyday items and learning methods might evolve. The solutions help students analyze the differences between physical books and screen-based reading, and reflect on the impact of technology like computers.
Learning outcomes
- Understand the evolution of books and reading materials.
- Compare traditional learning methods with futuristic technological approaches.
- Reflect on the concept of time and change through everyday examples.
- Imagine future technological advancements and their impact.
- Analyze the role of computers in personal and public life.
Topics covered
Paper topics
- Evolution of books
- Paper vs. digital reading
- Future technology
- Changes over time
- Past, present, and future
- Technological advancements
- Role of computers
- Economic changes (price comparison)
Important topics
- Comparison of books (paper vs. screen)
- Imagining future technologies
- Understanding changes over time
- Role of computers in life
- Price fluctuations of goods
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
कुम्मी के हाथ में जो किताब आई थी, वह संभवतः आज के समय में छपी हुई होगी। कहानी भविष्य की कल्पना करती है, जहाँ तकनीक बहुत उन्नत हो चुकी है, इसलिए यह माना जा सकता है कि किताब भी उसी आधुनिक समय की है।
प्रश्न 2
हाँ, यह सच है कि कई बार ऐसा होता है कि पुस्तकें एक बार पढ़ ली जाती हैं और फिर उन्हें संभाल कर नहीं रखा जाता या वे किसी काम की नहीं रहतीं, जिससे वे बेकार हो जाती हैं। हालाँकि, कई लोग अपनी पढ़ी हुई किताबों को सहेज कर रखते हैं या उन्हें दूसरों को दे देते हैं, जिससे वे पूरी तरह बेकार नहीं होतीं।
प्रश्न 3
हम कागज के पन्नों वाली किताब को पसंद करेंगे। इसके कई कारण हैं:
- स्थायित्व: कागज की किताबें हमेशा हमारे पास रहती हैं और उन्हें पढ़ने के लिए किसी विशेष उपकरण या बिजली की आवश्यकता नहीं होती।
- सुवाह्यता: इन्हें कहीं भी ले जाना आसान होता है।
- आँखों के लिए आराम: लगातार स्क्रीन देखने की तुलना में कागज पर पढ़ना आँखों के लिए अधिक आरामदायक हो सकता है।
- अनुभव: पन्ने पलटने और किताब को महसूस करने का एक अलग अनुभव होता है।
टेलीविजन पर चलने वाली किताब में सुविधा हो सकती है, लेकिन कागज की किताब का अपना महत्व और आनंद है।
प्रश्न 4
कागज़ के आविष्कार से पहले, छपाई विभिन्न प्रकार की सतहों पर की जाती थी। इनमें शामिल हैं:
- लकड़ी के तख्ते: लकड़ी पर नक्काशी करके या ब्लॉक प्रिंटिंग के माध्यम से छपाई की जाती थी।
- पत्ते: कुछ संस्कृतियों में, बड़े पत्तों पर भी छपाई या लेखन का कार्य किया जाता था।
- धातु के पत्र: धातु की चादरों पर खोदकर या उकेर कर महत्वपूर्ण लेख या चित्र अंकित किए जाते थे।
- चमड़ा या चर्मपत्र: जानवरों की खाल को संसाधित करके उस पर भी लिखा या छापा जाता था।
ये विधियाँ आज की छपाई की तुलना में अधिक श्रमसाध्य और समय लेने वाली थीं।
प्रश्न 5
हम अध्यापक की मदद से पढ़ना चाहेंगे, क्योंकि वे व्यक्तिगत ध्यान और समझ प्रदान कर सकते हैं। दोनों तरीकों की अपनी आसानियाँ और मुश्किलें हैं:
अध्यापक की मदद से पढ़ना:
- आसानियाँ:
- शिक्षक छात्र की व्यक्तिगत जरूरतों को समझकर पढ़ा सकते हैं।
- संदेह तुरंत दूर किए जा सकते हैं।
- भावनात्मक जुड़ाव और प्रेरणा मिलती है।
- कक्षा में सहपाठियों के साथ सीखने का अवसर मिलता है।
- मुश्किलें:
- कभी-कभी शिक्षक किसी विषय को समझाने में उतने प्रभावी नहीं हो पाते।
- सभी छात्रों को एक समान गति से समझाना मुश्किल हो सकता है।
- शिक्षक की उपलब्धता पर निर्भरता रहती है।
मशीन की मदद से पढ़ना:
- आसानियाँ:
- सभी विषयों की जानकारी आसानी से और कभी भी प्राप्त की जा सकती है।
- सीखने की गति छात्र अपनी सुविधानुसार रख सकता है।
- विभिन्न प्रकार के मल्टीमीडिया संसाधनों का उपयोग किया जा सकता है।
- मुश्किलें:
- छात्रों को समझने में कठिनाई हो सकती है क्योंकि मशीनें व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं दे सकतीं।
- तकनीकी खराबी या इंटरनेट की समस्या आ सकती है।
- भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव की कमी हो सकती है।
निष्कर्ष यह है कि अध्यापक का मार्गदर्शन अमूल्य है, लेकिन मशीनें सहायक हो सकती हैं।
प्रश्न
हाँ, मैंने अक्सर बड़ों को अपने बचपन के दिनों के बारे में बात करते हुए यह कहते सुना है, "वे दिन भी क्या दिन थे!"
मेरे अपने बीते दिनों के बारे में, मैं उन समयों के लिए "वे दिन भी क्या दिन थे!" कहना चाहूँगा जब:
- मैं बहुत छोटा था और मेरे माता-पिता और परिवार के सदस्य मुझ पर बहुत स्नेह लुटाते थे।
- मेरी हर छोटी-बड़ी इच्छा को तुरंत पूरा कर दिया जाता था।
- मुझे खेलने और मौज-मस्ती करने के लिए बहुत सारा समय मिलता था, और पढ़ाई का कोई खास दबाव नहीं था।
- त्योहारों और छुट्टियों का इंतजार रहता था और वे बहुत उत्साह के साथ मनाए जाते थे।
यह वह समय था जब जीवन सरल, खुशियों से भरा और चिंताओं से मुक्त था।
प्रश्न 1
पेन , घड़ी , टेलीफ़ोन / मोबाइल , टेलीविजन
कोई और चीज के बारे में तुम सोचना चाहो.
बहुत सालों बाद, ये वस्तुएँ आज की तुलना में कहीं अधिक उन्नत और अलग होंगी:
- पेन: भविष्य में पेन शायद लेजर किरणों वाले होंगे, जिनसे हम हवा में या किसी भी सतह पर दूर से लिख सकेंगे। ये पेन शायद डिजिटल नोट्स भी बना सकेंगे और उन्हें सीधे कंप्यूटर या अन्य डिवाइस में सेव कर सकेंगे।
- घड़ी: घड़ियों में सुइयाँ नहीं होंगी। वे शायद हमारे शरीर के स्वास्थ्य की निगरानी करने वाली स्मार्ट डिवाइस बन जाएँगी, जो हमारे दिल की धड़कन, रक्तचाप और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी दिखाएंगी। वे समय बताने के साथ-साथ हमारे व्यक्तिगत सहायक के रूप में भी काम कर सकती हैं।
- टेलीफ़ोन / मोबाइल: मोबाइल फोन शायद इतने छोटे हो जाएँगे कि उन्हें जेब में रखना भी मुश्किल हो। वे शायद सीधे हमारे दिमाग से जुड़ जाएँगे या होलोग्राफिक (त्रिविमीय) कॉल की सुविधा देंगे, जिससे ऐसा लगेगा जैसे व्यक्ति हमारे सामने ही खड़ा है।
- टेलीविजन: टेलीविजन बहुत पतले, लचीले और पारदर्शी हो जाएँगे, जिन्हें दीवारों पर या खिड़कियों पर भी लगाया जा सकेगा। वे शायद 3D या होलोग्राफिक डिस्प्ले प्रदान करेंगे, जिससे मनोरंजन का अनुभव बिल्कुल वास्तविक लगेगा।
- रसोईघर का सामान: भविष्य के रसोईघर पूरी तरह से स्वचालित होंगे। रोबोटिक शेफ खाना पकाएंगे, फ्रिज खुद ही सामग्री की सूची बनाएगा और ऑनलाइन ऑर्डर करेगा, और ओवन तापमान और समय को अपने आप नियंत्रित करेगा।
- अन्य वस्तुएँ (जैसे कार): कारें उड़ने वाली या स्वचालित (सेल्फ-ड्राइविंग) होंगी, जो बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के हमें हमारे गंतव्य तक पहुंचाएंगी। वे पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा स्रोतों पर चलेंगी।
प्रश्न 2
आलू , लड्डू , शक्कर , दाल , चावल , दूध
यह एक तालिका है जो बीस साल पहले और आज की कुछ वस्तुओं की अनुमानित कीमतों की तुलना करती है। ये कीमतें क्षेत्र और समय के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती हैं:
| वस्तु | बीस साल पहले की कीमत (अनुमानित) | आज का दाम (अनुमानित) |
|---|---|---|
| आलू | 1-2 रूपए प्रति कि.ग्रा. | 10-15 रूपए प्रति कि.ग्रा. |
| लड्डू (उदाहरण के लिए, बेसन के लड्डू) | 4-5 रूपए प्रति 100 ग्राम (या 40-50 रूपए प्रति कि.ग्रा.) | 60-70 रूपए प्रति 100 ग्राम (या 600-700 रूपए प्रति कि.ग्रा.) |
| शक्कर | 17-18 रूपए प्रति कि.ग्रा. | 40-45 रूपए प्रति कि.ग्रा. |
| दाल (जैसे अरहर) | 20-25 रूपए प्रति कि.ग्रा. | 120-150 रूपए प्रति कि.ग्रा. |
| चावल (बासमती को छोड़कर सामान्य) | 15-20 रूपए प्रति कि.ग्रा. | 50-60 रूपए प्रति कि.ग्रा. |
| दूध (पाउडर या पैकेट) | 10-12 रूपए प्रति लीटर | 50-60 रूपए प्रति लीटर |
नोट: उपरोक्त कीमतें केवल उदाहरण के लिए हैं और वास्तविक बाजार दरों से भिन्न हो सकती हैं। लड्डू की कीमत प्रति किलो के बजाय प्रति 100 ग्राम या प्रति पीस के हिसाब से अधिक प्रासंगिक है, इसलिए यहाँ अनुमानित तुलना दी गई है। बीस साल पहले की कीमतें बहुत कम थीं, जो समय के साथ महंगाई को दर्शाती हैं।
प्रश्न 3
कंप्यूटर हमारे व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है। इसके उपयोग के कुछ प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं:
व्यक्तिगत जीवन में कंप्यूटर का उपयोग:
- मनोरंजन: फिल्में देखना, संगीत सुनना, वीडियो गेम खेलना, और सोशल मीडिया का उपयोग करना।
- संचार: ईमेल भेजना, वीडियो कॉल करना, और दोस्तों व परिवार से जुड़े रहना।
- शिक्षा और सीखना: ऑनलाइन कोर्स करना, जानकारी खोजना, और शैक्षिक सामग्री का अध्ययन करना।
- रचनात्मक कार्य: लेखन, चित्रकारी, संगीत रचना, और वीडियो संपादन जैसे कार्य करना।
- वित्तीय प्रबंधन: ऑनलाइन बैंकिंग, बिलों का भुगतान, और व्यक्तिगत बजट बनाना।
- खरीदारी: ऑनलाइन शॉपिंग करना।
सार्वजनिक जीवन (सरकारी और व्यावसायिक) में कंप्यूटर का उपयोग:
- टिकट बुकिंग: रेल, बस, हवाई जहाज और सिनेमा हॉल के टिकट बुक करना।
- सार्वजनिक जानकारी: सरकारी योजनाओं, मौसम की जानकारी, समाचार और अन्य महत्वपूर्ण सूचनाओं तक पहुंच।
- सरकारी कार्य: करों का भुगतान, सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन, और रिकॉर्ड का प्रबंधन।
- व्यापार और वाणिज्य: उत्पादन, विपणन, बिक्री, ग्राहक सेवा, और लेखांकन।
- संचार और नेटवर्किंग: बड़े पैमाने पर संचार प्रणालियों का प्रबंधन।
- अनुसंधान और विकास: वैज्ञानिक अनुसंधान, डेटा विश्लेषण और नई तकनीकों का विकास।
- स्वास्थ्य सेवा: मरीजों के रिकॉर्ड का प्रबंधन, चिकित्सा इमेजिंग, और रोबोटिक सर्जरी।
कंप्यूटर ने हमारे जीवन को कई मायनों में आसान, तेज और अधिक कुशल बना दिया है।
Common mistakes
- Confusing past, present, and future scenarios.
- Underestimating the value of traditional books.
- Not considering the practical implications of technological changes.
- Difficulty in comparing prices and economic changes over time.
Revision tips
- Imagine yourself in the future described in the chapter.
- Discuss with friends or family about how things have changed since their childhood.
- Draw or write about your predictions for future technology.
- Create a small chart comparing the prices of items from 20 years ago and today.
Practice MCQs
Q1. कुम्मी के हाथ में आई किताब किस समय की छपी हुई मानी जा सकती है?
Explanation: कुम्मी के हाथ में आई किताब को आज के जमाने की छपी हुई माना जा सकता है, क्योंकि कहानी भविष्य की कल्पना करती है।
Q2. रोहित के अनुसार, एक बार पढ़ी हुई पुस्तकें कैसी हो जाती हैं?
Explanation: रोहित का मानना था कि एक बार पढ़ी हुई पुस्तकें बेकार हो जाती हैं, जो कि कहानी के भविष्यवादी दृष्टिकोण को दर्शाता है।
Q3. कागज़ के पन्नों की किताब की तुलना में टेलीविजन के पर्दे पर चलने वाली किताब का क्या नुकसान हो सकता है?
Explanation: टेलीविजन के पर्दे पर चलने वाली किताब की एक संभावित कमी यह है कि वह हमेशा उपलब्ध न हो या उसे पढ़ने के लिए विशेष उपकरणों की आवश्यकता हो।
Q4. कागज से पहले छपाई किन चीजों पर होती थी?
Explanation: कहानी के अनुसार, कागज के आविष्कार से पहले छपाई लकड़ी, पत्तों और धातु जैसी चीजों पर की जाती थी।
Q5. भविष्य में पेन कैसे हो सकते हैं, ऐसी कल्पना की गई है?
Explanation: कहानी में कल्पना की गई है कि भविष्य में पेन लेजर किरणों वाले हो सकते हैं, जिनसे दूर से भी लिखा जा सकता है।
Frequently asked questions
यह पाठ 'वे दिन भी क्या दिन थे!' किस बारे में है?
यह पाठ समय के साथ किताबों, सीखने के तरीकों और प्रौद्योगिकी में आए बदलावों के बारे में है। यह अतीत, वर्तमान और भविष्य की तुलना करता है।
पाठ में किस प्रकार की किताबों की कल्पना की गई है?
पाठ में कागज़ के पन्नों वाली पारंपरिक किताबों के साथ-साथ टेलीविजन के पर्दे पर चलने वाली भविष्य की किताबों की भी कल्पना की गई है।
छात्रों को भविष्य के बारे में क्या सोचने के लिए प्रोत्साहित किया गया है?
छात्रों को भविष्य में पेन, घड़ी, टेलीफोन, टेलीविजन और रसोईघर के सामान जैसी वस्तुओं में होने वाले तकनीकी बदलावों की कल्पना करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
क्या यह पाठ प्रौद्योगिकी के महत्व पर प्रकाश डालता है?
हाँ, यह पाठ कंप्यूटर के व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डालता है और भविष्य में प्रौद्योगिकी के और अधिक विकास की संभावनाओं को दर्शाता है।
कीमतों की तुलना करने का क्या उद्देश्य है?
बीस साल पहले और आज की वस्तुओं की कीमतों की तुलना करके, छात्र समय के साथ आर्थिक बदलावों और महंगाई को समझने का प्रयास करते हैं।
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